More
    Homeसाहित्‍यकविताज्येष्ठ पुत्र

    ज्येष्ठ पुत्र

    पुत्र ज्येष्ठ है यदि तू अपने कुल का
    तो संघर्षों और विपत्तियों से मत डर
    चाहता है अनुज हो तेरा लक्ष्मण जैसा
    पहले तू स्वयं राम-सा कर्म तो कर

    अपने पिता के वचन की लाज निभाने
    ज्येष्ठ जटिल जीवन पथ अपनाते हैं
    हो प्राप्त विजय अनुजों को इसलिए
    सहर्ष वो स्वयं पराजित हो जाते हैं

    लाँघते नहीं मर्यादा कभी अपने कर्मों से
    विचलित होकर धैर्य कभी खोते नहीं
    असि नहीं उठाते हैं स्वजनों पर
    ज्येष्ठ पुत्र निष्ठुर कभी होते नहीं

    ✍️आलोक कौशिक

    आलोक कौशिक
    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    11,682 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read