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    Homeसाहित्‍यकवितामैं तो हूं केवल अक्षर

    मैं तो हूं केवल अक्षर

    मैं तो हूं केवल अक्षर
    तुम चाहो शब्दकोश बना दो

    लगता वीराना मुझको
    अब तो ये सारा शहर
    याद तू आये मुझको
    हर दिन आठों पहर

    जब चाहे छू ले साहिल
    वो लहर सरफ़रोश बना दो

    अगर दे साथ तू मेरा
    गाऊं मैं गीत झूम के
    बुझेगी प्यास तेरी भी
    प्यासे लबों को चूम के

    आयते पढ़ूं मैं इश्क़ की
    इस कदर मदहोश बना दो

    तेरा प्यार मेरे लिए
    है ठंढ़ी छांव की तरह
    पागल शहर में मुझको
    लगे तू गांव की तरह

    ख़ामोशी न समझे दुनिया
    मुझे समुंदर का ख़रोश बना दो

    :- आलोक कौशिक

    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

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