लेखक परिचय

भंवर मेघवंशी

भंवर मेघवंशी

स्वतंत्र पत्रकार

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कौन से युग ,किस सदी ,

किस कालखंड में ,सहिष्णु थे आप ?

देवासुर संग्राम के समय ?

जब अमृत खुद चखा

और विष छोड़ दिया

उनके लिए ,

जो ना थे तुमसे सहमत.

दैत्य ,दानव ,असुर ,किन्नर

यक्ष ,राक्षस

क्या क्या ना कहा उनको.

वध ,मर्दन ,संहार

क्या क्या ना किया उनका .

…………………..

तब थे आप सहिष्णु ?

जब मर्यादा पुरुषोत्तम ने काट लिया था

शम्बूक का सिर .

ली थी पत्नी की चरित्र परीक्षा

और फिर भी छोड़ दी गई

गर्भवती सीता

अकेली वन प्रांतर में .

या तब ,जब

द्रोण ने दक्षिणा में कटवा दिया था

आदिवासी एकलव्य का अंगूठा .

जुएं में दांव पर लगा दी गयी थी

पांच पांच पतियों की पत्नि द्रोपदी

और टुकर टुकर देखते रहे पितामह .

……………

या तब थे आप सहिष्णु ?

जब ब्रह्मा ने बनाये थे वर्ण

रच डाली थी ऊँच नीच भरी सृष्टि.

या तब ,जब विषमता के जनक ने

लिखी थी विषैली मनुस्मृति .

जिसने औरत को सिर्फ

भोगने की वस्तु बना दिया था .

शूद्रों से छीन लिए गए थे

तमाम अधिकार .

रह गए थे उनके पास

महज़ कर्तव्य .

सेवा करना ही

उनका जीवनोद्देश्य

बन गया था .

और अछूत

धकेल दिये गए थे

गाँव के दख्खन टोलों में .

लटका दी गई थी

गले में हंडिया और पीठ पर झाड़ू

निकल सकते थे वे सिर्फ भरी दुपहरी .

ताकि उनकी छाया भी ना पड़े तुम पर .

इन्सान को अछूत बनाकर

उसकी छाया तक से परहेज़ !

नहीं थी असहिष्णुता ?

……………..

आखिर आप कब थे सहिष्णु ?

परशुराम के क्षत्रिय संहार के समय

बौद्धों के कत्लेआम के वक़्त

या महाभारत युद्ध के दौरान .

लंका में आग लगाते हुए

या खांडव वन जलाते हुये .

कुछ याद पड़ता है

आखिरी बार कब थे आप सहिष्णु ?

…………………………

अछूतों के पृथक निर्वाचन का

हक छीनते हुए ,

मुल्क के बंटवारे के समय

दंगों के दौरान ,

पंजाब ,गुजरात ,कश्मीर ,पूर्वोत्तर ,

बाबरी ,दादरी ,कुम्हेर ,जहानाबाद

डांगावास और झज्जर

कहाँ पर थे आप सहिष्णु ?

सोनी सोरी के गुप्तांगों में

पत्थर ठूंसते हुए .

सलवा जुडूम ,ग्रीन हंट के नाम पर

आदिवासियों को मारते हुए .

लोगों की नदियाँ ,जंगल ,

खेत,खलिहान हडपते वक़्त .

आखिर कब थे आप सहिष्णु ?

दाभोलकर ,पानसरे ,कलबुर्गी के

क़त्ल के वक़्त .

प्रतिरोध के हर स्वर को

पाकिस्तान भेजते वक़्त

फेसबुक ,ट्वीटर ,व्हाट्सएप

किस जगह पर थे आप सहिष्णु ?

……

प्राचीन युग में ,

गुलाम भारत में

आजाद मुल्क में

बीते कल और आज तक भी

कभी नहीं थे आप कतई सहिष्णु .

सहिष्णु हो ही नहीं सकते है आप

क्योंकि आपकी संस्कृति ,साहित्य ,कला

धर्म ,मंदिर ,रसोई ,खेत ,गाँव ,घर .

कहीं भी नहीं दिखाई पड़ती है सहिष्णुता

सच्चाई तो यह है कि आपके

डीएनए में ही नहीं

सहिष्णुता युगों युगों से ……

–    भंवर मेघवंशी

 

12 Responses to “कब सहिष्णु थे आप ?”

  1. इंसान

    भावुकता के भंवर में बहते लेखक द्वारा अपने कुछ मन प्रिय शब्दों के ताने बाने में “असहिष्णुता” की छड़ी से यदि सामान्य हिन्दु को पीटने पर कोई “बहुत खूब” कहे तो उसे व्यक्तिगत सहिष्णुता ही मानना चहिये। अतीत की धुंदली यादों में क्योंकर लेखक ने खो दिया है वर्तमान का कलंक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसके आधिपत्य में हिन्दू हिन्दू ही न रहा? क्योंकर लेखक मोदी जी के “राष्ट्रीयता” के गीत की ओर क्रूर असहिष्णुता बनाए हुए है?

