देश में आर्थिक गतिविधियाँ पटरी पर लौटीं

पूरे विश्व में कोरोना वायरस महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियाँ ठप्प पड़ गई थीं। भारत भी इस प्रभाव से अछूता नहीं रहा था। लॉकडाउन के चलते, मार्च 2020 के बाद से लगातार आर्थिक गतिविधियों में कमी देखने में आई थी। परंतु अब हर्ष का विषय है कि माह सितम्बर 2020 में देश में आर्थिक गतिविधियों ने वापिस रफ़्तार पकड़ ली है। केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक क्षेत्र के सम्बंध में सही समय पर लिए गए कई निर्णयों के चलते ही यह सम्भव हो सका है।

माह सितम्बर 2020 में देश में ऊर्जा की माँग, माह सितम्बर 2019 की तुलना में,3 प्रतिशत बढ़ गई है। जबकि अगस्त 2020 में ऊर्जा की माँग, अगस्त 2019 की तुलना में, 2 प्रतिशत कम थी। ऊर्जा की माँग में माह सितम्बर 2019 की तुलना में माह सितम्बर 2020 में वृद्धि होना, दर्शाता है कि देश में उत्पादन गतिविधियों में तेज़ी आई है। इसी प्रकार, विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन गतिविधियों में वृद्धि एवं कमी दर्शाने वाला इंडेक्स (पीएमआई) भी माह सितम्बर 2019 के 51.4 की तुलना में माह सितम्बर 2020 में बढ़कर 56.8 हो गया है। इस इंडेक्स का 50 के अंक से अधिक होना दर्शाता है कि उत्पादन गतिविधियों में वृद्धि दृष्टिगोचर हो रही है एवं यदि यह इंडेक्स 50 के अंक से नीचे रहता है तो इसका आश्य होता है कि उत्पादन गतिविधियों में कमीं हो रही है।

माह सितम्बर 2020 में वस्तु एवं सेवा कर की उगाही में भी अच्छी वृद्धि दर्ज हुई है। माह सितंबर 2019 में यह 91,916 करोड़ रुपए की रही थी जो माह सितम्बर 2020 में बढ़कर 95,480 करोड़ रुपए हो गई है। यह माह अप्रेल 2020 में घटकर 32,172 करोड़ रुपए हो गई थी एवं माह मई 2020 में बढ़कर 62,151 करोड़ रुपए तथा माह अगस्त 2020 में 86,449 करोड़ रुपए की रही थी।

देश में पेट्रोल की बिक्री भी माह जनवरी 2020 के 24,56,000 टन की तुलना में माह सितम्बर 2020 में 24,19,000 टन की रही है अर्थात कोरोना महामारी के पूर्व के स्तर को लगभग प्राप्त कर लिया गया है।

माह सितम्बर 2020 में यात्री वाहनों की बिक्री में भी उछाल देखने में आया है। यात्री वाहनों की बिक्री माह सितम्बर 2020 में 2.8 से 2.9 लाख वाहनों की रही है जो माह सितम्बर 2019 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।

माह सितम्बर 2020 में भारतीय रेल्वे की आय एवं सामान की ढुलाई की मात्रा में भी तुलनात्मक रूप से अच्छी वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है। सामान की ढुलाई की मात्रा में, माह सितम्बर 2020 में, माह सितंबर 2019 की तुलना में, 15.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी प्रकार, सामान ढुलाई से आय में भी इसी अवधि में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है।

उक्त आँकड़ों से यह स्पष्ट हो रहा है कि देश में अब उपभोक्ता वस्तुओं की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।      

भारत के विदेशी व्यापार क्षेत्र से भी बहुत अच्छी ख़बर आई है। बहुत लम्बे समय के बाद, विदेशी व्यापार के चालू खाता में, वर्ष 2020-21 की प्रथम तिमाही अर्थात अप्रेल से जून 2020 के बीच में, 1,980 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आधिक्य शेष दर्ज किया गया है। सामान्यतः भारत के विदेशी व्यापार के चालू खाता में कमी का शेष ही रहता आया है। विदेशी व्यापार के चालू खाता में आधिक्य शेष होने का आश्य यह है कि देश से निर्यात, आयात की तुलना में अधिक हो रहे हैं। जबकि सामान्यतः देश में आयात, निर्यात की तुलना में अधिक रहते हैं। साथ ही, देश के निर्यात में भी 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी दिनांक 18 सितम्बर 2020 को 54,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकार्ड स्तर पर पहुँच गया है एवं इसमें लगातार वृद्धि दृष्टिगोचर हो रही है।

