हठयोग पर ठिठका क्रिकेट…

अहम बात यह है कि अगर श्रृंखला रद्द होती है कि तो मामला बीसीसीआइ से हटकर लोढ़ा समिति की तरफ आ जाएगा कि सीरीज उनकी वजह से नहीं हो सकी.. जिसके बाद टकराव का यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल को प्रभावित करेगा। इस एक फैसले से सिर्फ क्रिकेट या किसी क्रिकेट बोर्ड की नहीं बल्कि भारत की बदनामी होगी।

bcciव्यवस्थाओं में बदलाव की सिफारिशों और बिना रोकटोक काम करने की स्वतंत्रता.. इन दो मनोदशा के बीच आज क्रिकेट उस दोराहे पर खड़ा है, जहां या तो व्यक्ति की हठधर्मिता को स्थान मिलेगा या फिर क्रिकेट को। और वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से खुद को सही ठहराने की होड़ में क्रिकेट यानि जेंटलमेन्स गेम कहीं पीछे छूट गया है।
क्रिकेट में बेतरतीब तरीके से पैसे के प्रवाह और व्यक्ति विशेष को अत्यधिक अधिकार होने जैसे मुद्दे को लेकर जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने खेल के बिगड़ते स्वरूप को सुधारने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए समिति द्वारा सिफारिशों की खेप भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को भेजा गया.. उनमें कुछ पर क्रिकेट बोर्ड सहमत भी है। मगर सभी वित्तीय लेन-देन के लिए समिति को जानकारी देने जैसी कुछ सिफारिशें बोर्ड के गले नहीं उतर रही। इसी बात को लेकर बीसीसीआई का विरोध प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप में सामने आ रहा है। बोर्ड द्वारा समिति की सिफारिशों का प्रत्यक्ष विरोध करने पर उच्चतम न्यायालय की तरफ से डांट भी पड़ी। साथ ही यह निर्देश दिया गया अगर क्रिकेट बोर्ड सिफारिशों के मुताबिक काम नहीं करता तो उसके सभी बैंक खातें सीज कर दिए जायेंगे। ऐसे में बोर्ड भी अब अधिकार छिनता देख, नियमों के दायरे में ही दाव खेल रहा है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारत-इंग्लैंड सीरिज के लिए इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) को अपना खर्च खुद वहन करने की बात कह कर लोढ़ा समिति के खिलाफ अपना सधा हुआ दाव खेला है। दरअसल समिति की सिफारिश के अनुसार, जब तक बीसीसीआई लोढ़ी समिति के समक्ष अपना हलफनामान नहीं रखता और सिफारिशों की नहीं मानता वह पैसों को लेकर कोई फैसला नहीं कर सकता। ऐसे में भारत-इंग्लैंड सीरिज खतरे में पड़ सकती है, जिसके लिए सीधे तौर पर लोढ़ा समिति की सिफारिशें ही जिम्मेदार होंगी।
बतादें कि लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू किए बगैर बीसीसीआइ कोई वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकता है। इसी वजह से बोर्ड सचिव अजय शिर्के ने ईसीबी को ईमेल के जरिए बता दिया है कि दौरे के लिए उनके साथ एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं हो सकेगा। ऐसे में भारत पहुंच चुकी इंग्लैंड की टीम को यहां रहने-ठहरने का खर्च अपनी जेब से देना होगा। इससे पहले बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति को बताया था कि इंग्लैंड दौरे के लिए ईसीबी के साथ एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर दस्तखत नहीं हुए हैं। समिति अगर इजाजत दे तो इस दौरे के लिए पैसा रिलीज किया जाए। जिसपर लोढ़ा समिति के सचिव गोपाल शंकर नारायण ने जवाब दिया कि समिति का इंग्लैंड दौरे से कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल यह मामला उच्चतम न्यायालय के अधीन है तो उसके निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
दूसरी तरफ, बीसीसीआई भी किसी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है। बोर्ड अब लोढ़ा समिति से आर-पार की लड़ाई के मूड में है.. नतीजतन वर्तमान सीरीज की बलि भी दी जा सकती है। बीसीसीआई की तरफ से साफ किया गया है कि ईसीबी को वर्तमान हालात की जानकारी दी गयी है, अगर वह वह भुगतान करने के लिए तैयार होते हैं तो सीरीज होगी.. नहीं तो लोढ़ा समिति जो चाहे वह करे। अहम बात यह है कि अगर श्रृंखला रद्द होती है कि तो मामला बीसीसीआइ से हटकर लोढ़ा समिति की तरफ आ जाएगा कि सीरीज उनकी वजह से नहीं हो सकी.. जिसके बाद टकराव का यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल को प्रभावित करेगा। इस एक फैसले से सिर्फ क्रिकेट या किसी क्रिकेट बोर्ड की नहीं बल्कि भारत की बदनामी होगी।
खैर परिणाम जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि क्रिकेट जरूर प्रभावित होगा। क्योंकि जब भी दो धुरी में हठ की लड़ाई हुई है एक धुरी को हारना पड़ता ही है.. साथ ही जिस विषय पर टकराव बना उसे भी कहीं ना कहीं आघात पहुंचता है। ऐसे में क्रिकेट को लेकर जो आम लोगों में रूझान है, वह भी घटेगा या घट सकता है। मगर सवाल अब भी यही है कि खेल को व्यक्ति वर्चस्व से अलग करने तथा आमदनी-खर्च के ब्यौरों का लेखा सार्वजनिक करने की बात को अहम से क्यों जोड़ा जा रहा है। आखिर एक खेल में पैसे को लेकर इतनी खींचतान क्यों है… तब सीधा का जवाब सामने आता है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के रूप में बीसीसीआई के हाथ लगा कुबेर का खजाना ही सभी समस्याओं की जड़ है। इस पैसों से जहां फिक्सिंग का भूत सामने आया.. तो वहीं शक्तिशाली अधिकारी द्वारा अपने चहेते फ्रेंचाइजी को आर्थिक सहायता पहुंचाने का भी आरोप लगा। उस पर किसी लीग से ज्यादा पैसे मिलने पर खिलाड़ियों में राष्ट्रीय स्तर पर खेल की भावना भी प्रभावित ना हो.. इन सभी बातों को लेकर लोढ़ा समिति ने कमर कस रखी है, जिसमें उच्चतम न्यायालय का उसे साथ मिल रहा है। जबकि बीसीसीआई समिति की सिफारिशों में फंसने के बाद अब लूप होल को तलाशने का काम कर रही है। इस तरह इंग्लैंड सीरिज उसी लूप होल्स में से एक है, जिसका क्रिकेट बोर्ड पूरी दृढ़ता से साथ उपयोग कर रही है।

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