जगत की जटिल राजनीति में उलझा हुआ भारत।


        ज के समय में राजनीति ने सब-कुछ अपने हित के अनुसार बाँध रखा है। छोटे से छोटा प्रतिनिधि अपने इच्छा एवं राजनीति के समीकरणों के अनुसार ही फैसले लेता है। प्रत्येक फैसले राजनीतिक लाभ एवं हानि के अनुसार ही किए जाते हैं। क्योंकि, एक छोटा से छोटा नेता अपनी कुर्सी को कभी भी त्यागना नहीं चाहता। प्रत्येक राजनेता प्राप्त की हुई कुर्सी को सदैव के लिए हथियाना चाहता है। यदि शब्दों को परिवर्तित करके कहा जाए तो संभवतः गलत नहीं होगा कि प्रत्येक राजनेता को कुर्सी एवं सत्ता पर बने रहने की लालसा होती है जिसके लिए वह सब-कुछ कर गुजरने के लिए तैयार रहता है। इसी राजनीतिक कुर्सी को हथियाने के लिए नेता गण जातीय समीकरणों का भी ध्यान रखते हैं, समाजिक ताने-बाने को भी संपूर्ण रूप से ध्यान देते हैं। कुर्सी हेतु जनता को अपने पाले में कैसे करना है पूरा ध्यान इसी पर केंद्रित होता है। इससे इतर राजनीति का दूसरा रूप एक और भी है। जोकि, आजकल बड़ी ही तीव्रता के साथ में चलन में आया है। वह यह है कि यदि कोई भी उभरता हुआ नेता जोकि, आने वाले समय में हमारी कुर्सी को छीन सकता है उसके रोकने के लिए अनेकों प्रकार के उपाय करना। चाहे जिस प्रकार से उस उभरते हुए नेता को रोका जाए। परन्तु, उभरते हुए नेता को सत्ता पर विराजमान नेता सदैव दबाने का भरसक प्रयास करता है, साथ ही उसकी छवि धूमिल करने हेतु जातीय आधार पर भी उसको अलग-थलग करने का कार्य किया जाता है जोकि किसी से भी छुपा हुआ नहीं है। तमाम षड़यन्त्रकारी रूप रेखा को अपनाना आज की राजनीति का मुख्य हिस्सा है।

     इन सभी राजनीतिक रूपरेखा को प्रस्तुत करना इसलिए आवश्यक था कि विश्व की जटिल राजनीति को देश की जनता तक स्पष्ट रूप से पहुँचाया जा सके। आज के समय में भारत एक उभरता हुआ राष्ट्र है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह का संदेह नहीं है। आज के समय में विश्वस्तर पर भारत आपनी अलग ही छाप छोड़ने में सफल रहा है। चाहे आर्थिक रूप से हो, चाहे बौद्धिक रूप से हो, अथवा विश्वस्तरीय परमाणु शक्ति से सम्पन्नता के क्षेत्र में हो। पिछले कुछ समय से भारत बड़ी ही तीव्रता के साथ विश्व पटल पर आगे बढ़ने में सफल रहा है।

     ज्ञात हो कि परमाणु पोखरों परीक्षण में पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे कलाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब हमारा देश परमाणु संपन्नता से सर्वशक्तिशाली बना तो विश्व स्तर पर भारत का विरोध चरम सीमा पर हुआ। उस समय भारत के प्रधानमंत्री स्व0 अटल विहारी वाजपेयी जी थे। विश्व में अपनी धाक रखने वाले अमेरिका और चीन ने भारत पर दबाव बनाने का भरसक प्रयास किया। परन्तु, अपने इरादों में अटल रहने वाले अटल जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उस समय भारत के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञनिक ए.पी.जे कलाम के कंधों से कंधा मिलाकर अटल जी ने चलने का कार्य किया। जिसका परिणाम आज देश की जनता के सामने है। स्व0 कलाम जी ने भारत को संपूर्ण विश्व के सामने शीर्ष पर विराजमान किया। जिससे अमेरिका और चीन जैसे देशों को भारत की बुद्धिजीविता एवं सशक्तिकरण का लोहा मानना एवं नतमस्तक होकर स्वीकार्य करने पर विवश एवं मजबूर होना पड़ा।

