लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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hind swarajjहिंद स्वराज’ महात्मा गांधी की चर्चित कृति है। इसे प्रकाशित हुए 100 साल हो गए। यह एक बीज पुस्तक है। यह भारतीय व्यवस्था का वैकल्पिक मॉडल है। गांधीजी ने इस पुस्‍तक में अहिंसा, नैतिकता, स्वदेशी, स्वावलंबन, समता, सभ्यातागत विमर्शों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने मशीनी सभ्यता की आलोचना करते हुए पश्चिमी देशों के विकास को अस्‍वीकार कर दिया और स्पष्ट शब्दों मे लिखा कि हमें ऐसे विकास की आवश्यकता नहीं है।

ध्यातव्य है कि गांधीजी ने ‘हिंद स्वराज’ पुस्तक 1909 में लंदन से केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) जाते वक्त जहाज में 21 दिनों में लिखी थी। पुस्तक लेखन के लिए उन्होंने जहाज में इस्तेमाल हो चुके पन्नों के पिछले हिस्से का उपयोग किया था। मूल पुस्तक गुजराती में लिखी गई थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। तत्पश्चात् उन्होंने स्वयं ही इसका अंग्रेजी अनुवाद किया। सर्वप्रथम यह पुस्तक दक्षिण अफ्रीका में छपने वाले साप्ताहिक ‘इंडियन ओपिनियन’ में प्रकाशित हुई थी। 20 अध्यायों में रखे अपने विचारों के माध्यम से गांधीजी ने तथाकथित आधुनिक सभ्यता पर सख्त टिप्पणियां करते हुए अपने सपनों के स्वराज की तस्वीर प्रस्तुत की थी। इसमें गांधी जी ने पाठकों के सवालों के जवाब एक संपादक की तरह दिया।

‘हिंद स्वराज’ पुस्तक को जहां अधिकांश चिंतकों ने प्रकाशस्तंभ बताया वहीं इस पुस्तक के विरोध में भी आवाजें उठीं। विरोध करने वालों में गांधीजी के गुरु गोपाल कृष्ण गोखले और उनके शिष्य जवाहरलाल नेहरू का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने इस पुस्तक को बकवास करार दिया। गोखले जी का मानना था- ‘यह विचार जल्दबाजी में बने हुए हैं, और एक साल भारत में रहने के बाद गांधीजी खुद ही इस पुस्तक का नाश कर देंगे’। नेहरूजी ने 1945 में इस पुस्तक को ठुकरा दिया था। तब गांधीजी ने जवाहर लाल नेहरू को पत्र लिखा कर कहा था, ‘हिंदुस्तान को बदलने के लिए और आजाद भारत के नवनिर्माण के लिए हिंद स्वराज प्रासंगिक है। लेकिन मैं इसमें एक परिवर्तन करना चाहूंगा। यह कि किताब में मैंने प्रजातंत्र को वेश्या कहा है, जबकि अब मैं इसे बांझ करना चाहता हूं।’ तब नेहरूजी ने इसे ‘अयथार्थवादी’ कहकर टाल दिया था। इसके बाद गांधीजी ने नेहरूजी को दूसरा पत्र लिखा, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं दूसरी ओर विदेशी चिंतकों ने इसे हमेशा सराहा। रूसी चिंतक और उपन्यासकार लियो टॉलस्टॉय ने ‘हिंद स्वराज’ को ऐतिहासिक करार देते हुए ‘न केवल भारत, बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण’ बताया था। गांधीजी ने पुस्तक प्रकाशन के 30 साल बाद 1938 में नए संस्करण के प्रकाशन पर अपने सन्देश में कहा कि-‘यह पुस्तक अगर आज मुझे फिर से लिखनी हो तो कहीं-कहीं मैं इसकी भाषा बदलूंगा, लेकिन…….इन 30 सालों में मुझे इस पुस्तक में बताये हुए विचारों में फेरबदल करने का कुछ भी कारण नहीं मिला।’

