ट्वीट से नहीं बल्कि जमीनी सुधार से सुधरेगी भारतीय रेलवे

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मौजूदा वक़्त में भारत सरकार के जिस मंत्रालय की सबसे अधिक चर्चा है वह रेल मंत्रालय है। रोजाना कई करोड़ों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने वाली भारतीय रेलवे बीते कई दशकों से ख़राब हालत से गुज़र रही थी। 2014 में केंद्र की सत्ता परिवर्तित होने के बाद से ही भारतीय जनता रेलवे की बदहाल व्यवस्था में सुधार लाये जाने की उम्मीद लगाये बैठी थी। गौरतलब है कि चुनावी दिनों में तत्कालीन भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मेदवार नरेंद्र मोदी ने कई मंचों से भारतीय रेलवे की हालत सुधारने तथा बुलेट ट्रेन जैसी अन्य तमाम सुविधाओं की बातें और वादे किये थे।

केंद्र की सत्ता मिलने के बाद से ही मोदी सरकार के रेल मंत्रालय के द्वारा किये जाने वाले तमाम कार्यों की चर्चा रोजाना अखबारों व लोगों द्वारा सुनाई दे रही है। वर्तमान समय में केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेलवे मंत्रालय यात्रियों की परेशानियों को सुनने के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर का जमकर सहारा ले रहे हैं। ट्विटर से रेल में सफ़र कर रहे यात्रियों को तुरंत मदद पहुंचाई जा रही है। इसके कई उदहारण मौजूदा वक़्त में लगातार देखने व सुनने को मिल रहे हैं। मसलन एक उदाहरण में एक ट्रेन में सफ़र कर रहे है बच्चे के पिता द्वारा ट्वीट किये जाने पर तत्काल दूध व खान-पान की अन्य सामग्री उपलब्ध कराने का भी है। ट्रेन के सात घंटे से अधिक विलंब होने की वजह से बच्चे को भूख लगी और ट्रेन में खाने की कोई व्यवस्था न होने के कारण उनके माता पिता को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा। ट्विटर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु व रेलवे मंत्रालय को टैग करने के बाद हरकत में आते हुए बच्चों को अगले ही स्टेशन पर खाना उपलब्ध कराया गया। इसी तरह एक अन्य मामले में बच्चे के पिता की तबियत ख़राब होने पर ट्रेन को 20 मिनट रुकवाकर जरुरी मदद दी गयी जिससे उनके पिता की तबियत सही हो सकी।

रेलवे मंत्रालय व रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा खुद को सोशल मीडिया पर लाये जाने के बाद से ही समूचा रेलवे तंत्र हरकत में गया है। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक सबकी जबाबदेही तय कर दी गई है। ये सभी यात्रियों की समस्याओं का त्वरित समाधान निकालकर मदद भी पहुंचा रहे हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु और रेलवे मंत्रालय की इस त्वरित मदद की निश्चित ही सराहना की जानी चाहिए लेकिन यह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है कि पिछले कई दशकों से माली हालत से गुज़र रही भारतीय रेलवे को महज सोशल मीडिया के सहारे ही नहीं सुधार जा सकता है। यह बेशक है कि इससे हालत को फौरी तौर पर सुलझाया व मदद प्रदान की जा सकती है लेकिन लंबे वक़्त के लिए रेलवे की हालत सुधारने के लिए उसे जमीनी व ठोस कदम उठाने ही होंगे। ट्रेन के जनरल और स्लीपर क्लास में होने वाली तमाम तरह की दिक्कतों को दूर करने की जरुरत है। इसके अलावा ट्रेन में आरक्षण कराने वक़्त सीटों के न उपलब्ध होने की वजह से भी यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. आरक्षण की यह समस्या सामान्य दिनों में तो आती ही है लेकिन त्योहारों के दौरान यह और भीषण हो जाती है।

