धूम्रपान करने वालों में खांसी, फेफड़े की बीमारी की सूचक

सरफ़राज़ ख़ान

जिन लोगों में क्रोनिक खांसी और बलगम आता हो उनमें क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव आर्टरी डिसीज (सीओएडी) का खतरा बहुत ज्यादा होता है। सीओएडी को क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) के नाम से भी जाना जाता है जो मौत का चौथा प्रमुख कारण होती है। यह क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस और एम्फाइसीमा के एक साथ होने से होती है जिससे फेफड़े बड़े और कमजोर हो जाते हैं। सीओएडी का मुख्य कारण धूम्रपान करना होता है।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़ अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पायरेटीर एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाषित एक अध्ययन का हवाला देते हुए डॉ. अग्रवाल ने बताया कि क्रोनिक खांसी और बलगम आने की स्थिति में धूम्रपान करने वालों में इसके लक्षण असामान्य नहीं होते, बल्कि यह जल्द एयरफ्लो ऑब्स्ट्रक्षन के सूचक होते हैं। अध्ययन में जिन लोगों में क्रोनिक कफ और बलगम आता था, उनमें सीओएडी का खतरा चार गुना ज्यादा देखा गया। अभी तक यह सोचा जाता था कि सिर्फ 15 फीसदी धूम्रपान करने वालों में सीओएडी होता है, लेकिन हाल के षोध में सुझाया गया हे कि धूम्रपान करने वालों में ताउम्र 50 फीसदी में सीओएडी का खतरा रहता है। अगर सही से ध्यान नहीं दिया गया तो सीओएडी की वजह से दिल पर भी असर होता है जिसके तहत हार्ट फेल्योर की वजह से समस्या और मौत का खतरा बढ़ जाता है।

धूम्रपान को त्यागकर इसकी स्थिति में उल्टाव लाया जा सकता है। धूम्रपान को छोड़ने में जितनी ज्यादा देर हो जाएगी, उतनी ही गति से इस बीमारी को दूर करने में वक्त लगता है। (स्टार न्यूज़ एजेंसी)

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