‘भारत स्वाभिमान’ का कड़वा सच!

बाबा रामदेव ने योग के नाम पर इस देश के लोगों के दिलों में स्थान बनाया| लोगों के स्वास्थ्य के लिये बाबा ने बहुत बड़ा काम किया| लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया| कुछ समय बाद “राजीव दीक्षित” नाम के एक विद्वान व्यक्ति को साथ में लेकर अपने मंच से और आस्था चैनल के माध्यम से तथ्यों तथा आंकड़ों के आधार पर घर-घर में जानकारी दी गयी कि देश के राजनेता न मात्र भ्रष्ट हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था को देश में लागू किया जा रहा है कि जिसके चलते देश को लूटकर विदेशी कम्पनियॉं भारत के धन को विदेशों में ले जा रही हैं|

जब श्री दीक्षित जी बाबा रामदेव के मंच से आँकड़ों सहित यह जानकारी देते तो लोगों का तालियों के रूप में अपार समर्थन मिलता था| लेकिन ये क्या जो बाबा रामदेव लाखों लोगों के हृदय रोग का सफलतापूर्वक उपचार करने का दावा करते रहते हैं, उन्हीं का अनुयाई, उन्हीं का एक मजबूत साथी पचास साल की आयु पूर्ण करने से पहले ही हृदयाघात के चलते असमय काल के गाल में समा गया| जिसका दाह संस्कार करने में साथ जाने वालों का आरोप है कि मृतक को हृदयाघात नहीं हुआ, बल्कि उसे कथित रूप से जहर दिया गया था, क्योंकि उसका शव नीला पड़ गया था!

कौन था यह इंसान? जो बाबा रामदेव का इतना करीबी होते हुए भी हृदयाघात का शिकार हो गया और जिसका शव नीला पड़ जाने पर भी, जिसका पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया गया? वो दुर्भाग्यशाली व्यक्ति राजीव दीक्षित ही था| जो बाबा के अभियान के लिये रातदिन एक करके तथ्य और आँकड़े जुटा कर बाबा के लिये राजनैतिक भूमि तैयार कर रहा था, जिसे कथित रूप से इस बात का इनाम मिला कि वह बाबा के मंच से बाबा से अधिक पापूलर (लोकप्रिय) होता जा रहा था| बाबा से ज्यादा लोग राजीव दीक्षित को सुनना पसन्द करने लगे थे| राजीव दीक्षित के चले जाने के बाद अनेक कथित हिन्दू सन्तों का आरोप है कि राजीव दीक्षित की मौत नहीं हुई, बल्कि उसकी हत्या करवाई गयी| जिसमें बाबा रामदेव सहित, उनके कुछ बेहद करीबी लोगों पर सन्देह है! इस प्रकार बाबा रामदेव का आन्दोलन योग से, स्वदेशी और राजीव दीक्षित के अवसान के रास्ते चलता हुआ ‘‘भारत स्वाभिमान’’ की यात्रा पर निकल पड़ा है|

देशभर में अनेकों लोगों द्वारा बाबा पर बार-बार आरोप लगाये जाते रहे हैं कि उनका असली या छुपा हुआ ऐजेण्डा हिन्दुत्वादी ताकतों और संघ सहित भाजपा को लाभ पहुँचाना है, लेकिन बाबा की ओर से इन बातों का बार-बार खण्डन किया जाता रहा है| यद्यपि सूचना अधिकार कानून के जरिये यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि देश के लोगों से राष्ट्र के उत्थान के नाम पर लिए गए चंदे में से बाबा के ट्रस्ट से भारतीय जनता पार्टी को चुनावी खर्चे के लिये लाखों रुपये तो चैक से ही दिये गये| बिना चैक नगद कितने दिये गये होंगे, इसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है! इस प्रकार बाबा का असली ‘‘संघी’’ चेहरा जनता के सामने आने लगा है| 

‘‘भारत स्वाभिमान’’ के समर्थकों की ओर से जनता को बेशक बेवकूफ बनाया जाता हो कि बाबा का संघ या भाजपा या नरेन्द्र मोदी के मकसदों को पूरा करने से कोई वास्ता नहीं है, लेकिन कथित राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व के प्रखर समर्थक लेखक श्री सुरेश चिपलूनकर जी, जो अनेक मंचों पर संघ, हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद, संस्कृति, रामदेव और भारत स्वाभिमान के बारे में अधिकारपूर्वक लम्बे समय से लिखते रहे हैं| जिनके बारे में कहा जाता है कि वे तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही अपनी बात कहना पसन्द करते हैं| यही नहीं, इनके लिखे का आर एस एस, विश्व हिन्दू परिषद् और भाजपा से जुड़े हुए तथा कथित राष्ट्रवाद, हिन्दुत्व और भारतीय संस्कृति के समर्थक लेखक, विचारक तथा टिप्पणीकार आँख बंद करके समर्थन भी करते रहे हैं| ऐसे विद्वान समझे जाने वाले संघ, नरेन्द्र मोदी, भाजपा और बाबा रामदेव के पक्के समर्थक लेखक श्री सुरेश चिपलूनकर ‘‘रामदेव बनाम अण्णा = भगवा बनाम गॉंधीटोपी सेकुलरिज़्म?? (भाग-२)’’ शीर्षक से लिखे गए और प्रवक्ता डोट कॉम पर २७ अप्रेल, ११ को प्रकाशित अपने एक लेख में साफ शब्दों में लिखते हैं कि-

‘‘……बाबा रामदेव देश भर में घूम-घूमकर कांग्रेस, सोनिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ माहौल तैयार कर रहे थे, सभाएं ले रहे थे, भारत स्वाभिमान नामक संगठन बनाकर, मजबूती से राजनैतिक अखाड़े में संविधान के तहत चुनाव लड़ने के लिये कमर कस रहे थे, मीडिया लगातार २जी और कलमाडी की खबरें दिखा रहा था, देश में कांग्रेस के खिलाफ़ जोरदार माहौल तैयार हो रहा था, जिसका नेतृत्व एक भगवा वस्त्रधारी (बाबा रामेदव) कर रहा था, आगे चलकर इस अभियान में नरेन्द्र मोदी और संघ का भी जुड़ना अवश्यंभावी था| और अब पिछले १५-२० दिनों में माहौल ने कैसी पलटी खाई है नेतृत्व और मीडिया कवरेज अचानक एक गॉंधी टोपीधारी व्यक्ति (अन्ना हजारे) के पास चला गया है, उसे घेरे हुए जो टोली (भूषण, हेगड़े, केजड़ीवाल आदि) काम कर रही है, वह धुर हिन्दुत्व विरोधी एवं नरेन्द्र मोदी से घृणा करने वालों से भरी हुई है….’’ 

इसी लेख में अपनी मनसा को जाहिर करते हुए उक्त लेखक लिखते हैं कि-

‘‘………..मुख्य बात तो यह है कि जनता को क्या चाहिये- १) एक फ़र्जी और कठपुतली टाइप का जन-लोकपाल देश के अधिक हित में है, जिसके लिये अण्णा मण्डली काम कर रही है अथवा २) कांग्रेस जैसी पार्टी को कम से कम १०-१५ साल के लिये सत्ता से बेदखल कर देना, जिसके लिये नरेन्द्र मोदी, रामदेव, सुब्रह्मण्यम स्वामी, गोविन्दाचार्य जैसे लोग काम कर रहे हैं? कम से कम मैं तो दूसरा विकल्प चुनना ही पसन्द करूंगा….’’

इसी लेख के अंत में निष्कर्ष के रूप में अपने इरादों को जाहिर करते हुए उक्त लेखक श्री सुरेश चिपलूणकर जी लिखते हैं कि-

‘‘….हम जैसे अनसिविलाइज़्ड आम आदमी की सोसायटी का भी एक लक्ष्य है, देश में सनातन धर्म की विजय पताका पुनः फ़हराना, सेकुलर कीट-पतंगों एवं भारतीय संस्कृति के विरोधियों को परास्त करना रामदेव बाबा-नरेन्द्र मोदी सरीखे लोगों को उच्चतम स्तर पर ले जाना, और इनसे भी अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, कांग्रेस जैसी पार्टी को नेस्तनाबूद करना|’’

श्री सुरेश चिपलूनकर जी द्वारा लिखे गए उपरोक्त विवरण से इस देश के लोगों को बाबा रामदेव के असल मकसद को समझने में किसी प्रकार का शक-सुबहा नहीं होना चाहिए| 

‘‘भारत स्वाभिमान’’ के नाम पर बाबा रामदेव इस देश में गुजरात में धर्म विशेष के लोगों के सामूहिक नरसंहार के आरोपी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हिन्दुत्व के नाम पर मनुस्मृति को लागू करवाना चाहते हैं|
मुठ्ठीभर आर्यों की मौलिक संस्कृति के अन्धभक्त दो प्रतिशत लोगों के आपराधिक षड़यन्त्रों को सनातन धर्म, हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के नाम पर 98 फीसदी लोगों पर थोपना चाहते हैं|
जबकि इनकी सनातन धर्म, हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति की परिभाषा वही है जो मनुस्मृति आदि ब्राह्मण ग्रंथों में लिखी गयी है| जिसके चलते आर्य संस्कृति मानव जाति के सिरमौर और स्वयं को भू-देव (इस पृथ्वी के साक्षात देवता) कहलाने वाले ब्राह्मण, अपनी पत्नी, बेटी और पत्नी तक को समानता और स्वतंत्रता का हक़ देना धर्म और संस्कृति के खिलाफ करार देते रहे हैं|
जिसके चलते विधवा विवाह को भी निन्दनीय करार देकर, अमानवीय और आपराधिक ‘‘सतिप्रथा’’ का खुला समर्थन करते रहे हैं और किन्हीं कारणों से ‘‘सति’’ नहीं हो सकने वाली स्त्रियों को सम्पूर्ण जीवन विधवा के रूप में गुजारते हुए ‘‘नियोग’’ नामक धार्मिक ढाल के रूप में अपनाये जाने वाले बलात्कार के लाईसेंस के जरिये ‘‘नियोग’’ के लिये सर्वोत्कृष्ट प्रथम पात्र ‘‘ब्राह्मणों’’ को आजीवन असंख्य विधवा स्त्रियों के साथ ‘‘नियोग’’ के बहाने बलात्कार करते रहने को भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म के अनुकूल और पवित्र मानते रहे हैं|
जिसका अकाट्य प्रमाण है, महा भारत काल के सबसे कुरूप पुरुष और नाजायज माता-पिता की औलाद (जिसके माता-पिता, विवाहित पति-पत्नी नहीं, बल्कि आपस में कथित रूप से पिता-पुत्री थे) वेदव्यास को केवल ब्राह्मण ॠषी पाराशर का पुत्र होने के कारण विचित्रवीर्य की दो पत्नियों के साथ ‘‘नियोग’’ के बहाने गर्भाधान (बलात्कार) करने के लिये बुलाया गया| परिणामस्वरूप तथाथित एवं आर्यधर्म नीति के अनुसार ‘‘नियोग’’ हेतु सर्वोत्कृष्ट प्रथम पात्र ‘‘ब्राह्मण’’ वेदव्यास द्वारा किये गये संभोग (जो हकीकत में बलात्कार था) और उनके कथित उत्तम वीर्य से नपुंसक पाण्डू और अन्धे धृतराष्ट्र का जन्म हुआ|
इन सब बातों से यह बात पुख्ता तौर पर प्रमाणित हो रही है कि बाबा रामदेव का अभियान, जिसे उन्होंने ‘‘भारत स्वाभिमान’’ का नाम दिया है, संघ स्वाभिमान और आर्यों की मूल क्रूरतम और घातक नीतियों की पुनर्स्थापना का एक मात्र अभियान है, जो अगले चुनाव में या तो भाजपा में विलीन हो जायेगा या साध्वी राजनेत्री उमा भारती की पार्टी की तरह से इसका भी सूपड़ा साफ हो जायेगा|
ऐसी क्रूर और अमानवीय आर्य संस्कृति के संवाहकों की स्त्री, दमित, दलित, आदिवासी और पिछड़ों के बारे में क्या सोच है, इसे सारा संसार जानता है! ये लोग स्त्री, दमित, दलित, आदिवासी और पिछड़ों को तो इंसान तक मानने को तैयार नहीं हैं!
लेकिन मुसलमानों से या ईसाईयों से हिन्दुओं को लड़ाने की जब-जब बात आती है तो इन्हें सबसे बलवान हिन्दू केवल और केवल दलित, आदिवासी और पिछड़ों में ही नज़र आते हैं! आखिर क्यों यह भी हर दलित, आदिवासी और पिछड़े हिन्दू के लिये विचारणीय है| यदि फिर भी समझ में नहीं आता है तो गुजरात में जाकर देखें| गुजरात में मुसलामनों के नरसंहार के आरोपियों में जितने हिन्दुओं पर मुकदमे चलाये जा रहे हैं या जितनों को सजा हुई है, उनकी हकीकत जानी जा सकती है| यहॉं तक कि मरने वाले हिन्दुओं में भी अधिकतर दलित, आदिवासी और पिछड़े ही थे|