     उसके बाद लगातार भारत की बढ़ती हुई साख से अमेरिका और चीन दोनों भारत से ईर्ष्या रखते हैं। अमेरिका और चीन को इस बात का भय है कि यदि इसी प्रकार भारत विश्व स्तर पर अपनी साख बढ़ाता रहा तो हमारा पतन होना निश्चित है।

     भारत के लिए ध्यान देने योग्य बिन्दु यह है कि अमेरिका और चीन जहाँ एक दूसरे के धुरविरोधी हैं वहीं पाकिस्तान पर दोनों का रवैया लचीला क्यों? इसके पीछे क्या उद्देश्य है। क्या, कभी ऐसा हो सकता है कि दो धुर विरोधी दुश्मन एक ऐसे देश से लगाव रखें जोकि, दुश्मन देश का घनिष्ठ मित्र हो। ज्ञात हो कि चीन से पाकिस्तान की दोस्ती जगजाहिर है। चीन एवं पाकिस्तान की मित्रता की पराकाष्ठा यह है कि चीन पाकिस्तान को एक छोटे भाई की तरह सम्मान देता है। जब-जब भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाने का प्रयास किया तब चीन ने विश्व के सामने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया। समस्या तो यहां तक आ गई की यदि भारत पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध की बात करता है तो चीन खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करते हूए भारत का विरोध करता है। विश्व स्तरीय एन0एस0जी सदस्यता इस बात का मजबूत प्रमाण है। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत को शामिल न होने देने के लिए चीन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। चीन लगातार भारत का विरोध करता रहा और पाकिस्तान के प्रति चीन और अमेरिका दोनों का रवैया एक रहा।

     दो विश्वस्तरीय धुरविरोधियों के बीच पाकिस्तान की दोनों से घनिष्टता एक ऐसी शतरंज रूपी चाल है जोकि, विश्व की राजनीति को समझने वालों के गले नहीं उतर रही है। अमेरिका जहाँ पाकिस्तान को आर्थिक मदद प्रदान करता है वहीं चीन पाकिस्तान के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है। जिसे भारत को बहुत ही गंभीरता पूर्वक समझने की आवश्यकता है। भारत के बढ़ते हुए कदम को रोकने के लिए यह विश्वस्तरीय सोची समझी साज़िश है। जिसे सुनियोजित ढंग से पाकिस्तान के माध्यम से भारत को आर्थिक,शारीरिक एवं बौद्धिक स्तर पर उलझाने का प्रयास है। इसे बहुत ही गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। क्योंकि, अमेरिका ने हथियारों की दुकान खोल रखी है जिसे अमेरिका पाकिस्तान के माध्यम से पूरे विश्व में चला रहा है। संपूर्ण विश्व आतंक से निपटने के लिए हथियार खरीदता है जिसका मुख्य निर्यातक अमेरिका और रूस है। चीन पाकिस्तान के साथ इसलिए खड़ा है कि वह भारत के हिन्दमहासागर में अपनी मज़बूत पैठ बनाना चाहता है। उसके बाद चीन डोकलाम एवं अरूणांचल प्रदेश में भी अपनी पैठ बनाना चहता है। भारत का एक बड़ा क्षेत्र जोकि पाकिस्तान के माध्यम से आज चीन के कब्जे में है।

अतः भारत को बड़ी ही बुद्धिजीविता के साथ पाकिस्तान की रूप रेखा को समझना चाहिए। क्योंकि, चीन और अमेरिका पाकिस्तान के कंधे पर बन्दूक रखकर स्वयं चला रहे हैं। दिखावे में तो सामने चेहरा पाकिस्तान का है। परन्तु, परदे के पीछे चीन और अमेरिका का पूरा समीकरण है। इसलिए चीन अमेरिका और रूस की तिकड़ी के मध्य फंसे हुए भारत को बड़ी ही बुद्धिजीविता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। क्योंकि, यह राष्ट्रीय स्तर की तिकड़ी उभरते हुए भारत को उलझा करके कमज़ोर करना चाहती है।

सज्जाद हैदर

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