कलियुग के अग्रदूत – महाराजा अग्रसेन 

महाराजा अग्रसेन एक इतिहास पुरुष थे, वह पिता बल्लभसेन के एक सच्चे अग्र आर्य पुत्र थे। महाभारत काल के दौरान हुई हिंसा में समाप्त हो रही आर्य अग्र वैश्य जाति की दयनीय स्थिति को देख विचलित हो उठे, क्योंकि महाभारत के युद्ध में लगे पैसे से व्यापारी वर्ग प्रायः समाप्त हो चला था। चारों ओर पैसे के अभाव में गरीबी, भुखमरी, लड़ाई-झगड़े, अशांति का माहौल पैर पसार रहा था। इस बात को उन्होंने विचारा और संकल्प किया कि पुनः इस खोयी हुई गरिमा को वापिस लाकर ही दम लूँगा। पिता बल्लभसेन तो पांडवों के साथ लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए थे|

agrsenविमलेश बंसल ‘आर्या’

महाराजा अग्रसेन एक इतिहास पुरुष थे, वह पिता बल्लभसेन के एक सच्चे अग्र आर्य पुत्र थे। महाभारत काल के दौरान हुई हिंसा में समाप्त हो रही आर्य अग्र वैश्य जाति की दयनीय स्थिति को देख विचलित हो उठे, क्योंकि महाभारत के युद्ध में लगे पैसे से व्यापारी वर्ग प्रायः समाप्त हो चला था। चारों ओर पैसे के अभाव में गरीबी, भुखमरी, लड़ाई-झगड़े, अशांति का माहौल पैर पसार रहा था। इस बात को उन्होंने विचारा और संकल्प किया कि पुनः इस खोयी हुई गरिमा को वापिस लाकर ही दम लूँगा। पिता बल्लभसेन तो पांडवों के साथ लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए थे|
गरीबों को ऊपर उठाये बिना आर्य अग्र जाति का कल्याण नहीं| उन्होंने इस कार्य के लिए शेष बचे धनपतियों को दूर-दूर से बुलाया और 18 यज्ञों की पृष्ठ भूमि रखी जिसमें उन्हें पूर्ण सफलता मिली।  यज्ञों के ब्रह्मा, गुरुओं के नामों के आधार पर अग्र आर्य वंश को आगे बढ़ाया। जिनके नाम हम सबको विदित हैं – गर्ग, गोयल, बंसल, मित्तल आदि, तत्पश्चात् बड़े-बड़े नगर बसाने का कार्य भी आरम्भ करवाया, जिसमें प्रत्येक नए गरीब व्यक्ति को बसाने के लिए प्रत्येक घर से एक रुपया और एक ईंट का फॉर्मूला देकर उनकी रहने की और भोजन की व्यवस्था करवाई। भाइयों बात यहीं नहीं रुकी, अन्याय, अत्याचार, अभाव, अज्ञान, अधर्म के बढ़ने से अनार्यों, राक्षसों की बढ़ती हो गरीबी के चलते पशुओं की हिंसा, छोटे-बड़े का भेदभाव, आश्रम व्यवस्था तथा वर्ण व्यवस्था में असंतुलन से परिवार, समाज और देश की भारी क्षति से क्षुब्ध महाराजा अग्रसेन ने खोयी हुई अपनी प्रतिष्ठा को पशुबलि हत्या रोक, सामाजिक समरसता को ला, हम सबके ऊपर बड़ा उपकार किया। आज सभी आश्रम तथा सभी वर्ण , वैश्य पर आधारित हैं, जिसे कि वेद ने आर्य कहा है। आर्य का अर्थ श्रेष्ठ होता है, जो धीरे-धीरे सेठ के नाम से अपभ्रंश हो गया तथा लाला जिस पर हर वक्त मांग बनी रहती है।
एक और मुख्य बात जाति प्रथा को बन्द करने के लिए स्वयं सूर्यवंशीय, क्षत्रिय होते हुए भी वैश्य धर्म को अपनाकर नाग जाति की कन्या माधवी से विवाह कर लोगों के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया| ऐसे महाराजा वैदिक धर्म के संवाहक, हम सबके प्रणेता का आज 5140 वां जन्म दिवस है। हम सबका परम सौभाग्य है, कि हम अति सुंदर भव्य आयोजनों को कर परिवार, समाज और देश को समृद्ध और सुसंस्कृत बनाने के लिए आज के दिन संकल्पित होते हैं। ईश्वर की हम सब पर यह महती कृपा बनी रहे। हर वर्ष इसी तरह ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर, अपने हिन्दू भाई-बहिनों को ऊपर उठाने के  लिए हम सब कटि बद्ध रहें|
इन्हीं शब्दों के साथ हार्दिक शुभकामनाएं तथा लख-लख बधाई

 

अग्रसेन के श्रीचरणों में       

 

अग्रसेन के श्रीचरणों में, शत शत बार नमन।

शत् शत् बार नमन, हमारा खिले अग्र उपवन॥

हमारा खिले आर्य उपवन॥

 

1 अग्र वंश के हम सब लाल, माँ लक्ष्मी ही हमारी ढाल|

करें समर्पित तन, करें समर्पित तन, हमारा खिले ………

 

2 अन्यायों से हम न डरेंगे, हिंदू धर्म हित भेंट चढ़ेंगे|

करके स्वार्थ दमन, करके स्वार्थ दमन, हमारा खिले ………

 

3 शिक्षित हर संतान करेंगे, यज्ञों से घर-घर महकेंगे|

करके ईश नमन, करके ईश नमन, हमारा खिले ………

 

4 कोई न हिंसा कभी करेंगे, प्रण ये मिलकर सभी करेंगे|

तन मन और वचन, तन मन और वचन, हमारा खिले ………

 

5 अभाव कहीं न रहने पाये, हर दिल ऐसा भाव जगाऐं|

हो फिर चैन   अमन, हो फिर चैन   अमन, हमारा खिले ………

 

6 लाख बधाई आप सभी को, नमन महालक्ष्मी सरस्वती को|

गूंजे घोष गगन, गूंजे घोष गगन, हमारा खिले ………

 

अग्रसेन के श्रीचरणों में, शत शत बार नमन।

शत् शत् बार नमन, हमारा खिले अग्र उपवन॥

हमारा खिले आर्य उपवन॥

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