होशंगाबद की हर्षिता की कामयाबी आसमान जैसी उंची है

विवेक कुमार पाठक
स्वतंत्र पत्रकार
ये बेटी भले की 16 साल की है मगर उसकी कामयाबी का कद आसमान छू रहा है। मप्र की हर्षिता तोमर ने सेलिंग में प्रदेश का झंडा बुलंद कर दिया। होशंगाबाद की यह दुबली पतली बेटी जर्काता में सिर्फ सूबे ही नहीं देश की गौरव बनी है। हर्षिता ने एशियन गेम्स की सेलिंग र्स्पधा में कांस्य पदक हांसिल कर मशहूर सेठानी घाट वाले शहर होशंगाबाद को विश्व पटल पर ला लिया है।
नर्मदा नगरी किनारे बसा बड़े विकास से दूर अगर होशंगाबाद की बेटी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचती है तो ये हर्षिता की जीतोड़ मेहनत का नतीजा है। ये हर्षिता के हौंसलों की उड़ान है जिसे उसके परिवार ने हवा दी है। 
इस उड़ान को बरकरार रखने और प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश की खेल प्रेमी मंत्री यशोधराराजे सिंधिया भी बधाई पा रही हैं।
निसंदेह वे बधाई की हकदार हैं और उन्हें बधाई अपने मप्र के नागरिकों से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक से मिल रही हैं।
उनके टीमवर्क के चलते इस बार मध्यप्रदेश देश के खेल नक्शे पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
मप्र में अगर 16 साल की कम उमर में ही खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पा रहे हैं तो उसके लिए खेल विभाग के वर्तमान प्रशिक्षकों, अफसरों, खिलाड़ियों को टीम वर्क के लिए एक मंच पर लाने वाली यशोधराराजे सिंधिया को साधुवाद।
अच्छा खिलाड़ी वो वृक्ष है जिसकी पौध बचपन में ही लगाना होती है।
मप्र में जूनियर र्स्पधाओं में छोटी उम्र के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना उन्हें ब्लॉक से जिले, जिले से संभाग, संभाग से प्रदेश व देश की खेल स्पर्धाओं तक पहुंचने का अवसर दिलाना यशोधराराजे की जमीनी मेहनत है।
उनके कार्यकाल में खिलाड़ियों को सुविधाएं मिली हैं और ये सुविधाएं उन आम परिवारों की प्रतिभाओं के लिए वरदान साबित हुई हैं जो अब तक संसाधनों के कारण पिछड़ जाते थे।
छोटे शहरों के बच्चे प्रदेश की खेल अकादमियों में अपनी मेहनत के बल पर चुने जा रहे हैं तो इससे मप्र में खेल जगत में आगे बढ़ने का एक पारदर्शी वातावरण  दिख रहा है।
इससे सामान्य परिवारों ने भी अपने खिलाड़ी बच्चों को नौकरी में धकेलने की जगह खेल में नाम कमाने भेजना शुरु किया है।
इस माइंडसेट को चेंज करने में खेल मंत्री यशोधराराजे सिंधिया की अगुवाई वाली खेल अकादमियां और उनके प्रशिक्षकों की मेहनत सफल हुई है।
सूबे के होशंगाबाद जैसे छोटे शहर की हर्षिता का एशियाई खेलों में कांस्य पदक मिलना इसी बदलाव की उजली तस्वीर है।
16 साल की हर्षिता की यह एकमात्र बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की र्स्पधाओं में तीन सवर्ण सहित एक कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं।
मध्यप्रदेश सेलिंग अकादमी की किशोर खिलाड़ी हर्षिता तोमर ने अपनी मेहनत से प्रदेश के लाखों खिलाड़ियों को देश दुनिया में नाम कमाने प्रेरित किया है।
प्रदेश की खेल मंत्री ने इस मौके पर यह वादा करके अच्छा संदेश दिया है कि इन शानदार सफलताओं की निरंतरता बनाए रखने हमारे खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण दिलाने में हम और नई उर्जा के साथ काम करेंगे।
खिलाड़ियों की उपलब्धियां और खेल मंत्री का प्रोत्साहन मप्र के खेलजगत के लिए फीलगुड है

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