उपरोक्त लेख में चाहे-अनचाहे प्रकट जानकारी से यह तो साफ़ हो ही गया है कि ‘‘भारत स्वाभिमान’’ के नाम से बाबा रामदेव के मार्फ़त नरेन्द्र मोदी, संघ और अनार्यों तथा गैर-हिन्दुओं के विरुद्ध षड़यंत्र रचने में माहिर लोगों द्वारा अध्यात्मवाद, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति की रक्षा के नाम पर चलाया जा रहा नाटकीय अभियान ‘‘भारत स्वाभिमान’’ हिन्दूअनार्यों को हिन्दुत्व की एकता और अस्मिता की रक्षा के मोहपाश में फंसाकर, हिन्दुअनार्यों और गैर हिन्दुओं को फिर से मूल आर्यों की क्रूरता के शिकंजे में फंसाने हेतु संचालित किया जा रहा है| 

जिससे इस देश के हर अनार्य को ही नहीं, बल्कि आर्य स्त्रियों, आर्य आम गरीब और पिछड़े लोगों (गरीब, तंगहाली, शोषण, अत्याचार, भेदभाव, मिलावट, कालाबाजारी आदि के शिकार ब्राह्मण, बनिया और क्षत्रियों) को सजग तथा सतर्क रहने की बेहद जरूरत है| क्योंकि भारत स्वाभिमान के नाम पर जिस मानसिकता के लोगों द्वारा यह नाटकीय अभियान मुखौटे लगाकर चलाया जा रहा है, उनकी मानसिकता इतिहास में कैसी रही है? इसे जानने के लिये इतना सा जान लेना पर्याप्त होगा कि मूल आर्यों के अपने रक्षक के रूप में साथ आये, आर्य मूल के क्षत्रियों तक को इन्होंने नहीं छोड़ा और जिन आर्यों के द्वारा भारत भूमि को एक बार नहीं, बल्कि अनेकों बार क्षत्रिय विहीन कर दिया गया हो और क्षत्रियों के क्रूरतम हत्यारे ‘‘परसराम’’ की पूजा करने में गौरव का अनुभव करते हों, क्रूरतम हत्यारे ‘‘परसराम’’ की जयन्ति मनाते हों और क्रूरतम हत्यारे ‘‘परसराम’’ की जयन्ति को सरकार के मार्फत सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिये लगातार प्रयास कर रहे हों, उन पर भी यदि कोई व्यक्ति विश्वास करता है तो उसको बचाने वाला इस संसार में कोई नहीं है?

लेकिन सुखद अनुभव करने वाली बात यह है कि इस देश के अनार्यों को ही नहीं, बल्कि आर्य स्त्रियों और आर्य आम लोगों (ब्राह्मण-बनिया को भी) तथा अनार्य क्षत्रियों को अब क्रूर मूल आर्य मानसिकता से ग्रस्त, घृणित-अमानवीय लोगों के मुखौटों के पीछे छिपी असली और षड़यन्त्रकारी आपराधिक चेहरे दिखने लगे हैं और अब बहुत कुछ समझ में भी आने लगा है|


जिसके चलते यह बात पुख्ता तौर पर प्रमाणित हो रही है कि बाबा रामदेव का अभियान, जिसे उन्होंने ‘‘भारत स्वाभिमान’’ का नाम दिया है, संघ स्वाभिमान और मूल आर्यों की क्रूरतम और घातक नीतियों की पुनर्स्थापना का अभियान मात्र है, जो अगले चुनाव में या तो भाजपा में विलीन हो जायेगा या उमा भारती की पार्टी की तरह से इसका भी सूपड़ा साफ होना तय है| लेकिन फिर भी इन षड़यन्त्रकारियों के षड्यंतों के शिकार बहुसंख्यक भारतीयों को हर कदम पर सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि इन षड़यन्त्रकारियों के पास अपार धन, गुण्डातन्त्र और बौद्धिक बल की ताकत है, जिसे आने वाले लोकसभा चुनावों में झोंक देने के लिये इन्होंने कमर कस ली है| यदि इस देश की 98 फीसदी आबादी आपने स्वाभिमान को जिन्दा रखना चाहती है, तो मूल आर्यों की क्रूरतम नीतियों की मानसिकता से ग्रस्त लोगों का अभी से उपचार करना शुरू कर दें| लोक सभा के चुनाव तक केवल मानसिकता शेष रहेगी!

53 thoughts on “‘भारत स्वाभिमान’ का कड़वा सच!

  1. आख़िर मैं इतने लम्बे अर्शे से किसका समर्थन कर रहा था? बीजेपी का? जिस बीजेपी अब-तक वही काम किया है जो सारे मीर जाफ़र की नाजायज़ औलादें करते आये हैं जिसका घोर-विरोध मेरे परम पूज्य स्वर्गीय श्री राजीव दिक्षित भाई जी ने किया था.. शहीद भगत सिंह जैसे वीर क्रांतिकारियों ने किया था..
    आज हमारा देश फिर से सोने का चिड़िया वाला देश कहलता अगर उन्हें हमारे लाल बहादुर शास्त्री जी के जैसा ज़हर देके न मारा होता।
    इस रामदेव ने श्री राजीव भाई जी को मरवा कर बीजेपी को पूरा समर्थन दे दिया। जिस राजीव भाई ने “भारत स्वाभिमान आन्दोलन” की नीव रखी थी। जिन्होंने पुरे हिंदुस्तान की जनता को विदेशों में जमा हज़ारों-लाखों कड़ोड़ ब्लैक मनी की पुरे प्रमाण के साथ जानकारी दी.. ये रामदेव दोगले ने अंग्रेजों और अमेरीकियो का तलवा चाट कर उनको मरवा दिया और उनका सारा श्रेय अपने पर ले लिया। दोस्तों श्री राजीव भाई जी जैसा पुण्य आत्मा का जन्म बहुत मुश्किल से इस भारत माता की कोख से होता है मगर अफ़सोस कुछ हरामखोर दोगले चरित्र जैसे लोग उन्हें बार-बार मरवा देते हैं।

  2. Ye mina full mental hai,isko janam dene par iske maa-baap ko shram aa rahi hogi.itna dimag lagata hai.dr.ki degree farzi hai kya. Itihas padha bhi hai ya swapan me yesab dekha hai.

  3. मीणाजी ने अपना उपनाम बहुत सोच विचार कर रखा है.”निरंकुश” अर्थात अनियंत्रित, स्वच्छंद ,सब प्रकार के बंधनों से मुक्त ,स्वेच्छाचारी सब कुछ कहने करने के लिए स्वतंत्र . इस उपनाम के कुछ अवांछनीय अर्थ भी हो सकते हैं यथा उद्दंड, उछ्रंखाल,मर्यादाहीन आदि. खैर जो भी हो मीणाजी ने अपने उपनाम द्वारा सब को पहले ही सचेत किया हुआ है की इन महाशय से साधारण शिष्टाचार,विवेक, गहन अद्ध्यायन सत्यनिष्ठा आदि की अपेक्षा न रखें. उन्हें जो सूझेगा वे वही कहेगे और करेंगे. मीणाजी के लेखों पर टिप्पणी करने वाले सज्जन यदि इस तथ्य से भली भांति अवगत हों तो वे मीणाजी के लेख पढ़ कर दुखी,निराश या उद्द्वेलित होने से बच जायेंगे.

  4. १० में से एक भी टिपण्णी डी. मीना जी के पक्ष में नहीं. इससे पता चलता है कि देश की जनता कैसे और किस दिशा में सोच रही है, किधर जा रही है. धन्य हैं हमारे डा.मीना जी जो इतने अपमानित और लांछित होकर देश के जनता को जगाने का माध्यम बन रहे हैं.

  5. सही कहा त्रिपाठी जी ने, ये बस “टायटल” लगा कर लेखक बने हैं. मुझे लगता है इनकी डिग्री फर्जी एवं कार्यालय भी फर्जी संस्था न चला रहा हो.

    इन्हें हिन्दुओं, ब्राह्मणों, सवर्णों के बारे में अपशब्द के के अलावा और कुछ कहते नहीं देखा जा सकता.. इनका हर लेख घूम फिर कर अपने निचोड़ में गालियाँ ही देता है… या किसी तो स्वर्ण हिन्दू ने इनकी ऐसी तैसी ( ****) की है… जो यह भूल कर भी ये नहीं भुला पाते … यह एक कुंठाग्रस्त, पूर्वाग्रहों से ग्रस्त “सो काल्ड ‘लेखक’ हैं”

    अनेक प्रतिक्रियाओं में इनके लेखों की भर्त्सना करने के बाद भी कोई असर नज़र नहीं आता … अब लगता है.. इन्हें मानसिक चिकित्सा की आवश्यकता है…

    संपादक जी आपसे अनुरोध है.. इनके लेख न प्रकाशित कर.. इन्हें आराम करने दिया जाये… जब तक ये पूर्ण रूप से ठीक नहीं हो जाते.

  6. सही कहा राजेश जी ने, ये बस “टायटल” लगा कर लेखक बने हैं. मुझे लगता है इनकी डिग्री एवं कार्यालय भी संस्था न चला रहा हो.

