लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under लेख.


यह पतन की पराकाष्ठा है। पश्चिमी सभ्यता भारतीय जीवन-मूल्यों को लीलने में जुटा हुआ है। भारतीय खान-पान, वेश-भूषा, भाषा, रहन-सहन, जीवन-दर्शन इन सब पर पाश्चात्य प्रवृति हावी होती जा रही है। हम नकलची होते जा रहे हैं। हम अपना वैशिष्टय भूलते जा रहे हैं। हम स्व-विस्मृति के कगार पर हैं। :कन्या भ्रूण हत्या परमात्मा की सृष्टि से खिलवाड़ या कुछ और….भी क्या आज भारत वर्ष में बेटियों की आबरू  सुरक्षित है जबकि हमारे देश मे हर तीन मिनट मे एक नारी से बलात्कार होता है,..पुलिस भी नही छोड़ती है थानों में. क्या हम भारतीयों को देश के भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों, संत्रियों, अधिकारिओ ,कर्मचारियों, नेताओ द्वारा पाले जा रहे गुंडों आतंकवादीयो की आय्याशी के लिए बेटियो को जन्म देना चाहिए? आज जवान बेटी की मां-बाप से पूछो कि उन्हें नींद क्यों नहीं आती है. एक तो घर की इज़्ज़त की लूटने की चिंता ..द ूसरी शादी के लिए दहेज की चिंता क्योकि महँगाई आसमान छू रही है जिसकी मार केवल मध्यम एवम् ग़रीबों पर ही पड़ रही है. अमीरो, भ्रष्ट नेताओं,मंत्रियों, संतरियों अधिकारियों, असामाजिक तत्वों और इनके नाते दारो को कोई फ़र्क नही पड़ता ..इनकी बहू बेटी पर हाथ डालने से पहले लोग हज़ार बार सोचते है…दहेज के लिए हराम की कमाई भरपूर है….इसलिए लोग बेटिया पैदा करने से डरते है ,इन्हे बेटे का मोह नही .. ब ेटी से प्यार है……..

हमारे देश में बेटे के मोह के चलते हर साल लाखों बच्चियों की इस दुनिया में आने से पहले ही हत्या कर दी जाती है। यह धारणा पुरानी और ग़लत है ,आज जो भ्रूण हत्याए हो रही है उसके पिछे के कारण को सरकार और समाज देखना नही चाहता है | वास्तविकता यह है की आज़ादी के बाद से -दो ही चीज़ो के भाव बढ़े है (१) ज़मीनो के (२) कमीनो के और दो ही चीज़ो के भाव कम हुए है (१) हसीनो के (२) पसिनो के , ग़रीब की लुगाई पूरे गाव की भोज़ाई| आज के परिवेश मे भारतीयो को दो डर ही बेटी को जन्म देने से रोकते है – (१) भारतीय संस्कृति मे पाश्चात्य नंगी संस्कृति का सरकार और समाज द्वारा समावेश कर दिया गया है ,बड़े बड़े सभ्य घरो की बेटीया टीवी,सिनेमा इंटरनेट पर….VASTRAHEEN हो रही है जिसके परिणाम स्वरूप समाज की बहू बेटियो की इज़्ज़त रोज लूट रही है ,हर तीन मिनट मे एक भारतीय नारी से बलात्कार होता है | क्या हम भारतीय अपने घर की इज़्जत को लूटा ने के लिए कन्या को जन्म दे ? सरकार AUR SAMAJ जवाब दे…

2 Responses to “कन्या भ्रूण हत्या”

  1. Ram narayan suthar

    सरकार जनहित में नहीं बल्कि अपने हित के अनुसार चल रही है उसी का परिणाम अजन्मी कन्याओ को भुगतना पड़ रहा है…………..
    …………………………..अफ़सोस की शिक्षित समाज में भूर्ण हत्या के आंकड़े अशिक्षित से ज्यादा है

    Reply
  2. sunil patel

    बड़ी ज्वलंत समस्या है. सरकार कुछ करने की स्तिथि में नहीं है और समाज कुछ करना नहीं चाहता है क्योंकि सरकार में आधे से ज्यादा आपराधि बैठे है और समाज हमसे बना है.
    दो रस्ते हो सके है :
    * पहला – हम अपने परिवार में ऐसा नहीं होने देंगे.
    * दूसरा – हमारे घर, परिवार, आस पड़ोस, रिश्तेदार, समाज में कोई ऐसा करता है तो उसका बहिस्कार (कम से कम व्यक्तिगत रूप से) करने का साहस करे.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *