कुलदीप सिंह राघव

देश के विभिन राज्यों की जो आज दयनीय स्थिति है मुझे लगता है गुजरात उन सभी राज्यों के लिए रोल मॉडल हो सकता है। गुजरात का अति प्रभावशाली विकास देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड सहित लगभग सभी राज्यों में विकास की रफ्तार काफी धीमी है। उत्तर प्रदेश तो हमेशा केंद्र से मदद न मिलने का राग अलापता रहता है। गुजरात की विकास दर अन्य राज्यों ही अपेक्षा काफी अधिक है। और इस प्रशंसनीय विकास के लिए गुजरात ही इकलौता प्रदेश है जो केंद्र से मदद की गुहार नहीं लगाता है। गुजरात आज जो भी है वो अपने बलबूते पर है।

 

बीते पंद्रह अगस्त को गुजरात के मुख्यमंत्री भाई नरेंद्र मोदी ने गुजरात को जो तोहफा दिया उससे पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया दंग रह गई। मोदी ने अहमदाबाद शहर के बीचों बीच साबरमती नदी के तट पर सात किलोमीटर लंबे वाक-वे और वाटर स्पोर्टस एक्टिविटी का लोकार्पण किया। वास्तव में गुजरात के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है। साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्‍ट के तहत गांधी ब्रिज से लेकर वासणा बैराज तक सात किलोमीटर लंबा वाक और लोअर प्रोमेनाड का लोकार्पण कर मोदी ने सारी दुनिया को गुजरात का लोहा मनवा दिया। इस वाक वे की खासियत यह है कि इसे दुनिया की टाप एडवाइजरी फर्म (केपीएमजी) ने विश्व के सौ टाप इनोवेटिव प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया है। इसी प्रोजेक्ट के लिए अहमदाबाद म्युनिसिपल बोर्ड को एचयूडीसीओ नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा 2006 में इसे प्रधानमंत्री पुरस्कार भी मिल चुका है।

 

इस खास प्रोजेक्ट के अलावा गुजरात में न जाने कितनी एसी पहल हैं जिनका पूरी दुनिया में नाम है। विकास के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात का तोड नहीं है।

 

गुजरात में सडक से लेकर शौचालय तक सभी उत्तम विकास का उदाहरण हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि केंद्र सरकार को गुजरात का विकास नजर नहीं आ रहा है। आज सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मोदी की खूब तारीफ हो रही है। लोग चाहते हैं कि कोई एसा व्यक्ति देश की कमान संभाले जो विकास की साबरमती को गंगा से जोड़े।

 

अभी हाल ही में भाजपा को विदा कह गए गुजरात के नेता केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन के नाम से नई पार्टी बना ली है। मेरी समझ से परे यह है कि इतने विकसित राज्य में केशुभाई और क्या परिवर्तन चाहते हैं। वास्तव में ये मोदी की प्रतिष्ठा के प्रति बौखलाहट है।

 

मुझे यह कहने में बिल्कुल भी गुरेज नहीं है कि मोदी की प्रतिष्ठा से केंद्र सरकार तो बौखलाई हुई है ही लेकिन भाजपा के नेता भी इससे चिंतित हैं। कहीं एसा न हो कि जनता की डिमांड पर मोदी को ही कुर्सी परोसनी पड जाए। दो दिन पहले टीवी पर एक चर्चा सुन रहा था। नीचे ब्रेक्रिंग चल रही थी कि अगला चुनाव मोदी बनाम राहुल गांधी हो सकता है। सारा देश जानता है कि राहुल मोदी के आगे कहीं नहीं टिकते हैं। यदि केंद्र सरकार मूर्खता भरा यह कदम उठाती है तो यह उसकी सबसे बडी भूल होगी। अगर भारतीय जनता पार्टी ने मोदी को पीएम की कुर्सी के लिए प्रोजेक्ट किया तो दो बार से सत्ता से दूर भाजपा स्पष्ट बहुमत से सत्ता में आ सकती है।

 

चुंकि आज सारा देश मंहगाई , भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याओं से त्रस्त है। इसलिए देश हित में यही होना चाहिए।

 

1 thought on “मोदी फक्टर….

  1. “”””””””””””””””निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय””””””””””””अटल चुनौती अखिल विश्व को भला बुरा चाहे जो मानें …डटें हुए हैं राष्ट्रधर्म पर विपदाओं में सीना ताने ,,,नहीं विरोधक रोक सकेंगे ,,निंदक होवेंगे अनुगामी ..जन-जन इसकी वृद्धि करेगा ,,इसकी गति ना थमेगी थामे ,,,~~परशुरामश्च हरनौत ,नालन्दा

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