लेखक परिचय

डॉ. मनीष कुमार

डॉ. मनीष कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए, एमफिल और पीएचडी की उपाधि हासिल करने वाले मनीषजी राजनीतिक टिप्‍पणीकार के रूप में मशहूर हैं। इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में लंबी पारी खेलने के बाद इन दिनों आप प्रिंट मीडिया में भी अपने जौहर दिखा रहे हैं। फिलहाल आप देश के पहले हिंदी साप्‍ताहिक समाचार-पत्र चौथी दुनिया में संपादक (समन्वय) का दायित्व संभाल रहे हैं।

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yemenरात में ही ये पोस्ट लिखना पड़ रहा है क्योंकि सबेरे से टाइम्स नाउ, अरनब गोस्वामी और साथ में कुछ मीडिया के संदिग्ध लोग हंगामा मचाने वाले है. न्यूज ट्रेडर्स के निशाने पर जनरल वी के सिंह होंगे. आज एडिटर्स गिल्ड भी जागृत हो जाएगा. देश के महान महान अंग्रेजी के संपादकों का भाषण भी होगा. पत्रकारों का एक गुट जो आजकल कुंठित चल रहा है वो सरकार पर इमरर्जेंसी और मीडिया को धमकाने का आरोप लगायेगा. विपक्ष की तरह सीधे प्रधानमंत्री से जवाब मांगा जाएगा. यकीन मानिए कल ये न्यूज-ट्रेडर्स देश में प्रजातंत्र पर खतरे का झंडा बुलंद करेंगे और विपक्षी पार्टियों के कई नेता लगे हाथ बहती गंगा में अपना हाथ धोएंगे.

मुद्दा ये बनाया जाएगा कि केंद्रीय मंत्री जनरल वी के सिंह ने मीडिया को प्रेसटीट्यूट कहा है. नहीं नहीं..अरनब गोस्वामी तो ये कहने वाला है कि मीडिया को प्रोसटीट्यूट कहा है. पहले सच्चाई जानना जरूरी है. जनरल वी के सिंह ने जो ट्वीट किया वो यह है “Friends what do you expect from presstitutes. Last time Arnab thought there was ‘O’ in place of ‘E’ ‪#TimesNowDisaster‬” इसमें जो विवादित शब्द है वो है presstitutes. दरअसल ये कोई गाली नहीं है. इस शब्द का इस्तेमाल उन पत्रकारों या मीडिया के लिए होता जो पक्षपातपूर्ण और पूर्वनिर्धारित धारणाओं से ग्रसित होते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो यह शब्द न्यूज ट्रेडर जैसा ही है. जनरल वी के सिंह ने इस ट्वीट को तब किया जब देश की मीडिया ने यमन में चल रहे रेस्क्यू आपरेशन को ब्लैकआउट कर दिया और बाद में यह दिखाना शुरू कर दिया कि जो लोग आ रहे हैं उनमें से किसी का सामान गायब है तो किसी को गरम खाना नहीं मिला. यमन से जिंदा लौट आए या सरकार ने उन्हें सही सलामत बचा लिया उसकी कोई चर्चा ही नहीं है. खैर.

