यूपी:  मोदी से किया मिशन-2019 का शंखनाद

  प्रभुनाथ शुक्ल
राजनीतिक लिहाज से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में अपने दो दिवसी दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी मिशन-2019 का आगाज कर दिया। गोरखपुर के मगहर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन बड़ी रैलियां पूर्वांचल की। जिसमें वाराणसी, मिर्जापुर के साथ सबसे अहम रैली आजगमगढ़ की रही जहां पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन दौरान सपा-बसपा को निशाने पर रखा। पूर्वांचल के पिछड़ेपन के लिए पूर्व की सपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सपा-बसपी दोस्ती पर भी तंज कसा। हलांकि रैली के बहाने मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। पीएम ने कहां कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों की पार्टी है। लेकिन उसमें भीे पुरुषों की है। तीन तलाक से जुझती महिलाओं की पीड़ा उसे कभी नहीं दिखी। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को भी आड़े हाथों लिया, उनके भाषण का अशं भी पढ़ा जिसमें वह कहते थे कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। 
मिर्जापुर में किसानों को बड़ा तोहफा दिया। 3500 करोड़ की लागत से बनी बाणसागर सिंचाई परियोजना का लोकार्पण किया। मिर्जापुर में किसान पालटिक्स की थींम को फं्रट पर रखते हुए कांग्रेस पर च नावह तीर चलाए। कांग्रेस को परिवारवादी पार्टी बताया। किसानों की बदहाली के लिए भी जिम्मेदार ठहराया। बाणसागर जैसी परियोजना में 40 साल का वक्त लगने पर भी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया। कहां की पूर्व की सरकारों ने किसानों पर सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाये और उन्हें वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया। समर्थन मूल्य बढ़ाने की आड़ में सिर्फ इश्तहारबाजी की गयी। लेकिन हमारी सरकार ने धान जैसी फसल का दोगुना समर्थन मूल्य बढ़ा कर आपको लाभ पहुंचाया। वहीं भगवान शिव की जीवंत नगरी वाराणसी यानी काशी में धर्म और जाति की डिप्लोमैसी करने से भी नहीं चूके। आधी रात काशी की सड़कों पर प्रधानमंत्री का खाफिला प्रोटोकाल को तोड़ते हुए निकला, जहां सड़क किनारे खड़े लोगों ने हर-हर महादेव का जयघोष कर उनका स्वागत किया। बीएचचू पहुंच कर शिव की पूर्जा-अर्चना की। जबकि मिर्जापुर में सोनेलाल की आड़ में पटेल जाति को भी लुभाया। क्योंकि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर की सांसद हैं। यहां पटेल आबादी अधिक है जिसकी वजह से अनुप्रिया और पटेलों को खुश करने के लिए कहा कि हमारी सरकार सोनेलाल पटेल के सपने को पूरा करेगी।
पूर्वांचल दौरे में एक बात खास तौर पर उभर कर आयी वह रही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सियासी तागत। वाराणसी, आजमगढ और मिर्जापुर की रैलियों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री मोदी के हर संबोधन में छाए रहे। जिसकी वजह से पार्टी में योगी विरोधियों का मनोबल गिर सकता है। सभी रैलियों में यूपी के विकास की चर्चा पहली पायदान पर थी। प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि योगी की अगुवाई में विकास तेजी से हो रहा है। फुलपुर, कैराना और खुद गोरखपुर उपचुनाव हारने के बाद योगी के नेतृत्व पर सवाल उठे थे। यह हवा तेजी से फैली थी की मुख्यमंत्री बदले जा सकते हैं। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में 2019 का लोकसभा चुनाव हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता योगी की अगुवाई में ही लड़ा जाएगा। इस तरह मोदी की प्री-मिशन. 2019 की परीक्षा में योगी पास हो गए हैं।काशी के कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों को मिशन-2019 का गुरुमंत्र दे गए मोदी। पूर्वांचल के इस दौरे के दौरान कैफी आजमी के आजमगढ में उन्होंने विकास के साथ जाति, काशी में धर्म और विंध्यक्षेंत्र में किसानों को साधने की सफल राजनीति की। एक्सप्रेस वे के जरिए पूर्वांचल की राजनीति की नब्ज पकड़ी।
