समाज को खोखला कर रहा है नशा।युबा पीढ़ी का भविष्य खतरे में ।

सुभाष चंद

पश्चिमी सभ्यता ने हमारे देश, प्रदेश के युबाओं को किस तरह अपनी और आकर्षित किया है । इससे सभी भलीभांति परिचित हैं।  इसकी और देश के युवा सबसे अधिक आकर्षित होते हैं और अपनी भारतीय संस्कृति छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागते हैं। नशाखोरी भी इसी का उदाहरण है  भारत देश की  बड़ी मुख्य समस्याओं में से एक युबाओं  में फैलती नशाखोरी भी है । हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या लगभग 70 लाख के पार हो चुकी है । इस जनसंख्या का एक बड़ा भाग युवाओं का है।  नशा एक ऐसी समस्या है , जिससे नशा करने वाले के साथ साथ उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है । और अगर परिवार बर्बाद होगा तो समाज नहीं रहेगा , समाज नहीं रहेगा तो देश और प्रदेश भी बिखरता चला जाएगा । इंसान को इस दलदल से  में एक कदम रखने की देरी होती है । यहां आपने यह कदम रखा फिर आप मजे से चलते चलते इसके आदि हो जाएंगे। और दलदल में धंसते चले जाएंगे । नशे का आदी इंसान चाहे तब भी इसे छोड़ नहीं पाता क्योंकि  उसे तलब पड़ जाती है। और फिर तलब ही  नशा और  बढ़ाती है । नशा नाश है। जीवन दो विपरीत ध्रुवों के बीच गतिमान रहता है । सुख और दुख लाभ और हानि जीवन और मृत्यु यह कभी अलग ना होने वाले दो किनारे हैं । सुख के समय में आनंद और उल्लास हंसी और कोलाहल जीवन में छा जाते हैं तो दुख में मनुष्य निराश होकर रुदन करता है। निराशा के कारण  ही मनुष्य दुख को भुलाने के लिए उन मादक द्रव्यों का सहारा लेता है । जो उसे दुखों की स्मृति से दूर भगा ले जाते हैं । यह मादक द्रव्य ही नशा कहे जाते हैं । मादक द्रव्य को लेने के लिए आज केवल असफलता और निराशा ही कारण नहीं बने हैं । अपितु रोमांच पाश्चात्य दुनिया की नकल और नशे के व्यापारियों की लालची प्रवृत्ति भी इसमें सहायक होती है । नशीले पदार्थ में मादक और उत्तेजक पदार्थ होते हैं। जिनका प्रयोग करने से व्यक्ति अपनी समृद्धि और संवेदनशीलता स्थाई रूप से खो देता है नशीले पदार्थ स्नायु तंत्र को प्रभावित करते हैं ।और इससे व्यक्ति उचित अनुचित भले बुरे की चेतना खो देता है। उसके अंग  शीथल हो जाते हैं । शरीर में कंपन होने लगता है, आंखें असामान्य हो जाती है नशा किए हुए व्यक्ति को सहजता से पहचाना जा सकता  है । इसीलिए इन नशीले पदार्थों में आज तमाकू भी माना जाता है। क्योंकि इससे शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है लेकिन विशेष रूप से जो नशा आज के युग में व्याप्त है उसमें चरस ,गांजा ,भांग, अफीम, स्मैक, हीरोइन ,चिट्टा, हशीश, कोरेक्स, मार्फिन,पैथाडीन , मेथाडोन,डाइजापाम, फेविकोल, आयोडेक्स बाम, बूट पालिश, जैसे  उल्लेखनीय है । शराब भी इसी प्रकार का जहर है जो आज भी सबसे अधिक प्रचलित है। शराब जैसे नशीले पदार्थ का प्रचलन तो समाज में बहुत पहले से ही था लेकिन आधुनिक युग में पाश्चात्य संस्कृति से नशे के नए रूप मिले हैं। और   हेरोइन और कोकीन जैसे संवेदन मादक पदार्थ के उदाहरण है। इसी  व्यवसाय के पीछे आज अनेक राष्ट्रों की सरकार का सीधा संबंध होता है । जिससे बड़े बड़े अधिकारी वर्ग भी सम्मिलित होते हैं । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने के व्यवसायियों का जाल बहुत ही घटित होता है। आज के भौतिकवादी जीवन में नशाखोरी के अनेक कारण हैं ।आज के व्यस्त जीवन में घर में बच्चों को परिवार का साथ और प्यार ना  मिलने से अकेलेपन की प्रवृत्ति ने इस नशे को अपनाया । स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों में हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी शिकार बन जाते हैं ।