गौर करने वाली बात यह है कि यह ट्वीट मीडिया के लिए नहीं बल्कि सिर्फ सर्वज्ञानी अरनब गोस्वामी के लिए था. अरनब गोस्वामी देश के 300 न्यूज चैनलों में से एक चैनल का संपादक है, वो मीडिया नहीं है. इसलिए इस ट्वीट को पूरी मीडिया के लिए बताना भी गलत है. एक जानकारी और जरूरी है. इससे पहले जनरल वी के सिंह ने इस शब्द का प्रयोग शेखर गुप्ता द्वारा संपादित इंडियन एक्सप्रेस के लिए किया था. जो लगातार जनरल वी के सिंह के खिलाफ झूठी खबरें छाप रहा था. उस वक्त भी बड़ा बवाल मचा था और एडिटर्स गिल्ड ने इस शब्द के इस्तेमाल की निंदा की थी. जनरल वी के सिंह ने अरनब गोस्वामी के लिए बस यही कहा है कि पिछली बार जब उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया था तो अरनब गोस्वामी E को O समझ बैठा था. जनरल वी के सिंह ने ये ट्वीट क्या किया कि सोशल मीडिया में हर जगह इसी विषय पर चर्चा होने लगी और जनता ने अरनब गोस्वामी और टाइम्स नाउ को जमकर लताड़ा. इस मामले में अरनब गोस्वामी और टाइम्स नाउ से कई गलतियां हुई हैं लेकिन सबसे बड़ी गलती यह कि अरनब ने जनरल वी के सिंह को कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा समझ लिया. जिसे जब मन चाहे दुत्कार दो और वह कभी प्रतिरोध नहीं करेगा.

यमन हिंसा की चपेट में है. यहां दुनिया के अलग अलग देशों के नागरिक फसें हैं. वो यमन से बाहर निकलना चाहते हैं. लेकिन भारत के अलावा कोई भी देश अपने नागरिको को बाहर निकालने में सफल नहीं हो पाया है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत के रेस्कयु आपरेशन का नेतृत्व जनरल वी के सिंह कर रहे हैं. वो हिंसा से ग्रसित यमन के सना शहर में स्वयं रहकर अलग अलग एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर रहे हैं और भारतीय नागरिकों को बाहर निकाल रहे हैं. इतिहास में पहली बार कोई केंद्रीय मंत्री युद्धक्षेत्र में प्रवेश कर लोगों को बचाने का आपरेशन चला रहा है. पूरी दुनिया भारत के इस रेस्क्यु आपरेशन से चकित है. यमन के हिंसा प्रभावित इलाकों से नौसेना ने भारतीय नागरिकों के अलावा 176 विदेशियों की भी जान बचाई है. यही वजह है कि अमेरिका, स्वीडेन, हॉलैंड, जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, मिस्र, हंगरी, क्यूबा, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे 26 देशों ने भारत से अपने नागरिकों को यमन से बाहर निकालने में मदद मांगी है. जनरल वीके सिंह ने यमन में जो किया है वो भारत के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बन गया लेकिन अफसोसं इस बात का है कि एक तरफ जनरल वी के सिंह ने भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और देश की मीडिया के लिए यह खबर ही नहीं है.

चूंकि, मीडिया ने इस खबर को नहीं दिखाया, इसलिए जनरल वी के सिंह ने मीडिया पर एक कटाक्ष किया कि जंग जैसे हालात से जूझते यमन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन पर नजर रखना ‘पाकिस्तानी दूतावास में जाने से कम रोमांचक है’. यह कटाक्ष मीडिया पर था लेकिन अकल के मारे हुए पत्रकारों ने इसे खबर बना दिया. नोट करने वाली बात यह है कि विपक्षी पार्टियों ने पाकिस्तानी उच्चायोग में हुए समारोह में जनरल वी के सिंह की शिरकत पर नाखुशी जताई थी, और मीडिया ने जनरल सिंह के ट्वीट का गलत अर्थ लगा कर हंगामा खड़ा कर दिया था. इसलिए ऐसा कटाक्ष कर जनरल वी के सिंह ने कोई गलती नहीं की. मीडिया को बस आईना दिखाया कि पाकिस्तान उच्चायोग को मीडिया ने तो बहुत उछाला लेकिन जो हैरतअंगेज काम यमन में हो रहा है उसे मीडिया नहीं दिखा रहा है. लेकिन, अहंकार में डूबा अरनब गोस्वामी इस बयान में छिपा कटाक्ष समझ नहीं सका या समझने के बावजूद खेल करने लगा और यह खबर चलाना शुरू कर दिया कि जनरल वी के सिंह ने यह कहा है कि नागरिकों को निकलने का काम रोमांचक नहीं है. इस खबर को दिखा कर अरनब गोस्वामी ने जनरल वी के सिंह को नीचा दिखाने की कोशिश की. यह अरनब गोस्वामी की शैतानी थी.

