“हर घर तिरंगा – हर घर शास्त्र – हर घर शस्त्र”

यह अत्यंत सुखद है कि स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ पर “अमृत महोत्सव” के नाम पर अनेक स्थानों पर भव्य समारोह एवं सम्मेलन आदि आयोजित किए जा रहे हैं l देश के कोने-कोने में  “राष्ट्रीय ध्वज” को “हर घर तिरंगा ” फहराने का उत्साहवर्धक अभियान चलाया जा रहा है l चारों ओर घर-घर,गली-गली,व्यापारिक संस्थानों, विद्यालयों, शासकीय कार्यालयों एवं छोटे-बड़े  वाहनों आदि में राष्ट्रीय स्वाभिमान और चेतना के प्रतीक तिरंगे का ससम्मान ध्वज लगाया जा रहा है l 

स्वतंत्र भारत का यह “अमृत महोत्सव” बच्चों, युवाओं, प्रौढ़ो सहित हमारे वृद्धजनों में भी राष्ट्र के प्रति एक विशेष प्रेम और भक्ति का संचार करने का एक अद्भुत माध्यम बन गया है l सामुहिक चेतनायुक्त ऐसे अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम राष्ट्र को सशक्त बनाने में भी विशेष भूमिका निभा सकते हैं l

इसी संदर्भ में है हम सबको इससे प्रेरित होकर ऐसे अभियान चलाने का साहस करना चाहिए जो बढ़ते हुए इस्लामिक जिहाद, ईसाईयों के षड्यंत्र, नक्सलवाद, मार्क्सवाद, भ्रष्टाचार एवं टुकड़े-टुकड़े गैंग सहित सभी भारत विरोधी शक्तियों की वास्तविकता को उजागर करके उनका प्रबल विरोध कर सकें। इसीलिए यह समझना भी आवश्यक है  कि आज अनेक अनुकूल स्थितियों के होते हुए भी विपरीत परिस्थितियों का निर्माण निरन्तर कैसे और क्यों बनाया जा रहा है ? विदेशी और देशी षडयंत्रकारी सतत् देश को अनेक प्रकार के चक्रव्यूहों में बांधने का बारम्बार प्रयास कैसे और क्यों कर पा रहे हैं ?

क्या हमें इस संकट से पार पाने के लिए यह विचार नहीं करना चाहिए कि आज जब राष्ट्र स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा हैं तो भी राष्ट्र की अखंडता एवं सम्प्रभुता की रक्षार्थ सतर्क एवं सशक्त रहने का आह्वान करने वाले आक्रामक नेतृत्व का अभाव क्यों बना हुआ है ? जब हम सब एक प्रकार से दृढ़ प्रतिज्ञ है कि हम अपने महान भारतवर्ष को विश्व गुरू के सिंहासन पर पुनः सुशोभित करने की सामर्थ्य रखते हैं तो फिर उसके लिए हमें समर्पण,सक्षम,दूरदर्शी एवं आक्रामक व्यक्तित्व वाले नेतृत्व की आवश्यकता है l

अतः आज देश को एक ऐसा विशाल नेतृत्व चाहिए जो “हम भारत के नागरिकों ” में राष्ट्र रक्षार्थ शत्रु बोध जगाये और देश विरोधी षड्यंत्रों को विफल करने के लिए “हर घर तिरंगा”  अभियान के समान “हर घर शास्त्र और हर घर शस्त्र” के अभियान का शुभारंभ करके हमारी भीरुता और अकर्मण्यता को दूर करके हमें शूरवीर बना सकें l

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