    इन्हें हिन्दुओं, ब्राह्मणों, सवर्णों के बारे में अपशब्द के के अलावा और कुछ कहते नहीं देखा जा सकता.. इनका हर लेख घूम फिर कर निचोड़ में गलियां ही देता है… या किसी तो स्वर्ण हिन्दू ने इनकी ऐसी तैसी ( ****) की है… जो यह भूल कर भी नहीं भुला पाते … यह एक कुंठाग्रस्त, पूर्वाग्रहों से ग्रस्त “सो काल्ड लेखक hain”

    अनेक प्रतिक्रियाओं में इनके लेखों की भर्त्सना करने के बाद भी कोई असर nazar नहीं आता … अब लगता है.. इन्हें मानसिक चिकित्सा की आवश्यकता है…

    संपादक जी आपसे अनुरोध है.. इनके लेख न प्रकाशित कर.. इन्हें आराम करने दिया जाये… जब तक ये पूर्ण रूप से ठीक नहीं हो जाते.

  7. पता नहीं कैसे कैसे — लोग एक “टाइटल” लगा कर लेखक बन गए हैं. अबे—, अगर बाबा रामदेव भाजपा या संघ को समर्थन दे या ले रहे हैं तो तुम्हे, कपिल सिब्बल, उनकी अम्मा सोनिया या पापा मनमोहन को क्या आपत्ति है ? बाबा जो बोल रहे हैं उसमे गलत क्या है ? एक सच बात चाहे बाबा बोले, संघ बोले, भाजपा बोले, अन्ना हजारे बोले या मैं-तुम-हर देशवासी बोले, वो सच ही रहेगी. काले-धन से सबसे ज्यादा पेट में दर्द कांग्रेसियों को हैं क्यूंकि सबसे बड़े चोर यही हैं. आनंद-भवन ने स्वतंत्रता-संग्राम का धन चुराने के लिए मुखबिरी कर के अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की हत्या करवा दी, आपातकाल लगा कर राजपूताने के सारे खजाने को हड़प लिया, निजाम का सारा सोना कहाँ गया ? बोफोर्स की दलाली से ले कर कामनवेल्थ खेल तक की कलि कमाई किसके पास है ? अगर किसी माई के लाल में दम और सच्चाई है तो आ कर सार्वजनिक बहस कर ले टीवी पर. पता चल जायेगा की चोर कौन है और सच्चा कौन ?

  8. पुरुषोत्तम मीना कांग्रेस का टुच्चा दलाल है … संपादक से निवेदन है इसे यहाँ से भगा दिया जाए

  9. प्रवक्ता पर आई प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है की देश की जनता की सोच किस दिशा में जा रही है. डा. मीना जैसों के देश व समाज विरोधी लेखों का एक लाभ तो साफ़ नज़र आ रहा है . स्पष्ट पता चल रहा है की देश की जनता मीना जी जैसों के झांसे में नहीं आ रही. बड़ी मुश्किल से ही कोई टिपण्णी इन जैसों के पक्ष में अति है. वह भी लगता है की बड़े प्रयत्न से प्रायोजित की जाती है. अतः देशभक्तों के लिए ये बड़े संतोष की बात है की देश की जनता देश विरोधी व देशभक्त लोगों व संस्थाओं की पहचान सही ढंग से करने लगी है…… अर्थात यदि ‘एवीएम्’ में कोई बड़ा घोटाला यह सरकार करने में सफल न हुई तो इन देशद्रोहियों का अगली सरकार में पूरा सफाया होजायेगा. याद रहे की ये वर्तमान सरकार अनैतिक व गैरकानूनी है जो की इलेक्ट्रोनिक वोटिं मशीनों में भारी हेर-फेर करके सता में आई और अखबारों व इलेक्रोनिक मीडिया ने इस खबर को दबा दिया. न जाने क्यूँ भाजपा भी इस धांधली पर एक बार बोल कर मौन साध गयी . … खैर इस बात के लिए तो डा. मीना जी का आभार मानता हूँ की देशभक्तों के रोष को बढाने व सामने लाने में उनके लेखों का काफी योगदान है. बदनाम होकर भी उन्होंने अपना काम किया, आभार. ईश्वर इन्हें सद्बुधी प्रदान करे !

  10. भाग २
    मीणा जी भारत मे भारत की जनता बहुत परेशान हैं और उन्हे जगाने के लिए भगवान् ने बाबा रामदेव जी को भेजा है | भारत मे बहुत सारे लोग भारत माता की सेवा कर रहे है लेकिन अलग अलग | बाबा रामदेव उन लोगो को एकत्र करके उनमे देश के लिए नेक काम करने की प्रेणना की भावना को प्रेरित किया है जिससे भ्रष्टाचार खतम हो , भारत की आजादी अधूरी है और उस आजादी को हम पूर्ण रूप से प्राप्त कर सके जहा पर भारत के लोगो के भारत की व्यवस्था हो और १०० प्रतिशत मतदान करके हम भ्रष्ट्र तंत्र से मुक्त हो सकते है | राजनीतिक भ्रष्टाचार से भारत को मुक्त हुए बिना भारत गुलाम ही रहेगा |बाबा रामदेव सबको जगा रहे है अपने कर्तव्यों एवं अधिकारों के प्रति |

  11. मीणा जी, आपने अपनी लेखनी का बड़ा ही निरंकुस्ता से प्रयोग किया है |आप जैसे लेखक इसी मे खुस हो जायेगे कि चलो कम से कम कुछ लोगो ने पढ़ा तो |मै आप को बता दू कि मै उन लोगो मे से एक हूँ जो बाबा रामदेव जी को आस्था चेनल के माध्यम से बहुत भक्ति के साथ सुनती हूँ , समझती हूँ और बहुत कुछ सीखती हूँ और यह कहती हूँ कि बाबा हमे माता पिता एवं गुरु की तरह एक एक चीज सीखाते है अपने योग ,भजन , राष्ट्र वादी चिंतन ,आहार , विचार,व्योहार पर्यावरण ,मानवता , राष्ट्र प्रेम , देश भक्ति , माता-पिता एवं बड़ो का आदर , आदि आदि | मेरी यह छोटी सी लेखनी उनके सुकर्मो का बखान करने के काबिल नहीं| मीणा जी आप जिस तरह का चश्मा लगायेगे वही आपको दिखेगा धर्म का चश्मा धर्म और अधर्म का चस्मा अधर्म को दिखलाएगा |
    राजीव दीक्षित जी को जहर से मारा गया था जैसे की स्वामी दयानंद सरस्वती जी को मारा गया था | यह जहर देने की घटना पहली नहीं है, इतिहास में | मामा शकुनी जैसे लोग ऐसी घिनौनी हरकत करते है |भारत स्वाभिमान आन्दोलन को राजीव भाई के जाने से बहुत क्षती हुई है और इस आन्दोलन का एक शेर सो गया लेकिन बाकी लोग संभवतः सावधान हो गए अपने जीवन को लेकर | राजीव भाई का ज्ञान सदा ही हमारे साथ है जो की भविष्य मे हमे बाबा रामदेव जी, अन्य एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के द्वारा प्राप्त होता रहेगा | मीणा जी आपकी बहुत सी बाते निराधार है| राजीव दीक्षित मरे नहीं उनकी आत्मा का वस्त्र मर गया जैसे की भगवान् कृष्ण ने गीता मे कहा है “आत्मा न मरती है , न उसे मारा जा सकता है , न छेदा जा सकता है न जलाया जा सकता है |आत्मा फिर से जन्म भी लेती है ,अपने पूर्ब जन्म के कर्मो के अनुसार |मीड़ा जी आप तो आर्य संस्कृति के इतनी खिलाफ है तो गीता मे क्या लिखा है , उससे क्या लेना देना |
    बाबा रामदेव जी एवं भारत स्वाभिमान टीम ने ही भाई राजीव जी इत्यादी लोगो को समस्त भारत मे से खोजकर-खोजकर यह टीम बनाई है और बहुत सारे नेक एवं देश प्रेमी भाई बहन बाबा रामदेव जी एवं उनके ट्रस्ट से जुडते चले गए और लोगो ने खुसी से दान भी दिया और दे रहे है |भाग २ बाद में

  12. परम आदरणीय पुरुषोत्तम निरंकुश जी,
    अपने आप को रोकने का भरपूर प्रयास करने के बावजूद मैं यह लिखने को विवश हूँ कि आप का ज्ञान न केवल अधूरा है अपितु आप भयंकर पूर्वाग्रह से भी ग्रस्त हैं. आप जैसे ही कुछ स्वनामधन्य देश को जात-पांत और पारस्परिक विद्वेष क़ी खायी में फिर से धकेलने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. आप तो विद्वान लेखक हैं. अपने सामाजिक दायित्वों को मेरे जैसे अनपढ़ से बेहतर समझ सकते हैं.
    सादर
    मदन मोहन ‘अरविन्द’

  13. छदम धर्मनिरपेक्षता एवं राष्ट्र द्रोह सर चढ़ कर बोल रहा है मीणा के. बात साफ है जो भी कांग्रेस और उसके कुकर्मो के खिलाफ बोलेगा वो सम्पर्दायिक करार दे दिया जायेगा.

  14. adarniya minaji,mai dusribar net per likhane का prayatna kar raha hu.apke lekh pravakta par padta rahata hu.lekho per pratikriya ke bad apki natkiya ada au namra banane ki kala का koi tod nahi hai.samne wale ko ucha sahitik bhasha aur kutarko se ahat kar do aur uski akramak pratikriya ke bad bhasha ,shaile,brahmanvad jaisi lafaji karte raho. ise khahte hai yeda banke peda khana.na to mai sangh ya ramdeo baba का karyakarta hun aur na he dalit hote huveap jaisa patit bajaru vicharak hun.ha desh hit me kam to nahi kar pata hun per kam karne walo का protsahan jarur kartahu.vaise ap jaise vampanthio ke bajaru vicharak har chote bade sharo aur karyalayo me mil jate hai..mere karibi vampanthi lic adhikari brahman hote huve ap jaise shudra vichar ke dhani hai.aur mai shudra hote huve desh aur samaj hit ke bat sochta hun.vampanthi pet aur uske adho bhag kihe batkarte hai.lekin pet ke upar del aur dimag hota hai ye vo samajh nahi pate hai kyoki ye unke pas hota hi nahi hai.shri sureshji ki lekh me varnit bato ko to ve apni suvidhanusar mante hai per baki hajaro bato per ekdam ashaj ho jate hai.lt rajeev dixit ki mrtyu pergalat jankari ke dhar per tipani ke hai.hamare shar bhilai ke aspatal meunki mrtiu huvi hai aur unke samarthak mitro ke sath ma chasmadid raha hu.aise he galat itihas ke jankari ke adhar per mahashi ved vyas per kutark kar apne vikrut mansikta का pradarshan kar rahe hai.

  15. मीना जी आप इतने पढ़े लिखे आदमी दिखाते है फिर भी चाँद रुपयों के कारन अपने पूर्वजो को गली देते है शर्म आती है आप पर
    आप हमेशा हिन्दू धर्म और देवताओ को गली देते है यह गलत है सिर्फ एक गोरी मैंम (सोनिया gandhi) को खुश करने केलिए इतने हिन्दुओ का अपमान कृते है.
    मुझे आपके लेखक और नाम पर बिस्वास नहीं होता है.

