लेखक परिचय

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

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– डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री

केरल देश का शायद सबसे ज्यादा अनुपात वाला साक्षर राज्य है। केरल ही वह प्रदेश है जहां देश के इतिहास में पहली बार लोकतांत्रिक ढंग से साम्यवादी सरकार को चुना गया था। इसलिए कुछलोग ऐसा भी कहते हैं कि केरल चिंतन और व्यवहार में देश का सबसे प्रगतिशील राज्य है। इतिहास में केरल परशुराम की धरती के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इस केरल को मुस्लिम बहुल बनाने का या फिर इसाई बहुल बनाने का प्रयास या फिर कहें कि षडयंत्र पिछले कई दशकों से चल रहा है। भारत की राजनीति जिस प्रकार की हो गयी है उसमें इस षडयंत्र का विरोध करने का साहस कोई नहीं कर पाता। क्योंकि अंततःसारे समीकरण मुुस्लिम मतों के इर्द -गिर्द आकर सिमट जाते हैं। जहां तक कि कोयम्बटूर बम विस्फोट के मामले में जेल में बंद अब्दुल नासिर मदनी को जेल से छोडा जाए ऐसा एक प्रस्ताव केरल विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। और कहना न होगा कि प्रस्ताव पर बहस के समय कांग्रेस और सीपीएम के लोग मदनी के समर्थन में एकदूसरे से होड ले रहे थे। रिकार्ड के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीडीपी, के अध्यक्ष अब जेल से बाहर हैं। केरल में पिछले सौ सालों से धीरे -धीरे मतांतरित इसाईयों और मुसलमानों की संख्या बढती जा रही है। भारत सरकार के ही आंकडों के अनुसार प्रदेश में इसाईयों की संख्या लगभग 25 फीसदी और मुसलमानों की संख्या 19 फीसदी है। यानी दोनों की जनसंख्या कुल मिलाकर लगभग 45 फीसदी बन जाती है। अब इसाईयों को भी लगता है और मुसलमानों को भी लगता है कि वे उस स्थिति में पहुंच गए हैं जिसमें वे एक और धक्का देकर या तो राज्य को इसाई बहुल बना सकते हैं या फिर मुस्लिम बहुल। इस कार्य के लिए दोनों का निशाना प्रदेश के बचे हुए हिंदुओं पर ही है। इसाई हिंदू को मतांतरित करने के लिए सेवा का पाखंड करते हैं और आतंकवादी इस्लामी संगठन उन्हीं पुराने हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें वे अनेक देशों में सफलतापूर्वक अजमा चुके हैं। यानी जोरजबरदस्ती, लालच या फिर फरेब।

अब क्योंकि इसाई और इस्लामी आतंकवादी संगठन एक ही उद्देश्य के लिए एक ही दिशा में चल रहे हैं। इसलिए उनमें टकराव होना शुरु हो गया है। रिकार्ड के लिए अब तक राज्य में सीपीएम मुस्लिम साम्प्रदायिकता को बढावा देती रही है और इसकी व्याख्या मार्क्सवादी शब्दावली में जनसंघर्ष के नाम से करती रही है। उदाहरण के लिए जब अंग्रेजों के वक्त में केरल में मोपलाओं ने हिन्दुओं का नरसंहार किया और उन्हें इस्लाम मत में दीक्षित होने के लिए मजबूर किया तो साम्यवादी शक्तियों ने इसकी व्याख्या किसान संघर्ष के नाम से की। सीपीएम ने केवल सत्ता में बने रहने के लिए नम्बूदरीपाद के मुख्यमंत्रित्वकाल में सम्प्रदायिक इस्लामी संगठनों का यह दावा स्वीकार किया कि प्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या बहुलता वाला एक अलग जिला गठित किया जाना चाहिए, और मल्लापुरम नाम के मुस्लिम जिले का गठन किया।

