लेखक परिचय

राजीव दुबे

राजीव दुबे

कार्यक्षेत्र: उच्च तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ| विशेष रुचि: भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन, इतिहास एवं मनोविज्ञान का अध्ययन , राजनैतिक विचारधाराओं का विश्लेषण एवं संबद्ध विषयों पर लेखन Twitter: @rajeev_dubey

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उलूक दर्शन

उल्लुओं की भाषा के जानकारों ने बताया है कि

आजकल उल्लू अपनी हर सभा में चीख – चीख कर कह रहे हैं –

“अगर घोड़ों ने सभ्यता के विकास के शुरुआती दौर में

आदमी को अपने ऊपर चढ़कर अपना शोषण न करने दिया होता

तो यह पूंजीवादी युग कभी नहीं आता । “

लेकिन अब उल्लुओं को कौन समझाये कि

आदमी को अगर घोड़े नहीं तो गधे, और गधे भी नहीं तो

आदमी तो मिल ही जाते – सवारी करने को –

आज भी मिल जाते हैं हर जगह – कोलकाता में भी …!

– राजीव दुबे

6 Responses to “उलूक दर्शन”

  1. Kerri Veasley

    maybe you will tell me who is really original author of this text? if this is your article i have to say you have got good thoughts

    Reply
  2. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    वाह राजीव भाई शानदार… कुछ पंकितियों में कितना बड़ा सच लिख डाला…
    बहुत बहुत धन्यवाद…

    Reply
  3. Dr Venkat Iyer

    बिकुल शाही बात हे राजीव ! दिवाली की सुभ कामनाये

    Reply

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