    इस्वर आपको सत्बुधि प्रदान करे

  16. आप और मायावती के हिन्दू विरोधी विचार बिलकुल एक जैसी है / वही शब्द , हजारो साल पुरानी बाते , अंग्रेजो और मुस्लिम राजाओ के खिलाफ एक शब्द नहीं , गुलामी के दुश्परिनामो को छिपाकर अतीत की बात कहना / शब्दों के अर्थ नहीं अनर्थ कहना / मुझे पूरे लेख में यही नजर आ रहा है / असत्य के आधार पर साधू संतो को बदनाम करने की जो मुहिम कांग्रेसियों ने चला रखी है वही आप भी कर रहे है / यह लेख इतना ही बतलाता है /

  17. मीणा जी आप गलत फहमी के शिकार है ,आप को लगता है की आपने उचित लिखा ,
    यदि आपने उचित लिख है तो आपको अपने आप साबित करने की जरूरत नहीं है

    ये पब्ब्लिक है सब जानती है

    किन्तु जो प्रतिक्रियाये आ रही है वो केवल आप के कुतर्क पूर्ण लेखन की वजह से है ,

    रामदेव के विरोध में लिख कर आप अप्रत्यक्ष रूप से भ्रस्ताचारियो समर्थन कर रहे है ,

    जरा बहाए निकल कर देखो आज क्या गाँव क्या शहर हर जगह भ्रस्ताचार की चर्चा हो रही है .

    यह चर्चा ही भ्र्स्ताचारियो के अंत का कारण बनेगी

    रामदेव से आपका दुराग्रह क्यों है
    शायद आपका राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    क्योकि इस पद पर रहते हुए भी आप भ्रस्ताचार को शिस्ताचार समझते रहे ,

    मैंने आपके अन्य लेख भी पड़े है वहा का निरंकुश और इस भ्रस्ताचार समर्थक निरिकुश में जरा स्वयं भेद करे

    अन्यथा आपने अपने स्तर से कितने भ्रस्ताचारियो को सजा दिलाई वो डाटा आप प्रवक्ता पर डाल दे
    मुझ सहित सभी के मुह बंद हो जायेगे

    जब आप जैसे जिम्मेदार लोग इस तरह के लेख लिखते है तो स्वाभाविक रूप से आप पर ऊँगली उठती रहेगी ,ये आप का भ्रम है की लोग आपकी जाती की वजह से आपके विरुद्ध है ,

  18. वाह रे पुरोशोत्तम नाम तो आपका पुरोशोत्तम है और विचार इतने घटिया,लोगो को सही बात की जानकारी देना पाप है, आपके विचार से तो लगता है की आप कांग्रेसी है,आधी रात को भूके प्यासे निर्दोष लोगो पर लाठिया चलाना सही है, अपनी नाक के निचे २जी घोटाले करवाना, खेल में घोटाले करवाना, सु. कोर्ट के आदेश का पालन न करना,देश का अनाज गरोबो को न बातकर गोदामों में सदा देना,किसी भी मामले में आर अस अस & भा ज पा का नाम लेना, लगातार महगाई बढ़ाते रहना,और कहाँ की में मजबूर हूँ, अगर देश का सबसे बड़ा आदमी कहेगा की में मजबूर हूँ ,तो देश चलाने को क्यों बता है किसी दूसरे को आने दे. स्विस बैंक के गुनाहारो के नाम नहीं बताएँगे,ये लोकतंत्र है. लोकपाल के लिए २ महीने से बैठके कर रहे है क्या हल निकला अभी तक, चारो तरफ से पैक रामलीला मैदान में अस्स्रू गैस चोदना सही है, देश द्रोह करना सही है.देश लूटना सही है.कसाब & अफ़ज़ल गुरु को फांसी न देना सही है,सन्यासी को पीटना भी सही है.

    लोगो को हकीकत बताना गलत है, भ्रस्ताचार के खिलाप बोलना गलत है, योग करना गलत है, स्वस्थ रहना गलत है,काले धन के बारे में बोलना गलत है, देश की जानकारी आम आदमी तक पहुचना गलत है महा भारत का उदहारण देकर आपने हिन्दू धर्म का अपमान किया है, आपको सच्चाई कुछ भी पता नहीं है.

    उस समय २ नही ३ पुत्र पैदा हुए उस तीसरे पुत्र को सभी जानते है “विदुर”.

    बिना सोचे समझे टिप्पणी करने सही बात को झुटलाया नहीं जा सकता.
    बाबा रामदेव ठग है और लादेन ओसामा जी है, ये आपकी सोनिया जी फिर देश को गुलाम बनाएगी,
    कुछ लिखना है तो देश के उपर लिखो, देश की भलाई के लिए लिखो,

    नोट—में ना बाबा रामदेव का समर्थक हूँ, ना किसी पार्टी का, में एक सच्चा देश भक्त हूँ, और देश के लिए जान देने को सदा तत्पर हूँ, जय हिंद जय भारत.भारत माता की जय..

  19. मीणा जी आप कांग्रेस पार्टी के लगते है, जो व्यक्ति अच्छा काम कर रहा है उस पर बेवजह आरोप लगा रहे है,आप जेसे कुछ लोगो के कारन ही भारत में भ्रस्ताचार पनप रहा है, और तुम जेसे लोगो के कारन ही भारत लुट रहा है, लुट लो सालो इस देश को.

  20. टिप्पणी लिखने के लिए आप सभी का ह्रदय से आभार|
    कम से कम आप सभी ने मेरे आलेख को पढने योग्य तो समझा है|
    भाषा की कंगाली के शिकार पाठक बंधुओं के लिए-किसी को “बेवकूफ” लिखने और “राष्ट्र द्रोही” कहने से कोई भी बात प्रमाणित नहीं होती है|
    श्री हरपाल सिंह सेवक जी “किस बात का प्रमाण मांग रहे हैं?” टिप्पणी अस्पष्ट प्रतीत होती है|
    कुछ बंधू जिन्हें केवल आर एस एस और भाजपा के अन्दर ही सब कुछ नज़र आता है और वे जो इस देश में मात्र दो फीसदी हैं, लेकिन खुद को इस देश, हिन्दू धर्म तथा भारत की संस्कृति का असली स्वयंभू मालिक समझते हैं| इस मद में उन्हें याद ही नहीं रहता कि वे “क्या और किस स्तर का लिख रहे हैं?” ऐसे स्वघोषित और स्वयंभू लोगों से संवाद करना मेरे जैसे अल्प ज्ञानी के लिए सम्भव नहीं है|
    आशा करता हूँ कि आगे भी देश के तथाकथित स्वघोषित और स्वयंभू लोगों का आशीष मिलता रहेगा!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, सम्पादक-प्रेसपालिका तथा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    0141-2222225, Mob : 98285-02666, Jaipur

  21. मीणा जी आपका लेख व तमाम टिप्पणिया पढ़ी मुझे १ बात का अहसास हुआ की कही ना कही आप दुराग्रह के शिकार जरूर थे यह लेख लिखते समय

    महाभारत का जो उदाहरन आपने दिया वो कुतर्क पूर्ण है उस समय २ नही ३ पुत्र पैदा हुए उस तीसरे पुत्र को सभी जानते है “विदुर”

    जिस नियोग पर आप ऊँगली उठा रहे है उससे तो मर्यादा पुरूसोतम राम के जन्म से भी आप कतई संतुस्ट नहीं हो सकते

    रही बात आर्यों की तो उस पर चर्चा करना गड़े मुर्दे खोदने के समान है .

    अब परिवेश पूरी तरह से बदल चूका है पर यह बदलाव उन लोगो को कतई नही दीखता जिनकी आँखों पर दुराग्रह का चश्मा लगा है

    समय के अनुसार यदि किसी लेखक ने समान विचारधरा के लोगो को एक साथ रख दिया तो उन पर आक्षेप लगाना आप जैसो को कतई शोभा नहीं देता .

  22. निरंकुश जी आपको असली मनु स्मृति पढने की जरूरत है जो आपको किसी पुराने वैदिक स्थान पर मिलेगी या तो लन्दन की इंडिया हाउस लाइब्रेरी और धर्म पर अभी आपको और चिंतन की जरूरत है आप दुनिया भर की किताबे और ग्रन्थ छोडिए आप केवल राम चरित मानस का उत्तर कांड धयान से हिंदी व्याख्या के साथ पढ़िए इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी आपके जैसे कुछ धर्म के बेवकूफ ठेके दारो ने राम चरित मानस की कुछ लाइन जिसमे शुद्र शब्द का प्रयोग किया था उसे हटाने की अपील की थी जज ने हटाने का आदेश भी दे दिया था लेकिन जज को माफ़ी मंगनी पड़ी थी जब उसका सही अर्थ पता चला इस लिए अंग्रेजो की लिखी हुई किताबे नहीं पढ़ा करिए असली के के लिए किसी वेड शाला में जा कर उसका अध्यन करिए फिर टिपण्णी इससे जयादा आपको कुछ समझाना मेरी बेवकूफी होगी

  23. पुरुशोथं जी जो मनुस्मृति की बात अप्प कर रहे हैं वोह सच नहीं उसे तोड़ मदोद किया गया है और वाईसा ही अप्प का दीमक दूउद रहा है क्यों की हमारे देशमें गद्दारों की कमिनाही है और यह ithihaaskar,lekhkaar etc. की हैं जो हमारे vedic dharam और rashtriya bhavana के saath kilwar किया है moughal , angrez और politicians की gulamgiri karthe aya है अगर अप्प को सची मनुस्मृति जो जाती वाद को बाश्किकार करती है ,और nari को uchatam stan पैर rakh thi है उसे padiya और वेदा के आदर पैर है मैं यह http://agniveer.com/3308/manu-smriti-and-shudras/ और Dr. surender जी की kithab http://www.vedicbook.com मैं uplabh है.