रेलवे में समस्याएं महज इतनी ही नहीं हैं बल्कि कई अन्य मामलों में यह समस्याएं और भी व्यापक तौर पर सामने आती हैं. कई बार रेलवे के ट्विटर अकाउंट पर यात्रियों द्वारा ऐसे ट्वीट किये गए जिससे पूरे रेलवे महकमे की वास्तविकता सामने आ गई। भारतीय रेल मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट के अनुसार, कुछ दिनों पहले लखनऊ से कानपुर परीक्षा देने जा रहे दो छात्रों ने ट्वीट के जरिये से शिकायत की कि लखनऊ से ही चलने वाली ट्रेन दो घंटों विलंब है। चंद मिनटों के भीतर ही रेलवे मंत्रालय ने फ़ौरन जवाब देते हुए स्थानीय अफसरों को ट्विटर के जरिये से ही सूचना दे दी लेकिन अफसरों ने पल्ला झाड़ते हुए महज खेद जताकर मामले को शांत कर दिया। रेलवे विभाग की इस नाकामी की वजह से अंततः दोनों छात्रों की परीक्षा कमोबेश घंटेभर की देरी से शुरू हो सकी। पूरे मामले पर अधिक जानकारी हासिल करने पर पता चला कि ज्यादा दूरी तक चलने वाली इस ट्रेन की हालत कमोबेश रोज़ ही ऐसी रहती है। इसी वजह से कई बार यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

एक तरफ जहां भारतीय रेलवे इन तमाम कमियों के दौर से गुज़र रही है तो वहीँ सरकार देश में जापान और चीन के तर्ज पर बुलेट ट्रेन को लाने में जुटी हुई है। इसी वजह से हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बुलेट ट्रेन के खातिर आगामी 50 वर्ष के लिए भारत को कर्ज देने की बात की है। महज 500 किलोमीटर की दूरी के लिए शुरू हो रहे बुलेट ट्रेन के पहले चरण के लिए इतनी बड़ी राशि और देश को 50 वर्ष तक कर्जदार बनाने को लेकर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। बड़ी तादाद में लोगों का मानना है कि सरकार को यह रकम भारतीय रेलवे को सुधारने के लिए लगानी चाहिए जिससे साधारण ट्रेनों में कमियां व यात्रियों को आने वाली परेशानियों को दूर हो सके।

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मदन तिवारी
जागरण समूह के नईदुनिया डॉट कॉम में ट्रेनी सब एडिटर। इसके इतर बीते दो वर्षों से देश के विभिन्‍न प्रतिष्ठित अख़बार जैसे : अमर उजाला (कॉम्‍पैक्‍ट), जनसंदेश टाइम्‍स, प्रजातंत्र लाइव, दैनिक दबंग दुनिया, दैनिक जागरण, डेली न्‍यूज एक्टिविस्‍ट समेत तमाम अन्‍य अखबारों में करीबन 100 के आसपास संपादकीय लेखन। इसके साथ ही वर्तमान समय में कानपुर के जागरण कॉलेज में स्‍नातक का तृतीय वर्ष में पत्रकारिता विद्यार्थी।

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  1. रेलवे में कर दिखाने के लिए बहुत कुछ है। सुरेश प्रभु बड़ी योजनाओ पर काम कर रहे है। साथ ही कुछ छोटे सुधार किए जा सके तो लोग उनकी क्षमता का लोहा मानेगे। वरना वह ट्वीट करने वाले बन कर रह जाएंगे। भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाना और गति देना आवश्यक है। आज विश्व के अन्य देशो में पटना से दिल्ली तक 1300 किलोमीटर की रेल यात्रा महज 9 घण्टे में पूरी हो रही है, हम 20 घण्टे में यह दूरी पूरी कर रहे है। आप एक महीने पहले यात्रा का प्रोग्राम न बनाए तो आपको आरक्षण नही मिल सकता, अनारक्षित डिब्बों में यात्री जानवरो की भाँती ठुसे रहते है। हमे आधुनिक बनना है, गति बढ़ानी है और यात्री क्षमता बढ़ानी है। यह काम कोई प्रभु ही कर सकता है।

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