आज देश में अराजकता व्याप्त है। हिंसा का बोलबाला है। कानून-व्यवस्था ध्वस्त है। विषमता की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। वास्तव में हम विकल्पहीनता के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में हमें ‘हिन्द स्वराज’ की याद आना स्वाभाविक ही है। ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ गांधीजी की पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ पर एक व्यापक बहस की शुरुआत कर रहा है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से लेकर 13 नवंबर (जब ‘हिंद स्वराज’ किताब लिखी गई थी) तक हम दो चरणों में अभियान चलाएंगे। पहले चरण में ‘हिंद स्वराज’ का सम्पूर्ण पाठ प्रकाशित करेंगे उसके बाद दूसरे चरण में गांधीवादी विद्वानों, प्राध्यापकों, राजनीतिक विश्लेषकों, पत्रकारों, साहित्यकारों, शोध विद्यार्थियों के लेख एवं साक्षात्कार प्रकाशित करेंगे। हमारा उद्देश्य है ‘हिंद स्वराज’ में लिखी गयी बातें हमारे राष्ट्रीय-जीवन का हिस्सा बने और सामाजिक बदलाव का जरिया बने। इस संबंध में सत्ता प्रतिष्ठानों से उम्मीद करना बेमानी है। हमें स्वयं जागरूक होना होगा और अपने जीवन को नैतिक आचरणों से ओत-प्रोत करना होगा। जन-दबाव से ही बदलाव साकार होगा।

आज भी काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो ‘हिंद स्वराज’ को विज्ञान और टेक्नोलाजी विरोधी करार देते हैं। इस संबंध में नोबल विजेता वीएस नायपॉल की टिप्पणी एकदम सटीक जान पड़ती है कि ‘हिंदुस्तान के लोग ‘हिंद स्वराज’ नहीं पढ़ते हैं।’ वास्तव में सतही बातों से राय बना लेना खतरनाक प्रवृति है।

आइए, ‘हिंद स्वराज’ को हम तन्यमयतापूर्वक पढ़ें। विवेकपूर्ण विचार करें। और इस पर अमल करने की कोशिश करें। हमारे इस अभियान में आपकी सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है। ‘हिंद स्वराज’ के संबंध में अपने विचार ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ पर अवश्य साझा करें।

56 Responses to “परिचर्चा : हिंद स्वराज की प्रासंगिकता”

  1. Arvind Kuril

    गांधीजी हर युग में प्रासंगिक रहे हैं और रहेङ्गे. जहां तक बात है “हिंदी स्वराज ” की तो इसे पढ़े बगैर अपनी राय देना एक ढकोसले के अलावा कुछ नहीं होगा. पहला कदम प्रकशित करना और जन जन तक पहचान बनाना अधिक आवश्यक है।
    स्वागत है इसका.
    अरविन्द कुरिल

    Reply
  2. शिवानंद द्विवेदी

    शिवा नन्द द्विवेदी “सहर

    स्वराज तो है परन्तु सिर्फ अर्ध स्वराज की स्थिति है ! आतंरिक कलह वाह्य समस्याओं से ज्यादा व्याप्त है ! क़ानून की धज्जियां उड़ रही हैं ! क़ानून के प्रति दिन प्रतिदिन घटता जनाधार चिंता का विषय है !

    Reply
  3. Dixit

    sergent m…jpg (16.9 KB) कृपया ईस को देखे गाँधी सार्जेंट मेजेर थे ब्रिटिश आर्मी में यह बात आजतक क्योँ छुपा यी गई

    Reply
  4. sadhak ummed singh baid

    महान हैं गाँधी मगर, आज पूछता कौन?
    नई समस्यायें जुङी, गाँधी सबपर मौन.
    गाँधी रह गये मौन, जमाना आगे बढता.
    ग्राम-स्वराज्य से पहले खुद का परिचय पढता.
    कह साधक कवि, चरैवेति अपनी पहचान है.
    आज पूछता कौन, भले गाँधी महान है???

    Reply
  5. Dixit

    : I recently heard in a school speech to the students ‘You should learn more and more about Gandhi!’.

    Well, as you said, students should go to the local and school libraries to learn more and more about Gandhi. But then, searching the net for Gandhi might be pretty dangerous. Try it out yourselves. I am sure that the government should ban the search for the word Gandhi on the net. It can lead to the complete removing of Gandhi from school studies.
    But then, one should not judge a person by his peccadilloes, for if one searches for such things, almost everyone would have a negative side connected to sensual themes. even famous men are not secure from it. For example, Oscar Wilde, Bertrand Russell,Andre Guide, Jefferson, and many others were victim of weak personal sides. But then, remove the saintliness from such persons and see if there is anything else of worth in them. Then one can see their true worth. Berternd Russell and all the others that I have mentioned can be seen devoid of holiness and still they have something tangible by which one can admire them. In the case of Gandhi, remove the saintliness and view him! What remains?
    Ved from Victoria Institutions replied to: Abhinav Mathur
    post – 23 Oct, 2009

    Reply
  6. Dixit

    Madhuji regards.
    As you have said ‘we all Indians will always be seeking the answers about the events happened at the time of independence’ the horror full past explains Gandhi & Nehru fully. When you can not get the answers in these long years how you are going get the truth? Please read the accord signed in 1947 granting Swaraj by the British you will get the true picture & greatness of Nehru & Gandhi.

    Reply
  7. Madhu Agarwal

    This is in response to Mr Dixit’s comments:
    I my opinion the first thing is that the discussion is about the views expressed in ‘Hind Swaraj’, “whether they are still useful or applicable or not.
    We all Indians will always be seeking the answers about the events happened at the time of independence. Perhaps, one day we will may be able to get some clear answers. Discovery of India helped me to understand Nehruji’s views and what was happening them.
    Thank you for mentioning some other resources to read these will enhance my knowledge.

    Reply
  8. Dixit

    Please tell the truth– How any one can forget the horror full past.Doesn’t our past define us. Gandhi Nehru supported British publicly to crush Netaji and when twenty thousand Indian marine soldiers refused to obey British command Nehru-Gandhi again and again demanded their unconditional surrender in support of their British masters. Nehru made Gandhi a hero for his own benefit. Will you please tell us How Gandhi is messenger of peace or Ahimsha when he publically supported British in the war with Netaji. His ahimsha was targeted only for Hindus he always supported British to crush the freedom movement in India. He openly said “I have got nothing to say for those who indulge in violence” and “I even denounce swaraj (he never wanted full freedom) at the cost of a single drop of British blood” Please explore the truth nothing but the truth. As per British claim in those days 99% were illiterate in India that was the benefit for Nehru-Gandhi and the Indians failed to understand the true picture of the duo at that time.

    Reply
  9. h.c.pandey

    a very important step in the right direction. i think it is important that a campaign is started by you for the masses for its awakening thinking that something may come out after churning the modern westernised indian culture. a dfficult task indeed. i hope you succeed in your mission. i am with you always, everytime. h.c.pandey

    Reply
  10. Dixit

    Mr.Subash This is the real hind Swaraj& democracy? “Smash and Grab”, a book by Sunanda K Datta-ray on annexation of Sikkim, which is banned in India, please visit . You can download the E-Book.
    Warm regards,

    Reply
  11. akgore

    Its very good effort made by Pravakta Team. Congratulation for starting debate in hindi. I also dare to ask them to start a movement for the year 2047. How will India remmber Gandhiji in 2047? He said—His life was message. Is it proper only to understand his teachings and not leading the life the way he wanted us to lead ?

    Reply
  12. Dharmendra

    Bahut hi achcha prayas hai… aazad bharat ke navnirman ke liye hind swaraj ki prasangikta hamesa hi rahi hai… magar tathkathit secularists ne hamesa se tustikaran ki rajniti ki hai.. aur parinam hamare samne hain… bina hind swaraj ki sthapna ke bharat ka navnirman asambhav hai… pravakta.com ne ek achchi shuruat ki hai… badhai…

    Reply
  13. प्रवक्‍ता ब्यूरो

    प्रवक्‍ता ब्यूरो

    आरके कपूरजी को हार्दिक धन्‍यवाद। हम चैप्‍टरवाइज ‘हिंद स्‍वराज’ को ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ पर प्रकाशित कर रहे हैं। आप मास्‍टहेड के नीचे ‘हिंद स्‍वराज’ बटन पर क्लिक करके इस किताब के पाठ को पढ सकते हैं।

    Reply
  14. R.Kapoor

    प्रतीकात्मक नक्शॆ सॆ परॆशान हॊनॆ वालॊन् की परवाह‌ करनॆ की जरूरत नही, कॊई कानून् इसपर लागू नही हॊनॆवाला.आप पूरी पुस्तक उपलब्ध करवानॆवालॆ थॆ,प्रतीक्षा है. सुप्रयास हॆतु शुभ कामनायॆ,

    Reply
  15. Ram Nayan Singh

    Vaakai Behatar karya hai. Hindi men aise kam hone he chahiye. Taki aam log bhee vimarshh men hissa le saken.