आजमगढ़ को आखिर भाजपा ने क्यों निशाना बनाया। आजमगढ़ सीट पर समाजवादी पार्टी के भीष्म पिताम्ह मुलायम सिंह यादव का कब्जा है। इसकी मूल वजह पूर्वांचल में आजमगढ़ ही एक ऐसा इलाका है। जहां से भाजपा को 2014 में पराजय मिली थी। वैसे वाराणसी जहां प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र हैं वहीं यह पूर्वांचल का पावर का सेंटर भी है। पूर्वांचल के साथ राज्य के दूसरे हिस्सों में जहां भाजपा दूसरे नम्बर थी, उन जिलों को लक्ष्य करने का प्लान बनाया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जरिए विकास की राजनीति कर लोगों को एक सुनहला सपना दिखाया। भाजपा की निगाह यूपी के मुसलमानों और दलितों पर टिकी है। भाजपा की यह सोची समझी रणनीति है। क्योंकि यूपी के 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उन मुस्लिम गढ़ों में भगवा फहराया था जहां इनकी आबादी 60 फीसदी से भी अधिक है। खुले तौर पर मोदी टोपी पहनने से भले इनकार करते हों, यूपी के सीएम योगी गोरखपुर में हरे रंग की भेंट भले न स्वीकार करते हों। लेकिन भाजपा मिशन-2019 को फतह करने के लिए एम फ्रेंडली की नीति पर चल रही है। वह मुसलमानों के दिमाग में बने भय और भ्रम को दूर करना चाहती है। जिसकी वजह है कि 2019 में  भी तीन तलाक का मसला छाया रहेगा और विरोधियों पर भारी पड़ेगा।
राज्य में सपा-बसपा की एकता भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। क्योंकि फूलपुर, गोरखपुर के बाद कैरान उपचुनाव में उसकी बड़ी पराजय हुई है। जबकि सभी सीटें भाजपा की अति वीआईपी सीटें थी। जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केशव मौर्य और हुकूम सिंह ने जीत हासिल की थी। भाजपा के सामने अब 50 फीसदी वोट हासिल करने की बड़ी चुनौती है, यह तभी संभव होगा जब उसके साथ दलित और अल्पसंख्क खड़े होंगे। इस मिशन में वह कितना कामयाब होगी यह तो वक्त बताएगा। लेकिन पूर्वांचल में एक के बाद एक प्रधानमंत्री की रैलियां बहुत कुछ कहती हैं। दूसरी तरफ आजमगढ़ की रैली भाजपा को एम फ्रेंडली बना सकती है। मोदी के भाषण और भरोसे से मुसलमानों के दिमाग में घूसी बातें धूल सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो वह विरोधियों का किला भेदने में कामयाब होगी। जबकि पूर्वांचल उसकी चुनौती सीधे सपा-बसपा से है। बटाला हाउस कांड और अबू सलेम की वजह से आजमगढ़ की छबि को बेहद नुकसान पहुंचा है। उसकी पहचान महान उपन्यासकार राहुल सांकृत्यान, मुनि भृगु, कैफी आजमी के बजाय आतंकवाद की नर्सरी के रुप में होने लगी। 2008 में दिल्ली में हुए बटाला हाउस कांड के बाद संजरपुर से कई युवकों की गिरफतारी ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया। हलांकि आजमगढ़ तपस्वियों और मुनियों की भूमि रही है। हिंदी फिल्मों में अविस्मरणीय योगदान देने वाले कैफी आजमी साहब इसी धरती से जुड़े थे। उनकी बेटी शबाना आजमी इस वक्त हिंदुस्तान की पहचान हैं। वैसे प्रधानमंत्री इन सब बातों का उल्लेख नहीं किया। बेहद चुराई से पूर्वांचल के इस गढ़ में तीन तलाक का मसला उठाया।आजमगढ़ की आबादी तकरीबन 50 लाख हैं। जिसमें 84 हिंदू और 16 फीसदी मुसलमान हैं। जबकि राज्य में अल्पसंख्यकों की आबादी 19 फीसद है। यूपी में 22 करोड़ से अधिक की आबादी में हिंदू 16 करोड और मुस्लिम 04 करोड़ से अधिक हैं। राज्य के  21 जिले ऐसे हैं जहां मुसलमानों की आबादी 20 फीसदी से अधिक है। पूर्वांचल की अपेक्षा पश्चिमी यूपी में मुस्लिम आबादी अधिक हैं। लेकिन जातिय और दलीय विभाजन के आधार पर उत्तर प्रदेश में हिंदू जातियां बंट जाति है। यहां जातिवाद की राजनीति गैर राज्यों से अधिक मजबूत है। भाजपा तीन तलाक की आड़ में मुस्लिम महिलाओं का विभाजन एक बार फिर 2014 की तरह चाहती है। यूपी और पूर्वांचल में दलितों के साथ मुसलमानों भाजपा की तरफ झुके तो एक बा रवह फिर मिशन-2019 में कामयाब हो सकती है।

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