लेखक परिचय

लालकृष्‍ण आडवाणी

लालकृष्‍ण आडवाणी

भारतीय जनसंघ एवं भाजपा के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष। भारत के उपप्रधानमंत्री एवं केन्‍द्रीय गृहमंत्री रहे। राजनैतिक शुचिता के प्रबल पक्षधर। प्रखर बौद्धिक क्षमता के धनी एवं बृहद जनाधार वाले करिश्‍माई व्‍यक्तित्‍व। वर्तमान में भाजपा संसदीय दल के अध्‍यक्ष एवं लोकसभा सांसद।

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लालकृष्ण आडवाणी

प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस पर, राजपथ की परेड को देखने के बाद मैं अपने निवास पर भी झण्डावादन का छोटा कार्यक्रम आयोजित करता हूं। इसमें अधिकांश वे सुरक्षाकर्मी भाग लेते हैं जो वहां पर तैनात हैं: इस वर्ष मेरी सुपुत्री प्रतिभा ने उनके लिए एक घंटे के वृत चित्र ‘वंदेमातरम‘ का शो प्रदर्शित किया।

उस अवसर पर उपस्थित मीडियाकर्मियों को मैंने कहा कि गणतंत्र दिवस एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए कि वह एक ऐसे महान देश से जुड़ा है जिसका सम्मान दुनिया भर में होता है।

इससे शायद ही कोई इंकार कर सकता है कि हाल ही में समाप्त हुए वर्ष ने हमारे देश के नागरिकों को न केवल अत्यंत निराशा और ठेस पहुचांई न केवल इसलिए खाद्य स्फीति और पेट्रोल, डीजल इत्यादि की कीमतों से आम आदमी के परिवार का बजट गड़बड़ा गया अपितु इसलिए भी कि पूरी दुनिया में हमारा देश दुनिया के सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में जाना जाने लगा है।

इस अवसर पर, मैं कुछ महीने पहले दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों का स्मरण कराना चाहूंगा। विदेश सहित दुनियाभर के अपने मित्रों तथा परिचितों से बातचीत में खेलों का मुद्दा अवश्य आता था और उसमें हमें पता चला कि विदेशी टीवी चैनलों पर नई दिल्ली के खेलों के नाम पर केवल घोटालों और घपलों सम्बन्धी समाचार ही दिखाए जाते थे। इसलिए मुझे ‘आउटलुक‘ वेबसाइट पर इस शीर्षक के अंर्तगत प्रकाशित ताजा रिपोर्ट देखकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ : ”ट्रांसपरेंसी करप्शन इंडेक्स में भारत 87वें क्रम पर लुढ़का।”

रिपोर्ट कहती है :

भ्रष्टाचार के स्तर के कारण ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के ‘कॅरप्शन प्रीसेप्शन इंडेक्स‘ के नवीनतम रैंकिंग में भारत 87वें क्रम पर लुढ़क गया, क्योंकि ग्लोबल वॉच डॉग वैश्विक प्रहरी की अवधारणा के अनुसार घपलों से भरे राष्ट्रमंडल खेलों के परिप्रेक्ष्य में देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है।

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के ‘ट्रांसपरेंसी करप्शन इंडेक्स‘ की रिपोर्ट जो 178 देशों के सार्वजनिक उपक्रमों को जांचती है, दर्शाती है कि सन् 2009 में भारत 84वें से तीन दर्जा नीचे गिरा है।

3.3 ईमानदारी प्राप्तांक (Integrity score) के साथ भ्रष्टाचार के संदर्भ में भारत अब दुनिया में 87वें क्रम पर है। पड़ोसी चीन 3.5 ईमानदारी स्कोर लेकर 78वें क्रम के साथ भारत से उपर है। सन् 2009 में वह 79वें क्रम पर था।

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के चेयरमैन पी.एस.बाबा ने कहा कि ”रैंकिंग और ईमानदारी स्कोर के साथ भारत का नीचे जाना चिंता और खेद का विषय है। ऐसा लगता है कि कुशल प्रशासकों के बावजूद भारत में शासन का स्तर सुधर नहीं रहा है।”

0 से 10 के पैमाने पर रैंकिंग अन्य कसौटियों के साथ-साथ भ्रष्टाचार की व्यापकता और प्रत्येक सरकार द्वारा भ्रष्ट गतिविधियों को रोकने और दण्डित करने की योग्यता पर आधारित होती है।शून्य का स्कोर सर्वाधिक भ्रष्ट जबकि 10 स्कोर भ्रष्टाचार के न्यूनतम स्तर को दर्शाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक ”भारत में भ्रष्ट्राचार के बारे में धारणा लगता है, हाल ही में सम्पन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कथित भ्रष्टाचार के चलते मुख्य रुप से बढ़ी है।”

