More
    Homeसाहित्‍यकहानीअंधे का क्या हुआ, मुझे नहीं पता

    अंधे का क्या हुआ, मुझे नहीं पता

    घुडसवार भरे दरबार में अपनी बात पर अडा था – ‘‘ दुनिया का सर्वोतम घोडा मेरे पास है, जो इसे गलत साबित कर दे, मैं भरे दरबार में अपना सर कलम करा लूगाॅं।’’ और राजा का कहना था -‘‘ राजकोष भले ही खाली हो जाए पर यह घोडा मुझे, अपने अस्तबल में चाहिए।’’सेनापति ने धीमी आवाज में राजा से आपत्ति की – हूजूर, बेशक आप घोडा अपने अस्तबल में ले, पर एक निवेदन है। राज्य में एक अंधा व्यक्ति है, पारखी है, तर्जुबेकार है, उसका कहा कभी गलत नहीं होता। एक बार उससे पूछ लेने में क्या हर्ज हैं। राजा को बात जंची। अंधा दरबार में बुलवाया गया।घोडें की पीठ पर हाथ फेरने के बाद अंधे ने जो घोषणा की तो सारे लोगों के होश उड गए। राजा का दिल बैठ गया। अंधे ने कहा – हूजूर, बुरा ना मानिएगा – यह घोडा किसी बूढी घोडी की औलाद है। घोडे के सन्दर्भ में सारे दावे अब जमीन पर थे। राजा हतप्रभ थे और घुडसवार भौच्चका।
    राजा, गुस्से से अंधे पर चिल्लाया – क्या बकते हो। बात गलत निकल गयी, तो जुबान खीच लूगाॅ। अंधे ने सर्द आवाज में कहा – मैं झूठ बोलता नहीं और आपको सच सुनने की आदत नहीं। मेरा सर कलम हो जायेगा, पर मरने के बाद भी कोई ये नहीं कहेगा कि अंधा झूठ बोलता था। राजा पलटा , सेनापति को हुक्म दिया – इस घुडसवार को तबतक कोडे मारों जबतक इसकी जुबान पर सच ना आ जाए।
    दस बारह कोडे में ही घुडसवार ने जुबान खोल दी। ‘‘ हाॅ हूजूर, ये घोडा एक बूढी घोडी की ही औलाद है।’’ राजा को काटो तो खून नहीं। घुडसवार का क्या हुआ, मुझे नहीं पता। पर राजा ने एक अप्रत्याशित आदेश सेनापति को दिया – इस अंधे को जेल के सलाखों के पीछे डाल दो और पहरा सख्त कर दो।
    वक्त बीतता रहा। दो चार महिने के बाद दरबार में एक हीरों का व्यापारी आया। दावा दुनिया के सर्वोतम हीरे का था। राजा का दिल एक बार फिर मचल गया। सेनापति से बोला – राजकोष खाली हो जाए पर ये हीरा मुझे चाहिए। सेनापति ने राजा के कान में कहा – हूजूर यदि आप इजाजत दे ंतो अंधे को मै दरबार में बुला लूॅ? राजा का दिल जोर से धडकने लगा। शंकाग्रसित हृदय से अंधे को बुलाने का आदेश दिया। अंधा दरबार में लाया गया। उसे घटनाक्रम बताया गया। पूरा दरबार संनाटे में था। सबके कान अंधे की आवाज पर टिके थे। अंधा, हाथों में हीरा लेकर उलट पलट रहा था। यकायक वह रूक गया। ‘‘ हूजूर, आप मेरी आवाज सुन रहे हैं ना। ये हीरा अंदर से खोखला है। इसे लेना आपके लिए मुनासिब नहीं होगा। राजा संतुलन खो बैठा। चिल्लाया – क्या बकते हो? अंधे ने ठण्ठी आवाज में उत्तर दिया – हूजूर जो आप सुन रहे है, अच्छा भले ना लगे, मगर सच यही है। राजा पलटा – सेनापति , इस व्यापारी का सर यही कलम करो। व्यापारी घुटनों के बल आ गया। रोते हुए जान की रहम माॅगा, बोला – हूजूर, हीरा अंदर से खोखला है। हीरा तोडा गया, बात सच निकली। व्यापारी का क्या हुआ मुझे नहीं पता। पर राजा ने सेनापति को हुक्म दिया – अंधे के पहरे को और सख्त कीजिए तथा इसपे निगरानी रखिए।
