दो बेजोड़ योद्धाओं के साथ तैयार भारतीय वायुसेना

जंग में वायुसेना की ताकत बनेंगे चिनूक-अपाचे

योगेश कुमार गोयल

            चीन के साथ बढ़ रहे तनावपूर्ण माहौल में भारतीय वायुसेना ने चीन से लगे सभी अग्रिम मोर्चों पर हाई अलर्ट के साथ अपने लड़ाकू विमानों और हेलीकाप्टरों की तैनाती बढ़ा दी है। वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू जेट सुखोई, जगुआर, मिराज-2000, मिग के अलावा अत्याधुनिक तकनीकों से लैस अपाचे और चिनूक हेलीकाप्टरों को भी लेह-लद्दाख इलाकों में तैनात कर दिया गया है। ये दोनों ऐसे हेलीकॉप्टर हैं, जो चीन की वायुसेना पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में इनकी विशेषताओं के बारे में जानना जरूरी है। अमेरिकी कम्पनी ‘बोइंग’ द्वारा निर्मित सीएच-47एफ चिनूक हेलीकॉप्टर दुनिया के कई प्रमुख देशों में काफी लोकप्रिय हैं, जो पिछले साल वायुसेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं। यह अमेरिकी हेलीकॉप्टर बहुत ज्यादा वजन उठाने में सक्षम है। यह वही हेलीकॉप्टर है, जिसके जरिये अमेरिका ने दुर्दान्त आतंकवादी ओसामा-बिन-लादेन को मार गिराया था।

            चिनूक ऐसा एडवांस्ड मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय वायुसेना को बेजोड़ सामरिक महत्व की हैवी लिफ्ट क्षमता प्रदान करता है, साथ ही इसका मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर बहुत तेज गति से 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने और 11 टन तक का वजन ले जाने में सक्षम है और इसका इस्तेमाल दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर सेना के जवानों, हथियारों, मशीनों तथा अन्य प्रकार की रक्षा सामग्री ले जाने में आसानी से किया जा सकता है, जिससे ऐसे स्थानों पर तैनात सेना के जवानों को जरूरत पड़ने पर हथियार तथा अन्य भारी-भरकम रक्षा सामग्री आसानी से मुहैया करवाई जा सकती है। यह छोटे हेलीपैड तथा घनी घाटियों में भी उतर सकता है और किसी भी प्रकार के मौसम का सामना कर सकता है। इसमें एक साथ 45 सैनिकों के बैठने की व्यवस्था है और इसमें छोटी तोपें, बख्तरबंद गाडि़यां इत्यादि विभिन्न युद्धक सामान नीचे लटकाकर कहीं भी ले जाए जा सकते हैं।

            चूंकि चिनूक बहुत तेज गति से उड़ान भरता है, इसलिए बेहद घनी पहाडि़यों में भी यह सफलतापूर्वक कार्य कर सकता है। मल्टी रोल, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म वाला यह हेलीकॉप्टर 315 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है। आमतौर पर वायुसेना के हेलीकॉप्टर में सिंगल रोटर इंजन होता है जबकि चिनूक में दो रोटर इंजन लगे हैं, जो नया कॉन्सेप्ट माना गया है। इसमें कोई टेल रोटर नहीं है बल्कि इसमें अधिक सामान ढ़ोने के लिए दो मेन रोटर लगाए गए हैं। भारी सामान ढ़ोने के लिए इसमें तीन हुक लगे हैं। रात में भी उड़ान भरने और ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम यह हेलिकॉप्टर घने कोहरे तथा धुंध में भी बखूबी कारगर है। इसे बेहद कुशलता के साथ मुश्किल से मुश्किल जमीन पर भी ऑपरेट किया जा सकता है। चिनूक में मिसाइल वार्निंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है तथा इसमें तीन मशीनगन भी सैट की गई हैं। लैंडिंग के समय जमीन पर मौजूद किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए इनका इस्तेमाल होता है।

            मौजूदा समय में यह अमेरिका के सबसे तेज हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है, जिसमें कॉमन एविएशन आर्किटेक्चर कॉकपिट तथा एडवांस्ड कॉकपिट प्रबंध जैसी विशेषताएं भी हैं। समय की मांग के साथ चिनूक में पूर्णतया एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट प्रणाली सहित रोटर ब्लैड, एंडवांस्ड फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम इत्यादि कई बदलाव करते हुए इसके वजन को कम किया गया है और तकनीक में सुधार करते हुए इसे बेहद उन्नत बनाया गया है। हालांकि चिनूक का आकार काफी बड़ा है लेकिन बड़े आकार के बावजूद अन्य हेलीकॉप्टरों के मुकाबले इसकी गति बेहद तेज होती है, जिससे दुर्गम स्थानों पर भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इसका इस्तेमाल अन्य युद्धक हेलीकॉप्टरों की तरह सीधे तौर पर युद्ध में दुश्मन पर हमला करने में नहीं होता बल्कि यह सैनिकों तथा सैन्य साजो-सामान को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने के लिए उपयोग किया रहा है। ऐसे में चीन से जंग होने की स्थिति में भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