    RN

    Reply
  16. Dixit

    Mr.Subash,regards. Kathni aurkarni me kya anter haiba ta ne ki kripa karen. I will read Hind swaraj of Mr. Gandhi as per your advice. I am a fan of Lokemannya Tilack, Bhagat Singh, Chandra Shekhar Azad, Khudiram Bose, Netaji Subash Chandra Bose& others like them. History has proved Nehru and Gandhi were hot favourites of British. As you have stated Nehru had said he was the last English leader to rule India. He also had said “It is a disgrace that I was born in India.” In 1947 British granted Swaraj as demanded by Gandhi. Please read the accord signed by British with congress and request to republish that accord again with Mr. Editor, to justify the demand of Mr. Gandhi’s dream of Hind Swaraj which was already granted by their British Masters when Nehru’s Congress declared Netaji a traitor & vowed to hand him to the British Government to secure Indian Swaraj and made Hindu’s permanent slave of minorities. Is this the true historical background of “Bharatiyata” of Nehru& Gandhi? Nehru-Gandhi duo gave promotion to all the officers and secretaries who brutally suppressed freedom movements all over India in British raj. To establish Indian Swaraj like British raj and strengthen Nehru dynasty. Sonia ji, Rahulji are the real representative of Gandhiji’s Hind Swaraj because they are also “Gandhi’s”, isn’t it?

    Reply
  17. subhas

    Respected Dixit Ji

    I am not talking about Gandhi worship. I don’t beleive in these type of things. What I am trying to say is please read the content of Hind Swaraj. Without reading this book it will not be appropriate to comment on Hind Swaraj. My sincere request is that please read this small book.
    Actually Gandhi had done some wrong things. He was no God. As a human being It is possible that he might have taken some bad decissions. I am not justifying his wrong deeds. But at the same time Gandhi was a true follower of Bharatiyata. He was against angrejiyat. First Prime minister Pt Jawahar Lal Nehru rejected Hind Swaraj when came to power. In a letter written to Gandhi Ji he rejected Hind Swaraj and said India’s development model will be a western model.These things are all in records. You can find this letter in many books and archives. In My opinion Gandhi’s thought was assasinated by Pt Jawaharlal Nehru.It was real killing of Gandhiji. Because Gandhi means his thought i.e. Bharatiyata. Jawaharlal Nehru once proudly claimed that he was the last English leader to rule India. You can understand his mentality thorugh the above statement. One can say Gandhi was physically killed by Nathuram Godse but much before that his thought (Bhartiyata) was killed by Nehru. So Please go through Hind Swaraj once then decide.

    Thanks

    Reply
  18. Dixit

    Dear SubhasJi,
    Regards.Bharat ka itihash hi durbhagya purna rahahai. Gandhiji ko Nehru rajya ki sthapana ke liye hi mahn banaya gaya? Jabtack shatya Jan samakchya na hi ayega jo Bharat me shambhav nahi? Please leave this Gandhi worship. This proves in Bharat, intellectuals are completely demoralized. Please read Gandhi’s Biography. Do not try to make Gandhi God? What is the significance of Gandhian book? When history of Indian Freedom is completely fabricated and Nehru dynasty is in power for more than fifty years in the name of democracy?
    Swaraj ka arth hi angrejiyat ki chhat hai?Gandhi ji ne kabhi bhi Bharat ki purna swatantra cha hi hi nahi?

    Reply
  19. ved prakash

    masla yah nahi hai hal kaun karega prashn hai pahal kaun karega?aur aapne is pahal kee shuruaat kee haiham sabhi aapke sath hai.