    Reply
  2. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    Bank Holidays in State of Delhi for the year 2015
    (१) हमारे बँक की छुट्टियों की सूची—हमारी सहिष्णुता दिखाती है।
    कुछ देख ले।
    Republic Day 26-Jan-2015 Monday (राष्ट्रीय)
    Holi 06-Mar-2015 Friday (हिन्दू)
    Mahavir Jayanthi 02-Apr-2015 Thursday (जैन)
    Buddha Purnima 04-May-2015 Monday (बौद्ध)
    Idu’l Fitr 18-July-2015 Saturday (इस्लाम)
    Independence Day 15-Aug-2015 Saturday (राष्ट्रीय)
    Janamashtami 05-Sep-2015 Saturday (हिन्दू)
    Idul Zuha (Bakrid) 25-Sep-2015 Friday (इस्लाम)
    Mahatma Gandhi’s Birthday 02-Oct-2015 Friday (राष्ट्रीय)
    Dussehra 22-Oct-2015 Thursday (हिन्दू)
    Muharram 24-Oct-2015 Saturday (इस्लाम)
    Diwali (Deepavali) 11-Nov-2015 Wednesday (हिन्दू)
    Guru Nanak’s Birthday 25-Nov-2015 Wednesday (सिख)
    Milad-Un-Nabi or Id-E-Milad (Birthday of Prophet Mohammad) 24-Dec-2015 Thursday (इस्लाम)
    Christmas Day 25-Dec-2015 Friday (इसाई)
    =======================================================
    ३राष्ट्रीय, ४ हिन्दू ,४ इस्लामी, १ बौद्ध, १ जैन, १ इसाई, और १ सिख छुट्टियाँ सम्मिलित है।

    (२) जिसका लम्बा ज्ञात इतिहास काल होगा उतनी अधिक छुट्टियाँ होंगी।
    इस नियम के अनुसार हिन्दुओं की छुट्टियाँ इससे भी कई अधिक होनी चाहिए थी।
    पर हिन्दू उदार वृत्ति है। असहिष्णु विचारधारा के साथ भी प्रायः सहिष्णुता से रहता है।
    (३) हिंसकॊं के साथ अहिंसा
    (४) असहिष्णु समाज के साथ सहिष्णु
    (५) अपना धर्म ही सर्व श्रेष्ठ मानने वालों के(इस्लाम और इसाई) साथ भी सर्वधर्म समभाव?
    विरोधाभास है, असहिष्णु विचारधारा से भी हिन्दू ही सहिष्णुता का व्यवहार करता है। हिंसको के साथ अहिंसा?
    (६) आप इस प्रवक्ता में सहिष्णुता पर झूठा प्रहार भी कर सकते हो, ये महाराज सहिष्णुता ही है।
    (७) (संसार के सहिष्णु देशॊं की सूचीमें भारत सर्वाधिक सहिष्णु देशो में माना जाता है।
    समय बिगाडना नहीं चाहता। टिप्पणी ही आलेख बन जाएगी।
    (लेखक स्वयं जैन-वैष्णव संयुक्त परिवार से है।)
    (८) विषय को गोल गोल कर घुमा देंगे। तो प्रतिक्रिया की अपेक्षा न रखें। ये आप का अपमान न समझे।
    (९) कवि एक विरोधी स्वर शब्दांकित कर प्रवक्ता में छाप भी देता है। यह क्या असहिष्णुता का प्रकटन है?

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      डाक्टर साहिब इन छुट्टियों के फेहरिस्त से इस बढ़ते हुए असहिष्णुता का क्या सम्बन्ध है?भारत के संविधान के मूल में सर्वधर्म (पंथ) सम्मान की भावना है.कोई भी सरकार चाहे वह केंद्र की हो या राज्य की,उसे उस मूल भूत भावना के दायरे में हैं रहना है,अतः ये छुटियाँ देनी हिं है.छुटियों का जो क्रमांकन आपने कियाहै,उससे भी यही सिद्ध होता है.अब रह गयी बात हिन्दुओं की छुटियाँ कम होने की तो क्या आप बता सकते हैं कि अन्य किन अवसरों पर छुटियाँ होनी चाहिए थी? और क्या इनके लिए सब हिन्दू सहमत होंगे? मुझे तो इन छुटियों में सहिष्णुता या असहिषुणता जैसा कोई चक्कर समझ में नहीं आ रहा है.आपके दूसरी,तीसरी और चौथी बिंदु का उत्तर कविता में मौजूद है.पांचवे और छठे बिंदु का जवाब यह है कि हम हिन्दू और खासकर सनातनी अनेक बुराइयों के होते हुए भी अपने धर्म को सवश्रेष्ठ मानते है,ऐसी बहुत सी बुराइयों का वर्णन इस कविता में भी है,तो अन्य भी ऐसा कहते हैँ ,तो हम कौन होते हैँ उनपर उंगली उठाने वाले? . .सातवें बिंदु पर मुझे संदेह है. क्या डाक्टर साहिब इसका कोई प्रमाण दे सकते हैं?आठवाँ बिंदु तो जवाब के लायक नहीं और नौवें बिंदु पर केवल प्रवक्ता मंडल ही कुछ कह सकता है,क्योंकि प्रच्छन रूप से यह उनकी सत्यनिष्ठा पर आघात है.