    कई पतझण आये और कई सावन गुजर गए। राजा एक दिन रनिवास को जा रहे थे। अंधा जहाॅं कैद था, वही रास्ता रनिवास को जाता था। अंधे ने राजा को आवाज दी – यदि मैं गलत नहीं हूॅ तो हूजूर जा रहे हैं क्या? राजा का दिल धडका – अंधा अब क्या कहना चाहता है? राजा रूक गए। अंधे ने राजा से मुखाबि होकर बोला – हूजूर, बहुत दिनों से, आपसे मिलने की इच्छा थी। एक बात कहनी थी। मैं जानता हूॅ, इस बात को सुनते ही आप मेरा सर अवश्य कलम करा देगें। लेकिन हूजूर, मैं अपनी फितरत से मजबूर हूॅ। मैं झूठ बोल नहीं सकता और आप सच सुन नहीं सकते। राजा का दिल जोर से धडक रहा था। उत्तेजना बरदास्त नहीं हो रही थी। तभी अंधे ने कहा – ‘‘ हूजूर , यदि मैं गलत नहीं हूॅ, तो रानी बदचलन हैं।
    राजा का सर चक्कर खाने लगा। सर पकडकर वहीं बैठ गया। अंधे की पिछली घोषणायें उसे डरा रही थी। राजा ने अपने को सम्भाला। दरबार में आए – सेनापति को बुलाए। मैं दो दिनों के लिए राज्य से बाहर शिकार खेलने के लिए जा रहा हूॅ। व्यवस्था संचालन आपके हाथें में होगी।
    राजा को कहाॅ चैन। वो उसी रात रनिवास में वापस पलट गया। सेनापति रानियों के साथ पकडा गया। रानियों का और सेनापति का क्या हुआ, मुझे नहीं पता। पर राजा ने अंधे का पहरा और सख्त करा दिया।
    अब राजा का किसी काम में मन नहीं लगता था। रनिवास जाते वक्त वो हमेशा डरा रहता था कही अंधा आवाज ना दे दे। समय बीतता रहा, राजा का भय धीरे धीरे जाता रहा। तभी एकाएक एक दिन अंधे ने राजा को आवाज दी। हूजूर, दो मिनट का समय, मुझे देगें क्या ? राजा को काटो तो खून नहीं। कलेजा मुहॅ को आने लगा। अब ये क्या कहेगा ? राजा करीब आए। लडखडाती आवाज में बोले – बोलो, क्या बोलना चाहते हो। अंधे ने गम्भीर आवाज में कहा – लगता है हूजूर, मेरा दिन पूरा हो गया है। आज जो मैं कहने जा रहा हूॅ, वह सुनने के बाद आपके द्वारा मेरा सर कलम ना कराया जाना  आपके मर्दानगी को चुनौती होगी। लेकिन क्या करू हूजूर, फितरत से मजबूर हूॅ। झूठ मैं बोलता नहीं और सच आपको पंसद नहीं। ‘‘ मुझे लगता है हूजूर, आपकी पैदाईश में ही खोट है।‘‘ राजा आपा खो बैठा – चिल्लाया – क्या बकते हो। अंधे ने सर्द और ठण्ठे आवाज में कहा – जो आपने सुना, वो सच है। निर्णय आपको करना है – मेरा सर कलम पहले करायेगें या तहकीकात ?
    राजा का सर चक्कर खा रहा था। आखिर अंधे को वो बातें कैसे मालूम है जो मुझे भी नहीं पता? अंतिम बात ने राजा के सारे कसबल निकाल दिए थे। राजा इसी उधेड बीन में अपना समय काट रहा था कि अपनी पैदाईश का सच कैसे पता करे ?
