लेखक परिचय

दिवस दिनेश गौड़

दिवस दिनेश गौड़

पेशे से अभियंता दिनेशजी देश व समाज की समस्‍याओं पर महत्‍वपूर्ण टिप्‍पणी करते रहते हैं।

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इ. दिवस दिनेश गौड़

मित्रों अन्ना हजारे का अनशन जनलोकपाल मुद्दे को लेकर चल ही रहा है| अनशन दिल्ली में है लेकिन उसकी आग देश भर में लगी हुई दिखाई दे रही है| मैं तो यहाँ जयपुर में देख रहा हूँ कि जो कहीं नहीं हो रहा वो कल दिनांक १८ अगस्त को जयपुर में हो गया| आन्दोलनकारियों ने सुबह से ही रैली निकालनी शुरू कर दी| इसमें यहाँ के व्यापारी भी शामिल थे| उन्होंने शहर भर में घूम घूम कर आधे दिन के लिए अन्ना के समर्थन में‚ दुकाने व बाज़ार बंद रखने की याचना लोगों से की| कोई जोर ज़बरदस्ती नहीं थी, जिसकी इच्छा हो वो बंद करे जिसकी इच्छा न हो वो न करे| अधिकतर दुकाने व बाज़ार कल बंद रहे|

इसके अतिरिक्त रोज़ शाम को शहर के मुख्य मार्गों व चौराहों पर लोग एकत्र हो जाते हैं| ये लोग किसी दल के नहीं होते, इनका कोई नेता नहीं होता, केवल अपनी इच्छा से सड़कों पर उतर आए हैं व अन्ना के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, मोमबत्तियां जला रहे हैं|

तीन दिनों से मेरा भी टाइम टेबल कुछ ऐसा ही चल रहा है| दिन भर अपना काम करते हैं व शाम को सड़कों पर उतर आते हैं| रोज़ भीड़ बढ़ती ही जा रही है| कल तो इतनी भीड़ थी कि लग रहा था कि पूरा देश ही अन्ना के समर्थन में आ गया है| खैर अपने को तो यूपीए सरकार या कहिये कांग्रेस पार्टी को घेरने का बहाना चाहिए|

देश भर का मीडिया भी जैसे सरकार गिराने पर तुला है| जहां देखो अन्ना, अन्ना और केवल अन्ना| जब भी, जहां भी कोई समाचार देखो तो बस अन्ना|

एक नारा जो बार बार सुनाई दे रहा है, वह है – ”अन्ना एक आंधी है, देश का दूसरा गांधी है|”

बिलकुल मैं भी आज यही कह रहा हूँ| अन्ना दूसरा गांधी ही है| और अंग्रेजों की संज्ञा इस कांग्रेस को दी जा सकती है| बिलकुल ऐसा ही लग रहा है जैसे १९४७ से पहले का कोई सीन चल रहा हो| देश भर में रैलियाँ प्रदर्शन हो रहे हैं, जैसे गांधी जी के समर्थन में व अंग्रेजों के विरोध में १९४७ से पहले होते थे|

किन्तु अंग्रेजों को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता था| जिसकी प्रकृति ही अत्याचारी हो, उसे इन नारों व भाषणों से भला क्या समस्या होती? अंग्रेजों को कौनसा यहाँ भारतीयों का दिल जीतना था? उनका मकसद तो भारत को लूटना व भारतीयों पर अत्याचार करना था| और वही काम आज कांग्रेस कर रही है| इन काले अंग्रेजों ने अपने गुरु गोरे अंग्रेजों से बहुत कुछ सीखा है|

याद रखने वाली बात यह है कि आज़ादी की लड़ाई केवल गांधी ने नहीं लड़ी| लेकिन अंग्रेजों ने केवल गांधी जी को हाई लाईट कर यह दिखाया कि भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाला सिर्फ गांधी ही है, क्योंकि गांधी से उन्हें कोई समस्या जो नहीं थी| जिनसे समस्या थी (भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चन्द्र बोस आदि) उन्हें पीछे धकेल दिया गया| जिनसे डर था वे गुमनामी में जीते रहे, और तो और अपने ही देशवासियों स े अपमानित होते रहे| यहाँ तक कि उन्होंने अपनी लड़ाई के साथ साथ गांधी का भी सहयोग किया किन्तु स्वयं गांधीवादियों ने भी उन्हें अपनी लड़ाई से दूर रखा| निश्चित रूप से गांधी जी का अभियान देश के हित में था| इसके लिए भारत सदैव गांधी जी को याद रखेगा| लेकिन साथ ही यह भी ध्यान देने योग्य है कि समस्या को जड़ से मिटाने के लिए गांधी के रास्तों के साथ साथ कोई अन्य रास्ता भी अपनाना चाहिए था|