    Reply
  20. murari gupta

    आपका प्रयास सराहनीय है। खासकर आज के दौर में ऐसी बहसों की बहुत जरूरत है। इतिहास का पुनपढ़न जरूरी है। हिंद स्वराज एक मौलिक सोच है। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। और इसे आगे बढ़ाने के लिए इसी तरह के मंथनों की जरूरत है।

    Reply
  21. subhas

    आदणीय दीक्षित जी

    आपका संपादक के नाम पत्र पढा । आप ने हिन्द स्वराज की चर्चा की प्रासंगकिता पर प्रश्न उठाया है । मुझे लगता है कि और मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि आपने हिन्द स्वराज पढी नहीं होगी । यही कारण है कि आप इस प्रकार की बात कर रहे हैं । इसमें आपकी गलती नहीं है क्योंकि गांधीजी ने हिन्द स्वराज में ही कहा है कि भारत के कुछ पढे लिखे लोग पश्चिम के मोह में फंस गये हैं । अंग्रेजों को बाहर करने से हमें सच्ची स्वराज नहीं मिलेगी बल्कि अंग्रेजीयत को बाहर करना पडेगा और भारत की संस्कृति व तासीर के आधार पर भारत का विकास करना होगा । मैने भी जब यह पुस्तक नहीं पढी थी तब मैं भी आपकी तरह का विचार रखता था । लेकिन हिन्द स्वराज को पढने के बाद मुझे स्पष्टता आया । इसलिए आपसे विनम्र निवेदन है कि आप कृपया इस छोटी सी पुस्तिका को एक बार अध्ययन करें । आपने कई सौ सालों तक भारतीयों की गुलामी की बात भी कही है । हिन्द स्वराज के आधार पर ही भारत को सच्ची स्वराज मिलेगी अन्यथा हम आधुनिक परिभाषा में आजाद तो रहेंगे लेकिन वास्तव में व्यवस्था व चिंतन के आधार पर गुलाम ही रहेंगे ।

    धन्यवाद

    Reply
  22. Dixit

    Mr. Editor,
    I cannot understand the significance of Gandhi’s Hind Swaraj now? Do you want to join British Empire, as he wished and be the queen’s subject again? This is the dirty Indian habit to see negative subjects in a positive way, that’s why India was enslaved for more then thirteen hundred years? Congress made Gandhi father of the nation. What is the meaning of the father of the nation? Did he create India? Or he divided India? When you are giving credit for the creation, then who are to be blamed for the destruction and the greatest horror in human history of the time? Kindly tell the viewers if there is any significance in the then British PM who granted “swaraj” to India, Mr. Clement Attlee, when he said “Indian army is no longer loyal to us due to Subash Chandra Bose. We are sitting on a dynamite in India that’s why we are leaving India” and the famous saying of PM Sir Winston Churchill when he said “if there would have been three-four more Gandhi’s were born in India we could have ruled that country for few more centuries” Don’t fabricate the Indian history in Congress’s way and please tell us the truth. I have requested you to publish the accord signed by the British Bosses granting swaraj in 1947 that will reveal the true history of modern India. {That accord was already published in the leading newspapers of India in Aug 1947}

    Reply
  23. रवि शंकर

    Ravi Shankar

    हिन्द‌ स्वराज पर अभियान‌ कॆ लियॆ बधाई. मुझॆ लगता है कि आज अधिकांश लॊग इस पर बहस सॆ घबरातॆ है। इसका कारण भी है। हिन्द‌ स्वराज हमॆ अपनॆ जीवन मॆ बदलाव करनॆ कॆ लियॆ कहती है। पश्चिमी भोगवादी चिंतन के उलट आत्मसंयम और ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा’ का भारतीय मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। परंतु पंडित नेहरू की तरह आज का भारतीय समाज भी ह्रदय से तो पश्चिमी भोगवाद का ही भक्त है। इसलिए प्रासंगिकता आदि का प्रश्न उठा रहा है और इसीलिए 1945 में ही गांधी के विचारों की भ्रूणहत्या पंडित नेहरू ने कर दी थी और आज हम उसकी कब्र को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं।

    Reply
  24. R.Kapoor

    सामयिक, प्रासङ्गिक विषय पर इस प्रारम्भ के ळीये

    Reply
  25. R.Kapoor

    सामयिक, प्रासङ्गिक विषय पर इस प्रारम्भ के ळीये बाडधाआई.

    Reply
  26. shobhana

    hind svraj pustak par bhs ak achhi shuruat hai .dekhte hai aaj ki pristhitiyo me gandhiji ke vichar kitne prasngik hai ya anukarneey hai.