            चिनूक के अलावा अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी चीन के खिलाफ वायुसेना को काफी मजबूती प्रदान करेंगे। ‘बोइंग’ द्वारा निर्मित ‘लादेन किलर’ नाम से विख्यात एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर को दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हेलीकॉप्टरों के रूप में जाना जाता है। यह अमेरिकी सेना तथा कई अन्य अतंर्राष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस मल्टी रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो एक साथ कई कार्यों को अंजाम दे सकता है। इसे दुनिया की सबसे परिष्कृत ऐसी घातक मशीन कहा जाता है, जो दुश्मनों पर बहुत बेरहम साबित होती है। अपाचे को दो पायलट उड़ाते हैं, मुख्य पायलट पीछे बैठता है, जिसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है, वही हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करता है जबकि आगे बैठा दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फायर करता है। अपाचे का निशाना बहुत सटीक है, जो युद्ध के मैदान में केवल दुश्मन के परखच्चे उड़ाने का ही काम नहीं करता बल्कि युद्धस्थल की तस्वीरें खींचकर उन्हें अपने एयरबेस पर ट्रांसमिट भी कर देता है।

            करीब 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे के बड़े विंग को चलाने के लिए इसमें दो इंजन फिट हैं, जिस कारण इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है। भारतीय वायुसेना की सामरिक जरूरतों के लिहाज से अपाचे इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी वायुसेना की जरूरत के मुताबिक ही इसमें अपेक्षित बदलाव किए गए हैं। यह ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो दुश्मन की नाक के नीचे किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इसे छिपकर वार करने के लिए जाना जाता है। दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर उसके इलाके में आसानी से घुसने की क्षमता, जमीन के काफी करीब उड़ान भरने में कारगर, हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों और बंदूकों से लैस, सिर्फ 1 मिनट में 128 टारगेट निशाना बनाने तथा दिन के अलावा रात में भी आसानी से कहीं भी जाने में सक्षम, किसी भी मौसम में उड़ान भरने तथा आसानी से टारगेट डिटेक्ट करने में सक्षम, दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा देने में माहिर इत्यादि अनेक खूबियों से लैस अपाचे का अमेरिका पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों को धूल चटाने के लिए इस्तेमाल कर चुका है।

            इसमें सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में परिचालित होने की अद्भुत क्षमता है। 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण आसानी से दुश्मनों के टैंकरों के परखच्चे उड़ा सकता है। बहुत तेज रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रूके हुए लक्ष्यों को आसानी से भांप सकता है। एक मिनट के भीतर यह 128 लक्ष्यों से होने वाले खतरों को भांपकर उन्हें प्राथमिकता के साथ बता देता है। इसे इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है। यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है और नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढ़ोने में सक्षम है। टारगेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के लिए इसमें लेजर, इंफ्रारेड, सिर्फ टारगेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर सहित कई आधुनिक तकनीकें समाहित की गई हैं।

            अपाचे एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है और इसकी फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। इसमें 360 डिग्री तक घूम सकने वाला अत्याधुनिक फायर कंट्रोल रडार तथा निशाना साधने वाला सिस्टम लगा है। दो जनरल इलैक्ट्रिक टी-700 हाई परफॉरमेंस टर्बोशाफ्ट इंजनों से लैस इस हेलीकॉप्टर में आगे की तरफ एक सेंसर फिट है, जिसके चलते यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका सबसे खतरनाक हथियार है 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता। दरअसल इसमें हेलिफायर, स्ट्रिंगर मिसाइलें, 70 एमएम हाइड्रा एंटी ऑर्मर रॉकेट्स लगे हैं और मिसाइलों के पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है। इसके वैकल्पिक स्टिंगर या साइडवाइंडर मिसाइल इसे हवा से हवा में हमला करने में सक्षम बनाते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर के नीचे दोनों तरफ 30 एमएम की दो ऑटोमैटिक राइफलें भी लगी हैं, जिनमें एक बार में शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30 एमएम की 1200 गोलियां भरी जा सकती हैं। इसका सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम, जिनकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। 17.73 मीटर लंबे, 4.64 मीटर ऊंचे तथा करीब 5165 किलोग्राम वजनी इस हेलीकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की व्यवस्था है। इसका अधिकतम भार 10400 किलोग्राम हो सकता है। डेटा नेटवर्किंग के जरिये हथियार प्रणाली से और हथियार प्रणाली तक, युद्धक्षेत्र की तस्वीरें प्राप्त करने और भेजने की इसकी क्षमता इसकी खूबियों को और भी घातक बना देती है। चीनी वायुसेना के पास भले ही भारत से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हैं लेकिन उसके पास ऐसे खतरनाक हेलीकॉप्टरों की खेप नहीं है, ऐसे में ये हेलीकॉप्टर उस पर भारी पड़ सकते हैं।

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