बिलकुल वही सीन अभी दोहराया आ रहा है|

कांग्रेस को डर अन्ना का नहीं है| अन्ना का डर होता तो आज अन्ना को मीडिया में इतना कवरेज नहीं मिलता| डर है तो बाबा रामदेव का| तभी तो अन्ना की गिरफ्तारी पर हो हल्ला होने पर भी कांग्रेसियों के कान पर जून तक नहीं रेंग रही थी| लेकिन जैसे ही बाबा रामदेव दिल्ली पहुंचे कि अन्ना की रिहाई के लिए सरकार ही पलकें बिछाने लगी| जो सरकार कल तक अनशन की इजाज़त तक नहीं दे रही थी, आज अचानक अनशन की अवधी का बढाकर पहले तीन दिन से सात दिन व बाद में सात दिन से बढ़ाकर १५ दिन कर देती है| अन्ना थोड़े भाव और खाते तो शायद एक महिना या एक साल की अनुमति भी मिल जाती| ऐसा लग रहा था जैसे सरकार अन्ना से गुहार लगा रही हो कि आइये आप अनशन कीजिये और हो सके तो बचाइये अपने देश को| कहीं ऐसा न हो जाए कि इस पूरे प्रकरण में बाबा रामदेव हीरो बन जाएं और हम देखते रह जाएं|

इस बात से बिलकुल भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस को डर मुख्यत: बाबा रामदेव से ही है| जहां अन्ना को मीडिया में हाई लाईट किया आ रहा है वहीँ बाबा रामदेव के किसी कार्यक्रम को टीवी चैनलों का हिस्सा एक मिनट के लिए भी नहीं बनने दिया गया| क्योंकि अन्ना भ्रष्टाचार रुपी दानव के पैरों के नाखून काटने से शुरुआत कर रहे हैं जबकि बाबा रामदेव सीधा गले पर वार कर रहे हैं|

ध्यान रहे १९४७ से पहले गांधी जी भी किसी न किसी क़ानून को लेकर अंग्रेजों से बहस किया करते थे जबकि क्रांतिकारी सीधे भारत से अंग्रेजों को भगाने के लिए लड़ते थे|

क़ानून बन जाने से क्या होगा? बन जाए लोकपाल, जब कपिल सिब्बल जैसे क़ानून का बलात्कार करने वाले स्वयं मंत्रिमंडल में बैठे हों तो भला कोई क़ानून क्या उखाड़ लेगा?

गांधी जी के साथ ”नेहरु” था, तो यहाँ अन्ना के साथ भी एक दल्ला ”अग्निवेश” है| इन जैसों की छत्र छाया में भला कोई क़ानून कैसे सुरक्षित रह सकता है?

मुझे लगता है कि अन्ना की टीम में यदि किसी पर भरोसा किया जा सकता है तो वह स्वयं अन्ना पर अथवा किरण बेदी व अरविन्द केजरीवाल पर| भूषण बाप बेटे भला कब से भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने लगे?

कांग्रेस का बाबा से डर तो उसी समय समझ आ जाना चाहिए था जब अन्ना को राम लीला मैदान में अनशन की अनुमति मिली| जिस राम लीला मैदान से बाबा रामदेव व उनके एक लाख से अधिक समर्थकों को आधी रात में ही मार मार कर भगाया गया वहां अन्ना को सरकारी खर्चे पर जल्द से जल्द मैदान की सफाई करवा कर अनशन के लिए जमीन उपलब्ध की जा रही है|

बाबा रामदेव के आन्दोलन का दमन करने का कांग्रेस के पास जो सबसे बड़ा बहाना था वह ये कि ”राम लीला मैदान चांदनी चौक के निकट है और यह स्थान साम्प्रदायिक हिंसा का केंद्र रहा है|”

तो अब अन्ना को ऐसे साम्प्रदायिक हिंसा के केंद्र पर अनशन की अनुमति क्यों दी गयी? क्या दिल्ली में और कोई जगह नहीं है?

कांग्रेस का मकसद साफ़ साफ़ दिखाई दे जाना चाहिए| उसे पता है कि इतनी फजीती होने के बाद वह २०१४ के लोकसभा चुनावों में नहीं आ सकती| उसकी हालत अभी वैसी ही है, जैसी इंदिरा गांधी के आपातकाल के समय थी| अत: जितना हो सके उसे जनलोकपाल के मुद्दे को घसीटना ही पड़ेगा| और दो साल बाद यह क़ानून पारित कर दिया जाएगा, जिसमे प्रधानमंत्री भी लोकपाल का शिकार होगा| ऐसे में बाबा रामदेव से भी पीछा छुडाया जा सकेगा और आने वाली सरकार को इसी लोकपाल से गिराकर फिर से तख़्त पर बैठा जा सकेगा|