  24. अगर संघ और बाबा रामदेव एक साथ न जुडे तो बाबा पर विश्वास करना कठिन होगा। इतिहास के झरोखे से देखने पर हमे ज्ञात होता है की संघ ने राष्ट्र-हित मे प्रमाणिक ढंग से काम किया है। बाबा रामदेव को प्रमाणिकता सिद्ध करनी होगी।

  25. मीणा जी अपने गंदे विचारों से कृपया स्वामी रामदेव को दूर रखिये, उनके साथ अगर संघ है तो दारूल उलूम देवबंद भी और अगर उनके साथ चर्च के शीर्ष नुमाइंदे है तो सिख और जैनियों के भी अगड़े है तो पिछड़े भी, जहाँ वो शहर और गाँव में अपनी निःशुल्क कक्षाए लगते है वही आदिवासी और नक्सलियों के बीच भी, सभी राज्यों और भाषाई लोगो को बराबर सम्मान देते है, जहाँ तक उत्तराखंड बीजेपी को चंदा देने कि बात है तो चंदा तो उन्होंने राजस्थान कांग्रेस को भी दिया था तो आपके अनुसार वो किसके समर्थक हुए
    याद रक्खे स्वामी रामदेव जोड़ने का काम कर रहे है तोड़ने का नहीं इसीलिए वो देश के सभी संगठनो, चाहे वो किसी प्रकार के हो के अच्छे लोगो को अपनी और आकर्षित करने में सफल हुए है, इसमे कुछ बुरे लोग भी हो सकते है लेकिन इनकी संख्या नगण्य होगी
    सबसे बड़ी बात की वो स्वयं ब्राह्मन नहीं है, और इस बात के प्रतीक है की ब्राह्मन या संत कैसे होते थे और आज भी देश में ऐसे संतों की कमी नहीं है, पूर्व में अगर किसी ने गलत किया है या आज अगर कोई गलत कर रहा है तो उसके लिए स्वामी जी तो दोषी नहीं है, रावण जैसे ब्रह्मणों को देश के जनमानस ने अपना पूज्य कभी नहीं माना, जिन लोगो को वो अपने मंच से निशाना बनाते है वो अच्छे व्यक्ति या संगठन नहीं है अगर आप इससे पीड़ित होते है तो आप के बारे में भी सहज अनुमान लगाया जा सकता है
    हिन्दू धर्म की जिन कमियों पर आप निशाना लगाते है धर्म उन कमियों से पार पाने के लिए प्रयासरत है और सौभाग्य से ऐसा हो भी रहा है स्वामी रामदेव भी एक सुधारक का काम ही कर रहे है, वो स्वयं फलित ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, ग्रह अथवा रत्न के प्रभावों को नहीं मानते और उसके मुखर विरोधी भी है, इसीलिए इसके समर्थक जो समाज में इस तरह की अज्ञानता से लाभ उठाना चाहते है उनका विरोध करते है
    जहाँ तक राजीव दीक्षित की मौत की बात है तो कोई योगी रोग से नहीं मरेगा ऐसा शत प्रतिशत नहीं हो सकता क्योंकि आज जल, मृदा, वायु, पौधे सभी प्रदूषित है जब तक हम इन सभी तत्वों को शुद्ध नहीं कर लेते अपना अभिष्ट नहीं प्राप्त कर सकते हाँ रोगों से होने वाली मौतों की संख्या जरूर घटा सकते है, चूँकि आप भारत स्वाभिमान से नहीं जुड़े हुए नहीं है इसलिए आप नहीं जानते कि राजीव दीक्षित को हृदय सम्बन्धी रोग पिछले कई वर्षों से था, उनसे खाने पर परहेज करने के लिए सभी वैद्यों तथा स्वामी जी ने भी कई बार कहा था लेकिन परहेज न करना उनकी मौत का कारण बना, सामान्यतया स्वाभाविक मृत्यु कि स्थिति में पोस्टमार्टम तब तक नहीं कराया जाता जब तक इसके लिए परिवार कि इच्छा न हो
    जहाँ तक शरीर के नीला पड़ने कि बात है तो काल्पनिक आरोपों का जवाब नहीं दिया जा सकता अंतिम संस्कार के पूर्व पूरे समय उनका मुख श्रद्दालुओं के लिए खुला था आस्था चैनेल के पास उसकी विडिओं भी है

  26. एक आदमी ने ३-४ हजार साल पहले कुछ लिखा था, जो तब की परीस्थितियों में चाहे उचित या अनुचित रहा हो किन्तु आज तो वो सिरे से अप्रासंगिक है…ऐसी किताबों का सिरमौर है एक चलताऊ उपन्यास से भी वर्तमान में घटिया दर्जे की पुस्तक ”मनुस्मृति”.
    यहाँ संस्कृति का राग अलापने वाले वही हैं जिनका दाना -पानी उस संस्कृति की फसल से ही निकलता है……जो वास्तव में २ प्रतिशत ही होगा (कूपमंडूकता के आधार par)….जातिगत आधार पर उसमें भी ”प्रोग्रेसिव नेचर” के लोग हैं…..मैं स्वयं उस मनगढ़ंत किताब के मुख-द्वार वाले वर्ग से ठहरा किन्तु सच्चाई तो यही है न की हमारे पूर्वजों ने वास्तव में अत्याचार किये जिसके लिए हमें शर्म और खेद है………..

    इस अकाट्य सत्य को स्वीकार करने में pravktaake tippadiyon में chaaye rahne वाले vidwaanon को aanch kyon lagti है?……manaa की angrejon ने galat itihaas likhaa तो bhartiyon ने भी तो मनगढ़ंत mahimaamandan ही kiyaa है जो itihaas kam katha aur kalpnaa ही jyaada lagtaa है……..

  27. आकडे और प्रमाण देने की कृपा करे देश में भाषण देने वाले लोग बहुत है आप जो कह रहे है उससे परहेज नहीं है लेकिन प्रमाण के वगैर कहना ठीक नहीं है आर्यों को तुच्छ कहना भी ठीक नहीं है

  28. श्री डॉ. राजेश कपूर जी,

    मैं आपकी निम्न टिप्पणी के लिये अलग से आपका आभार प्रकट करना चाहता हूँ, जिसमें आपने लिखा है कि-

    “”हमारा (आर्यों का) आत्मविश्वास हिमालय सरीखा अडिग है जो किसी के (हम जैसे आदिवासियों के) हिलाए हिलने वाला नहीं, अपनी ऊर्जा एक असफल होने वाले कार्य पर लगा कर अपना समय क्यूँ गंवा रहे हो ?” (क्योंकि सारी व्यवस्था और लोगों के दिमांग पर तो जन्म से म्रत्यु तक हमारा ही कब्ज़ा रहता है)

    आपकी उक्त धमकी भरी चेतावनी और यथार्थ से परिपूर्ण सलाह पर मैं गंभीरता से विचार करूंगा! फिर निर्णय लूँगा कि क्या वाकई मुझ जैसे लोग फालतू में अपनी ऊर्जा हिमालयी आर्य पहाड़ से टकराने में अपव्यय कर रहे हैं? चेताने, आत्मालोचन करने और मेरी तथा आप लोगों की हकीकत से वाकिफ करवाने और हकीकत की पुष्टि करने के लिए आपका एक बार फिर से आभार|

  29. aur ek baat sanskriti hai kya cheez? ye sawaal sanghee jan ke lie hai…… sanghee dristikon se hi bataaiyega……….. wastvik dristikon mujhe pata hai….ye sawal Dr. rajesh kapoor, dr. madhusoodan jee, er. diwas aur purohit jee se samaan roop se hai…..

  30. वाह-वाह-वाह रे देशभक्तों, गलत को सही रूप में रख देने से डॉ. पुरुषोत्तम ने रख क्या दिया….आप लोगों के अनर्गल और अशिष्ट संस्कार अपनी प्राचीन संस्कृति के साथ मुह बाए सामने परिलक्षित हो गए…. सब करके भी आप लोग अपने को पाक-साफ़ ही सोचते हैं तो आप लोगों के ”संघी-संस्कार”’ को प्रणाम…….

    पुरोहित जी तो प्रवक्ता को ”ब्रह्मण-प्रवक्ता” के रूप में स्थापित करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में महारत हासिल करते दिख रहे हैं…कुछ लोगों ने तो यहाँ से हटने की धमकी भी दे डाली………मज़ा आया, अच्छा लगा……. सदियों से सताने वाली जमात सताए गए लोगों के आरोप से ही बौखला जाती है क्यों की उसे केवल खुद की सुनाने और अपने चाटुकारों को सुनने की आदत रहती है,……..

    सुरेश चिप्लूकर जी के आरोपों पर ये लोग खुद ही अपने हाथों से अपनी पीठ थपथपा रहे थे, उन्हें सामने न होने के बावजूद मुह चूओमकर बधाईयाँ दे रह्हे थे….aise me unke lekhon की pratikriyaa में chhape lekh से (anya tippadikaaron से अशिष्ट shabdon को udhaar lekar kahun तो) ”mirch lagnaa” swabhaawik ही thi.

    pravktaa sampaadak और nirankush जी को unke saahas के lie बधाईयाँ….

  31. भारतीय संस्कृति और हन्दू धर्म की उदारता, सहनशीलता और अच्छाई के नमूने : भारतीय संस्कृति और हन्दू धर्म के कथित ठेकेदारों की जुबानी पढ़िए :-

    भारत स्वाभिमान लागू करवाने वाले मनुवादियों और ब्राह्मणवाद की मानसिकता की पारीभाषा जो प्रवक्ता पर खुद मनुवादियों और ब्राह्मणवाद की मानसिकता से ग्रस्त पाठकों ने ही दे दी है –

    हम ब्रह्मा के मुख से पैदा हुए है| अत: हम जो कहते हैं वो ही सही और अंतिम सत्य है, इसलिए हमारे कहे, बोले और लिखे को अंतिम सत्य मानो, छापो और उसका अनुसरण करो| जो कोई हमारे विचारों का विरोध करे, उसे बोलने मत दो, उसे छपने मत दो और उसे देशद्रोही, पागल, धर्मद्रोही, विदेशों का एजेंट और ईसाई घोषित कर दो| यदि फिर भी कोई नहीं माने तो ऐसे संपादकों और मीडिया मंचों का बहिस्कार करने की धमकी देकर संपादकों/मालिकों पर दबाव बनाओ, ताकि सच्चाई का गला घोंटा जा सके और सबसे बड़ी बात ये की जो सवाल उठाये जावें उनका सीधा जवाब कभी मत दो, नहीं तो उलझ जाओगे क्योंकि हकीकत तो झुन्ठालाई नहीं जा सकती| लेकिन साथ ही इस झूठ को को फैलाओ की हमारे खिलाफ बोलने वाले हिन्दू धर्म विरोधी और देशद्रोही होने के साथ साथ पोप और ईसाईयों के एजेंट हैं| यही नहीं ऐसे लोगों को उनकी नीचता का ज्ञान करने के लिए लिखें की ऐसे लोगों के लेख नेट पर प्रकाशित होने से मोनीटर अपवित्र हो गया जिसे धोने के लिए अमरीका में सरलता से गोमूत्र प्राप्त नहीं है तो पवित्र करने के लिए उपवास करो| कुछ भी करो पर जिन लोगों को हिन्दू धर्म में, आर्य ब्राह्मण के विचारों और आदेशों को मानने की बाध्यता है, यदि वे नहीं मानें तो उनकी कुत्ते की तरह से हत्या कर दो| वाह क्या शानदार परिभाषा है- मनुवाद और ब्राह्मणवाद की! इस परिभाषा को पुष्ट करने वाले उद्धरण स्वयं लिखने के लिए आप सभी हिंदूवादी आर्य महानुभावों का ह्रदय से आभार! अब मुझे मनुवाद और ब्राह्मणवाद की परिभाषा बताने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं है| आपने खुद ही अपनी परिभाषा दे दी है, वैसे आपके इन विचारों की पुष्टी आपके पूर्वजों द्वारा लिखित कथित धर्मग्रन्थ भी कदम कदम पर करते हैं| आप सभी के वे विचार जिनसे उक्त परिभाषा का जन्म हुआ, नीचे प्रस्तुत हैं :

