काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता

काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता 
तुम्हारे कानो से चिपका होता 
तुम अपने दिल की बात कहती
मैं अपने दिल की बात कहता 

काश ! तुम मेरे मोबाइल होते
भले ही मेरे कानो से चिपके होते
पर जब मैं बॉय फ्रेंड से बात करती 
तुम्हारे दिल में कडवाहट होती 

काश ! मै तुम्हारा दीपक होता 
तुम मेरी तेल बाति होती 
मै सारी रात जलता रहता 
तुमको प्रकाश  देता रहता 

काश ! तुम मेरे दीपक होते 
भले ही तुम्हारी तेल बाति होती 
जब तेल तुम्हारा खत्म हो जाता 
सुबह तुम्हे कूड़े में फैक आती 

काश ! तुम्हार गणेश होता 
घर में तुम्हारे पूजा जाता  
रोज तुम्हारे लडडू खाता 
खूब मौज मस्ती मनाता 

काश ! तुम मेरे गणेश होते 
भले ही तुम रोज पूजे जाते  
और खूब मौज मस्ती मनाते
पर हर वर्ष तुम्हारा विसर्जन करती 

काश ! मैं तुम्हारा राम होता 
कलयुग में मैं पैदा होता 
तुम सीता सी पत्नि होती 
कितनी अच्छी ये बात होती 

काश ! तुम कलयुग मै पैदा होते 
मै सीता सी सावित्री न होती  
तुम अकेले बन बन में भटकते 
मैं अकेले ही मौज मस्ती लेती 

आर के रस्तोगी  

3 thoughts on “काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता

    1. श्री मधुसूदन जी
      नमस्कार ,
      आपका स्वास्थ कैसा है |चूकि आज कल अमेरिका में भी काफी ठण्ड पढ रही है |कविता पर लिखी टिपण्णी के लिये बहुत बहुत धन्यवाद | मै आपके लिये कोई कवि नहीं हूँ मै तो आपका एक छोटा भाई हूँ.

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