कोई आश्चर्य नहीं जो ऐसे समय में पुन: कांग्रेस सत्ता में आ जाए| जब आपातकाल के बाद केवल दो वर्षों के जनता पार्टी के शासन के बाद पुन: सत्ता में आ सकती है तो आज क्यों नहीं? दरअसल भारत देश की जनता भूलती बहुत जल्दी है| देखिये न केवल दो ही वर्षों में इंदिरा का आपातकाल भूल गयी| १९४७ पूरा होते ही अंग्रेजों के दो सौ साल के अत्याचार भूल कर इंग्लैण्ड से दोस्ती कर बैठी| पाकिस्तान द्वारा थोपे गए चार युद्ध व सैकड़ों आतंकवादी घटनाओं को भूल कर दोस्ती की बात कर बैठी|

अन्ना की गलती वही है जो गांधी ने की| अन्ना जिस प्रकार बाबा रामदेव से दूरी बना रहे हैं वह प्रशंसनीय नहीं है| बाबा रामदेव अब भी अन्ना के सहयोग के लिए दिल्ली पहुँच गए, किन्तु अन्ना ने तो उनसे मिलने से भी मना कर दिया| ये सब कांग्रेस की चाल है जो वह अन्ना व बाबा को एक नहीं होने दे रही|

अन्ना को इन धूर्तों के षड्यंत्र को समझना होगा, नहीं तो वही इतिहास दोहराया जाएगा जो १९४७ में सत्ता के हस्तांतरण द्वारा देश आज तक झेल रहा है|

इस पूरे विवाद में मैं ये बात साफ़ कर देना चाहता हूँ कि मुझे अन्ना के आन्दोलन से कोई तकलीफ नहीं है| मैं तो खुद गला फाड़ फाड़ कर नारेबाजियां कर रहा हूँ| गला छिल गया है, ठीक से आवाज़ भी नहीं आ रही अब तो| लोकपाल के मुद्दे को लेकर देश भर में जो कुछ भी हो रहा है वह बहुत सही हो रहा है| किन्तु भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर जो हो रहा है वह सही नहीं है| यही जन आक्रोश बाबा रामदेव के समर्थन में भी चाहता हूँ| लोकपाल की लड़ाई अंतिम लड़ाई नहीं है| यह तो केवल एक शुरुआत है, अंत नहीं| ऐसा न हो कि लोकपाल का मुद्दा शांत होते ही सब अपने अपने घरों की ओर चल दें|

15 Responses to “मैं भी अन्ना भक्त, किन्तु आज अन्ना भक्तों से गालियाँ सुनने आया हूँ”

  1. Sanjay

    मंत्रियों ने बाबा रामदेव जी को धमकी दी थी कि यदि अन्ना हजारे उनके मंच पैर आये तो सरकार कोई भी बात नहीं करेगी. शायद यही धमकी अन्ना की टीम को दी गयी है. क्योंकि १+१=११. यदि दोनों मिल जायंगे तो सरकार की हालत ख़राब हो जायगी.

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  2. RAJ

    बिलकुल सही बात की आपने मन प्रसन्ना हो gaya

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  3. Shailendra Saxena

    आदरणीय अन्ना जी ,
    जय माई की ,
    अन्ना जी आप ने देश को जगा दिया है
    देश १००% अन्ना जी के साथ हूँ.
    हम सभी अन्ना जी के लिए गंज बासोदा मैं प्रतिदिन
    कार्यक्रम करवा रहे हैं
    राष्ट्रपति जी, अन्ना जी की पूरी सुरक्षा करें
    . उनको कुछ भ्रष्ट लोग निशाना बना सकते हैं .
    देश मैं लगभग सारे (९०% नेता भ्रष्ट हैं ) चाहे वे किसी भी दल के हों .
    सभी राज्यों के अधिकांश मुख्य मंत्री , मंत्री व विधायक भी भ्रष्ट हैं जनता व युवा वर्ग को
    इनका भी घेराव करना चाहिए.
    अन्ना जी अगले चुनाव मैं पढ़े लिखे ईमान दार लोगों को चुनाव लढ़वाएं या फिर इमानदार
    लोगों का समर्थन करें पुरे देश मैं एक वार फिर से चुनाव होना चाहिए पुरे देश की विधानसभाओं के
    विधायकों की वेइमानी व भ्रस्टाचारी जग जाहिर है .अन्ना जी किसी भी कीमत पर पीछे मत हटना पूरा देश आपके साथ है .
    शैलेन्द्र सक्सेना “आध्यात्म” एवं मुक्ता सक्सेना , संचालक असेंट इंग्लिश स्पीकिंग कोचिंग ,बरेठ रोड गंज बासोदा जिला विदिशा म. प्र .पिन- ४६४२२१. फ़ोन – ०७५९४-२२१५६८, मो. – ०९८२७२४९९६४, ०९९०७८२०१३१.
    जय अन्ना जी एंड जय रामदेव जी.