कम से कम चार जांच एजेंसियां – केन्द्रीय सर्तकता आयोग(सी.वी.सी), प्रर्वतन निदेशालय(एर्न्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट), आयकर विभाग (इन्कम टैक्स डिर्पाटमेंट) और नियंत्रक एवं महालेखाकार(सी ए जी) – गत् वर्ष समाप्त हुए राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजकों के विरुध्द भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है।

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल द्वारा दुनिया में सर्वाधिक न्यूनतम भ्रष्टाचार वाले देशों में डेनमार्क, न्यूजीलैंड और सिंगापुर को शामिल किया गया है।

9.3 स्कोर के चलते डेनमार्क रिपोर्ट में पहले क्रम पर है जबकि न्यूजीलैण्ड और सिंगापुर समान स्कोर के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे क्रम पर है।

5.7 ईमानदारी स्कोर के साथ दक्षिण एशिया में भूटान सर्वोतम कार्यनिष्पादनता के चलते 37वें क्रम पर है।

यह रिपोर्ट विश्व बैंक, यूरोपीय यूनियन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और फ्रीडम हाऊस फाऊण्डेशन सहित विभिन्न अतंरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा वर्षभर में किए गए 13 सर्वेक्षणों पर आधारित है।

राष्ट्रीय स्तर पर दृश्य वास्तव में निराशाजनक है। इसकी तुलना में हाल ही में गुजरात से मिलने वाले समाचारों पर कोई भी गर्व कर सकता है।

सन् 2003 से प्रत्येक दो वर्ष पर गुजरात Vibrant Gujarat कार्यक्रम आयोजित करता है। अब तक चार कार्यक्रम – 2003, 2005, 2007 एवं 2009 – हो चुके हैं। इस वर्ष के कार्यक्रम में 101 देशों और लगभग 1400 विदेशी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मोटे तौर पर 462 बिलियन अमेरिकी डॉलर राशि जोकि भारत के जी डी पी का एक तिहाई है, के समझौता पत्रों (एम ओ यू) पर मात्र दो दिन में हस्ताक्षर किए गए।

मई 2010 में मैंने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित अद्वितीय स्वर्णिम गुजरात समारोह (गुजरात के स्थापना की स्वर्ण जयंती) के बारे में लिखा था। उस अवसर पर राजधानी गांधीनगर में एक नए प्रकल्प महात्मा मंदिर की घोषणा की गई थी। यह भी घोषित किया गया था कि 2011 में आयोजित Vibrant Gujarat कार्यक्रम महात्मा मंदिर में ही किया जाएगा। प्रकल्प इतना महत्वाकांक्षी था अनेकों को आशंका थी कि क्या यह इतनी जल्दी यह पूरा हो पाएगा। लेकिन इसका श्रेय नरेन्द्रभाई को देना पड़ेगा कि 34 एकड़ भूमि में इस ऐतिहासिक आश्चर्य का निर्माण 182 दिनों में पूरा कर दिखाया।

बगैर स्तम्भों वाले इस बहुउद्देश्यीय वातानुकूलित मुख्य कन्वेंशन हॉल जहां Vibrant Gujarat कार्यक्रम सम्पन्न हुआ में 500 लोग बैठ सकते हैं और आवश्यकतानुसार स्थान बढ़ाने-घटाने की काफी संभावना है। इसके अलावा निर्मित बिज़नेस सेंटर में एक ही समय पर 1500 लोग बैठ सकते हैं।

गुजरात में इन उपलब्धियों के पीछे नरेन्द्रभाई द्वारा राज्य प्रशासन से प्रभावी ढंग से लेटलतीफी और भ्रष्टाचार को समाप्त करने में उनकी विस्मयकारी सफलता है। और यही सफलता भारत तथा विदेशों से उद्योगपतियों को स्वाभाविक रूप से गुजरात की ओर आकर्षित करती है।

6 Responses to “भ्रष्टाचार से कलुषित भारत और गुजरात का उदाहरण”

  1. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    भाई शैलेन्द्र जी से पूर्णत: सहमती|
    नरेन्द्र भाई मोदी एवं आडवानी जी की राष्ट्र भक्ति से तो हम पूर्णत: परिचित हैं| साथ ही स्वामी रामदेव जी भी एक आशा की किरण बनकर हमारे सामने आए हैं| हमें चाहिए की उनके भारत स्वाभिमान संगठन को और मजबूत एवं सफल बनाएं|

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  2. शैलेन्‍द्र कुमार

    शैलेन्द्र कुमार

    देश के शासन तंत्र पर बाहर से एक दबाव होना चाहिए जो उसे गलत कार्य करने से रोके और अपराधियों के खिलाफ कार्यवाई करने के लिए मजबूर करे इसके लिए बीजेपी के ऊपर एक दबाव समूह आरएसएस है लेकिन अब उसका दबाव उतना प्रभावी नहीं रहा जितना दीनदयाल जी और श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी के समय था लेकिन फिर भी कांग्रेस के अराजक और निरंकुश सरकार से बेहतर है
    लेकिन अगर हमें पूर्ण रूप से सक्षम सरकार चाहिए तो स्वामी रामदेव का भारत स्वाभिमान संगठन एक सबसे बेहतर दबाव समूह के रूप में उभर रहा है देश के सभी स्वच्छ शासन चाहने वालों के लिए जरूरी है की वो इस समूह की ताकत को और बढ़ाये

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  3. विजय सोनी

    विजय सोनी

    प्रिय आर .सिंह जी धन्यवाद आपकी प्रतिक्रया में आपने बहुत सही लिखा की भारतीय जनता पार्टी को किसी कद्दावर नेता को आगे लाना होगा ,ये भी सही है की कांग्रेस अपने ही बोझ तले दब गई है ,मै इसमें और आगे जोड़ते हुवे कहूँगा की जिस दल ने इस देश पर ५८ वर्षों तक राज किया उसकी हालत आज इतनी पतली हो गई है की वो अपने दम पर ५४० लोकसभा नहीं लड़ सकती ,भ्रष्टाचार के लिए सारा देश थोडा कम या ज्यादा मुजरिम है ये भी सच है ,किन्तु सबसे बड़ा मुजरिम वो होता है जो”ज़िम्मेदार”है या “ज़ावाबदार” है जिसने इस देश पर लगभग ५८ वर्षों तक राज किया ,इसलिए मेरा ख्वाब नहीं बल्कि ये हकीक़त है की जनता अब कांग्रेस से उब चुकी है ,केंद्र में अगली सरकार निश्चित रूप से बीजेपी की ही होगी .

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  4. himwant

    आदरणीय आडवाणी जी,

    1) पेट्रोल, डिजल पर “रिसर्च सरचार्ज” लगाया जाना चाहिए चाहे वह और अधिक महंगे क्यो न हो जाए. उस धन से स्वदेशी वैकल्पिक उर्जा का विकास किया जाना चाहिए. पेट्रोल, डिजल सस्ते करने के लिए सरकारी धन का प्रयोग नही होना चाहिए.

    2) ट्रांसपरेंसी जैसी एजेंसीयो को quote करके आप अपनी शाख गिराते है. बात कहनी हो तो सीधे कहिए.

    3) गुजरात मे मोदी ने कमाल किया है. अब आप उन्हे भारत मे कमाल करने का मौका दिजीए.

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  5. आर. सिंह

    R.Singh

    ख्वाब देखना गलत नहीं है और हो सकता है की सोनी जी का ख्वाब सत्य हो जाये,पर इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को बाजपेयी जैसा एक कद्दावर नेता को सामने लाना होगा.नरेन्द्र भाई गुजरात से बाहर निकलकर कुछ कर पायेंगे इसमे मुझे संदेह है .अन्य कोई ऐसा नेता दिखता नहीं.कांग्रेस अपने ही बोझ से डूब रही है पर विकल्प के अभाव में शायद काग्रेस फिर शासन में आजाये.आवश्यकता इस बात की है की लोगों को भरोसा तो हो की जो आएगा वह स्वच्छ शासन देगा. भारतीय जनता पार्टी का शासन काल बाजपेयी जी के नेतृत्व के बावजूद भी कोई वैसा प्रवाशाली नहीं दिखा था.और अब तो वे आयेंगे भी नहीं.रह गयी भ्रष्टाचार और भ्रष्टों की बात तो इसमे सारा देश थोडा कम या ज्यादा मुजरिम है.यह किसी कांग्रेस या किसी भारतीय जनता पार्टी की देन नहीं है.भ्रष्टाचार हम सब भारतीयों का साझा उद्दयोग है अतः हममे से कोई भी यह कहता है की उसका इसमे योगदान नहीं है तो मैं उसे मिथ्यावादी समझता हूँ,वह आदमी लाल कृष्ण अडवाणी ही क्यों न हो.उनके पिछले शासन काल में भी मुझे ऐसा कुछ नहीं दिखा थाजिसको भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की दिशा में क्रन्तिकारी कदम माना जाये.

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  6. विजय सोनी

    विजय सोनी

    आदरणीय मुख्यमंत्री श्री मोदी जी के कुशल शासनकाल में गुजरात ने ना केवल भारत में बल्की सारी दुनिया में एक विशेष स्थान कायम किया और सभी का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है ,इसी प्रकार से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाक्टर रमण सिंह जी भी बधाई की पात्र हैं उनके भी कुशल नेतृत्व ने ये साबित कर दिखाया है की भारतीय जनता पार्टी ही एक मात्र पार्टी है जिसके शासन में जनता राहत की साँस ले सकती है वो चाहे भ्रष्टाचार की बात हो या महंगाई की या सुरक्षा की देश हित में जनता २०१४ में लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इतनी सीटें ज़रूर जिताएगी की वो केंद्र में अपनी सरकार बना सके

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