केरल के दोनों मुख्य राजनीतिक दल चाहे वे कांग्रेस हो या फिर सीपीएम। मुस्लिम साम्प्रदायिकता के तुष्टीकरण में जुटे रहे। मुस्लिम लीग के साथ समय -समय पर दोनों राजनीतिक दलों ने चुनावी समझौते किए। इससे, मुस्लिम आतंकवादियों को शह भी मिली और उनका हौसला भी बढा। केरल में इन मुस्लिम संगठनों ने लव जिहाद के नाम से एक नया गुप्त आंदोलन शुरु किया जिसमें मुसलमान युवकों को इस बात का प्रशिक्षण दिया गया कि वैसे हिन्दु लडकियों को प्रेमपाश में फंसाएं और फिर उनसे शादी करें। जो मुस्लिम युवक इसमें सफल हो जाते हैं उनको कहा जाता है कि एक लाख रुपए का इनाम दिया जाता है। ऐसी लडकियों को या तो बाद में सउदी अरब में बेच दिया जाता है या फिर पाकिस्तान में प्रशिक्षण ले रहे आतंकवादियों की हमबिस्तर होने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। कुछ लडकियों ने आत्महत्या कर ली और बहुत के पास वेश्यावृत्ति अपनाने के सिवाय कोई चारा नहीं रहा। केरल में लव जिहाद का संकट इतना गहराया कि अंततः प्रदेश के उच्च न्यायालय को यह आदेश देना पडा कि लव जिहाद के षडयंत्र की पूरी तरह जांच की जाए और इसमें लगे हुए षडयंत्रकारियों को पकडा जाए। केरल में मुस्लिम आतंकवादियों के सार्वजनिक रुप से कर रहे संगठन उदाहरण के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और जमायत-ए-इस्लामिए हिंद ने केरल को इस्लामी राज्य बनाने की सार्वजनिक मुहिम छेड दी है। पीएफआई के गुण्डों ने एक प्रोफेसर की बाहें सरेआम इसलिए काट दी कि उसने प्रश्नपत्र में इस्लाम के बारे में कोई ऐसा प्रश्न पूछा था जिसे इस्लामी आतंकवादी स्वीकार नहीं कर सके। अर्थात बोलने लिखने और पढने की स्वतंत्रता को इस्लामी संगठन अभी से प्रतिबंधित कर देना चाहते हैं जबकि मुसलमानों की जनसंख्या महज 19 फीसदी है। इसका सीधा से अर्थ है कि ज्यों ज्यों प्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या बढती जाएगी त्यों -त्यों स्वतंत्र चिंतन परम्परा पर ताले लटकते जाएंगे। जिस अब्दुल नासिर मदनी का उपर जिक्र किया गया है उस पर कर्नाटक मंे आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के केस दर्ज हैं लेकिन जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए जाती है तो हजारों हजार के संख्या में मुसलमान एकत्रित होकर उसकी गिरफ्तारी को नाकाम ही नहीं करते बल्कि पुलिस की पिटाई भी करते हैं।

ये वो तथ्य हैं जो मीडिया के माध्यम से जनसाधारण तक पहुंचते हैं यही तथ्य केरल के आने वाले भविष्य की ओर संकेत करने में पर्याप्त हैं। लेकिन केरल के मुख्यमंत्री के पास तो इससे भी कहीं भी ज्यादा सूचनाएं और जानकारी होगी। लगता है केरल में पानी सिर के उपर से गुजरने की स्थिति में आ गया है। शायद यही कारण है कि सीपीएम के मुख्यमंत्री अच्युतानंदन को सार्वजनिक रुप से अपने पुराने सहयोगियों के षडयंत्रों का खुलासा करना पडा। मुख्यमंत्री के अनुसार मुस्लिम संगठन ऐसी योजना बना रहे हैं कि अगले बीस सालों में केरल एक मुस्लिम बहुल राज्य बन जाए। वे लोगों को पैसे दे रहे हैं और दूसरे लालच भी दे रहे हैं ताकि केरल के लोग इस्लाम मत को स्वीकार लें। इतना ही नहीं, मुसलमानों की जनसंख्या बढाने के लिए एक सोची समझी योजना के तहत मुसलमान युवक हिन्दू लडकियों से शादी कर रहे हैं। जब किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री ऐसा खुलासा करता है तो वास्तविक षडयंत्र कितना खतरनाक है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है और खासकर के यदि मुख्यमंत्री कट्टर मार्क्सवादी हो तो षड्यंत्र की गंभीरता और भी गहरा जाती है।

लेकिन संकट की इस घडी में भी प्रदेश में कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण के प्रयासों में ही लगी हुई है। कांग्रेस को लगता है कि सीपीएम के इस रुख से मुसलमान जरुर नाराज होंगे। नाराज मुसलमानों को यदि कोई प्रलोभन देकर अपनी ओर खींच लिया जाए तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकती है। कांग्रेस को अपनी सरकार बनाने की चिंता है परशुराम की धरती केरल के भविष्य की नहीं। इसलिए, उन्होंने एक स्वर से जिहाद छेड दिया कि मुख्यमंत्री तो आरएसएस की भाषा बोल रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि मैं आरएसएस की भाषा नहीं बल्कि सत्य बोल रहा हूं। उनके अनुसार मेरी सूचना राज्य में आतंकवादी घटनाओं के मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के घरों से बरामद दस्तावेजों के साक्ष्य पर आधारित है।

कुछ अरसा पहले लव जिहाद के सिलसिले में जो बात केरल उच्च न्यायालय ने कही थी वही बात अब राज्य के कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री कह रहे हैं। जरुरी है कि इस मसले पर राजनीति को छोडकर प्रदेश में इस्लामी आतंकवाद के परदे के पीछे प्रदेश की पहचान और उसके सांस्कृतिक स्वरुप को बदलने के षड्यंत्र को परास्त किया जाए।