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  4. Satyarthi

    भारतीय मीडिया किस प्रकार के समाचारों को प्रमुखता देता है और किस प्रकार के समाचारों की अनदेखी करता है और क्यों ? यह समझने के लिए कृपया गूगल पर जाकर ” who owns the Indian media ” टाइप करें और उत्तर पढ़ें श्री सुब्रमन्य स्वामी ने जितना कुछ लिखा और जितना कुछ किया उस के लिए हमारे मीडिया में कोई स्थान नहीं है पर जिज्ञासु पाठकों के लिए एक विकल्प खुल गया है you tube जिस का यथा संभव प्रयोग करना चाहिए

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  5. Awadhesh

    लेख भी पढ़ा, टिप्पणिया भी, इस विषय में दिवस जी से बात भी हुई.
    मेरा अपना मानना है की इस भ्रष्ट सरकार से जनता के लिए जो कुछ भी मिल जाय अच्छा है. हम लोगो को अन्ना हजारे को मिल रहे जन समर्थन का उपयोग काले धन के मुद्दे को जीवित रखने में करना होगा. क्योकि सरकार के लिये जनलोकपाल बनाना अपेक्षाकृत आसान है, साथ ही वह काले धन के मुद्दे को दबाये रखना चाहती है. बाबा रामदेव ने जिस प्रकार अपने रणनीतिकारों को आखिरी मौके पर अलग कर दिया, उसका खामियाजा वो भुगत रहे हैं. दुःख: इस बात का है की इन सबको इतना बड़ा मुद्दा थमाने वाले डा. सुब्रमण्यम स्वामी को मीडिया और विभिन्न संगठनो ने कभी महत्व नहीं दिया. जन लोकपाल के पीछे कांग्रेस के बड़े नेता जो काले धन के मामले में फसे हुए थे, अपनी गर्दन बचाने में सफल होते दिख रहे हैं. जन लोकपाल के बाद सभी राष्ट्रवादी संगठनो को एक साथ काले धन का मुद्दा उठाना चाहिए. हाँ टीम अन्ना से उम्मीद मत कीजियेगा की वो काले धन के मुद्दे पर आपके साथ आयेंगे. एक बात और अन्ना सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस से तंग जनता के लिए अपनी भड़ास निकालने का साधन मात्र हैं. भारत माता की जय.

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  6. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    इंजी.दिवस दिनेश गौड़ जी ने पूरे परिप्रेक्ष्य को बड़ी गहराई से समझ कर बड़ी योग्यता से प्रस्तुत किया है. इनका विश्लेषण और चिंताएं हर भारतीय के मन को स्पर्श करने वाली हैं. बिलकुल सही और मूल्यवान आकलन है कि जिस प्रकार क्रांतिकारियों को पृष्ठभूमि में डालने के लिए चतुर अंग्रेजों ने पहले तो गांधी जी को खूब प्रचार व सम्मान दिया. महात्मा गांधी जी को किनारे करने के लिए ‘अडविना बैटन’ के वासना के मोहपाश में बंधे नेहरू का जम कर इस्तेमाल किया. इस प्रकार पहले तो बड़े खतरे को यानी क्रांतिकारियों से निपटने के लिए अहिंसावादी देश भक्त गांधी को इस्तेमाल किया और फिर तन से भारतीय और मन से पूरे अँगरेज़ नेहरू को प्रयोग कर के गांधी को निष्प्रभावी कर दिया. कहते हैं कि इतिहास अपने को दोहराता है. आज भी इतिहास दोहराया जा रहा है. देश को लूट रहे आधुनिक राबर्ट क्लाईवों ने सबसे बड़ा खतरा बन रहे बाबा रामदेव को किनारे करने के लिए अन्ना हजारे को चमकाया है. अब जिस मीडिया के चमत्कार से अन्ना को पूरे देश का हीरो बनाया था उसी मीडिया की मदद से अन्ना और उनकी टीम को बुरी तरह बदनाम कर दिया जाएगा. पिछले कल ये अभियान एक देवी जी की मदद से शुरू हो भी चुका है जो तीसरा लोकपाल-बिल मसविदा लेकर सामने आ गई है (लाई गई है) . मीडिया कि असलियत को समझना हो तो अनिल गुप्ता जी कि टिपण्णी में दिए स्रोत पर जाकर देख लें…… मुझे आशा की एक ही किरण नज़र आ रही है कि अन्ना हजारे निश्चित रूप से इमानदार और देश भक्त हैं. देर-सवेर उन्हें भी सारा खेल समझ आ ही जाना है. शायद काफी कुछ आ भी गया है. तभी तो वे जेल से बाहर आने के बाद पहली ही रैली में बोले थे कि बात केवल लोकपाल बिल की नहीं है, सारी व्यवस्था बदलनी है. यदि वे ठीक से समझ पाए तो बाबा रामदेव और वे एक मंच पर आयेंगे. पर इसमें एक रुकावट यह है कि वहाँ अग्निवेश जैसे सरकारी भेदिये बैठे हैं जो ऐसा होने में भारी बाधा बनेंगे, बन रहे हैं. संघ जैसी देशभक्त संस्थाओं को साथ आने देने में रुकावट बन रहे हैं. इनके एक्सपोस हुए बिना इस आन्दोलन की सफलता में संदेह बना रहेगा. # दिवस जी कि चिंता हर देशभक्त भारतीय की चिंता है कि जग रहे देशवासी फिर से सो न जाएँ. आन्दोलन की दिशा में भटकाव न आ जाए. मुझे तो यही नज़र आ रहा है कि इसमें सबसे बुरी और खतरनाक भूमिका मीडिया की रहने वाली है. मीडिया के बहकावे से देशवासियों को कैसे बचना और बचाना है, यह एक यक्ष प्रश्न है. सरकार तो जो कर रही है उसका प्रभाव जनता पर सही हो रहा है. सबको समझ आ रहा है कि सरकार और उसके संचालकों की नीयत क्या है. इनकी करनियों से इनके प्रति असंतोष बढ़ ही रहा है. पर इस दुष्ट मीडिया का क्या होगा ? संतों का कहना है कि सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित है. कोई रास्ता तो निकलेगा ही. ….यह भी ध्यान देने के बात है कि जनता और देश के विरोधियों के रूप में अभी तक तो सामने इस सरकार और इसके नेता ही नज़र आ रहे हैं, इनके पीछे छुपे जो असली खिलाड़ी हैं वे तो सामने आने बाकी हैं. # …. अंत में अनिल जी से कहना है कि उनमें एक अछे लेखक की योग्यता, क्षमता है. यदि पहले से न लिखते हों तो लेख लिखना शुरू करें. ..दिवस जी अति उत्तम. इतना सुव्यवस्थित और प्रभावी लेख लिखने हेतु बधाई, साधुवाद. शायद आपके अब तक के उतम लेखों में यह सर्वोत्तम है. शुभकामनाएं !

