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    Homeसाहित्‍यकवितासृष्टि के आरंभ से हम कहांतक गुजरे

    सृष्टि के आरंभ से हम कहांतक गुजरे

    —विनय कुमार विनायक
    सृष्टि के आरम्भ से!
    वैदिक कर्मकाण्डी ब्राह्मण
    योग ज्ञानी क्षत्रिय बने
    ऋग्वेद पुरुषसुक्त कहता
    ब्रह्मा के मुख ब्राह्मण होते,
    क्षत्रिय ब्रह्मा के बाहु!
    मुख ने श्राप दिया बाहु को,
    बाहु ने मुख को दंड!
    मुख में राम बगल में परशु,
    बाहु बना सहस्त्रबाहु!
    परशुराम और सहस्त्रार्जुन में
    युद्ध चला कई पुश्त!
    मुख ने तोड़ दिया भुज दंड!
    ब्राह्मण ब्राह्मण ही रहा,
    क्षत्रिय होने लगा श्रमण!
    श्रषभ देव से महावीर तक
    चौबीस तीर्थंकर और बुद्ध,
    सभी क्षत्रिय थे श्रमण!
    ब्राह्मण के कर्मकांड यज्ञ से,
    बहुत बढ़ी थी पशु हिंसा!
    हिंसक जो थे बने अहिंसक,
    गो द्विज हितकारी राम थे!
    कृष्ण पशु बलि विरोधी,
    जिन, बुद्ध अहिंसावाद के
    अवतारी भगवान थे!
    ब्राह्मण ब्राह्मण ही रहे,
    क्षत्रिय श्रमण हो गए!
    ब्राह्मण भारत में रहे
    श्रमण विश्व में फैल गए!
    ब्राह्मण क्षत्रिय द्वंद्व से
    क्षत्रिय बना बौद्ध, जैन
    भेदभाव से मिली मुक्ति
    अहिंसावाद से मिला चैन!
    ब्राह्मण धर्म कुरीति में
    क्षत्रियों ने बदलाव किया
    जैन,बौद्ध,सिख धर्म दे
    चतुष्वर्ण को एक किया!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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