    १-Ashwani Garg Says:-“The article is so cheap and demeaning to Hindus, I wonder if the author is a Pakistani. The words he has used against the revered saints like Maharshi Ved Vyas so demeaning I wonder if teh author is a paid agent of Jihadis.”
    २-इंसान Says:- कड़वा सच तो यह है कि पत्रकारिता के आडम्बर में लेखक जैसे राजद्रोहियों और षड्यंत्रकारियों ने भारतीय समुदाय के मन में कई ऐसे प्रश्न पैदा कर दिए हैं जिनका उत्तर वे स्वयं देने में भयभीत हैं|
    ३-Ramesh Kumar Says:-Actually I am not surprised by seeing this article. I feel he is a planted man by Church and other western forces.
    ४-Abhishek purohit Says: आपका मँच (प्रवक्ता) क्या बामसेफ छाप के घटिया विचारोँ से भरेगा?इन साहब का घोषित उद्देश्य आपके मँच का माहौल खराब करना है व समाज मेँ विष घोल कर जातिय झगड़ो को बड़ावा देना हैँ.क्या आप बामण,बनियोँ के खिलाफ इन विद्दान के तथ्योँ के पक्ष मेँ हैँ? …..खुद को गालियाँ सुनना कम से कम मेँ तो नहीँ चाहुँगा,अगर आप इस लेख को नहीँ हटाते तो ये मान कर चलिए कि आप एक जागरुक पाठक खो देँगेँ।जय श्री राम
    ५-ajit bhosle Says:बस इस्लामिक आंतंकवाद को हल्का करने के लिए ये शब्द गड़ लिया गया है जबकि इस शब्द का सच्चाई से कोई दूर दूर तक वास्ता ही नहीं है,
    ६-ajay atri Says: अगर आप ऐसे लेख छपे गे तो में प्रवक्ता साईट देखना ही बंद कर दूंगा.
    ७-Manish Pathak Says:Shame to Purushottam Meena.
    ८-sachin Says: जितना जहर अपने बाबा रामदेव और आर्य के लिया उगले है अगर उतनी ही सच्ची बातें पोप और ईसाईयों के बारे में लोगों के बातें तो बहुत अच्हा होगा
    ९-Dr Ashutosh Says: हे परम राष्ट्रद्रोही, कुत्सित मानसिकता वाले संस्कृति द्रोही! तुम्हारे जैसे लोगो के वध के लिए ही भगवान परशुराम ने जन्म लिया था और अब तुम्हारे कुल और अन्य गद्दारों के वध के लिए बाबा रामदेव अवतरित हुए हैं. सावधान हो जाओ और अपने इस लेख के लिए क्षमा याचना कर लो अन्यथा कुत्ते की मृत्यु पाओगे
    १०-dr.rajesh kapoor Says: डा. मीना जी के भीतर जो भरा है, जिन ताकतों के लिए वे काम कर रहे हैं ; वह खुल कर सामने आ गया है. सनातन, सहिष्णु, श्रेष्ठ हिन्दू धर्म के विरुद्ध विष वमन ही इनकी पहचान है, यही इनका मिशन है; बस इसे समझें, स्मरण रखें
    ११-मानसिक दिवालियापन है और कुछ नहीं इस सेकुलर कीड़े का….Ajay Atri and Abhishek Purohit…आपकी बातों का संपादक महोदय पर कोई असर नहीं होने वाला….कई पाठक पहले ही प्रवक्ता छोड़ चुके है……ये (प्रवक्ता के संपादक) भी कांग्रेस से पाते है………
    १२-मीणा जी आपको समझाना व्यर्थ है| आपसे आयु में छोटा हूँ किन्तु लगता है आपसे अधिक बुद्धि तो मै ही रखता हूँ| (क्योंकि आर्य जो हूँ)……….आज में प्रवक्ता पर यह कहना चाहता हूँ कि आप एक देश द्रोही हैं| जी हाँ देश द्रोही कहा मैंने राज द्रोही नहीं| चिंता न करें ये आप ही के शब्दों में निहित है|
    १३-अब इस निम्न बुद्धि के मानस (क्योंकि उच्च बुद्धी पर तो केवल आर्यों का ही हक़ है) से पूछो के जो काम इसके मालिक (ईसाई) दो सौ वर्षों में नहीं कर सके क्या यह उनका आधा अधूरा काम पूरा करना चाहता है? ………….इस निर्लज्ज घटिया लेख के कारण मैं प्रवकता.कॉम से दो महीने का उपवास ले रहा हूँ क्योंकि यहां न्यू यार्क में मेरे मॉनिटर को धोने के लिए गौ मूत्र सरलता से प्राप्य नहीं है|
    १४-prof: madhusudan Says: मैंने अपने स्वतंत्र अधिकार का उपयोग करते हुए, कुछ लेखों को न पढ़ने का निर्णय कर अपने समय को व्यर्थ ना करने का सोचा है| मेरे इस निर्णय में सहायता के लिए यह लेखक महोदय धन्यवाद के निश्चित अधिकारी है| “निरंकुश” जी धन्यवाद|
    १५-हमारा (आर्यों का) आत्मविश्वास हिमालय सरीखा अडिग है जो किसी के हिलाए हिलाने वाला नहीं, अपनी ऊर्जा एक असफल होने वाले कार्य पर लगा कर अपना समय क्यूँ गंवा रहे हो ? (क्योंकि सारी व्यवस्था पर तो हमारा ही कब्ज़ा है)

  32. Dr. Purushottam Meena ‘Nirankush’ जी लिखने में तो निरंकुश हो गए पता नहीं पढने/अध्ययन करने में क्यों नहीं हो पा रहे है. मनुस्मृति के अलावा आपने कुछ देखा भी है क्या? मुझे तो ये भी लगता है आप मनुस्मृति की आधुनिक प्रासंगिकता को भी नहीं देख रहे… आपको पता होना चाहिए की उस महान ग्रन्थ में ब्रह्मण, की परिभाषा क्या थी? और अब क्या हो गयी है?

    वैसे भी कम से कम आपकी इतनी औकात नहीं की आप पुरानी घटनाओं को लेकर अभी सामाजिक वैमनस्य फैलाने का कार्य करें.

    संपादक जी से आग्रह होगा की सामाजिक बुराइयों पर आधारित लेख प्रवक्ता पर आने से पहले ये जरूर देख लें की क्या उसमे कोई समाधान भी दिया है या नहीं? और अगर सा समाधान न हो तो उसे कचरा समझ कर फ़ेंक दें.

  33. किश्तों में जवाब दूंगा डा. मीना जी को. बड़ा अच्छा है की इन महोदय के बहाने भारत के इतिहास के वे स्वर्णिम पृष्ठ खोलने का अवसर मिलेगा जो दबाये- छुपाये गए हैं, उनके द्वारा जिनके मानसपुत्र श्री मीना जी दुर्भाग्यवश बन चुके हैं. उन पृष्ठों की चर्चा से कटु बना वातावरण कुछ सुखद होजायेगा. मेरे प्यारे भाई मीना जी आप इसी मानसिकता में जीते रहे तो मुझे दिमाग का इलाज करवाने का उपदेश देते-देते स्वयं मानसिक रोगी बन जायेंगे. मैं ह्रदय से चाहता हूँ की आपकी ऐसी दुर्दशा न हो. अपने विद्वेषपूर्ण स्वभाव को तज कर ठन्डे मन से मेरी बात पर सोचना. जिस मानसिक अवस्था में आप जी रहे हैं, आपके और समाज के स्वास्थ्य के लिए वह हितकर नहीं. शेष अगली किश्त में. पर याद रहे की हमारा आत्मविश्वास हिमालय सरीखा अडिग है जो किसी के हिलाए हिलाने वाला नहीं, अपनी ऊर्जा एक असफल होने वाले कार्य पर लगा कर अपना समय क्यूँ गंवा रहे हो ?

  34. मैंने अपने स्वतंत्र अधिकार का उपयोग करते हुए, कुछ लेखों को न पढ़ने का निर्णय कर अपने समय को व्यर्थ ना करने का सोचा है| मेरे इस निर्णय में सहायता के लिए यह लेखक महोदय धन्यवाद के निश्चित अधिकारी है| “निरंकुश” जी धन्यवाद|

  35. इस लेख को देखते मुझे कुछ वर्ष पहले रामेन्द्र नाथ द्वारा अंग्रेजी में लिखा निबंध, Why I Am Not a Hindu, याद आ गया| अंग्रेजों के जमाने में ईसाई धर्म को फैलाने के लिए मिशनरियों द्वारा भारतीय समाज में हीन भावना ग्रस्त परन्तु पढ़े लिखे हिन्दुओं को पैसे और नौकरी का प्रलोभन देकर ऐसे निबंधों के प्रारूप दे दिए जाते थे जिन्हें वे समय समय पर अपने नाम से प्रकाशित करते थे| उद्देश्य यह था कि अधिक से अधिक लोगों में अपने धर्म के प्रति द्वेष उत्पन्न कर उन्हें ईसाई धर्म की शरण में लाया जा सके|

    अब इस निम्न बुद्धि के मानस से पूछो के जो काम इसके मालिक दो सौ वर्षों में नहीं कर सके क्या यह उनका आधा अधूरा काम पूरा करना चाहता है? बाबा रामदेव ९८ प्रतिशत भारतीयों को यथार्थ स्वंतंत्रता दिलाने चले हैं और यह मूर्ख उन्हें ईसा मसीह की शरण में ले जाना चाहता है| कड़वा सच क्या है?

    भारतीय समाज में बड़े संत पैदा हुए हैं, जैसे नानक, महांवीर, दयानंद, राजा राममोहन राय, इत्यादि, और समय बीतते उन्होंने हिंदू धर्म को नई दिशा दी है| तिस पर हिंदू समाज में इन संतों को सम्मानित किया जाता रहा है| लेकिन यह धूर्त और कपटी व्यक्ति कीचड उछाल रहा है|

    इस निर्लज्ज घटिया लेख के कारण मैं प्रवकता.कॉम से दो महीने का उपवास ले रहा हूँ क्योंकि यहां न्यू यार्क में मेरे मॉनिटर को धोने के लिए गौ मूत्र सरलता से प्राप्य नहीं है|

  36. सबसे पहले मै भाई अभिषेक पुरोहित और अजय आत्रे जी से निवेदन करता हूँ कि कृपया वे प्रवक्ता का साथ ना छोड़ें| इन राष्ट्रविरोधियों को हारने के लिए हमें आपका साथ चाहिए| इन्हें जो कुछ बकना था ये बक चुके हैं, अब इनको उत्तर देने की बारी हमारी है| आप इन पर अधिक ध्यान न दें, इनका तो काम ही यही है कि भारतीयों को लडवाओ और मज़े करो| क्यों कि ये मानसिक रूप से अभी भी गुलाम ही हैं| जिस मैकॉले ने इनपर अत्याचार किये ये आज तक उसी के तलवे चाट रहे हैं व उसका हेतु सिद्ध कर रहे हैं| अत: आपसे विनम्र प्रार्थना है कि कृपया सम्पादक जी पर इस प्रकार का दबाव न डालें| यह तो उनकी महानता है कि अपने विचारों के विरुद्ध लोगों को भी यहाँ स्थान दे रहे हैं| इसे ही तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते हैं| किसी वामपंथी या कांग्रेसी पत्रिका में देखो किस प्रकार वे अपने सामान लोगों को बिठाकर उनसे वाहवाही लूटते हैं| किन्तु हम जानते हैं कि हम सही हैं अत: इन छिटपुट लोगों से घबराते नहीं हैं| आशा है कि आप मेरी प्रार्थना को स्वीकार करेंगे|
    मीणा जी आपको समझाना व्यर्थ है| आपसे आयु में छोटा हूँ किन्तु लगता है आपसे अधिक बुद्धि तो मै ही रखता हूँ| हिन्दू-मुस्लिम को तो लडवा कर मार दिया| मुसलामानों को हिन्दुओं से अलग कर दिया अब हिन्दुओं को भी आपस में तोड़ने का यह घ्रणित कार्य आप कर रहे हैं| पहले ब्राह्मण दलित का राग अलापा और जब बात नहीं बनी तो विषयों को भी लड़वाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया| आपके हिसाब से तो हमारे ऋषि मुनि व सन्यासी व हमारे धर्म गुरु मुर्ख ही थे| साथ ही संसार के अधिकतर वे लोग मुर्ख हैं जो यह मानते हैं कि भारतीय संस्कृति व भारतीय नागरिक सबसे अधिक सहिष्णु हैं| जिन्होंने कभी किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया| आज में प्रवक्ता पर यह कहना चाहता हूँ कि आप एक देश द्रोही हैं| जी हाँ देश द्रोही कहा मैंने राज द्रोही नहीं| चिंता न करें ये आप ही के शब्दों में निहित है| आपने कहा-
    “श्री गोयल जी आप जिस धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये आँख बन्द करके, जिन लोगों के मोहपाश में फंसे हुए हैं”
    अर्थात गोयल जी ही धर्म व भारतीय संस्कृति को बचाने का काम कर रहे हैं, आपका तो काम है उसे नष्ट करना| आप भारतीय संस्कृति से नफरत करते हैं अत: आप देश द्रोही हैं, और गोयल जी देश भक्त| गोयल जी के कथन में गलत कुछ नहीं है| खैर आप से माथा मारने के लिए मेरे पास समय नहीं है| आप एक चिकने घड़े हैं| इस प्रकार की भाषा के लिए मै आपसे कोई क्षमा नहीं मांगूंगा क्यों कि मै मै राष्ट्रद्रोहियों के आगे नहीं झुकता| हमारी संस्कृति की महानता को समझने के लिए यह लिंक http://www.pravakta.com/story/22352#comment-15589 देख लें| यह आप जैसों को समझाने का एक छोटा सा प्रयास था| इसके बाद भी यदि आप की समझ में ना आये तो तरस आता है आपकी बुद्धि पर| भगवान् आपका कल्याण करे|

  37. मानसिक दिवालियापन है और कुछ नहीं इस सेकुलर कीड़े का….
    रही बात सुरेश जी के लिखने की तो लेखन साबित करता है की हम सबके सामने सीना ठोक कर कहते है . सेकुलरों की तरह पीठ में छुरा नहीं घोपते…………..
    निरंकुश…तेरे पर अंकुश हम ही लगायेंगे………….

    @Ajay Atri and Abhishek Purohit…आपकी बातों का संपादक महोदय पर कोई असर नहीं होने वाला….कई पाठक पहले ही प्रवक्ता छोड़ चुके है……ये भी कांग्रेस से पाते है…………..

  38. डा. मीना जी के भीतर जो भरा है, जिन ताकतों के लिए वे काम कर रहे हैं ; वह खुल कर सामने आ गया है.
    सनातन, सहिष्णु, श्रेष्ठ हिन्दू धर्म के विरुद्ध विष वमन ही इनकी पहचान है, यही इनका मिशन है; बस इसे समझें, स्मरण रखें और समय आने पर उचित उत्तर दें.
    हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों में घृणा, विद्वेष की आग लगा कर, टुकडों में बाँट कर ये अपना हित साधना चाहते हैं.
    ज़रा बतलाओ तो संसार में किस समाज में हम भारतीयों से अधिक सहिष्णुता, सहनशीलता है ? माना की अनेक कमियाँ भी हैं, किस समाज में कमिया नहीं ? हम खुद हमारे कमियाँ दूर करने के लिए काम करते रहे हैं, आगे भी करेंगे. पर इसके लिए हमें किसी ऐसे की ज़रूरत नहीं जो हमसे, हमारी संस्कृति, साहित्य व धर्म से घृणा करता हो.यह भारत है जहां सुधारक पैदा होते ही रहते हैं पर उन्हें कोई सूली पर नहीं टांगता, इन्कुज़ेशन में तडपा-तडपा कर नहीं मारता. हम अब देश व समाज तोड़क ताकतों के षड्यंत्रों का शिकार अब नहीं बनने वाले.
    – बाबा रामदेव के इलावा और कौन है जिसने हमें काग्रेसी लूट, षड्यंरों की जानकारी दी ? इटली के लुटेरे बैंकों को भारत में लाकर भारत की अपरिमित लूट का रास्ता खोलने वालों की पहचान करवाई. ऐसे बाबा के विरुद्ध तुम लोगों का विष वामन क्यूँ है, हम सब समझ रहे हैं. वक्त आने पर वोट की पेटी में से करारा जवाब निकलेगा; ज़रा थोड़ा और इंतज़ार करो. अरबों, खरबों की लूट कर-कर के देश के करोड़ों लोगों को भिखारी बनाने वालों को करारा जवाब तो देना ही होगा. लाखों किसानों को आत्महत्या पर मजबूर करने वालों को सबक तो सिखाना ही होगा. बस थोड़ा और इंतज़ार ……

  39. “सचिन गोयल” जी आर्य मूल के लोगों की सोच के समर्थक “वैश्यों” को क्या मानते हैं, ये जानना है तो थोडा समय इनके ग्रंथों को पढने में खर्च करें! खुद ही समझ में आ जायेगा की हजारों सालों से जहर कौन फैला रहा है| यदि आपके पास इनका कुटिल साहित्य उपलब्ध नहीं हो तो मुझे कहें मैं प्रस्तुत कर दूंगा! एक उदाहरण पेश है :-

    मनुस्मृति में वैश्यों को तो बहुत ज्यादा मात्रा में ब्राह्मणों के अत्याचारों का शिकार बनाने की स्थायी व्यवस्था की गयी है| मनु के अनुसार वैश्य क्योंकि ब्रह्मा की उरु अर्थात् जंघा से उत्पन्न हुए बताये गये हैं| अत: वैश्यों को भी मनुस्मृति में शूद्रों की भॉंति नीच घोषित किया गया है :-

    “ऊर्ध्व नाभेर्यानि खानि तानि मेध्यानि सर्वश:|
    यान्यधस्तान्येध्यानि देहाच्चैव मलाुश्‍चुता:॥”

    अर्थात् नाभि से ऊपर जितनी भी इन्द्रियां हैं, वे सब पवित्र हैं और जो नाभि से नीचे के हिस्से हैं, वे सब अपवित्र हैं| वैश्य क्योंकि नाभि के नीचे के भाग से उपजे हैं, अत: वे नीच हैं|

    श्री गोयल जी आप जिस धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये आँख बन्द करके, जिन लोगों के मोहपाश में फंसे हुए हो, उनकी नीति के अनुसार जंघा से उत्पन्न वैश्यों के साथ आर्य मूल की वर्तमान में प्रचलित ब्राह्मण मानसिकता के लोग कैसा व्यवहार कर सकने के लिये मनु द्वारा अधिकृत हैं? यह जानना चाहते हैं तो मनुस्मृति के अध्याय 11 के 11वें श्‍लोक को पढकर और किसी विश्‍वसनीय और संस्कृत का ज्ञान रखने वाले निष्पक्ष गैर ब्राह्मण व्यक्ति से अनुवाद करवा कर समझ लें| मैं आपको डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा किया गया अनुवाद यहॉं प्रस्तुत कर रहा हूँ| जो इस प्रकार है :-

    “यज्ञ करते हुए यदि धनाभाव के कारण यज्ञ पूरा न हो रहा हो तो यज्ञ करने के लिये अयोज्ञ और हीन वैश्य के घर से भी आवश्यक सामग्री ली जा सकती है और यदि वैश्य देने से इनकार करे तो बलात्कार या चोरी द्वारा ब्राह्मण को ये सामग्री प्राप्त करने की पूरी छूट है|
    क्योंकि प्रथ्वी पर जितनी भी धन संपदा है उसपर केवल ब्राह्मन का ही अधिकार है| केवल यही नहीं ये भी साफ कर दिया गया है कि राजा ऐसे कार्य के लिये ब्राह्मण को दण्डित नहीं करेगा|”

    ऐसा कानून भारत में लागू करवाने के लिये प्रयत्नशील हैं, ‘भारत स्वाभिमान’ के समर्थक! क्या आप भी ऐसा धर्माधारित कानून चाहते हैं? यदि हॉं तो आपको ‘भारत स्वाभिमान’ आन्दोलन मुबारक हो!

  40. श्री सचिन जी इस देश के ९८ फीसदी लोगों के जीने के हक को ईसाई या पोप नहीं, बल्कि दो फीसदी आर्य मूल के मनुवादी छीन रहे हैं| जो दूसरों की तो छोडिये अपनी माता, पुत्री, बहिन और पत्नी अर्थात “मात्र शक्ति” तक को इन्सान नहीं मानते| विश्वास नहीं हो तो पढ़ लीजिये :-

    १. ‘‘स्त्री मन को शिक्षित नहीं किया जा सकता| उसकी बुद्धि तुच्छ होती है|’’ देखें-ॠगवेद मंत्र (८/३३/१७)

    २. ‘‘स्त्रियों के साथ मैत्री नहीं हो सकती| इनके दिल लक्कड़बग्घों से भी क्रूर होते हैं|’’ देखें-ॠगवेद मंत्र (१०/९५/१५)

    ३. ‘‘कृपणं ह दुहिता’’ अर्थात्-‘‘पुत्री कष्टप्रदा, दुखदायिनी होती है|’’ देखें-ब्राह्मण ग्रंथ, ऐतरेय ब्राह्मण मंत्र (७/३/१)

    ४. ‘‘पुरुषों को दूषित करना स्त्रियों का स्वभाव ही है| अत: बुद्धिमामनों को स्त्रियों से बचना चाहिये|’’ देखें-मनुस्मृति, अध्याय-२ (श्‍लोक-२१७)

    ५. ‘‘शास्त्र की यह मर्यादा है कि स्त्रियो के संस्कार वेदमन्त्रों से नहीं करने चाहिये, क्योंकि स्त्रियॉं मूर्ख और अशुभ होती हैं| (एक स्थान पर लिखा है कि क्योंकि निरेन्द्रिय व अमन्त्रा होने के कारण स्त्रियों की स्थिति ही असत्य रूप होती है)’’ देखें-मनुस्मृति, अध्याय-९ (श्‍लोक-१८)

    ६. ‘‘विधवा स्त्री को दुबारा विवाह नहीं करना चाहिये, क्योंकि ऐसा करने से धर्म का नाश होता है|’’ देखें-मनुस्मृति, अध्याय-९ (श्‍लोक-६४)

    ७. ‘‘स्त्रियॉं कौनसा दुष्कर्म नहीं कर सकती|’’ देखें-चाणक्यनीतिदर्पण, अध्याय-१० (श्‍लोक-४)

  41. Aarop to logo ne vivekanand or gandhi ji per bhi lagaye the……….lekin unhe murakh kaha gaya. Is lekh ko likhne ke baad,lekhak apne aap ko kaha rakhte hai khud taya kare.

