लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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हमारे घरों का शीश/कांच/आईना एक खास हिस्सा होता है। आईने के सामने खड़े होकर खुद को निहारना किसे अच्छा नहीं लगता। लेकिन इसकी अहमियत सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। वास्तुशास्त्र के हिसाब से भी दर्पण की , घर में काफी अहमियत होती है। आपके घर में किस दिशा में , किस आकार और आकृति का दर्पण लगा है , इसका भवन और इसके आस-पास की उर्जा पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए वास्तुशास्त्र में इसके सही इस्तेमाल पर काफी जोर दिया जाता है , क्योंकि दर्पण का इस्तेमाल किसी भी तरह की अशुभ उर्जा का मार्ग बदलने के लिए किया जाता है।
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न सिर्फ भारतीय वास्तु शास्त्र में , बल्कि चाइनीज वास्तु यानी फेंगशुई में भी दर्पण को लाभकारी माना गया है। लेकिन इसके लाभ के लिए इसका सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है , क्योंकि गलत इस्तेमाल से नुकसान होते भी देर नहीं लगती। इसका अर्थ यह भी नहीं कि आप अपने घर या दफ्तर में लगे हर दर्पण को शक की निगाह से देखने लगें या किसी भी शीशे को घर लाने से पहले वास्तुविशेषज्ञ की सलाह लें। लेकिन अगर आप थोड़ी सी सूझबूझ और जानकारी से इसका इस्तेमाल करें तो काफी फायदा उठा सकते हैं।

क्या है दर्पण की सही दिशा:-
वास्तु शास्त्र के मुताबिक ब्रह्मांड की पॉजीटिव एनर्जी हमेशा पूर्व से पश्चिम की तरफ और उत्तर से दक्षिण की तरफ चलती है। इसलिए दर्पण को हमेशा पूर्व या उत्तर की दीवार पर इस तरह लगाना चाहिए की देखने वाले का चेहरा पूर्व या उत्तर की ओर रहे। क्योंकि दक्षिण या पश्चिम की दीवारों पर लगे दर्पण , उलट दिशाओं से आ रही ऊर्जा को रिफ्लेक्ट कर देते हैं और आप नहीं चाहेंगे कि आप के घर में आ रही पॉजीटिव एनर्जी वापस लौट जाए।

कैसा हो दर्पण का आकार:-
दर्पण जितना बड़ा और हल्का हो , वास्तु के हिसाब से उतना ही अच्छा माना जाता है। हालांकि संख्या को लेकर कोई कठोर नियम नहीं है , और घर में जरूरत के मुताबिक ही आईनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक से ज्यादा शीशों को मिला कर एक बड़े शीशे की तरह इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि ऐसा करने पर शरीर खंडित दिखाई देगा , जो वास्तु के हिसाब से सही नहीं है।

दर्पण के इस्तेमाल में सावधानी:-
इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि आईना टूटा-फूटा , नुकीला , चटका हुआ , धुंधला या गंदा न हो और उसमें प्रतिबिंब , लहरदार या टेढ़ा-मेढ़ा न दिखाई दे। हमारी शक्ल को ठीक ढंग से न दिखाने वाला दर्पण हमारे प्रभामंडल यानी ‘ ऑरा ‘ को प्रभावित करता है और ऐसे आईने के लंबे समय तक , लगातार इस्तेमाल से नेगेटिव एनर्जी पैदा होती है।

कैसा हो दर्पण का फ्रेम:-
दर्पण का फ्रेम भी काफी अहम होता है। दर्पण का अपना असर इतना ज्यादा होता है कि यह जहां भी इस्तेमाल किया जाता है वहां की ऊर्जा को दोगुना कर सकता है , इसलिए फ्रेम का रंग कभी भी गर्म , तीखा या भड़कीला नहीं होना चाहिए। सुर्ख लाल , गहरे नारंगी या गुलाबी रंग के फ्रेम के इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए। इसकी बजाए अगर फ्रेम नीला , हरा , सफेद , क्रीम या ऑफ व्हाइट हो तो बहुत अच्छा रहता है। अगर फ्रेम कहीं से टूट-फूट जाए या उसकी लकड़ी गिर जाए तो उसे जल्द से जल्द ठीक करवाना चाहिए।

कहां पर नहीं लगाना चाहिए दर्पण:-
किसी भी दर्पण को सोने के कमरे में नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी के सोने के कमरे में दर्पण से किसी तीसरे आदमी की मौजूदगी का अहसास होता है। रात के वक्त अंधेरे में अपना ही प्रतिबिंब हमें चौंका भी देता है। इसलिए अगर आईना या ड्रेसिंग-टेबल रखना भी हो , तो इस तरह से रखा जाना चाहिए कि सोने वाले का अक्स उसमें न दिखाई दे। और , क्योंकि टीवी की स्क्रीन भी शीशे का काम करती है इसलिए टीवी को भी बेड के सामने नहीं रखना चाहिए। अगर किसी वजह से ऐसा करना मुश्किल हो , तो सोने से पहले दर्पण को किसी कपड़े या पर्दे से ढक देना चाहिए।

