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    Homeसाहित्‍यकवितामैं गांधी हूं सनातनी सेकुलर राह पे चलता हूं

    मैं गांधी हूं सनातनी सेकुलर राह पे चलता हूं

    —विनय कुमार विनायक
    मैं गांधी हूं
    मैं झूठ नहीं बोलूंगा
    मैं खरा सोना बन ना सका
    मैं खुद को चांदी बोलता हूं!

    मैं गांधी हूं
    देश को आजादी
    बिना खड्ग ढाल के
    नहीं मिली थी
    मैं इसे आज कबूलता हूं!

    मैं गांधी हूं
    देश स्वतंत्र हुआ
    सिर्फ अहिंसा धर्म से नहीं
    क्रांति और जंग से भी
    मैं इसे कभी नहीं भूलता हूं!

    मैं गांधी हूं
    मेरी अहिंसा नीति को
    बहुत प्रचार मिला
    किन्तु मेरी नीति से
    अंग्रेज नहीं दहले थे
    ये भेद खुद ही खोलता हूं!

    मैं गांधी हूं
    क्रांतिवीरों की बलि
    मुझसे आगे थी
    उनकी शहादत को
    मैं श्रद्धा नमन करता हूं!

    मैं गांधी हूं
    सारा श्रेय नहीं लूंगा
    जितना किया
    देश के खातिर
    मैं उतना ही बोलता हूं!

    मैं गांधी हूं
    सदा से दलित
    अल्पसंख्यकों के लिए
    आवाज बनता रहा हूं
    हर युग में ऐसा ही करूंगा!

    मैं गांधी हूं
    मेरे हाथ में तुला
    मैं सत्य को सत्य
    और झूठ को झूठ
    सदा ही तोलता रहा हूं!

    मैं गांधी हूं
    मैं सदा सच बोलता हूं
    नहीं किसी को छलता हूं
    मैं गांधीगिरी से
    समस्या का हल निकालता हूं!

    मैं गांधी हूं
    हमेशा राम राम बोलता हूं
    कृष्ण की गीता को पढ़ता हूं
    मैं धर्म से सनातनी हूं
    मगर सेकुलर राह पे चलता हूं!
    —-विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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