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  7. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    आदरणीय मधुसुदन जी, वैसे तो मैं यहाँ आपसे मार्गदर्शन ले रहा हूँ किन्तु आपने पूछा है तो बता रहा हूँ कि मुझे अन्ना व उनके आन्दोलन से कोई तकलीफ नही है| दरअसल मुझे लगता है कि अन्ना के आन्दोलन को कांग्रेस गलत दिशा में घुमा रही है| अन्ना को खुद पता नही चल रहा|
    मैं अन्ना व उनके आन्दोलन का पूर्ण समर्थन करता हूँ| इस विषय में आप मेरी एक पोस्ट जो मैंने अभी लिखी है, यहाँ देख सकते हैं|
    http://www.diwasgaur.com/2011/08/blog-post_21.html

    ये पोस्ट तो आप पढ़ ही चुके हैं| शायद दोनों पोस्ट पढने के बाद मेरी मनोस्थिति समझ पाएं|

    कोई त्रुटी लगे तो कृपया संकेत अवश्य दें| आपसे मार्गदर्शन की अपेक्षा है|
    आभार…

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  8. Sudershan Shukla

    ये बात सच है की प्रशाशन बाबा रामदेव के अभियान से बहोत ही भय भीत है/ अन्ना हजारे जो मांग कर रहे है वो रामदेव की मांग का एक बहोत ही छोटासा हिस्सा है/ इसलिए अन्ना की बातें कुछ मान कर आज के लिए कुछ चैन लेना चाहती है भ्रष्ट सर्कार/

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  9. Satyarthi

    इस सम्बन्ध में मैं अपने विचार “अन्ना हजारे के नाम खुला ख़त ” लेख पर अपनी टिप्पणिओं में व्यक्त कर चूका हूँ. अन्ना हजारे और उनके नजदीकी विशिष्ट सलाहकारों के सोनिया गाँधी गठित एन ए सी के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं. अन्ना को जिस सिविल सोसायटी का समर्थन प्राप्त है उस के कई गण्य मान्य सदस्य मैग्सेसे पुरस्कार से अलंकृत हैं और जिन्हें संभवतः कई एन जी ओ का समर्थन प्राप्त है . हमारे मीडिया ने जिस प्रकार स्वामी रामदेव से सम्बंधित समाचारों को जानबूझ कर स्थान नहीं दिया और अन्ना को जिस प्रकार बढ़ा चढ़ा कर प्रदर्शित किया ज़ा रहा है वह चिंता का विषय है. अन्ना का आन्दोलन भ्रष्टाचार मिटाओ आन्दोलन के बजाय महामहिम अन्ना आन्दोलन के रूप में जनता के सामने रखा ज़ा रहा है. ऐसी बहुत सारे कानून आसानी से बनाये ज़ा सकते हैं जिनसे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया ज़ा सकता है लेकिन इस विषय पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही.बस अन्ना और जन लोकपाल बिल.पता नहीं की अन्ना के समर्थन में जुटने वाली भीड़ वास्तव में कितनी बड़ी है और उसमे भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों की समझ रखने वाले कितने लोग हैं. आशा है की आने वाले दिनों में स्थिति कुछ और स्पष्ट हो सकेगी.