इसके पीछे या तो नशे के व्यापारियों का जाल होता है या अपने व्यक्तिगत कारणों से यह लोग निश्चित होते हैं । धनी परिवार के लड़कों को इस जाल में फंसाया जाता है और वे कभी-कभी धन के   तथाकथित दिखावे के लिए इस ओर मुड़ जाते हैं । कुछ संपन्न वर्ग में शराब का नशा तो प्राय उनके सर पर भूत और प्रतीक बन जाता है ।भारत जैसे देश में शराब प्रमुख नशा माना जाता है।  लेकिन आज की युवा पीढ़ी  इन नशे के नए रूपों के जाल में भी फंस गई है । युवा वर्ग इस और अपनी बेकारी और असफलता के कारण भी आकर्षित हुआ है । दुखी और निराश नशे का सहारा लेकर अपराधी प्रवृत्ति के हो जाते हैं । यह लोग दूसरे लोगों को नशा भेंट करते हैं लेकिन जब इस के आदि हो जाते हैं तो घर का सामान चुरा कर और अन्य साधनों से नशा खरीदते हैं । युवक अपराध में सम्मिलित हो जाते हैं।  इससे व्यक्ति के स्नायु संस्थान प्रभावित होते हैं। निर्णय और नियंत्रण शक्ति कमजोर हो जाती है अमाशय ,लीवर और हृदय प्रभावित होते हैं । शराबी चालक सड़क पर हत्यारा बनकर निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार देता  है । पत्नी के आभूषण बेचता है बच्चों की परवरिश और शिक्षा का उचित प्रबंध नहीं कर पाता और  नशे की हालत में सड़कों और नालियों में गिरकर आत्मसम्मान भी बेचता है। लज्जा को त्यागकर अनैतिक और असामाजिक कर्मों की और भी उन्मुख होता है संवेदन मादक पदार्थ निर्देशक शक्ति आदि पर अपना प्रभाव दिखाते हैं ।और संवेदन क्षमता को स्थाई रूप से मंद और विकृत कर देते हैं। एक बार इस नशे की लत पड़ने पर भी निरंतर अपने आप धंसते चले जाते हैं ।और नशे की  मांग बढ़ती ही चली जाती है। इस मांग को पूरा करने के लिए व्यापार आदि कार्यों में भी भाग लेने लगता है। आज हिमाचल प्रदेश में भी नशे का जहर  इस कदर फैल गया है। कि आए दिन कोई ना कोई घटना प्रदेश के युबाओं को मौत के कुँए में धकेल देती है । आज नशे के चलते  समाज खोखला होता जा रहा है युवा पीढ़ी विभिन्न प्रकार के नशों के चुंगल में फंस कर अपने जीवन को बर्बाद कर रही है यदि समाज को इन घातक नशो के बारे में जागरूक नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को कई प्रकार के सामाजिक ,आर्थिक, मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा । आज हिमाचल प्रदेश  के जिला कांगड़ा के उपमण्डल इन्दौरा में पंजाब के साथ सटे क्षेत्र में नशे का कारोबार इस कदर होता है । कि औरतें भी इस धंधे में संलिप्त हैं।  इस दुष्ट प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार और जनता दोनों का सक्रिय सहयोग ही सफल हो सकता है । सरकार  को चाहिए कि इस अपराध में भागीदार लोगों को जल्दी कड़ी सजा दी जाए तो जनता के लिए एक उदाहरण और भय का कारण बन जाएगा बड़े से बड़े गिरोह और व्यापारियों को भी कड़े दंड दिए जाने की आवश्यकता है । कठोर कानून बनाना और कठोरता से उसका पालन करना भी नितांत आवश्यक है । दोषी व्यक्ति को किसी भी रूप में चाहे वह कोई भी हो क्षमा नहीं करना चाहिए।  संचार माध्यम टीवी सिनेमा पत्र-पत्रिका इसके प्रति जनमत तैयार कर सकते हैं और लोगों की मानसिकता बदल सकते हैं इसके लिए अनेक समाजसेवी संस्थाएं जो सरकारी और गैर सरकारी रूप से कार्य करती हैं महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है । इस नशे में प्रवृत्त लोगों को सहानुभूति और प्यार के द्वारा ही सही धीरे-धीरे रास्ते पर लाया जा सकता है। उनकी इस प्रवृत्ति को बदलना और उन्हें सबल बनाकर तथा नशा विरोधी केंद्रों में उनकी शिक्षा करवाकर उन्हें नया जीवन दान दिया जा सकता है। आज के युबाओं को नशे की घिनोनी लत से बचाने की नितांत आबश्यकता है।

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