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    कहीं योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता खलने तो नहीं लगी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को!

    लिमटी खरे

    भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के उपरांत दूसरी पंक्ति में जिन नेताओं का शुमार है उसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा का नाम सहज ही लिया जाने लगा है। इसके पहले रमन सिंह भी इस फेहरिस्त का हिस्सा हुआ करते थे, किन्तु कुछ समय से रमन सिंह पूरी तरह मौन ही साधे हुए हैं, जिसके कारण अब वे इस दौड़ से हट चुके हैं।

    देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्रित्व काल बहुत ज्यादा विवादित नहीं रहा है। योगी आदित्यनाथ बहुत ही सधे कदमों से आगे बढ़ रहे हैं। सियासी बियावान में इस तरह की चर्चांए भी चलने लगी हैं कि नरेंद्र मोदी के बाद पीएम मेटेरियल अगर कोई है तो वह योगी आदित्यनाथ ही हैं। योगी आदित्यनाथ के हर कदम पर सभी की नजरें रहतीं हैं। उनके वक्तव्यों पर भी लोग कान लगाए बैठे दिखाई देते हैं।

    असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के हालिया कदमताल को देखकर यह लगने लगा है कि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौति देने का मानस बना चुके हैं। हेमंत बिस्वा सरमा पिछले दिनों अनेक बार अजीबो गरीब बयान भी दे चुके हैं। उनके इस तरह के बिना सिर पैर वाले बयानों से उन्हें कितना पालिटिकल माईलेज मिल रहा होगा, यह कहना तो मुश्किल है पर इससे वे मीडिया की सुर्खियों में जरूर बने रह रहे हैं।

    हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के द्वारा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही राहुल गांधी की बढ़ी हुई दाढ़ी वाली शक्ल की तुलना सद्दाम हुसैन से कर दी तो लोग इस पर भड़क उठे। देखा जाए तो सियासी आरोप प्रत्यारोप में भाषा का संयम रखना बहुत ही जरूरी होता है। बहुत सारे लोग सुर्खियां बटोरने के लिए अनाप शनाप, अनर्गल और स्तरहीन वक्तव्य दे दिया करते हैं, बाद में जब वे ट्रोल होते हैं तब उन्हें समझ में आता है कि वे गलति कर बैठे हैं। कांग्रेस ने भी हेमंत बिस्वा सरमा को भाषा की मर्यादा रखने की नसीहत दे डाली है।

    भाजपा मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि दरअसल, योगी आदित्यनाथ के बढ़ते कद से वरिष्ठ नेताओं की पेशानी पर पसीने की बूंदें छलकती दिख रही हैं। योगी आदित्यनाथ की मांग सबसे ज्यादा चुनावी राज्यों में हो रही है, चाहे चुनाव नार्थ ईस्ट के राज्यों का हो, केरल का या कर्नाटक का। इतना ही नहीं गुजरात जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह का गृहराज्य है वहां भी योगी आदित्यनाथ की सभाओं की मांग सबसे ज्यादा ही रही है।

    नपे तुले कदमों से बढ़ने वाले योगी आदित्यनाथ कहीं बड़े नेताओं के लिए गले की फांस न बन जाएं, इसलिए अब योगी आदित्यनाथ के समकक्ष किसी नेता को खड़ा करने की जद्दोजदह तेज हो गई है। इसी बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा भी मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संकेत देकर इस हवा को बल दे दिया है कि योगी आदित्यनाथ के समकक्ष वे भी खड़े हो सकते हैं। कहीं न कहीं इस तरह की कवायद के पीछे योगी आदित्यनाथ के समकक्ष कुछ नेताओं को लाने की तैयारियां अगर हो रही हों तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए 

    लिमटी खरे
    लिमटी खरेhttps://limtykhare.blogspot.com
    हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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