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  10. डॉ. मधुसूदन

    मधुसूदन उवाच

    मेरी जानकारी सीमित है। पर सारी टिप्पणियां पढी।
    केवल एक ही बात (शायद) कही भी गयी है, उसे दोहराना, और अधोरेखित भी करना, चाहता हूं।
    शासन कूट नीति अपना रहा है।लगता है, वह बाबा रामदेव को क्रेडिट नहीं देना चाहता। उसे समय भी चाहिए,(१) स्विस बैन्क से पैसा निकलवाकर बनाना रिपब्लिकों की बैन्कों में जमा करवाने के लिए।(२) भ्रष्टाचारियों को भी अकाउंट की एवं घरमे छुपाए धन की साफ सूफी करने के लिए।(३)
    रण-नीति==>(क)जितना विलम्ब हो सकता है, करेंगे/करवाएंगे।(ख) जितनी बन पाए, उतनी विरोधकों में फूट डालेंगे। (ग) संघ-सम्बंधित संस्थाओं को दूर रखनेका प्रयास ज़रूर किया जाएगा। सबसे ज्यादा डर इन्हींका है।(घ) और इसी का दूरसे भी भास, बाबा रामदेव के कारण, सकारण होता था। आर एस एस सुसंगठित है, बाकी संस्थाएं लहर पर चढ जाती हैं, और फिर कहती है, क्रांति हो गयी। आर एस एस वह है, जो ऊगते सूरज की पूजा करने के बजाय, सच्चे सूरज को ऊगाने में जुटी है।
    पर, अभी देश हित में एक जूट होनेका समय है।
    अण्णा के सारे सहकारी,कसौटी पर खरे भी उतरेंगे या नहीं? संदेह है। मुझे तो कुछ लोग, सॅबोटेज करने के लिए उचित अवसर की राह देखनेवाले, और मूक सम्मति (याने असम्मति) दर्शक जैसे प्रतीत होते हैं।

    अण्णा के साथ जनता बहुत है, पर (शायद) तृण-मूल (ग्रास रूट) संगठन नहीं है।टिप्पणी दीजिएगा। मेरी जानकारी आंशिक ही है। गलत भी हो सकती है।
    पर, अभी “देश हित” में एक जूट होने का समय है।

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  11. MOHAN LAL YADAV

    वैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना आम बात है. दिनेश जी ने अपने विचार दिए है, और बहुत हद तक ठीक भी है अकेले जन लोकपाल बिल से क्या देश के सामने विधमान बहुत सी समस्याओं का हल होगा…..? इसीलिए बाबा रामदेव और अन्ना को साथ- साथ अगुवाई करनी चाहिए. जो आन्दोलन चल रहा है उसके जरिये व्यवस्था में परिवर्तन होना ही चाहिए. अंग्रजो की ejad की गई की गई कार्यपालिका की व्यवस्था को sudhaar की जरुरत है. परदे के पीछे सरकार के खेल, नीति, चेहरे उजागर होना चाहिए क्योंकि अन्ना के इस आन्दोलन में सामिल कई लोग ऐसे है जिन्हें नहीं मालूम की अन्ना अनसन क्यों कर रहे है, लेकिन वो खुश है की अन्ना ने सरकार को झुका दिया ……………. अन्ततोगत्वा इसी भरोसे के साथ की अन्ना कुछ तो नया करंगे ही ………………… जय हिंद.

