लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन किशोर सिन्‍हा

kashiमधुर मनोहर अतीव सुंदर यह सर्वविद्या की राजधानी। तीनों लोकों से न्यारी यह नगरी बाबा विश्वनाथ के त्रिशूल पर अवस्थित है। सारी दुनिया में पाखंड की पूजा हो सकती है लेकिन यहाँ सत्यं शिवं सुन्दरम ही पूजित है। काशी से चुनाव लड़ने के पहले अरविन्द केजरीवाल ने यही सोचा था कि दिल्ली की तरह यहाँ की जनता को भी मूर्ख बना लेंगे लेकिन उनका यह दाव फिलहाल उल्टा पड़ रहा है। काशी की जनता एक छठी इन्द्रिय भी रखती है जिससे वह पाखंडियों को देखते ही पहचान लेती है और तदनुसार आचरण भी करने लगती है। केजरीवाल ने अन्ना का भरपूर दोहन किया और प्रसिद्धि प्राप्त होते ही उन्हें दूध की मक्खी की तरह बाहर निकालकर फ़ेंक दिया। दिल्ली के चुनाव में अपने बच्चों की कसम खाने के बावजूद भी कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई। दिल्ली विधान सभा के चुनाव में सबसे आगे आकर आटो वालों ने चुनाव प्रचार किया। इस गरीब तबके के प्रत्येक व्यक्ति ने पेट काटकर पांच पांच सौ रूपए आप के चुनाव फंड में दिए। केजरीवाल ने उनसे वादा किया था की सत्ता संभालते ही ऑटो का किराया दूना कर देंगे, उनके लिए मुफ्त आवास की व्यवस्था करेंगे, बिजली-पानी मुफ्त देंगे और उन्हें पुलिसिया उत्पीडन से पूरी मुक्ति दिलाएंगे। अपने 49 दिनों के कार्यकाल में उन्होंने इस तबके के लिए कुछ नहीं किया। वे एक भगोड़े साबित हुए। दिल्ली के आटो चालक लाली का केजरीवाल को जड़ा गया थप्पड़ पूरे समुदाय के दिल में उबलते आक्रोश की अभिव्यक्ति मात्र था। भारत की दुर्दशा के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी का विरोध करने के बदले उन्होंने मोदी का विरोध करने का निश्चय किया। यहाँ वे पूरी तरह बेनकाब हो गए। आज की तारीख में मोदी से अधिक लोकप्रिय कोई नेता नहीं है। वे भारत के उज्जवल भविष्य के प्रतीक बन चुके हैं। भारत की जनता की आशा के वे एकमात्र केंद्र हैं। उन्होंने चुनौतियाँ स्वीकार की है और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गुजरात में विकास के नए-नए मापदंड स्थापित किये हैं। वे एक जांचे-परखे नेता हैं। देश की जनता के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास है। मोदी के माध्यम से देश के विकास में सहभागी बनने के बदले केजरीवाल ने उनके अंध विरोध का फैसला लिया। यह फैसला भी उनका अपना नहीं बल्कि मल्लिका-ए-हिंदुस्तान का फैसला था जिसे उन्होंने सर झुकाकर स्वीकार किया। ऐसे रँगे सियार को काशी ने देखते ही पहचान लिया। उनका स्वागत लंका के पान की दूकान पर चप्पलों से, कंपनी बाग में सड़े अण्डों से तथा भीषम पुर में चहेट कर किया गया। काशी के तुलसी घाट पर बने संकट मोचन मंदिर के गेस्ट हाउस से उन्हें निकाल बाहर किया गया। उन्हें रहने के लिए काशी में कोई घर नहीं मिल पा रहा है। आजकल वे अमीठी में कुमार विश्वास का चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

गंगा के सुरम्य तट पर बसी काशी स्वयं सुज्ञान, धर्म और सत्यराशि है। यह सत्यशिक्षा का अनुपम केंद्र है। राजा हरिश्चन्द्र ने चांडाल के हाथों बिककर सत्य की स्थापना की थी। वे केशव का पान खाने के लिए लंका नहीं जाते थे। महर्षि व्यास ने यही वेदों की रचना की थी। गणेश जी के सहयोग से यही महाभारत और गीता की रचना की थी। यह ब्रह्मविद्या की राजधानी है।मुक्तिपद को दिलानेवाले, सुधर्म पर चलानेवाले बुद्ध और शंकर की तपोभूमि है। गंगा, वरुणा और अस्सी की सुरम्य धाराओं से घिरी वाराणसी में पूर्वाग्रह मुक्त कबीर और तुलसी ने पवित्र स्नान किया है। यह वाग्विद्या की राजधानी है। यहाँ प्रतीचि-प्राची का सुन्दर संगम है। यहाँ का काशी हिन्दू विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माता महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रखर देशभक्ति, उनकी हिम्मत और उनकी शक्ति का प्रतीक है। यह कर्मवीरों की राजधानी है। यहाँ की गौरवशाली परम्पराएँ राष्ट्र गौरव नरेन्द्र मोदी का कोटि-कोटि भुजाएं फैलाकर स्वागत कर रही हैं। बाबा विश्वनाथ, बुद्ध, महावीर, शंकर, नानक, कबीर, व्यास, तुलसी, रविदास, कीनाराम, लाल बहादुर शास्त्री और संपूर्णानंद की पुण्य आत्माएं नरेन्द्र मोदी को आशीर्वाद देने के लिए आतुर हैं। यहाँ भगोड़े का क्या काम?