  42. तथ्यों को बिना जाने बिना समझे किसी पर भी मिथ्याभियोग लगाना और सनातन संस्कृति की आलोचना करना इतना आसान नहीं है एक बात अच्छी प्रकार समझ लीजिये कि नेट पर बैठने वाले लोग आपकी तरह जाहिल और कुत्सित मानसिकता वाले न होकर परम राष्ट्रवादी है. आपका कुत्सित ज्ञान इस बात से ही परिलक्षित हो रहा है कि आप मनु को जाने बिना ही उनकी मनु स्मृति पर टिप्पड़ी कर बैठे कम से कम मनु स्मृति का अध्ययन करके ये तो जान लीजिये कि मनु कोई ब्राम्हण नहीं थे. नियोग का विषद पाठन करके आप यह भी जान सकते हैं कि यह कितनी पवित्र व्यवस्था है और इस व्यवस्था को मानने के लिए कोई स्त्री बाध्य नहीं होती अपितु उसकी सहमति होने पर ही वंश वृद्धि की कामना से नियोग किया जाता है वो भी ब्राम्हण द्वारा न होकर उसी कुल के किसी व्यक्ति या स्त्री के देवर से करने की व्यवस्था है अतः हे परम राष्ट्रद्रोही, कुत्सित मानसिकता वाले संस्कृति द्रोही! तुम्हारे जैसे लोगो के वध के लिए ही भगवान परशुराम ने जन्म लिया था और अब तुम्हारे कुल और अन्य गद्दारों के वध के लिए बाबा रामदेव अवतरित हुए हैं. सावधान हो जाओ और अपने इस लेख के लिए क्षमा याचना कर लो अन्यथा कुत्ते की मृत्यु पाओगे

  43. जितना जहर अपने बाबा रामदेव और आर्य के लिया उगले है अगर उतनी ही सच्ची बातें पोप और ईसाईयों के बारे में लोगों के बातें तो बहुत अच्हा होगा

  44. Pata nahi.. indian intellect ko ho kya gaya hai? Pata nahi chalta aakhir wo chahta kya hai? aap apne lekhan se logon ko anjaan khatre se aagah kar rahe ho ya dara rahe ho? Aap ramdev ko bhulkar bharat swabhiman ke vicharon ke saath ho ya nahi ho? Aur agar nahi ho to kyon nahi ho? kya aap kuchh special karna chahte ho? Kya aapse kuchh special ho sakta hai? Agar nahi to un vicharon ko poore man se (kam se kam) sahyog kyon nahi kar rahe ho jo desh hit mein hai..aaapko bhi kahin Baba Hathyogi.. ya Digvijay Singh se sahanubhooti to nahi hai? Kyon ek bhale manas ke peechhe pade hue hain wo indian intellect….jinki kul sankhya ka more than 60% voting bhi nahi karte? Kya kabhi kisi ne kisi se yes poochha tha….ya bola tha ki Shyama Prasad mukherji, Lal bahadur shastri, lalit narain misra ki maut kab, kahan, kaise hui thee.

    Harek parivartan balidan maangta hai… bade parivartan to aur bhi bada balidan mangata hai..kya Agar abhi Baba Ramdev ki maut ho jaaye to apko rona nahi aayega.

    Shame to Purushottam Meena.

  45. अगर आप ऐसे लेख छपे गे तो में प्रवक्ता साईट देखना ही बंद कर दूंगा.

  46. बेहद शर्मनाक लेख, लगता है तुम भी उन काइयां साधुओं की टोली में शामिल हो गए हो जो बाबा रामदेव की सफलता से पूरी तरह पगला गए हैं और उन पर नाना प्रकार के आरोप लगा रहे हैं, तुम लोग अपनी शतुर्मुर्गी सोच कब छोड़ोगे जब तुम्हारे परिवारों पर जेहादी हमले शुरू हो जायेंगे तब. और ये बकवास लिखना बंद करो क्या तुम्हे मालूम है की भगवा आतंकवाद शब्द हिन्दुस्तान के अलावा दुनिया में कहीं सुनाई नहीं पड़ता है जबकि इस्लामिक आतंकवाद सवा सौ देशों से ज्यादा देशों में हाहाकार मचाये हुए है, बस इस्लामिक आंतंकवाद को हल्का करने के लिए ये शब्द गड़ लिया गया है जबकि इस शब्द का सच्चाई से कोई दूर दूर तक वास्ता ही नहीं है,और ये सब हो रहा है तुम जैसी नाटकीय सेकुलर सोच रखने वालों के कारण.

  47. आप जिस भाषा पर उतर आऐ है वो यह बताने को पर्याप्त है आप कितने घटिया आदमी हैँ।सम्पादक जी क्या आप अपने पत्र मेँ ऐसी भाषा को बडावा देना चाहते हैँ?विवेकहिन पागलोँ के प्रलाप को क्या दुसरे विवेकहिन पागल प्रलाप की अपेक्षा करते हैँ?पागल बन कर गालियाँ बकने मेँ कोई श्रम है?आप का मँच क्या बामसेफ छाप के घटिया विचारोँ से भरेगा?इन साहब का घोषित उद्देश्य आपके मँच का माहौल खराब करना है व समाज मेँ विष घोल कर जातिय झगड़ो को बड़ावा देना हैँ.क्या आप बामण,बनियोँ के खिलाफ इन विद्दान के तथ्योँ के पक्ष मेँ हैँ?सीधी सीधी बात है ये कुण्ठित महान विद्दान आपकी सदाशता का अनुचित लाभ उठा कर घृणा फैला रहै है और हम पाठकोँ को आपके मंच से तौड़ने की कोशिश कर रहे है।यह मत समझियेगा कि हमारे पास कोई तर्क या तथ्य नहीँ है इन झोला छाप विद्दानोँ की किताबेँ पढ़ कर बता रहा हुँ इनसे तर्क की कोई गुँजाइश नहीँ हैँ कोइ इनके पास सिवाय ब्राह्मणोँ को गालियाँ बकने के आलावा कुछ ना है।खुद को गालियाँ सुनना कम से कम मेँ तो नहीँ चाहुँगा,अगर आप इस लेख को नहीँ हटाते तो ये मान कर चलिए कि आप एक जागरुक पाठक खो देँगेँ।जय श्री राम

  48. Once again Mr Niraknush has shown his hate mentality towords Bharatiya culture and Bharatiya icons.What Mr Nirankush has written is a churth theory. Actually I am not surprised by seeing this article. I feel he is a planted man by Church and other western forces. He is not the single person to do so, there are number of peoples doing the same and pursuing the agenda of Church in Bharat. A person like Mr Nirankush is accusing Baba Ramdev. What Mr Nirankush has done to the society except pursuing the Church agenda. So peole know the truth . The people of Bharat barsh need not worry by these type of hate articles. They should rather ignore these type of cheap planted article

  49. भारत देश के लिए इस लेख की विषय-वस्तु से कहीं अधिक इसके अभीष्ट लक्ष्य और उद्देश्य भयंकर हैं| यह सब लिखते लेखक किसे चेतावनी दे रहा है, किसको किस से बचा रहा है? क्या पिछले चौंसठ वर्षों से गुलामी की जंज़ीरों में जकडे जीवन के प्रत्येक स्तर पर अत्यधिक अभाव में रहते अधिकांश भारतीयों को बाबा रामदेव और उनके समर्थकों से नई प्रकार की क्रूरता और यातनाओं का भय और शंका बनी हुई है? प्राचीन ग्रंथों और प्राचीन काल में प्रचलित झूठी सच्ची मान्यताओं की ओर संकेत कर हिंदुत्व का हौवा दिखाते विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यक अनुयायिओं में शंका और अनंत वाद-विवाद खडा कर लेखक किसे धोखा दे रहा है? साम्प्रदायिक दंगों में कौन और कितने हताहत होने के विपरीत किसने किसको बचाया भारतीय भाई-चारे का प्रतीक है| मुझे १९४७ की एक घटना याद है| देश के विभाजन के समय कर्फ्यू के दौरान दिल्ली स्थित करोल बाग की नाई वाली गलियों से निकल मुसलामानों को सीमा के उस पर जाते रेलवे स्टेशन के रास्ते पर उनके जान माल के भय के कारण कपूर नाम के एक मजिस्ट्रेट ने उन्हें महरोली की ओर भेज उनकी रक्षा की थी| मजिस्ट्रेट कपूर राष्ट्र स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे| स्वतन्त्र भारत में साम्प्रदायिक दंगे देश में विदेशी राज की याद दिलाते हैं| प्रजा को कमज़ोर बनाए रखने में विदेशी सत्ता को सदैव लाभ था लेकिन स्वंतत्र भारत में देश-निर्माण से बढ़ कर और कौन विषय हो सकता था| क्या लेखक बता सकता है कि साम्प्रदायिक दंगों और हिंसा के विरुद्ध अभी तक कोई विधान क्योंकर नहीं बन पाया है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? कड़वा सच तो यह है कि पत्रकारिता के आडम्बर में लेखक जैसे राजद्रोहियों और षड्यंत्रकारियों ने भारतीय समुदाय के मन में कई ऐसे प्रश्न पैदा कर दिए हैं जिनका उत्तर वे स्वयं देने में भयभीत हैं|

    मुझे स्वयं किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी राजनीतिक वर्ग से कोई लगाव नहीं है लेकिन मेरी सहानुभूति अवश्य उन तत्वों से होगी जो लेखक द्वारा संरक्षित लोगों पर अंकुश धर भारत को यथार्थ स्वंतंत्रता दिलवा सकें|

  50. This hate article shows the agitated state of mind of the author. Looks like the truth exposed by Suresh Chiplunkar has had a very profound impact on the author’s hidden agenda.
    The article is so cheap and demeaning to Hindus, I wonder if the author is a Pakistani. The words he has used against the revered saints like Maharshi Ved Vyas so demeaning I wonder if teh author is a paid agent of Jihadis.

    I strongly denounce the article and its author.

    Baba Ram Dev is a national hero. So is Narendra Modi. One might have difference of opinion with them, but no one can deny the huge social contribution of these two sons of Bharat. Today millions of people all over the world take inspiration from Baba Ram Dev and practice Yoga.

    Shame to Purushottam Meena.

  51. बहुत बढ़िया विश्लेषण सर जी… श्री सुरेश चिप्लूकर जी के चेहरे को उघाड़कर रख दिया आपने……..इन महाशय का इस लेख का पार्ट-१ जितना पाक०साफ़ और निर्लिप्त-विश्लेषण था, पार्ट-२ उतना ही कूप-मंडूक और संलिप्त………….बधाईयाँ

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