लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

Posted On by &filed under गजल, साहित्‍य.


झुकी तो हया हो गई

झुकी तो हया हो गई

उठी तो दुआ हो गई।

बढ़ी इतनी दीवानगी

मुहब्बत सजा हो गई।

तुम्हारे बिना जिंदगी

बड़ी बेमज़ा हो गई।

अजाब मुस्कराहट तेरी

सरापा कज़ा हो गई।

हुई तुमसे क्या दोस्ती

ये दुनिया खफा हो गई।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *