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    Homeसाहित्‍यकविताआशा कैसे कर लें

    आशा कैसे कर लें

    गुड़- गुड़ हुक्का पिया शेर ने,
    मुंह से धुआं उड़ाया।
    हाथी को वन के राजा का,
    यह ढंग नहीं सुहा या ।

    उसके मुंह से छीना हुक्का,
    कसकर डांट पिलाई।
    कैसे वन के राजा हो तुम,
    तुम्हें शरम न आई।

    तम्बाकू पर सारे वन में ,
    ही प्रतिबंध लगा है।
    तुमने ही आदेश निकला,
    तुमको नहीं पता है?

    नियम बनाने वाले ही जब,
    नियम ताक पर रख दें।
    किसी और से पालन की हम,
    आशा कैसे कर लें।

    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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