स्वस्थ यौन संबंध और आपका परिवार

अनाल अनूपआज भी भारत में सेक्स को वर्जना की तरह देखा जाता है। जबकि हमारे देश में खजुराहो से लेकर वात्सायन के कामसूत्र जैसी कृतियों में सेक्स के हर पहलू पर रोशनी डाली गई है। स्वस्थ व सुखी जीवन के लिए संयमित सेक्स को उपयोगी बताया गया है। सेक्स का स्थान जीवन में पहला तो नहीं कह सकते हैं। सेक्स शरीर की एक जरुरत है और साथ ही इंसान के जीवन चक्र को जारी रखने वाला जरिया भी। आम जीवन में सेक्स को लेकर बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं। जानकारी के अभाव में, परिस्थितियों के कारण या फिर मनोविकार के कारण इंसान बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य करके सामाजिक बहिष्कार का पात्र बन जाता है। बलात्कार आज भारत में सबसे ज्वलंत मुद्दा है। बावजूद इसके इस समस्या के तह में जाने का कभी प्रयास नहीं किया गया है।
आज भी स्कूलों व कॉलेजों में सेक्स शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसी-किसी स्कूल में सेक्स शिक्षा को लागू किया गया है। किंतु उसको अमलीजामा अभी तक कागजों पर पहनाया जा रहा है। आमतौर पर सेक्स को घर में गुनाह के तौर पर देखा जाता है। माता-पिता अपने बच्चों को यौन संबंधित जानकारी देने से परहेज करते हैं। हालांकि इंसान की फितरत वर्जित माने जाने वाले विषयों के बारे में जानकारी हासिल करने की जिज्ञासा सबसे उत्कट होती है। मानसिक स्तर पर वैचारिक मतांतर की वजह से बच्चा अश्‍लील साहित्य पढ़ने का या साइबर सेक्स का आदी हो जाता है। इस क्रम में कुछ बच्चे मनोविकृति के शिकार हो जाते हैं। मनोविकार से ग्रसित बच्चे बाद में जाकर बलात्कार जैसे क्रूर व घिनौने जुर्म को अंजाम देते हैं। दरअसल सामाजिक सोच में टकराव के कारण युवक व युवतियों के बीच सेक्स के लिए आपसी सहमति बन ही नहीं पाती है। वैसे अब दूसरी वजहों से सहमति के इक्का-दुक्का मामले हमारे सामने आ रहे हैं। गाँवों में हालत और भी खराब हैं। वहाँ गाली या अपशब्द के आदान-प्रदान के दरम्यान पूरे कामसूत्र की झांकी आपको मिल सकती है। परन्तु उस कामसूत्र में मनोविकृति ज्यादा होती है। इसका दूसरा पहलू यह है कि गाँवों में नारी को महज वस्तु माना जाता है। आपसी दुश्‍मनी निकालने के लिए भी औरत को निशाना बनाया जाता है।
कामसूत्र
प्राचीन भारत के महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक महर्षि वात्स्यायन  ने कामसूत्र में न केवल दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है।  अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान कौटिल्य का है, काम के क्षेत्र में वही स्थान महर्षि वात्स्यायन का है। महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की प्रथम यौन संहिता है  खजुराहो से लेकर वात्सायन के कामसूत्र जैसी कृतियों में सेक्स के हर पहलू पर रोशनी डाली गई है। स्वस्थ व सुखी जीवन के लिए संयमित सेक्स को उपयोगी बताया गया है। सेक्स शरीर की एक जरुरत है और साथ ही इंसान के जीवन चक्र को जारी रखने वाला जरिया भी। आम जीवन में सेक्स को लेकर बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं। जानकारी के अभाव में, परिस्थितियों के कारण या फिर मनोविकार के कारण इंसान बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य करके सामाजिक बहिष्कार का पात्र बन जाता है।  काम एक अत्यन्त शक्तिशाली मूल प्रवृत्ति है काम ही जीवन का संपदन, जीवन का उद्गम, उसके अस्तित्व तथा उसकी गतिशीलता तथा नर-नारी के पारस्परिक अकर्षण एवं सम्मोहन का रहस्य है। वास्तव में काम ही विवाह एवं दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला है। काम का सम्मोहन ही नर-नारी को वैवाहिक-सूत्र में आबद्ध करता है। अतः विवाहित जीवन में आनन्द की निरन्तर रस-वर्षा करते रहना ही कामसूत्र का वास्तविक उद्देश्य है।
कामसूत्र सिर्फ सेक्स नही है…
कामसूत्र का नाम लेते ही आप चौंक जाते होंगे और अगर कोई आप से कामसूत्र पढ़ने के लिए कहें तो एक बारगी आप जरूर कतरायेंगे. लेकिन हम आपको बता दें कि कामसूत्र कोई सेक्स की किताब नहीं है, और ना ही कामशास्त्र है. हां इतना जरूर है कि जिसने कामसूत्र नहीं पढा वे इसे कामशास्त्र या सेक्स की किताब जरूर मानते है. लेकिन नहीं ये सच नहीं है.
