अभिरंजन कुमार

कल शाम को मै अपने कमरे में पढ़ रहा था कि अचानक मेरा फोन बज उठा | मै तिरछी नजरों से फोन के तरफ देखा तो मेरे कॉलेज के एक दोस्त अरीबम रमेश शर्मा (काल्पनिक नाम)का फोन था मैंने जब फोन उठाया तो उसने सीधा मुझसे यही पुछा ,क्या मै घर चला जाऊ? अचानक मेरे मन में बिजली कोंध गई कि अभी तो कॉलेज खुली है फिर ये घर क्यू जाना चाहता है ? यह सब मै सोच ही रहा था कि उसने कहा “मेरी मम्मी फोन करके कही है कि घर चले आओ|”मैंने पूछा क्यू ? उसने कहा मै पूर्वोतर का हूँ , इसलिए घर वाले डर रहे है | मैंने कहा दरों मत सब ठीक हो जायेगा ये सब तो आसाम कि बात है फिर दिल्ली में डरने कि क्या बात है ? उसने कहा कि “पूर्वोतर के लोगो को भगाया जा रहा है ” मैने कहा ये कैसे हो सकता है? मैंने तुरंत ही टीवी चालू किया तो देखा कि सच में ऐसा ही हो रहा है जो उसने बताया |

टीवी में सभी लोग डरे -डरे दिख रहे थे| आखिर क्यू ये लोग भाग रहे थे अपने गाँव के तरफ ? इन्हें क्या हुआ ? माना कि इसमे कुछ ही लोग असम के होंगे पर वहाँ से आने के बाद ये अपने घर में कैसे रह पायेंगे? क्यू कि असम में भी हिंसा दो समुदायों के बिच पहले से जरी है|जिसमे कई लोगो कि जान पहले ही जा चुकी है ,हजारो घर बर्बाद हो गये और कई लाख लोग शरणार्थी बान चुके है| दो गुटों कि मामूली झडप इतनी बड़ी हिंसा की रूप ले लेगी किसी ने यह सोचा नहीं था |दो गुटों की मामूली झडप देश के कोने -कोने में हिंसा भड़का देगी ऐसा सोचने का समय किसके पास है| उपर बाले लोग बयान देना ही काफी समझते है |

सरकार जाग नहीं पाई या ये सोच नहीं पाई कि हिंसा इतनी बड़ी रूप ले लेगी |खैर! सोचने का समय किसी नेताओ के पास नहीं है |क्यू कि सब तो एक ही तरह के है| कौन मोल ले खतरा |सत्ता किसे प्यारी नहीं लगती? क्यू पड़े इन पचडो में| पाँच साल बाद तो जीत कर आ ही जायेंगे ?

भारत में हर धर्म -सप्रदाय भाषा -जाती के लोग रहते है फिर पूर्वोतर के निवासियों को उत्तर, दक्षिण और पश्चिम से पलायन पर मजबूर क्यू है ? कई शहरों में आये दिन पूर्वोतर के लोगों के साथ कही पथराव तो कही मार-पीट कि घटना सुनाने और देखने को मिल रहा है| यह हिंसा सिर्फ चेन्नई और बंगलौर की ही नहीं कभी महाराष्ट्र तो कभी उतर प्रदेश में भी दिख जाती है | अरे शुक्र मनाओ प्रदेशों के सरकार का जो तुरंत ही स्टेशन पर जा कर पूर्वोतर के लोगो को समझा बुझाकर बापस बुलाया नहीं तो सभी पूर्वोतरी पलायन कर जाते| क्या बाकि राज्यों कि सरकार कही बड़ी घटना का इंतजार तो नहीं कर रही है कि जब होगा तो देखा जायेगा ? सरकार इस तरह हाथ पर हाथ रख कर चुप क्यू है? उसे कुछ तो कार्यवाही करनी चाहिय ? जिससे और राज्यों में इस तरह कि हिंसा न भडके और लोग भय मुक्त रह सकें | केंद्र सरकार तो इन दिनों घोटालेबाजों को पकडने में ब्यस्त है| इसीलिए शायद हिंसा के तरफ उसका ध्यान नहीं जा रहा है|

जो लोग गुजरात दंगे पर चिल्लाते है, मानवता कि दुहाई देते है ,आज वे लोग चुप क्यू है? क्या उन्हें नहीं दिख रहा है असम और पूर्वोतर के लोगो का दर्द|क्या सो रही है सरकार? लोग कहते है कि गुजरात का दंगा बहुत ही बड़ा दंगा है| अर्थार्त हिंसा का प्रतिउत्तर हिंसा से | मतलब, दंगे का जबाब दंगा से| जो ठीक नहीं है| परन्तु असम दंगो पर सरकार चुप क्यू है? क्या सरकार यह सोच रही कि जितने दाग लगेंगे हम उतने ही बढेगे , या यह सोच रही है कि “लडेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया”|

अपने एक- एक महीने का बेतन देकर बीजेपी के सांसद असम हिंसा में जल रहे लोगो के लिए पानी डालने कि कोशिश कि है |बीजेपी के तरफ से यह शुरुआत मानवता कि कदम कह सकते है|बीजेपी धन देकर पेट कि आग बुझा सकती है लेकिन दिमाग के आग को नहीं| इस मुद्दे पर सवाल कर के एक अच्छीबिपक्ष की भूमिका अदा क्यू नहीं करती| एक जिम्मेदर बिपक्ष होने का साहस तो दिखाये | शोर-शराबा तो आम आदमी भी कर लेता है |असम और पूर्वोतर के लोगो के साथ दुर्व्यवहार कही ऐसा तो नहीं लगता कि जिस तरह कश्मीर से कश्मीरी पंडित भाग गये उसी तरह से पूर्वोतर से बोडो ,नागा और कुकीज|लेकिन करे कोई भरे कोई ये क्यू ?

किसे नेता ने कहा था “हम यहाँ अली और कुली को बसायेंगे “| क्या ये उसी का परिणाम तो नहीं ? हमें ऐसा लग रहा है कि अपने ही घर में कोई हमें बेदखल कर रहा है|अगर हम कारण कि बात करे तो ; पूर्वोतर कि घटना कही सरकार कि अनदेखी तो नहीं| हिन्दुस्तानियों का हिंदुस्तान में कत्ल !किसने दिया ये अधिकार इन दरिंदों को कि भगाओ पूर्वोतर के लोगों को| भारत तो सदियों से दूसरों को शरण देता है | तब ऐसे स्थिति में हम किसके पास जाये| कोन देगा हमें शरण| यहाँ कोई भी कही रह सकता है फिर चरों दिशाओं से पूर्वोतर के साथ दुर्व्यवहार क्यू?

जिस तरह कुछ प्रदेश के आला लोग समझा-बुझाकर पूर्वोतर के लोगो को रोक रहे है उसी तरह मैंने भी अरिबम को समझा-बुझाकर रोक लिया कि देल्ही में तो विदेशी लोग भी सुरक्षित है फिर तुम तो मेरे अपने हो तुम कैसे असुरक्षित हो सकते हो|कितने ऐसे अरीबम रमेश शर्मा को सरकार या हम रोक सकते है ? आखिर हम सब को जानना और जागना होगा कि ओ भी हमारे अपने हैं |

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