दर्पण के अन्य वास्तु-प्रयोग:-
दर्पण के इस्तेमाल से और भी कई तरह के फायदे उठाए जा सकते हैं। अगर आपके घर या दफ्तर का मुंह दक्षिण-पश्चिम की ओर है , तो एक अष्टकोणीय दर्पण चौखट या दीवार पर बाहर की ओर लगा देने से उस दिशा से आने वाली नेगेटिव एनर्जी को रोका जा सकता है। अपना चेहरा देखने के लिए अगर गोल आईने का इस्तेमाल किया जाए , तो काफी फायदेमंद रहता है। अगर रसोईघर का दरवाजा , खाना बनाने वाली गृहिणी की पीठ की ओर पड़ता है तो सामने की दीवार पर शीशा लगाने से सहूलियत हो जाती है। व्यापारी या दुकानदार अपने कैश-बॉक्स की भीतरी दीवारों पर भी शीशों का इस्तेमाल करें , तो लक्ष्मी का आगमन होता है और बिजनेस में भी फायदा होता है।
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जानिए कहाँ लगाएं दर्पण (शीशा/आइना/कांच) आपके घर में—

घर पर आईना ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। कई लोगों को तो आर्इने की इतनी बुरी आदत होती है कि वह अपने हर कमरे में एक आईना लगवाते हैं। घर में आईना एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। शीशे या आर्इने का घर पर सही स्‍थान पर लगा होना अति आवश्‍यक है। कई लोग इन तथ्‍यों को सच नहीं मानते हैं लेकिन वास्‍तव में इन बातों का प्रभाव जीवन में पड़ता है। शीशे के स्‍थान के बारे में वैज्ञानिक रूप से कई बातें प्रुफ हो चुकी हैं।

वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि आईना यदि सही दिशा और सही स्थिति में हो तो आपका फायदा और न हो तो आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है।
आइये जानें कि घर पर कहां लगाएं आईना?