    तभी एक दिन राजमाता ने पुत्र से प्रयागराज स्नान करने की इच्छा व्यक्त की। राजा राजमाता को संगम स्नान के लिए प्रयागराज लाए। माॅं ने संगम में डुबकी लगायी और जब सर पानी से बाहर निकाला – तो सामने कमर इतने पानी में अपने पुत्र को हाथ जोडे खडा पाया। राजा ने विनित और कातर स्वर में मॅा से पूछा – माॅ , ये वो स्थान है, जहाॅ कोई झूठ नहीं बोलता। सच सच बताओं मेरी पैदाईश की क्या कहानी है।
    राजमाता की आॅखे डबडबाई और लरजते स्वर में  उन्होने कहा – पुत्र, जिस राज को मैं आजीवन अपने सीने में छिपायी रही, आज तुमसे कहती हूॅ – ’’ तुम मेरी जिन्दगी की, एक भूल के परिणाम हो।’’ सच उद्घाटित हो चुका था। अंधा एक बार फिर सही साबित हुआ था। राजा के दिमाग की चूले हिल गयी। अब वो सबकुछ जानना चाहता था। पर उसकी मजबूरी थी, सारे प्रश्नों का उत्तर अंधे के पास था।
    राजा प्रयागराज से वापस आया। उसने सेनापति को आदेश दिया, अंधे को दरबार में पेश किया जाए। अंधा दरबार में लाया गया। राजा ने अंधे से कहा – एक एहसान और करो मेरे उपर, वरना मेरा दिमाग, जिज्ञासा से फट जायेगा। अंधे ने गम्भीर आवाज में पूछा – क्या जानना चाहते है और कहाॅ से शुरू करू। राजा ने अपने को काबू में रखते हुए पूछा – तुम्हे कैसे पता चला – घोडा, बूढी घोडी की औलाद है ?
    अंधे ने सर्द आवाज में कहा – इसका उत्तर बहुत आसान है हूजूर। मैने घुडसवार से पूछा था। कितनी दूर से आ रहे हो ? उसने कहा था – दस कोस से। फिर मैने उस घोडे की पीठ पर हाथ फेरकर देखा था। वह पसीने से लथपथ था। मैं तत्काल समझ गया किसी नौजवान घोडी की औलाद मात्र दस कोस की दूरी तय करके पसीने से नहीं नहायेगी। यह अवश्य ही किसी बूढी घोडी की औलाद है।
    राजा ने दबी जुबान में पूछा – और हीरा खोखला कैसे था ? अंधे के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आई –  अंधे ने कहा – हूजूर, इसका उत्तर पहले प्रश्न से भी आसान है। मैने हीरे को हाथ में लेकर देखा था। उसकी लम्बाई और चैडाई के अनुपात में मुझे उसका वजन नहीं लगा। मैं समझ गया हीरा अंदर से खोखला है।
    राजा की जिज्ञासा जहाॅ धीरे धीरे शांत हो रही थी,वही अगला प्रश्न उसकी धडकनों को बढा रहा था। राजा ने दबी जबान में रानी के बदचलन होने की बात पूछी। अंधे ने गम्भीर आवाज में राजा से कहा – हूजूर , इस प्रश्न का उत्तर और भी आसान है। मैं आपके कदमों की आहट को पहचानता हूॅं । आपके रनिवास में आकर, चले जाने के बाद कोई व्यक्ति रनिवास में आता था। में तत्काल समझ गया रानी बदचलन है।
    अब राजा के परीक्षा की घडी थी, सवाल उनकी पैदाईश की थी। आखिर अंधे को इसका पता कैसे चला ? उनकी दिमाग की नसे फटी चली जा रही थी। आखिरकार हिम्मतकर के राजा ने ये सवाल भी अंधे से पूछ ही लिया। अंधा गम्भीर हुआ और फिर कहना शुरू किया – ‘‘ हूजूर, मैं आपको सच पे सच बतलाता गया, मुझे इनामोइकराम से नवाजने के बजाय आप मेरा पहरा सख्त से सख्त करते चले गए। मेरी निगरानी बढाते गए। मैं समझ गया, ऐसा व्यवहार वही व्यक्ति कर सकता है, जिसकी पैदाईश में खोट हो। इतना कहकर अंधा खामोश हो गया।
    सभा स्तब्द्ध थी,राजा हतप्रभ। अंधे का क्या हुआ , मुझे नहीं पता। पर हूजूर, दावे से एक बात कह सकता हूॅ, अब ऐसे अंधे, आज के दौर में आॅखों वालों को भी खोजे नहीं मिलते।

    डा.( मेजर ) अरविन्द कुमार सिंह

    डा. अरविन्द कुमार सिंह
    डा. अरविन्द कुमार सिंह
    उदय प्रताप कालेज, वाराणसी में , 1991 से भूगोल प्रवक्ता के पद पर अद्यतन कार्यरत। 1995 में नेशनल कैडेट कोर में कमीशन। मेजर रैंक से 2012 में अवकाशप्राप्त। 2002 एवं 2003 में एनसीसी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित। 2006 में उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी अधिकारी के रूप में पुरस्कृत। विभिन्न प्रत्रपत्रिकाओं में समसामयिक लेखन। आकाशवाणी वाराणसी में रेडियोवार्ताकार।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    11,731 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read