मत करो खिलवाड़ मेरी तन्हाईयों से

मत करो खिलवाड़ मेरी तन्हाईयों से,मुझे तन्हा रहने दो |
मै अकेला ही आया था इस जहाँ में,मुझे अकेला ही रहने दो ||

काटता नही अकेलापन,मुझे अब सकून देता है |
कहते थे जिसे बोरयत,मुझे अब मजा  देता है ||

करते नहीं बातचीत किसी से,अपने में मस्त रहते है |
साथ रहकर परिवार में,हम अकेले ही पसन्द करते है || 

बनते जा रहे है अजीब रिश्ते,खून के रिश्ते भी भूल जाते है |
निभाता था दूर रहकर भी,अब तो पास रहकर भी टूट जाते है ||

क्या करे रस्तोगी अब,सबको अकेलापन खाने लगा है |
क्या हो गया दुनिया को,रिश्तो को पागलपन खाने लगा है ||

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