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    कांग्रेस में वापसी के लिए व्याकुल दिखने लगे कांग्रेस से आजाद हुए गुलाम नबी!

    (लिमटी खरे)

    कांग्रेस में जी 23 के प्रमुख सदस्य रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद भले ही कांग्रेस से त्यागपत्र देकर अपनी पार्टी बनाने की कवायद कर चुके हों, पर आज भी उनकी आत्मा कांग्रेस में ही बसती प्रतीत हो रही है। गुलाम नबी आजाद ने कुछ माह पूर्व कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था, और उसके बाद 26 सितंबर को उनके द्वारा डेमेक्रेटिक आजाद पार्टी का गठन किया गया था।

    गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते थे। बाद में कांग्रेस के अंदर जी 23 नामक अघोषित संगठन के वे सदस्य बने और उनके द्वारा राहुल गांधी की मुखालफत जमकर की गई। कुछ महीनों पहले गुलाम नबी आजाद जब कांग्रेस से ‘आजाद‘ हुए थे तब उनके द्वारा पार्टी की रीति नीति और राहुल गांधी के बारे में जमकर हमला बोला था। गुलाम नबी आजाद के वक्तव्य मीडिया की सुर्खियां बटोरते रहे।

    हाल ही में जम्मू में एक रैली में गुलाम नबी आजाद के सुर बदले बदले ही नजर आए। इस रैली में गुलाम नबी आजाद के द्वारा अपने हालिया स्वभाव से उलट कांग्रेस की जमकर तारीफ की, या यूं कहा जाए कि कांग्रेस की शान में जमकर कशीदे पढ़े। गुलाम नबी आजाद का कहना था कि कांग्रेस ही इकलौती ऐसी पार्टी है जो भाजपा को टक्कर देने में सक्षम है। श्रोता अवाक थे कि आखिर गुलाम नबी आजाद क्या हो गया है।

    इतना ही नहीं इस रैली को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि वे चाहते हैं कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का परचम लहराए। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि आखिर कुछ माह पहले तक पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद जो कांग्रेस और राहुल गांधी को जमकर कोस रहे थे, अचानक ही उनका हृदय परिवर्तन कैसे हो गया!

    सियासी बियावान में इस बात के निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं कि आखिर गुलाम नबी आजाद के इस स्टैण्ड के पीछे का राज क्या है! गुलाम नबी आजाद के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को इस बात के संकेत भी दिए कि गुलाम नबी आजाद के द्वारा अपनी मूल पार्टी (कांग्रेस) को छोड़ने के बाद अपना भविष्य तलाशने और अपने मूल विचारों को खोजने की कोशिश की होगी, पर उन्हें यह बात रह रहकर याद आ रही होगी कि जिस पार्टी की उनके द्वारा दशकों तक वफादारी से सेवा की, उसके खिलाफ वे कैसे बोल गए!

    सियासी हल्कों में यह बात भी जोर शोर से चल रही है कि जम्मू काश्मीर में अपने अकेले के दम पर एक क्षेत्रीय दल बनाने और हड़ताल आदि करने में गुलाम नबी आजाद को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा होगा, इसलिए उनके द्वारा सीधे सीधे यू टर्न लेने का मानस बनाया होगा।

    वहीं, गुलाम नबी आजाद के द्वारा रैली में दिए गए वक्तव्यों पर कांग्रेस के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने ऑफ द रिकार्ड चुटकी लेते हुए कहा कि गुलाम नबी आजाद दरअसल, धरा तलाश कर रहे हैं जो उन्हें कांग्रेस के बिना संभव नहीं दिख रहा है, यही कारण है कि वे कांग्रेस में वापसी के लिए व्याकुल हो रहे हैं!

    लिमटी खरे
    लिमटी खरेhttps://limtykhare.blogspot.com
    हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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