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  12. anil gupta

    श्री दिनेश जी के विचार कुछ हद तक सही हैं. अन्नाजी का आन्दोलन केवल लोकपाल के लिए है जबकि देश का धन चोरी से विदेशों में जमा करना भी अति महत्व पूर्ण मुद्दा है. २००९ के लोकसभा चुनावों के समय स्विस बैंकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष का बयां आया की भारतियों का लगभग १.५६ ट्रिलियन डालर स्विस बैंकों में जमा है. अडवाणी जी ने चुनाव के दौरान ही यह मुद्दा पूरी शिद्दत से उठाया. चुनाव के बाद से ही पिछले दो वर्षों से रामदेव जी इस मुद्दे को पुरे जोर से उठाते रहे हैं. इसी वर्ष फरवरी में रामलीला मैदान में उनके द्वारा रेली की गयी जिसमे बड़ी संख्या में विद्वान् लोग आये. मीडिया ने भी कवरेज दी. इस रेली में पूर्व आयकर अपर आयुक्त विश्वबंधु गुप्ता द्वारा ये रहस्योद्घाटन किया गया की सोनिया गाँधी के दामाद रोबेर्ट वाड्रा और क्वात्रोची के बेटे की साझेदारी में अंदमान में खुदाई का कार्य किया जा रहा है.और भी बातें सामने आयीं. इसके बाद से ही मीडिया को सांप सूंघ गया और रामदेव जी को ब्लेक आऊट किया जाने लगा. उनकी दूसरी रेली जो झज्झर में हुई उसके बारे में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने पूरी चुप्पी साधे राखी.अन्नाजी का अभियान इन दोनों रेलियों के बाद अप्रेल में शुरू हुआ.७/८ जून की रात्रि में सोनिया गाँधी, रोबेर्ट वाड्रा, राहुल गाँधी, विन्सेंट जोर्ज,सुमन दबे और १२ और व्यक्ति,जिन्होंने इंदिरा गाँधी इंटरनेश्नल एयरपोर्ट पर अपना व्यवसाय वित्तीय सलाहकार घोषित किया था, एक निजी बोईंग से स्विट्जर्लैंड गए जहाँ उन्ही दिनों दुनिया के धनपतियों की एक गुप्त बैठक चल रही थी. सारे मीडिया ने इस खबर को देश से छुपाया. ये तोकुछ इंटरनेट ने और कुछ सुब्रमण्यम स्वामीजी ने भंडाफोड़कर दिया.दिलचस्प बात ये है की इसका कोई खंडन उपरोक्त किसी भी महानुभावों ने पिछले दो महीनों में नहीं किया.भारत के मीडिया पर किसका नियंत्रण है इसकी जानकारी के लिए कहीं दूर जाने की जरुरत नहीं है. गूगल पर केवल यह सर्च डाल दें ” हु कंट्रोल्स इंडिया’स मीडिया?” सारी सच्चाई सामने आ जाएगी. अतः मीडिया के भेदभाव भरे रिपोर्टिंग से कोई शिकायत नहीं रहेगी. आखिर उनको अपने आकाओं की इच्छाओं का पालन करना है. एक और धोकधादी पर किसी मीडिया ने कमेन्ट नहीं किया है की भारत ने हाल में जिन देशों से काले धन के बारे में संधि की हैं उसमे काले धन के बारे में कट ऑफ डेट १ अप्रेल २०११ राखी है अर्थात इससे पहले के बारे में कोई जानकारी न तो मांगी जाएगी और न ही प्राप्त हो सकेगी जबकि अमेरिका और यूरीपीय देशों ने टैक्स हेवेन देशो से जो समझौते किये हैं उनमे ऐसी कोई कट ऑफ डेट नहीं है. क्या ये विषय लोकपाल से कवर हो सकेगा? नहीं. इसी बात को रामदेव उठा रहे थे और अभी भी उठा रहे हैं. आवश्यकता अन्ना और रामदेवजी को प्रतिद्वंदी के रूप में खड़ा पर्ने की नहीं है बल्कि दोनों एक दुसरे के पूरक हैं. अन्ना को उनकी साफ़ छवि, सर्कार के दमन व मीडिया द्वारा लाईव कवरेज ने जो माहौल बनाया है उसका फायदा उठाकर दोनों को एक साथ मिलकर देश से काले धन व भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार करना चाहिए.१९७३ में जब जय प्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ रणभेरी फूंकी थी तो उससे पहले उन्होंने ‘एवेरिमें’स वीकली’ नामक साप्ताहिक के माध्यम से अपने कार्यक्रम की प्राथमिकताएँ बताई थीं.उन्होंने कहा था की प्रधान मंत्री भ्रष्टाचार की गंगोत्री है. तथा चुनावी व्यवस्था में बदलाव लाये बिना व्यवस्था में परिवर्तन संभव नहीं है. लेकिन इमरजेंसी के कारन आन्दोलन पटरी से उतर गया था. और अंत में केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित होकर रह गया. इस आन्दोलन में जो भीड़ अभी दिख रही है वह कितने दिन तक टिकेगी? इसलिए लम्बी लडाई के लिए सबको साथ लेकर एक व्यापक जनसंघर्ष समिति बनाना चाहिए. जिसमे अन्ना हजारे, रामदेव जी और उन जैसे समर्पित सभी लोग शामिल हों. किसी को अश्पर्श्य न बनाया जाये. सरकार आन्दोलन में फूट डालने के लिए इसे आर एस एस प्रेरित बता रही है. लेकिन इससे परेशां होने की क्या बात है? आखिर आर एस एस ने हमेशा देश के लिए सर्वोत्तम समर्पण प्रदर्शित किया है. कुछ लोगों ने आर एस एस की पूरी परिभाषा ‘रेडी फॉर सेल्फ्लेस सर्विस’ अथवा ” रिकंस्ट्रकशन ऑफ़ सोसिअल सिस्टम” दी है. जे पी के आन्दोलन की सफलता का अधिकांश श्रेय संघ के सहयोग को ही जाता है. सरकार मुस्लिमों को इस आन्दोलन से दूर रखने के लिए इसे संघ प्रेरित बता रही है जबकि आन्दोलन इस सरकार की भ्रष्ट व देश्घातक, जनविरोधी, स्वार्थप्रेरित,व लूटमारक नीतियों का फलितार्थ है जिसे संघ व अन्य देशप्रेमी, तथा पीड़ित सामान्यजन खुले दिल से समर्थन व सहयोग दे रहा है.आखिर भ्रष्टाचार से मुसलमान भी उतने ही पीड़ित हैं जितने अन्य लोग.एक दलित लेखक ने इसे मनुवादी बताया है. ये भी केवल आन्दोलन को तोड़ने की साजिश है.राजीव मल्होत्रा ने अपनी पुस्तक “ब्रेकिंग इंडिया”में इस प्रकार के लेखकों की पूरी सच्चाई बताई है की किस प्रकार इस प्रकार के लोग दलित लेखन के नाम पर विदेशी हस्तक के रूप में देश की एकजुटता को तोड़ने का काम करते हैं. भाई रमेश सिंह जी, ये समय गुस्से का नहीं है बल्कि सबको एक साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाने के लिए यथाशक्ति योगदान का है.