नए नहीं हैं ये ईंट पत्थर, है विश्वकर्मा का कार्य सुन्दर;

रचे हैं विद्या के भव्य मंदिर, यह कर्मविद्या की राजधानी। 

One Response to “ई रजा काशी हौ”

  1. आर. सिंह

    आर. सिंह

    इस स्तुति वंदना पर कोई टिप्पणी संभव नहीं दिखती,पर प्रयत्न करने में हर्ज क्या है? सिन्हा जी ने लिखा है,”उन्होंने चुनौतियाँ स्वीकार की है और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गुजरात में विकास के नए-नए मापदंड स्थापित किये हैं। “मैं तो नमो के राज कार्य संभालने के पहले गुजरात गया था,वहां तो मुझे ऐसी कोई विपरीत परिस्थिति नहीं दिखी थी.कहीं ऐसा तो नहीं है की ये विपरीत परिस्थितियां नमो ने स्वयं पैदा की थी. रही विकास की बात ,तो जिस प्रकाशन समूह को इनका सबसे ज्यादा विज्ञापन जाता है,उसी के सबसे अग्रणी समाचार टाइम्स आफ इंडिया में 11 मार्च को एक समाचार छपा है.:Modi’s turf flops on edu. And health. मैं तो विकास का सर्वप्रधान मुद्दों में इन दोनों को मानता हूँ.नमो के भ्रष्टाचार मिटाने की बात तो मुझे ऐसे ही हास्यास्पद लगती है,क्योंकि जिसकके मंत्रिमंडल में नामी गरामी दागी मंत्री हों,वह भ्रष्टाचार मिटाने की बात करे,तो हास्यास्पद ही लगेगा न. गुजरात में सबसे कमजोर लोकायुक्त क़ानून है.केंद्र में भी वही होने वाला है.येदुरूपा और राम विलास पासवान जैसे लोगों का मंत्री बनना तो तय है ही,अमित शाह जैसे हत्या के आरोपी भी उसमे शामिल हो सक़क्ते हैं,जिसकी सेवा में दो विमान और एक हेलीकॉप्टर रात दिन लगे हुए हैं,जिनका काम मोदी को विभिन्न रैलियों में पहुंचाने के साथ उनको रोज रात में अहमदावाद पहुंचाना और फिर सुबह रैलीं के स्थान पर पहुचाना है.क्या कोई बता सकता है कि इन सबका खर्च कहाँ से आता है?ऐसी बहुत सी बाते हैं,जो नमो के विकास का पोल खोलती है.नमो बड़े बड़े उद्द्योपतियों को अवश्य प्रिय हैं,पर यह कोई कारण नहीं कि सब उनका समर्थन करे.मुश्किल तो यह है कि नमो के भक्त इस तरह अपने इष्ट देव के रंग में रंग गए हैं कि उनको अन्य चीजे न दिख रही है और न उन्हें कुछ सुनाई पड़ रहा है. मगर जो नमो की भक्ति में नहीं डूबे हैं,उन्हें सबकुछ दिख रहा है,अतः .अरविन्द केजरीवाल की कौन कहें ,वैसे लोग भी नमो का स्तुति गायन नहीं कर सकते.
    गुंडे अगर किसी को अपनी बात कहने से रोकते हैं ,तो यह चटकारे ले ले कर सुनाने की नहीं , बल्कि शर्म से डूब मरने की बात है. अभी अरविन्द अमेठी में है,पर अमेठी का चुनाव समाप्त होने पर वे दोनों वाराणसी में आएंगे.
    काशी जिसका वर्णन यहां किया गया है,वह शायद पुस्तकों तक सीमित है.गन्दगी पूर्ण गंगाके किनारे बसा हुआ यह शहर आज गन्दगी का भण्डार है. गंगा के साथ साथ यह नगर भी इस गन्दगी से निजात पाना चाहता है,पर गंदे हाथों से सफाई नहीं हो सकती,अतः इसको एक साफ़ सुथरे इंसान की जरूरत है. यह लिंक देखें,: http://www.pravakta.com/short-stories-the-priest-of-the-temple

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