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    Homeसाहित्‍यकविताउसकी मोहब्बत में

    उसकी मोहब्बत में

    उसका ना हो पाया तो
    अपना उसे बना लूँगा
    बिना लिए सात फेरे
    मोहब्बत निभा लूँगा

    संभव नहीं होगा मिलन
    मुश्किल होगा अगर दर्श
    करके अपनी आँखें बंद
    मैं कर लूँगा उसे स्पर्श

    छिन जायेगी आवाज़ मेरी
    खामोशियाँ उसे सुना दूँगा
    मैं उसकी मोहब्बत में
    खुद को भी भुला दूँगा

    रुक जाएँगी जब साँसे
    दुनिया मुझे जलाएगी
    चिता से उठती आग भी
    उसकी आकृति बनाएगी

    ✍️ आलोक कौशिक

    आलोक कौशिक
    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

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