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      • इंसान

        “You ‘ve already voted for this comment.” Why, then, do I not see it reflected here? I “down voted” this comment for it, as usual, borders on useless argument and असहिष्णुता| जन्म के अंधों को समझाना बहुत सरल है लेकिन दीमक के टीले पर बैठे अज्ञान के अंधे केवल टीले की ऊंचाई से नीचे दबे सहिष्णुओं को देख मन ही मन अपने अच्छे कर्मों को सराह रहे हैं। उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना होगा ताकि निपुण नेतृत्व के अभाव में चरमराते इन लोगों की असहिष्णुता औरों को साथ ले डूबे!

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  3. एम आर अयंगर

    हिंदी कुंट नहीं, हिंदी कुंज पर गलती सुधार लें.

    Reply
  4. एम आर अयंगर

    मेघवंशी जी,
    बहुत खूब…वाह क्या लिखा है…
    सचाई को बिना चिलमन के पेश किया…
    हो सके तो फेसबुक और हिंदी कुंट जैसे सामाजिक पोर्टलों पर शेयर करें या करने दें.

    मेरी विनम्रता स्वीकारें…

    Reply
  5. डॉ. राजेश कपूर

    राजेश कपूर

    मेघवंशी जी एक बार मान लिया कि ये हन्दू कभी भी सहिष्णू नहीं थे। पर काश सचमुच ऐसा होता। इतने अपमानित, उपेक्षित, तिरस्कृत होकर भी सब सहते जाते हैं।
    कश्मीर गया,वचीन ने भूमिइ हड़प ली, कश्मीर से भगाए गये, केरल में कटे-मरे, रोज आतंकवादियों का निशाना बनते हैं। पाकिस्तानी पिट्ठू इनका खाकर रोज इन्ही को गरियाते हैं। फिर भी ये सोए रहते है, सहते जाते हैं। कोई जापानी, चीनी, जर्मन, अंग्रेज होता तो कबकी इन सबकी बोलती बन्द कर दी गयी होती।

    Reply
    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      १.डाक्टर राजेश कपूर,”पाकिस्तानी पिट्ठू इनका खाकर रोज इन्ही को गरियाते हैं।” से आपकक्या मतलब है?कौन हैं ये पाकिस्तानी पिटठू जो हिन्दुओं का खा कर उन्हीं को गरियाते हैं?ये कौन हैं ,जिनके प्रति हिन्दू इतने दरियादिल हैं?
      २.आपने आगे लिखा है,”कोई जापानी, चीनी, जर्मन, अंग्रेज होता तो कबकी इन सबकी बोलती बन्द कर दी गयी होती।” आपने चार राष्ट्र के वासियों का हवाला दिया है,तो फिर यह राष्ट्र की बात हो गयी.इसमे कोई धर्म या मजहब कहाँ से घुस गया?
      ३.आपने आगे लिखा है,”कश्मीर गया,वचीन ने भूमिइ हड़प ली, कश्मीर से भगाए गये, केरल में कटे-मरे, रोज आतंकवादियों का निशाना बनते हैं।” क्या यह सहिष्णुता है? यह तो कायरता है.

      Reply
  6. आर. सिंह

    आर.सिंह

    इस पर वे क्या टिप्पणी करेंगे,जो आज भी मुंह से निकले हुए आह के लिए भी सर काटने के लिए तैयार बैठे हैं?

    Reply
    • इंसान

      आह और उसके साथ चीखना चिल्लाना तो तब सुना था जब रामलीला मैदान में रात सो रहे सैंकड़ों सहिष्णुओं पर ताबड़ तोड़ लाठियां चली थीं। कोई सर नहीं कटा था और हाँ एक अबला सहिष्णु की हत्या पर आपकी चूँ तक नहीं निकली थी। आप आह भी कैसे भर सकते हैं? आप तो अंतरिक्ष में बैठे इस ओर कूड़ा करकट फैंक अपने कभी भारत न लौटने की विवशता बना रहे हैं।

      Reply

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