नशे के कारोबारी पैसे के लिए कर रहे है मासुमों व लडकियों का इस्तेमाल


भगवत कौशिक। भारत युवाओं का देश है। लेकिन जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत विकास के पथ पर दौड़ने का दंभ भर रहा है, वह दुर्भाग्य से दिन पे दिन नशे की गिरफ्त में आ रही है।युवा तो युवा बच्चे तक इसका शिकार बनते जा रहे हैं।नशे के कारोबारी पैसा कमाने के चक्कर मे मासुमों की जिंदगीयो के साथ खिलवाड़ कर रहे है जिसका नतीजा आए दिन देश मे अवैध शराब व नशे के कारण घरो के चिराग बुझ रहे है।ऐसा नहीं है कि सरकार व पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं हो अपितु कुछ नेताओं व प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के आशीर्वाद से नशे का कारोबार बेरोकटोक चल रहा है।हाल ही मे ईनेलो विधायक अभय चौटाला भी इस मुद्दे को उठा चुके है । गजब की बात तो यह है कि नशाखोरी किसी एक राज्य की समस्या भर नहीं है, अपितु देश के लगभग सभी राज्य इस समस्या से जूझ रहे हैं। हिन्दुस्तान में अब नशा नासूर बन चुका है। 
◆रेव पार्टियां व लडकियों के माध्यम से होता है कारोबार–
 नशीला दवा और इंजेक्शनों का प्रयोग रहीसों के नशे का शौक पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इनको रेव पार्टी, नाइट क्लब में सप्लाई किया जा रहा है।नशे के कारोबार को चलाने के लिए हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर व नेपाल से लडकियों को लाया जाता है तथा इनके माध्यम से युवाओं को पार्टियों के बहाने बुलाकर नशा परोसा जा रहा है। 
◆उडता पंजाब नहीं उडता हरियाणा बोलिए–
पंजाब मे नशे के ऊपर बनी फिल्म “उडता पंजाब”के माध्यम से पंजाब मे फैले नशे को ऊजागर किया गया लेकिन अब हरियाणा की स्थिति भी धीरे धीरे पंजाब की तरह बन रही है।पंजाब के साथ लगती सीमाओं से ड्रग्स कारोबारियों ने हरियाणा मे भी तेजी से अपने पांव पसार लिए है ।कैथल, फतेहाबाद, सिरसा, अंबाला व गुडगांव मे नशे व ड्रग्स का कारोबार तेजी से पनप रहा है।बढती नशाखोरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नशामुक्ति केंद्रों मे प्रतिदिन 20-25 मरीजों को नशा छुडवाने के लिए भर्ती किया जा रहा है। 
◆हर साल देश मे होता है 30 खरब रूपये से ज्यादा का कारोबार—-
एक अध्ययन में सामने आया है कि हर साल भारत में लोग नशे पर करीब 30 खरब रुपए खर्च करते हैं।अगर समय रहते नशे पर अंकुश नहीं लगाया तो ये कारोबार तेजी से पूरे भारतवर्ष मे बढेगा।
चौकाने वाले है राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (NCB) के आंकड़े–
 भारत में हर दिन 10 -15 लोग नशे की वजह से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं। इन आत्महत्याओं में 1 आत्महत्या हर दिन सिर्फ पंजाब राज्य में होती है। वहीं यह भी बताया गया कि ड्रग्स जैसे नशे के शिकार राज्यों में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में हो रही हैं।अब हरियाणा भी इसकी गिरफ्त मे आता जा रहा है।

 कुछ केमिस्टों ने अपनी पहचान छुपाते हुए बताया कि आगरा का फुहारा मार्केट दवाओं के लिए मशहूर है। यहां हर तरह की दवा उपलब्ध हो जाती है। कुछ लोग लीगल तरीके से दवा का कारोबार करते हैं तो वहीं कुछ लोग इलीगल तरीके से कारोबार कर दूसरों के जीवन को अंधेरे में धकेलने का काम करते हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए आगरा में टेबलेट और इंजेक्शन तैयार किए जाते थे। जिन्हें देश के अलग-अलग राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत 11 राज्यों में इनकी सप्लाई की जाती ।  ड्रग्स माफियाओ का प्रमुख केंद्र दिल्ली है,क्योंकि इसी जगह से दूसरे राज्यों में नशे की सप्लाई की जाती है। ऐसी स्थिति में राजधानी में गांजा, चरस, कोकीन का धंधा तेजी से बढ़ा है।

◆नशे के लिए इस्तेमाल होनेवाली दवाईयां–
नशे को 2 भागों में बांटा जा सकता है –
1. पारंपरिक नशा – इसके अंतर्गत तम्बाकू, अफीम, भुक्की, खैनी, सुल्फा एवं शराब आते हैं या इनसे निर्मित विभिन्न प्रकार के पदार्थ।  2. सिंथेटिक ड्रग्स – इसके अंतर्गत स्मैक, हेरोइन, आइस, कोकीन, क्रेक कोकीन, LSD, मारिजुआना, एक्टेक्सी, सिलोसाइविन मशरूम, फेनसिलेडाईन मोमोटिल, पारवनस्पास, कफ सिरप कोरेक्स और अल्प्राजोलम बल्कि कफ सिरप फेंसीडिल, नींद की गोलियां ओपिन, आलिन्जापिन, ओलेन, शेड्यूल-एच ड्रग मसलन एल्बेंडाजोल, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड मोनोहाइड्रेड आदि नशीली दवाईंया आती है।
नशाखोरी की समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसको मुद्दा बनाते हुए देश को संबोधित किया था।इसके साथ ही कई सारी निजी संस्थाएं नशामुक्ति के लिए जागरुकता अभियान जैसे कई सारे कार्यक्रम चला रही हैं। लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से नशाखोरी के मामले देश के विभिन्न राज्यों में देखे जा रहे हैं। वह गंभीर चिंता के विषय हैं। सरकार को तुरंत प्रभाव से नशीले पदार्थों व शराब पर पूर्ण पाबंदी लगानी चाहिए तथा इनके कारोबार से जुड़े लोगो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार के साथ साथ युवाओं के अभिवावकों व समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे नशे व शराब के खिलाफ आवाज उठाए।

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