कितने आम रह गये हैं राहुल गांधी के आम आदमी के सिपाही

rahul-gandhiकांग्रेस की राजनीति में जब भी नया नेतृत्व उभरता हैं तो पार्टी में नये प्रयोग जरूर होते हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी चला रहें हैं जिसे उनके नजदीकी अक्स के नाम से पुकारते हैं। अक्स याने आम आदमी का सिपाही।देश के आम आदमी से कांग्रेसियों को जोड़ने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही हैं। इसके लिये उन्होंने युवक कांग्रेस के अमले को माध्यम बनाया हैं।
युवा राहुल गांधी ने इस योजना को बनाने में अपनी ओर से काफी सावधानियां बरतीं हैं। उन्होंने टेंलेंट हंट किया जिसमें देश के हर प्रदेश के कुछ चुनिंदा जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्षों का बाकायदा इंटरव्यू लिया गया। इसमें चयनित युवाओं पर इस महती योजना के संचालन की जवाबदारी सौंपी गयी हैं। पिछले कई सालों से कांग्रेस में यह परंपरा सी बन गयी हैं कि बिना किसी स्थानीय,क्षेत्रीय या प्रादेशिक नेता की अनुशंसा के किसी को भी कोई पद ही नहीं मिलता हैं। इसलिये कुछ विश्लेषकों का ऐसा भी मानना हैं कि टेंलेंट हंट से चयनित इन युवा नेताओं की भी पहली निष्ठा और आस्था उस नेता के प्रति ही रहेगी जिसने उसे युवा अध्यक्ष बनवाया था। इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि जिस नेता की अनुशंसा पर ये युवा नेता पदों पर आसीन हुये थे उनका कद उनकी कर्मभूमि में उनके आकाओं के आगे इतना बौना है कि बिना आका के संरक्षण के स्थानीय राजनीति करना इन युवा नेताओं के लिये संभव ही नहीं हैं। ऐसी परिस्थितियों में राहुल गांधी तक स्थानीय राजनैतिक विश्लेषण और स्थानीय कांग्रेसी नेताओं की गतिविधियों का कितना सही और निष्पक्ष चित्रण किया जाता होगा इसकी कल्पना करना कोई कठिन काम नहीं हैं।
यहां यह उल्लेख करना भी सामयिक ही होगा कि जब कांग्रेस में स्व. राजीव गांधी का आगमन हुआ था तो उन्होंने भी प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में दो दो युवा समन्वयक भेजने की योजना को लागू किया था। इसके लिये प्रदेश स्तर पर युवक कांग्रेस के माध्यम से चयनित कराये गये युवा नेताओं को बाकायदा एक महीने का राजनैतिक प्रशिक्षण देने के बाद अंर्तराज्यीय नियुक्ति की गयी थी और उस जमाने में उन्हें सात सौ पचास रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। ये युवा समन्वयक अपने प्रभार के संसदीय क्षेत्र की राजनैतिक परिस्थिति और कांग्रेसी सांसदों,विधायकों एवं अन्य नेताओं की गतिविधियों की सीघी जानकारी राजीव गांधी तक पहुंचाते थे। आला कमान तक जमीनी वास्तविकता से सीधे वाकिफ होने के लिये यह एक अति महत्वांकांक्षी एवं महत्वपूर्ण योजना थी। लेकिन कांग्रेस के घाघ नेताओं ने इस योजना में पलीता लगाने का कोई भी मौका नहीं चूका था। राजनैतिक महत्वांकांक्षाओं से लबालब इन युवा समन्वयकों को कांग्रेस के घाघ नेताओं ने सत्ता और धन की चकाचौंध से अपने कब्जे में कर लिया था। कुछ राज्यों में तो इन समन्वयकों की हत्याये भी हो गयीं थी। वहीं कुछ समन्वयकों की अच्छी भूमिका से कांग्रेस को लाभ भी मिला था।लेकिन अंततः यह योजना सत्तासुख भोगने के आदी हो चुके षड़यंत्रकारी घाघ कांग्रेसी नेताओं के कारण बंद कर देनी पड़ी थी।
इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि राहुल गांधी की सादगी और कार्यशैली के कांग्रेसी ही नहीं ब्लकि विपक्षी नेता भी प्रशंसक हैं। और तो और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तो खुले आम राहुल की गतिविधियों और कार्यों की प्रशंसा ऐन महाराष्ट्र चुनाव के समय की हैं। लेकिन राहुल गांधी के आम आदमी के सिपाही आम तौर हवायी यात्रायें और पांच सितारा हॉटलों की संस्कृति के कब्जे में आते जा रहें हैं जहां इस देश के आम आदमी की पहुंच ही नहीं है। कांग्रेस के घाघ नेताओं ने भी इनके दुरुपयोग की योजनाओं पर अमल की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राहुल गांधी तक अपने मन की बात पहुचाने तथा अपनी करनियों पर परदा डालने का यह एक सरल माध्यम इन घाघ नेताओं को मिल गया हैं। यदि इस योजना को कि्रयान्वित करने वाले कर्णधारों से रोज डायरी लिखने और उसका प्रति माह निरीक्षण करने का निर्णय लिया जाये तो नियंत्रण हो पाने की कुछ संभावनायें बन सकती हैं।
यदि इस महत्वाकांक्षी योजना के अमल में आने वाली इन विसंगतियों को रोका नहीं गया तो राहुल का आम आदमी का सिपाही देश के आम आदमी सें दिन ब दिन कोसों दूर होता जायेगा और कांग्रेस को देश के आम आदमी से जोड़ने की कल्पना धरी की धरी रह जायेगी। और आम आदमी के सिपाही बन कर राहुल के ये सिपाही सफर की ऐसी डगर पर चल पड़ेंगें जहां आम नहीं खास बना जाता ह

2 thoughts on “कितने आम रह गये हैं राहुल गांधी के आम आदमी के सिपाही

  1. आम आदमी का सिपाही यानी वह सिर्फ़ आम आदमी को ही लूटेगा, खास को नहीं… खास आदमी को लूटने के लिये “ऊपर” वालों के लिये अलग व्यवस्था है कांग्रेस में…

Leave a Reply

%d bloggers like this: