आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

मजबूर

कोई भी इंसानजब मजबूर होता हैखुद से वहबहुत दूर होता है जानकर भी राज़ सारेदिखता है अनजानबनकर रह जाता हैहालातों...

खुशी और ग़म

नहीं लगा पाओगेइसका अनुमानकौन है जहान मेंकितना परेशान किसी के जीवन मेंहै कितनी खुशीअंदाज़ा ना लगानादेख उसकी हँसी चाहत नहीं...

विदाई

आँसुओं के संग जबहोती है ठठोलीमुश्किल है समझनातब नैनों की बोली पिता दिखता है परेशानमाँ लगती है बेचैनबहन दिनभर हँसती...

जवानी

हो जाती है हर किसी सेकोई-ना-कोई नादानीआती है जब जीवन मेंखिलती हुई जवानी मोहब्बत भी लेती हैपहली बार अँगड़ाईछूती है...

निर्धन

पसंद नहीं वर्षा के दिननहीं भाती पूस की रातमिट्टी का घर है उसकानिर्धनता है उसकी ज़ात श्रम की अग्नि में...

दादाजी

मुझे अपने पुत्र से इतना प्रेम नहींजितना अपने पोते से हैऐसा मेरे दादाजी कहते थे माँगते थे वो किसी से...

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