3 Responses to “केरल को लेकर इस्लामी आतंकवादियों का षड्यंत्र”

  1. shishir chandra

    अग्निहोत्री जी केरल की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है. मुझे लगता है जल्द ही यह जम्मू एंड कश्मीर की तरह असफल राज्य बन जायेगा. अल्पसंख्कों का इतना अधिक संख्या ने केरल को oxygen में रख छोड़ा है. हिन्दू ही ध्रुवीकरण के द्वारा केरल की अस्मिता को बचा सकते हैं. जो फिलहाल असंभव कार्य दिखाई पड़ता है. ईसाई और मुस्लिम संगठनों की धर्मान्तरण की नीति ने केरल को उलझा कर रख दिया है. भारतीय लोकतंत्र इनके सामने असहाय है. हम देखने के सिवा कुछ कर भी क्या सकते हैं. केरल की साक्षरता को धिक्कार है. इससे बढ़िया तो अनपढ़ लोग हैं, जो ऐसी कुत्सित चालें और खूनखराबा नहीं करते. क्या केरल के लोग इस घटना से सबक लेंगे? क्या पूर्व की तरह आपस में लड़ते रहेंगे? कांग्रेस और कोम्मुनिस्ट दोनों केरल के लिए आत्मघाती होंगे. rss के alava koi भी sangthan rashtravadi najar नहीं aata. lekin janta के active samarthan के bina rss कुछ भी नहीं कर sakti.

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  2. Anil Sehgal

    (i) Maoism is different from Marxism
    (ii) Maoism is for spreading lawlessness and collecting money
    (iii) As such, Maoism, contrary to their claim, is practically not ideology- based
    (iv) Mamta Banerjee appears (as seen from Lalgarh rally) to have made up her mind that she needs might and men of Maoists to fight Marxists
    (v) Maoists appear set to fight Marxists with the help of Mamta’s Trinamool
    MY SUGGESTION FOR CONSIDERATION FOR KERELA IS:
    (a) There is criticism from Maoists that Kerela Chief Minister is speaking in the language of RSS
    (b) Wise counsel would be to follow the tested rule – enemy’s enemy should be befriended to remove the menace of common enemy
    (c) Both RSS and Marxists are ideology based; as such both can consider to have liaison with each other :
    – to evolve strategy to first weaken Maoists / terrorists, and
    – to weaken Islamists & Christians and
    – to ensure to keep both away from power.
    (d) Follow the strategy of Mamta Banerjee to become friendly with enemy of the enemy.
    There has to be a strategy to fight terrorists. There is no helplessness.
    Have faith in your capacity and proceed.

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  3. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    चेतना का संकट किस कदर गहरा चूका है .वह अग्निहोत्री जी ने प्रस्तुत आलेख में
    बयान कर दिया है .आज़ादी के बाद से ही दक्षिण भारत में क्षेत्रीय दलों ने तथाकथित राष्ट्रयीय दलों को लोकतंत्रात्मक खामियों के चलते लगातार ब्लैक मेल किया है .तमिलनाडु से डी एम् के आन्ध्र से तेलगु देशम .टी एम् सी कर्नाटक में जे डी एस और केरल में तो एक दर्ज़न छोटी छोटी पार्टियों ने लगातार कांग्रेस और भाजपा को उल्लू बनाया है .
    कांग्रेस ने आज़ादी के बाद हमेशा मुस्लिम लीग की वैशाखी का सहारा लिया .यहाँ तक की १९६० में मुस्लिम लीग कैथोलिक चर्च तथा तत्कालीन हिन्दू कट्टरपंथी धडों ने समवेत स्वर में केरल के महान मुख्या मंत्री इ एम् एस नम्बूदिरिपाद को मध्यावधि चुनाव तक नहीं कराने दिया था .

    हम जो बोयेंगे वही तो काटेंगे .अब चूँकि मदनी को कट्टरपंथ का आदेश है की केरल की कम्मुनिस्ट सरकार गिर्वानी है .ममता को आदेश है की बंगाल सरकार गिरानी है .तो वे अवश्य कोशिश करेंगे .चूँकि केरल बंगाल तथा त्रिपुरा की सरकारे नै उदारीकरण निजीकरण तथा भूमंडलीकरण की अमेरिकी चौधराहट के खिलाफ हैं और हमारे देश का वर्तमान नेत्रत्व पूरी तरह white हाउस के शरणम गच्छामि हो चूका है सो उनके agende को पूरा करने के लिए नए पुराने अनुषंगी istemaal kiye jaa rahe हैं .v एस achutaanandan sirf मुस्लिम saamprdaayikta के ही खिलाफ नहीं apitu वे hr kism की saamprdaayikta के खिलाफ हैं

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