भारत गुलामी की ओर……..

 ‘‘ जिनके दिल में दर्द है दुनिया का, वही दुनिया मे जिन्दा रहते है!
जो मिटाते है खुद को जीते जी, वही मरकर जिन्दा रहते है!!’’
अगर हम आपसे कहे कि भारत एक बार फिर गुलामी की ओर बढ़ रहा है, तो शायद आपकों कुछ अटपटा सा लगेगा। हो भी क्यों नही। क्योकि जहां से आप देख रहे है वहां से हो सकता है कि मेरा यह कथन आपको फजूल लग रहा हो लेकिन जहां से मै देख रहा हॅंू वहा से मुझे यह कहने में तनिक भी हिचक ही नही बल्कि रंजोगम इस बात का है कि जिस मातृभूमि को हमारे देश के पुरोधाओं ने अपने पवित्र लहू से सिंचकर मां भारती को स्वंत्रंत कराया था वही भारत आज हमारे नीति-नियंताओं के नीतियों के कारण गुलामी की ओर बढ़ रहा है। क्या हमने कभी यह महसूस किया है कि हम विदेशी वस्तुओं के आदी होते जा रहे। देश के महा नगरों से लगायत छोटे-बड़े कस्बे और गांव के गलियारें चीन से निर्मित वस्तुओं से पटा पड़ा है जो आने वाले दिनों में हिन्द के लिए हिन्द के लिए अशुभ संकेत है। आज के युवा पीढी को सोलहवी शताब्दी की बात याद करना होगा। जब फिरंगी मां भारती के पावन धरती पर सिर्फ व्यापार करने आये थे और देखते ही देखते हिन्द के सरजमी पर अपना राज कायम कर हमे अपना गुलाम बना लिया। हमे यह नही भूलना चाहिए कि उन फिरंगियों को सात समुन्दर पार खदेढ़ने में भारत मां के सपूतों को तकरीन साढे तीन सौ साल लग गए थे। लेकिन वही गलती अगर अब हम दोहरागें तो हमे स्वतंत्र होने में कितने पीढ़ी गुजर जायेगें इसका भविष्यवाणी करना बड़ा मुश्किल है। क्योकि चीन के दोगली नीति उन फिरंगियों से खतरनाक है जो कभी भिखारी बनकर आये थे और हमे ही लूट कर चले गए। हिन्द के लोगों को पचास साल पुरानी बात को नही भूलनी चाहिए जब चीन 1962 के युद्व में ‘ हिन्दी-चीनी,भाई-भाई’ कह कर हमारे पीठ में chinaछूरा घोपने का घिनौना कार्य कर चुका है।
‘‘ ना सर झूका है कभी ना झूकायेगी कभी !!
जो अपने दम पर जिए सच में जिन्दगी है वही !!’’
बेशक! आजादी के छह दशक बाद हिन्द न सिर्फ विकसित राष्ट्र बल्कि एक महाशाक्तिशाली देश के रूप में विश्व के नक्शा में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है। लेकिन इस बात से भी इन्कार नही किया जा सकता है कि आज हिन्दुस्तान के बाजार पर चाइना का नजायज कब्जा हो गया। इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लगायत खाद्य पदार्थो का सेवन करने के लिए हम चाइना के मोहताज बनते जा रहे है। यही वजह है कि चाइन निर्मित वस्तुए भारत के उद्योग व्यवस्था को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है, जो खतरे का संकेत है। इतना ही नही इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता है कि हजारों वर्ग किमी जमीन पर पडोसी का अवैध कब्जा भी है। इन सबके बावजूद हमारे देश के नीति-नियंताओं की राय में चीन हमारे लिए अंतराष्ट्रीय व्यापार के लिए इतना महत्वपूर्ण बन गया है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ‘स्वदेशी’ के सपने को चकनाचूक करने में यह तनिक भी परहेज नही कर रहे है। जरा सोचिए! आजादी के लड़ाई में महात्मा गांधी के गाडी़व से निकला ‘स्वदेशी अपनाओ’ का अचूक अस्त्र ने फिरंगियों को घूटना टेकने पर मजबूर कर दिया था। जिस स्वदेशी के बल पर हमारे देश के अमर शहीदों ने आजादी हासिल की थी आज हम हिन्दवासी उसी स्वदेशी को नकार कर विदेशी वस्तुओं को तब्बजों दे रहे। मेरा मानना है कि जो जिस देश के लोग अपना इतिहास भूल जाते है वह देश न तो कभी प्रगति कर सकता है और न ही उस देश के लोगों की कभी उन्नति हो सकती है। विचार कीजिए! जिस तरह भारत के बाजारों में चीन निर्मित वस्तुए जैसे चाइनीज मोबाइल, इलेक्ट्रानिक उपकरणो के अलावा खाद्य पदार्थ के रूप में डालडा, आलू, सेव,सौर्दर्य प्रसाधन, कपडे और पालीथिन आदि ने पावं पसारा है उसके बाद यह कहने में तनिक भी हिचक नही होगा कि चीन हमारी अर्थव्यस्था को खोखला करने में लगा है। ऐसे में हम हिन्दवासियों को इस गम्भीर मुद्दे पर गम्भीरता से सोचना होगा। इसमे कोई सन्देह नही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना ने जो मुहिम शुरू किया था वह समय की मांग थी। भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत होना ही चाहिए, किन्तु राजनीति के माहिर खिलाडियों ने फिरंगी नीति के तहत उस आन्दोलन का भी दमन कर दिया। ‘गांधी बाबा के स्वदेशी अपनाओं’ के सपने को भी नजरअन्दाज मत कीजिए। इस लिए आजादी के पैसठ साल बाद एक बार फिर गांधीजी के ‘स्वदेशी अपनाओ विदेशी जलाओं’ का मशाल लेकर हमने आगे बढ़ना होगा!

‘‘ सपनों के उगने से लेकर सपनों की नीलामी तक!
हमने क्या-क्या देख लिया शोहरत से गुमनामी तक!!
!! जय हिन्द!!

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