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  13. इंसान

    भारत में इस समय सर्वव्यापी भ्रष्टाचार और अनैतिकता को लेकर मुख्यत: दो पक्ष बने हुए हैं| एक जो सत्ताधारी कांग्रेस को जड़ से उखाड देश और देश की प्रजा के हित परिवर्तन लाना चाहता है| दूसरा पक्ष है जो सत्ताधारी कांग्रेस को स्पष्ट समर्थन देते हुए भ्रष्टाचार और अनैतिकता की स्थिति को ज्यों का त्यों बनाए रखना चाहता है| सत्ताधारी कांग्रेस द्वारा आसानी से उल्लू बनाए गए इस दूसरे पक्ष में वो लोग भी हैं जो उनके “बाटों और राज करों” नीति द्वारा निष्क्रिय बन अनजाने में उनका साथ दे रहे हैं| इन दो पक्षों में बंटे भारतीय उनके राष्ट्रवादी अथवा देशद्रोही होने के प्रतीक हैं| अन्ना और बाबा एक ही पक्ष में होते हुए एक साथ क्यों नहीं; एक ही पक्ष में होते हुए उनमें दूरी क्यों; उनके एक ही पक्ष में होते हुए सत्ताधारी कांग्रेस उनके द्वारा चलाए दो अभियानों में एक के साथ मनमानी और दूसरे के साथ शैतानी करती क्यों दिखती हैं?

    दिवस दिनेश गौड़ जी की सोच में कोई खोट नहीं है| लेखक अन्ना और बाबा को निरंतर एक ही पक्ष में देखना चाहते हैं| वर्तमान परिस्थिति में बनी या सत्ताधारी कांग्रेस की चतुर कुमंत्रणा से बनाई गई उनमे दूरी उन्हें अधीर बनाए हुए है| उन्हें धैर्य रखना होगा| मेरे विचार में सशक्त लोकपाल बिल समय की बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक मांग है| भारत स्वाभिमान न्यास के वेबसाईट पर बाबा के अभियान की गतिविधियों को देखते हुए मैं विशवास से कह सकता हूं कि बाबा द्वारा अलंकृत हुई अन्ना की दूसरी आज़ादी की जंग छिड़ने में अब देर न लगेगी|

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  14. Rekha Singh

    भाई आपका लेख पढ़कर खुशी हुई | देशभर मे जागरूकता बढ़ रही है |हमे थकना नहीं है |कुछ लोग बाबा रामदेव एवं अन्ना मे भ्रम फैला रहे है लकिन आम जनता तो दोनों को एक ही देखरही है और सही भी है एकता बहुत जरूरी है , वरना कांग्रेस बहुत हरामी है |पी एम् खीचना चाह रहे है और सोच रहे है की जनता धीरे धीरे खिसक जायेगी |जय हिंद

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  15. आर. सिंह

    आर.सिंह

    इंजीनीयर साहब अभी मैं आपको कुछ नहीं कहूँगा,क्योंकि ये अपनी अपनी विचारधारा है.आप ठीक भी हो सकते हैं,पर एक सलाह मैं आपको अवश्य दूंगा की आपके इस विचार के विरोध में अगर कोई कुछ लिखे या कहे तो उसको अनाप सनाप मत बकने लगिएगा,क्योंकि जैसे आपको अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार है ,वैसा दूसरों को भी है.तथास्तु.

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