1- दर्पण सदैव उत्तर अथवा पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना शुभदायक होते है।
2- भवन में नुकीले व् तेजधार वाले दर्पण नहीं लगाने चाहियें. ये हानिकारक होते है ।
3- यदि आपके घर के दरवाजे तक सीधी सड़क आने के कारण द्वार वेध हो रहा है और दरवाजा हटाना संभव नहीं है तो दरवाजे पर पाक्वा मिरर लगा दें। यह बेहद शक्तिशाली वास्तु प्रतीक है। अत: इसे लगाने में सावधानी रखना चाहिए।
4- आवासीय भवन अथवा व्यावसायिक भवन में ईशान (उत्तर-पूर्व) क्षेत्र ,उत्तर या पूर्व दीवाr में दर्पण लगाना चाहिए इसके लगाने से आय में वृद्धि होने लगती है. और व्यवसायिक सम्बन्धी बाधाए दूर होती है ।
5- आवासीय भवन अथवा व्यावसायिक भवन में दक्षिण, पश्चिम, आग्नेय, वायव्य एवं नैऋत्य दिशा में दीवारों पर लगे हुए दर्पण अशुभ होते है. यदि आपके यहां इस प्रकार के दर्पण लगे हुए है, तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए ।
6 – शयन कक्ष में यदि दर्पण लगाना है तो उत्तर या पूर्व की दीवार पर ही दर्पण लगाना चाहिए ।
7- दर्पण के संबंध में एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेड रूम में बिस्तर के ठीक सामने आइना लगाना अशुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे पति-पत्नी को कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ती है।
8- बिस्तर के ठीक सामने आइना होने से पति-पत्नी के वैवाहिक सम्बन्धों में भारी तनाव पैदा होता है। इसके कारण पति-पत्नी के अच्छे भले सम्बन्धों के बीच किसी तीसरे व्यक्ति का प्रवेश भी हो सकता है।
9 – वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगे दर्पण जिस कोण या दिशा में लगे होते हैं उस कोण की ऊर्जा को परावर्तित करते है ,अब अगर दर्पण सकारात्मक क्षेत्र में लगे होंगे तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भवन में अधिक होगा
10 – दर्पण के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए उन्हें ढक कर रखना चाहिए अथवा इन्हें अलमारियों के अन्दर की ओर लगवाने चाहिए।
11 – पलंग पर सो रहे पति-पत्नी को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण तलाक तक का कारण बन सकता है। इसलिए रात्रि के समय दर्पण दृष्टि से ओझल होना चाहिए।शयन कक्ष में आईना इस प्रकार लगाएं ताकि उस आईने में आपका बैड नजर न आए।
12 – भवन में छोटी‍ और संकुचित जगह पर दर्पण रखना चमत्कारी प्रभाव पैदा करता है।
13 – मकान का कोई हिस्सा असामान्य शेप का या अंधकारयुक्त हो तो वहाँ कटे या बढ़े हुए हिस्से में दर्पण लगाकर ऊर्जा को संतुलित करें
14 – यदि घर के बाहर इलेक्ट्रिक पोल, ऊँची इमारतें, अवांछित पेड़ या नुकीले उभार हैं और आप उनका दबाव महसूस कर रहे हैं तो उनकी तरफ पाक्वा मिरर लगाकर निदान करें
15 – मकान के ईशान कोण में उत्तर या पूर्व की दीवार पर‍ स्थित वॉश बेसिन के ऊपर दर्पण लगाएँ यह शुभ फलदायक है।
16.- कमरें में दरवाजे के अंदर की ओर दर्पण नहीं लगाना चाहिए यदि दरवाजा ईशान दिशा की ओर हो तो दर्पण लगाया जा सकता है |
17.– आफिस या घर में उत्तर-पूर्व दिशा में दर्पण लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसे में बढ़ौतरी होती है।
18.– घर में छोटी और संकुचित जगह पर आईना लगाएं, इससे आपको चमत्‍कारी प्रभाव दिखेगा।
19.– शीशे के सामने कोई शुभ चीज रखी या झलकनी चाहिये, इससे आपके घर में खुशहाली निवास करेगी।
20.– दर्पण को खिड़की या दरवाजे की ओर देखता हुआ न लगाएँ।
21.– कमरे के दीवारों पर आमने सामने शीशा नहीं लगाना चाहिये, इससे सदस्‍यों के बीच में उलझन पैदा होती है।
22.– आईना घर की दीवारों पर न तो ज्यादा ऊपर और न ही ज्यादा नीचे लगाएं, वर्ना घर के लोगों को शारिरीक तकलीफ से गुजरना पड़ सकता है।
23.– आईना हमेशा साफ-सुथरा और बिल्‍कुल भी टूटा हुआ नहीं होना चाहिये। नहीं तो ऐसे आइने में देखने से निगेटिव एनर्जी पैदा होती है।
24.–घर में आईना उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। एेसा करने से आय में वृद्धि के साथ-साथ सभी संकट भी समाप्त हो जांएगे।-आप जहां रह रहे हों या जहां आपका ऑफिस हो वहां उत्तर-पूर्व दिशा में दर्पण लगाना चाहिए। आप देखेंगे कि इसके लगाते ही आय में वृद्धि तो शुरू होगी ही साथ ही कमाई के रास्ते आनेवाली बाधाएं भी दूर होंगी।
25.– अगर आप अपने भाग्य में बृहत्तरकरण लाना चाहते है तो आईने को इस तरह लगाएं कि उसमें किसी शुभ वस्तु की छाया नजर आ रही हो।
26.–आईना घर में सही स्थान पर ही लगाना चाहिए नहीं तो घर के सदस्यों को कई शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।
27 .—-वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि आईने के ढक कर रखना चाहिए। बेहतर है कि आईने को अपनी अलमारियों के अंदर फिट कराएं या फिर ऐसा ड्रेसिंग टेबल हो जिसका आईना उसे खोलने के बाद नज़र आता हो।
28 .—यदि घर का कोई हिस्सा ऐसा हो, जहां अक्सर अंधेरा ही छाया रहता है तो ऐसे जगह गोल आईना लगाकर रखें। यह निगेटिव एनर्जी को भगाने की क्षमता रखता है।
29 .– यदि घर के बेसमेंट या दक्ष‌िण पश्च‌िम (नैऋत्य कोण) दिशा में स्नानघर अौर शौचालय बना है तो वर्गाकार आईना पूर्वी दीवार पर लगाने से वास्तु दोष दूर होता है।
30 .—कहते हैं आईना जितना बड़ा और हल्का हो, उसे उतना ही बेहतरीन माना जाता है। घर में आईने की संख्या चाहे कितनी हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यह जरूरी है कि आईने ने अलग-अलग टुकड़ों को एकसाथ जोड़कर एक जगह न रखें, क्योंकि इस तरह के आईने में आपका शरीर खंडित नजर आएगा औऱ यह शुभ नहीं माना जाता।
विशेष सावधानी–
अपने भवन में नुकीले व् तेजधार वाले दर्पण नहीं लगाने चाहियें । ये हानिकारक होते है |
दर्पण का टूटना अशुभ माना जाता है ।
ऐसी मान्यता है कि कोई मुसीबत इस दर्पण पर टल गयी है, टूटे दर्पण को तुरंत ही फेंक देना चाहिए ।
दर्पण को सोते समय हमेशा कपडे मे ढक कर सोना चाहिये ।

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