सोशल मीडिया पर टाइम्स नाउ के इस खबर का असर साफ दिखा. कई लोग इस बात को लेकर पहले से ही खफा थे कि मीडिया ने रेस्क्यू आपरेशन को ब्लैकआउट कर दिया है. इसलिए जब टाइम्स नाउ ने जनरल वी के सिंह के खिलाफ खबर दिखानी शुरू की तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. ट्विटर पर #TimesNowDisaster पूरी दुनिया में ट्रेंड करने लगा. अरनब के लिए यह एक दयनीय स्थिति है. अहंकार में डूबे अरनब को पता होना चाहिए कि ये युग सोशल मीडिया का है जहां स्टूडियो में बैठकर एकालाप की जगह नहीं है. जनता के साथ सच का सामना करना पड़ता है. अरनब के पास टीवी की पूंजी है, उस पर वो जो चाहे बोल सकता है. जो बकवास करना है कर सकता है. लेकिन जनरल वी के सिंह के साथ जनता है जो जानती है कि उन्होंने कैसे बहादुरी के साथ युद्धक्षेत्र में घुसकर.. ग्राउंड जीरो में जाकर .. कठिनाइयों का सामना कर देश का गौरव बढ़ाया है.

रही बात प्रेसटिट्यूट की तो अरनब गोस्वामी ही बताए कि उस पत्रकार या मीडिया को क्या नाम दिया जाए जो चर्च पर एक पत्थर गिरने पर देश में कोहराम मचा देता हो और वहीं, जब कोलकाता के बेलूर मठ के अंदर दो बम धमाके होते हैं तो उसे सांप सूंघ जाता हो. चीखना चिल्लाना और कुतर्क करना अलग बात है.. सच को स्वीकार करना अलग बात है. सच जनरल वी के सिंह के साथ है.

5 Responses to “जांबाज जनरल वी के सिंह बनाम हीन-भावना से ग्रसित अरनब गोस्वामी”

  1. Rajkumar Singh

    सलाम मनीष ! खुलकर सच सच्चाई बताने के ही लिए ही नहीं ,वस्तुगत यथार्थ को समझाने के लिए भी .आपको ‘ चौथी दुनिया ‘ में पढता ,देखता ,सुनता रहता हूँ .प्रार्थना की आप और आप जैसों की पत्रकारिता उस मुकाम पर पहुंचे जिस पत्रकारिता को ‘ धर्म ‘ कहा जाता है !

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  2. Dr. Arvind Kumar Singh

    डा. मनीष
    हम क्या कहते है यह महत्वपूर्ण नही है। महत्वपूर्ण ये है हम क्या करते है। यही फर्क है जनरल वी.के सिंह एवं अरनब गोस्वामी मे। जनरल वी.के. सिंह की पूजी उनका एक्शन है। आज सम्पूर्ण राष्ट्र जनरल सिंह द्वारा यमन में की गयी कार्यवाही से गौरवान्वीत है। सुन्दर आलेख के लिये धन्यवाद!
    आपका
    अरविन्द

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  3. नीतिन गायकवाड

    वाह….! कितने शानदार तरीके से आपने जवाब दिया है बिकाऊ media को….

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  4. डॉ. मधुसूदन

    Dr. Madhusudan

    Dhanyavad –Dr. Manish Kumar…for bringing this “whats’ his name” Inferiority Complex in the light. They say inferiority expresses itself as superiority.

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  5. योगी दीक्षित

    धन्यवाद मनीष, मेरे दिल कि भावनाओं को तुमने शब्द दे दिए. अर्नव बहुत अहंकारी और बदतमीज पत्रकार है. ये सब पर हावी होने को ही पत्रकारिता समझता है. शालीनता इसे छू भी नहीं गयी है.

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