इस वर्ष मानसून की वर्षा भी 28 सितम्बर 2020 तक सामान्य औसत से 9 प्रतिशत अधिक रही है। लगभग सभी राज्यों में सामान्य औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यह भी एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए क्योंकि इससे कृषि क्षेत्र में, ख़रीफ़ सीज़न में, कृषि पैदावार में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है। सामान्य औसत से अधिक वर्षा होने के चलते रबी सीज़न में भी पानी की उपलब्धता सुधर जाएगी जिसके कारण रबी सीज़न में भी कृषि पैदावार में अच्छी वृद्धि रहने की सम्भावना बढ़ गई है। जिसके चलते ट्रैक्टर, खाद, वाहनों, उपभोक्ता वस्तुओं, आदि की बिक्री में उछाल आने की पूरी सम्भावना रहेगी।

आने वाले माह अक्टोबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में त्योहारों के चलते भी वाहनों एवं उपभोक्ता वस्तुओं की माँग में वृद्धि दर्ज होने की पूरी सम्भावना है, जिसके चलते वाहन उद्योग एवं उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाईयों में तेज़ वृद्धि देखने को मिल सकती है।

कृषि क्षेत्र एवं विनिर्माण क्षेत्र के कोरोना महामारी के पूर्व के स्तर पर आ जाने के बाद अब सेवा क्षेत्र से उम्मीद की जानी चाहिए कि यह क्षेत्र भी अपने पूर्व के स्तर को शीघ्र प्राप्त करे। हालाँकि अब केंद्र सरकार द्वारा धीरे धीरे सेवा क्षेत्र को भी  खोला जा रहा है, जैसे कुछ रेलगाड़ियों को प्रारम्भ कर दिया गया है, एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में लोगों को आने जाने की छूट प्रदान कर दी गई है, मुंबई में लोकल ट्रेन को चालू कर दिया गया है एवं दिल्ली में मेट्रो की शुरुआत भी कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ उड़ानों को प्रारम्भ कर दिया गया है। साथ ही, वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं को, कुछ नियमों का पालन करते हुए, जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई है। कुछ राज्य सरकारों ने भी अंतरराज्यीय बसों को चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। होटलों एवं अन्य मनोरंजन के स्थानों को भी, कुछ शर्तों के साथ, धीरे धीरे खोलने की अनुमति प्रदान की जा रही है।   

पहिले हर राज्य द्वारा क्वॉरंटीन सम्बंधी नियमों को अपने स्तर पर ही लागू किया जा रहा था, परंतु अब राज्य सरकारों को इन नियमों को लागू करने के पूर्व केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। इस प्रकार पूरे देश में क्वॉरंटीन सम्बंधी नियमों में एकरूपता लाई जा रही है, ताकि नागरिकों में विश्वास बढ़े।

हालाँकि अब कुछ अच्छी ख़बरें भी आने लगी हैं। देश के कुछ होटलों में सप्ताह अंत के समय के लिए बुकिंग अब फ़ुल होने लगी है। धीमे धीमे ही सही, सेवा क्षेत्र के अंतर्गत, घरेलू पर्यटन तो प्रारम्भ हो रहा है। यह अब और आगे बढ़ेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। आसपास के शहरों में ऐसे कई स्थान पाए जाते हैं जहाँ सप्ताह अंत में जाया जा सकता है। ऐसे इलाक़ों में एवं देश के ग्रामीण इलाक़ों में पर्यटन की अपार सम्भावनाएँ मौजूद है। अब लोग दरअसल अपने घरों से बाहर निकलना चाह रहे हैं। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा मिलकर किए जा रहे प्रयासों के कारण ऐसा महसूस होने लगा है कि देश में अब घरेलू पर्यटन तो शीघ्र ही पुनर्जीवित हो जाएगा। इस प्रकार, सेवा क्षेत्र में भी तेज़ गति से विकास देखने को मिल सकता है।

प्रहलाद सबनानी

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