    Reply
  27. GOPAL BHATI

    आज कॆ भारत कॊ जिस तरह सॆ मशीनॊ की आदत् लग गई है, उससॆ ऎसा लगत है कि “हिन्द् स्वराज” की हर भारतवासी कॊ जरुरत है.

    Reply
  28. arti

    aapke is pryas k lie bhut-2 mera dhanyawad sweekar kare !!!!!!!!
    Gandhi Ji ko shradhanjali rajghat per jakar unki samadhi per foolmala chadhakar nai balki unki hind swaraj k swapn ko bharat per lagu kar k di ja sakti hai.
    aajkal ki di gai shrdhanjali adambro se yukt hai jo ki us mahan purush ka apman hai.
    Arti

    Reply
  29. Rakesh Singh

    बहुत सही प्रयास है |

    मैंने टिप्पणी लिखना आरम्भ किया और इतना लंबा हो गया की यहाँ नहीं डाल सकता |

    Reply
  30. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन उवाच

    बचपनमे मुझे स्मरण है, कि, महात्माजीके गुजराती हस्ताक्षरोमे(पर छपी हुयी) मेरे घरमे रखी हुयी “हिंद स्वराज” मैने देखी थी। पिताजी उसे पढते थे। स्मृति मे, कुछ ऐसाभी अंकित है, कि, महात्माजी दोनो हाथोंसे लिख सकते थे। अलग अलग पन्नोपार, अलग हस्ताक्षर स्पष्ट दिखाई पडते थे।आजके संदर्भमे “हिंद स्वराज” पर चर्चा, हमारे चिंतकोके लिए निश्चित,पुनर्मंथनका एक अवसर प्रदान करती है,सनातन वही समाज होता है, जो समय समय पर मंथन करते हुए, उचित सुधारोंको, अपनाकर परंपराओंको उत्क्रांत करनेमे हिचकिचाता नही। बलरामजी अग्रवाल शायद इसी बिंदूको इंगित कर रहे हैं। ’प्रवक्ता’के इस उपक्रमका स्वागत करता हूं।

    Reply
  31. प्रेम सिल्ही

    मैंने हिंद स्वराज्य पुस्तक पड़ी तो नहीं है लेकिन बहुत समय से मन में विचार आता है कि भारत में लोग आधुनिक जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखें व उन्हीं पश्चिमी बातों को अपनाएं जो भारतीय संस्कृति के अनुकूल हों| गांव व शहरों में सफाई और घरों व मुहल्लों में खाली जमीन को घास पौधों द्वारा सुन्दर बनाना, जन साधारण को स्वास्थ्य विज्ञान से परिचित करवाना, सड़क व यातायात के साधन उपलब्ध करवाना, व तकनीकी ज्ञान द्वारा जन जीवन को सरल बनाने के उपक्रम पाश्चात्य सभ्यता से सीख सकते हैं| सात्विक भोजन, भारतीय सभ्यता एवं भाषा ज्ञान व धार्मिक बातें पुरंत्या भारतीय मूल की ही होनी चाहियें| हिंद स्वराज्य में यदि कुछ ऐसा ही दृष्टांत दिया है तो इस पुस्तक को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित करके लोकप्रिय बनाना चाहिए|

    Reply
  32. मुहम्‍मद उमर कैरानवी

    गांधीजी को 30 साल बाद फेरबदल करने का कारण नहीं मिला था परन्‍तु आज हमें 61 साल बाद तो इसमें फेरबदल का भी अधिकार नहीं है, फिर भी आप लोग किताब ला ही रहे हो तो देख लेंगे, यह तो ऐलान भर है,
    आशा करता हूं कि आपका प्रयत्‍न अराजकता समाप्‍त करने में सहायक बनेगा,

    Reply
  33. ramkumar vidyarthi

    आपनॆ हिन्द‌ स्व‌राज्य‌ पर‌ बात‌ शुरु क‌र‌कॆ ऎक‌ नॆक‌ काम‌ किया है मै इस‌ प‌हल मॆ जरुर शामिल हॊना चाहता हु|