कामसूत्र सिर्फ सेक्स की किताब नहीं है बल्कि कामसूत्र में सेक्स के अलावा व्यक्ति की जीवनशैली, पत्नी के कर्त्तव्य, गृहकला, नाट्यकला, सौंदर्यशास्त्र, चित्रकारी और वेश्याओं की जीवन शैली आदि जीवन से जुड़ी सभी की जानकारी है.
संभोग और प्रेम पर वात्स्यायन ने दुनिया का प्रथम और सर्वाधिक प्रसिद्ध दार्शनिक ग्रंथ लिखा ‘कामसूत्र’. मूलत: रतिक्रीड़ा पर आधारित इस ग्रंथ की दुनियाभर में कहीं न कहीं चर्चा होती रहती है. सात खंड के छत्तीस अध्यायों में 1250 श्लोक के इस ग्रंथ में संभोग तथा रतिक्रीड़ा के आसनों पर आखिर ऐसा क्या लिखा है जो हर काल में प्रासंगिक बने रहने की ताकत रखता है. इसके सूत्र आज भी उतने ही ताजा हैं जितने कि वात्स्यायन के काल में रहे थे.
कामसूत्र महज एक ग्रंथ अथवा कागजों का पुलिंदा मात्र नहीं है बल्कि यह रतिक्रीड़ा के अलावा गृहस्थ जीवन को सही तरीके से जीने के उपाय बताता है. वास्तव में कामसूत्र प्रेम, सौंदर्य तथा जीवन के राग की संपूर्ण किताब है.
कामसूत्र का प्रेम
कामशास्त्र या कामसूत्र में स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचना और मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझाया गया है इसीलिए यह ग्रंथ शिक्षा देता है कि प्रेम का आधार है संभोग और संभोग का आधार है प्रेम. शरीर और मन दो अलग-अगल सत्ता होने के बावजूद दोनों एक दूसरे का आधार हैं.
प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है. स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं. प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है. दो आत्माओं के एक दूसरे को देखने का कोई उपाय नहीं है. शरीर ही शरीर को देखता है. स्त्री यदि संपूर्ण तरह से स्त्रेण चित्त है और पुरुष में पौरुषत्व है तो दोनों एक-दूसरे के मोहपाश से बच नहीं सकते.कामसूत्र का सेक्सवास्तव में सेक्स या संभोग ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला है. काम के सम्मोहन के कारण ही स्त्री-पुरुष विवाह सूत्र में बँधने का तय करते हैं. अतः विवाहित जीवन में काम के आनन्द की निरन्तर अनुभूति होते रहना ही कामसूत्र का उद्देश्य है. यदि स्त्री-पुरुषों के बीच काम को लेकर उदासीनता है तो दाम्पत्य जीवन ऐसे होगा जैसे कि एक ही ट्रेन में सफर कर रहे लेकिन अगल-अलग डिब्बों में.
कामसूत्र यौन संबंधी जानकारियों का बेहतरीन खजाना है. कामसूत्र उन आसनों के लिए भी प्रसिद्ध है जिनके चित्र या मू्र्ति देखने के लिए लोग खजुराहो या अजंता-एलोरा जाते हैं या फिर चुपके से आसनों की सामग्री को बाजार से खरीदकर देखते हैं. दिमाग विकृत होता है बाजार के उस गंदे साहित्य को पढ़ने से जिसे पश्चिमी मानसिकता के चलते बेचा जाता है, लेकिन कामसूत्र या कामशास्त्र आपको उत्तेजित करने के बजाय सही ज्ञान देता है. कामसूत्र में संभोग के हर पहलू का वर्णन कर मनो-शारीरिक प्रतिक्रियाओं की जो विवेचना प्रस्तुत की है वह अद्भुत और रोमांचक है.
आज के भागदौड़ से भरे जीवन में पति-पत्नी के संबंध औपचारिक ही रह गए हैं, लेकिन कामसूत्र का ज्ञान आपके वैवाहिक जीवन को अंत तक तरोताजा बनाए रखने में सक्षम है. संभोग के आसनों से यौन सुख के साथ ही व्यायाम के लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं. बस, जरूरत है तो इसे सही रूप में समझने की.
