हे मातु नर्मदे …..

माॅ नर्मदा से प्रार्थना***
हे मातु नर्मदे हम है तेरे तट के वासी
करूणा कर दे ऐसी, बने सभी सुखरासी।
न कोई दुखी न पीड़ा हो, ऐसी करूणा करो
न कोई भ्रमित न वेदना हो माॅ संताप हरो।। हे मातृ.. . .
तेरे अमृतमय जल की, सब पर हो अमृतमयी कृपा
न भ्रान्तियाॅ हो बाकी, सबकी कामना तू मिटा।
शीतल-स्नेह पावन जल की तू है स्वामिनी
प््रााणीमात्र को आनंदित करती हे धरागामिनी। हे मातृ . . . .
तेरी परिक्रमा से सबके ,मन की होती है एक ही दशा
समयबोध का अवसर छूटे, छाये सबपर भक्ति का नशा।
एक ही साॅचें में ढले सभी, माॅ ऐसी कृपा करो
न अभाव हो न चिंता हो, संताप सभी के हरो।हे मातृ नर्मदे . . . .
स्वार्थी रहे न कोई यहाॅ, निस्वार्थी हो सभी परिवार
ऊॅच-नीच न हो कोई, न स्वामी सेवक की दीवार
हे मातृ नर्मदे करदे, होशंगाबाद को ऐसा आलोक
ज्वलंनशील ताप सभी हर,,न रहे किसी को शोक…हे मातृ नर्मदे . . . .
कामना पीव की पूरी कर माॅ,होशंगाबाद की जय होवे
सबके घर में, सबके मन में, चिरस्थायी विजय होवे ।
तेरी कृपा के चातक है माॅ, नगर होशंगाबाद वासी
तेरे कण कण में बसे हुये है,शिवशंकर भोले अविनासी।।
हे मातृ नर्मदे हम है तेरे तट के वासी..
करूणा कर दे ऐसी बने सभी सुखराशि।।।

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