    Reply
  34. बलराम अग्रवाल

    अगर विचार-संकुचन न हो तो हर बहस स्वागत योग्य है। कई बार होता यह है कि कृति अपने काल में तो अनुकरणीय प्रतीत होती है लेकिन बदल चुकी परिस्थितियों में पिछड़ी प्रतीत होती है। इस संदर्भ में यह भी नहीं भूलना चाहिए कि बदल चुकी स्थितियाँ लौटकर पुनः आ सकती हैं इसलिए कृति पर विचार भी काल के आरपार ही होना चाहिए। अपने ही समय में हमने अनेक चमत्कारपूर्ण शब्दों को गर्त में चले जाते देखा है। उदाहरण के लिए हरिजन शब्द । निःसंदेह हिंद स्वराज लम्बे समय से बहस की माँग करती रही है। आपके द्वारा चलाई जाने बहस से, इतना आभास तो है ही कि, इस प्रतिस्पर्द्धात्मक युग में गाँधी जैसे आध्यात्मिक अथवा दार्शनिक चिन्तन से युक्त कोई भी व्यक्ति अप्रासंगिक सिद्ध हो जाएगा। यह पहली बार नहीं है और न ही अप्रत्याशित। कृष्ण के काल में विदुर की नीतियां अप्रासंगिक हो गई थीं।

    Reply
  35. Rajeshwar Vashistha

    बहुत अच्छी शुरुआत कर रहे हैं आप….. हम पूरी तरह से बेशर्त आपके साथ हैं…… नक्शे की चिंता न करें वह नवजीवन ट्रस्ट के प्रकाशन से जुडी चीज़ है और आपने मूल पुस्तक के कवर का ही चित्र लगाया है जिसे छपे बरसों हो गए हैं…..

    Reply
  36. usha chandna

    आपका प्रयास सराहनीय हॆ. बहस कॆ लिऎ मच बनॆ.

    Reply
  37. dhiru singh

    हिंद स्वराज की प्रासंगिकता के बारे में तो पढ़ के ही कुछ कहा जा सकता है . ऐसा क्या जो टोलस्टाय को पसंद आया और नेहरु को नहीं .

    Reply
  38. rajendra

    भारत‌ का मानचित्र गलत है इसॆ सम्झावॆ ‍ गान्धी जी नॆ नॆहरूजी कॊ अनुशासन् मॆ
    रखा हॊता तॊ आज् हालात यॆ न हॊतॆ जॊ है

    Reply
  39. Ek Pathak

    लेख के साथ प्रकाशित चित्र में भारत का आधा-अधूरा नक्शा है। इस तरह का नक्शा प्रकाशित करना गैरकानूनी है। कृपया पता कर लें। कहीं अनावश्यक विवाद कार्रवाई न शुरू हो जाए।

    Reply
  40. rakesh upadhyay

    हिंद स्वराज के संदर्भ में इस अनूठी प्रासंगिक पहल के लिए प्रवक्ता को बधाई।

    Reply
  41. shelleykhatri

    आपकी पहल सराहनीयॆ है. मैन् इस् अभियान मॆ जरुर् हिस्स लूगी.

    Reply
  42. sarwat jamal

    एक बहुत महत्वपूर्ण टास्क आपने उठा लिया है. मैं इस मिशन में, यदि आवश्यकता महसूस करें तो, आपके साथ हूँ.
    actually my name was not correct earlier.

    Reply
  43. sarwat jama

    एक बहुत महत्वपूर्ण टास्क आपने उठा लिया है. मैं इस मिशन में, यदि आवश्यकता महसूस करें तो, आपके साथ हूँ.

    Reply
  44. sunita sharma

    गांधी जी की विचारधारा अतयंत महत्वपुर्ण है,यदि आप हिंद स्वराज्य को प्रकाशित करते है तो आपका हार्दिक स्वागत है गांधीवाद आज भी प्रांसगिक हो जाता है जब वर्तमान हालात एेसे है तो…..

    सुनीता शर्मा

    स्वतंत्र पत्रकार
    ऋषिकेश
    उत्तराणखण्ड।

    Reply
  45. vibha rani

    aapakii baat bilkul sahee hai. ham kitaabon ko padhe bagiar, fimon ko dekhe bagair, jagahon par gae bagair apane raay aise thopte rahate hain, jaise kis ko sar dard se छ्utkara pane ke nuskhe de rahe hon.

    Reply

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