कामसूत्र का सौंदर्यशास्त्र
नाट्य शास्त्र के प्रणेता भरत मुनि कहते हैं- संसार में जो कुछ भी शुभ, पवित्र और उज्ज्वल दर्शनीय है वह श्रृंगार रस से प्रेरित है अर्थात काम की कमनीयता है. कामसूत्र कहता है कि स्त्रियों को भी काम या जीवन की सभी कलाओं का ज्ञान होना चाहिए इसीलिए उन्होंने स्त्रियों के लिए मुख्यत: 64 कलाओं में कुछ शर्त के साथ पारंगत होने की शिक्षा दी है. स्त्री द्वारा 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त करने से ऐश्वर्य और सुख की वृद्धि होती है. पारंगत स्त्री को कामसूत्र में गणिका कहा गया है. गणिका अर्थात गुणवती या कलावती.
जिन चौंसठ कलाओं की चर्चा की गई है उनमें से ज्यादातर आज के युग अनुसार अप्रासंगिक मानी जा सकती हैं, लेकिन कुछ कलाएं आज भी प्रासंगिक हैं जैसे हर स्त्री गायन, वादन, नृत्य और चित्र में पारंगत हो सकती. अप्रासंगिक कलाएं- कल-पूर्जे बनाना स्त्रियों का काम नहीं. इंद्रजाल, बाजीकरण, हाथ की सफाई, घुड़सवारी करना, बढ़ईगिरी और तीतर, बटेर अथवा भेड़ को लड़ाने की कला तो अब बिल्कुल चलन से बाहर हो चुकी कलाएं हैं. खैर, जो भी हो कहने का आशय यह है कि कामसूत्र सिर्फ संभोग की ही शिक्षा नहीं देता यह जीवन के हर पहलुओं को छूता है.
संभोग से समाधि
ऐसा माना जाता है कि जब संभोग की चरम अवस्था होती है उस वक्त विचार खो जाते हैं. इस अमनी दशा में जो आनंद की अनुभूति होती है वह समाधि के चरम आनंद की एक झलक मात्र है. संभोग के अंतिम क्षण में होशपूर्ण रहने से ही पता चलता है कि ध्यान क्या है. निर्विचार हो जाना ही समाधि की ओर रखा गया पहला कदम है.
अत: संभोग की चर्चा से कतराना या उस पर लिखी गई श्रेष्ठ किताबों को न पढ़ना अर्थात एक विषय में अशिक्षित रह जाना है. कामशास्त्र या कामसूत्र इसलिए लिखा गया था कि लोगों में सेक्स के प्रति फैली भ्रांतियाँ दूर हों और वे इस शक्ति का अपने जीवन को सत्यम, शिवम और सुंदरम बनाने में अच्छे से उपयोग कर सकें.विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्‍स न केवल प्रेम का एक भाग है, बल्कि स्‍वस्‍थ्‍य रहने का माध्‍यम भी है। यह न केवल आपको मानसिक व शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ्‍य रखता है, बल्कि आपकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट यानी व्‍यक्तित्‍व विकास भी करता है। नियममित रूप से सेक्‍स करने वाले व्‍यक्ति तन और मन दोनों से स्‍वस्‍थ्‍य रहते हैं। जिसका सकारात्‍मक प्रभाव आपके शादी-शुदा जीवन के अलावा सामाजिक और व्‍यवसायिक जीवन पर भी पड़ता है।
व्‍यक्तित्‍व का विकास भी करता है सेक्‍स
यहां हम आपको बताएंगे कि सेक्‍स करने से आपकी पर्सनालिटी किस तरह से निखरती है। संभोग की क्रिया एक प्रकार का व्‍यायाम है। जिसे हम एरोबिक्‍स भी कह सकते हैं और यह शरीर व मस्तिष्‍क दोनों के लिए अच्‍छा होता है। सेक्‍स के दौरान खास-तौर से पेट, पैर और कमर की एक्‍सरसाइज होती है। इससे महिलाओं के शरीर का नीचला भाग सुडौल बनता है, जबकि पुरुषों को फुर्ती मिलती है। तनाव को खत्‍म करने की सबसे बेहतरीन दवा सेक्‍स है। संभोग के बाद आप न केवल आपका तनाव कम होता है, बल्कि आपके अंदर सकारात्‍मक सोच भी विकसित होती है। स्‍वस्‍थ्‍य यौन जीवन व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाता है। अध्‍ययन के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से सेक्‍स करते हैं, वे व्‍यवसायिक क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों का सामना आसानी से कर लेते हैं। हर का में मनोबल ऊंचा रहता है।स्‍वस्‍थ्‍य यौन जीवन से आपके परिवार में खुशियां आती हैं। जीवन साथी से मधुर संबंध बने रहते हैं, जिसका सकारात्‍मक प्रभाव आपके परिवार पर पड़ता है। खुश रहने की वजह से आपका चेहरा भी खिला-खिला रहता है। त्‍वचा में अलग सा निखार दिखाई देता है। खास-तौर से महिलाओं पर यह लागू होता है, क्‍योंकि जब महिलाएं किसी तनाव में नहीं रहती हैं, तो उनकी त्‍वचा ज्‍यादा खिली-खिली दिखती है।

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