लेखक परिचय

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

लेखक एन.डी. सेंटर फार सोशल डेवलपमेंट एंड रिसर्च के अध्यक्ष हैं।

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–पंकज चतुर्वेदी

भारतीय उप-महाद्वीप में राजनितिक परिवारों से राजनेताओं के आने का सिलसिला बहुत पुराना है। पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो के परिवार से बेनज़ीर, दामाद आसिफ जरदारी तो है ही और अब नाती बिलावल और उसकी बहने बख्तावर और आसिफा भी पाक राजनीति जमात में शामिल होने को तैयार हैं, बस इनकी उम्र इन्हें रोक रही क्योकि ये सब अभी पाक की सरकारी राजनीतिक उम्र पच्चीस से छोटे हैं। ऐसा ही कुछ श्रीलंका में भी है जहाँ भंडारनायके दंपत्ति प्रधानमंत्री रहे, तो पुत्री चन्द्रिका कुमारतुंगे भी प्रधानमंत्री बनी एवं पुत्र अनुरा भंडारनायके संसद के अध्यक्ष से लेकर मंत्री के पद तक रहें।

बंगलादेश में संस्थापक मुजीब की पुत्री शेख हसीना वाजेद तो अभी सरकार की मुखिया है तो उनके पुत्र संजीब वाजेद जोय भी अपनी माँ की विरासत को सहेजने और सम्हालने के प्रयास में है। इसी तरह से हम ज़ियाउर्रहमान की पत्नी खालिदा ज़िया को भी इस फेहरिस्त में शामिल कर सकते हैं। उप-महाद्वीप के इन देशो में लोकतंत्र हमेश से ही कमजोर रहा है, कही सैनिक शासन तो कहीं आतंकवाद ने लोकतंत्रों को चुनौती दी है।

हमारा भारत लोकतंत्र के मामले में सौभाग्यशाली है, अनेक प्रहारों और चोटों के बाद भी हमारा लोकतंत्र आज भी मजबूत है।

इस सशक्त लोकतंत्र में गत दिवस भारत के एक बड़े मीडिया समूह द्वारा कराये गए आंकलन में, भारतीय जनमानस ने आपने जननेता के रूप में राहुल गांधी की स्थापना से अब भारत की राजनीति और राजनेताओ को अपनी दिशा और दशा बदलने का एक बड़ा संकेत दिया है। इस आंकलन के अनुसार राहुल गाँधी भारत के तमाम राजनीतिज्ञों में जनप्रियता के मामले में शीर्ष पर है।

भारत के सबसे बड़े राजनितिक परिवार से जुड़े होने वाले राहुल ने अनेको बार यह स्वीकार है कि उन्हें नेहरु-गाँधी परिवार का अंश-वंश होने का लाभ मिला है, पर इसके साथ साथ हमें यह भी स्वीकारना होगा कि इस विशेषाधिकार के बाद भी राहुल गाँधी ने स्वयं को भारत के जन मानस का नेता साबित करने के लिए कठोर परिश्रम और प्रयास किये है।

एक अरब से अधिक आबादी के इस देश में राजनीति करना बहुत आसान है ,पर जनता में लोकप्रियता प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। लेकिन अपनी विशिष्ट राजनितिक शैली के आधार पर राहुल गाँधी ने इस दिशा में बहुत प्रगति करी है।देश के उन्नीस राज्यों से लिए गए इन आंकड़ों में युवाओं, पुरुषों एवं महिलाओ सभी वर्गों में राहुल कि लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल देख गया है।

राहुल ने राजनितिक बदलाव कि शुरुआत अपने ही दल से करी, और इस परिवर्तन एवं प्रयोग के लिए कांग्रेस कि राजनितिक –पौधशाला छात्र संगठन एन.एस.यू.आई .और युवा कांग्रेस पर विशेष ध्यान केंद्रित किया और बड़े नेताओ के पट्ठो के स्थान पर भारत के अनेक राज्यों में अब इन दोनों संगठनो में एक आचार संहिता के तहत विधिवत लोकतान्त्रिक पद्धत्ति से निर्वाचित साधारण और अराजनैतिक पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली युवक –युवतियाँ भी सामने आ रहे हैं। जिसका फायदा यह होगा कि आने वाले समय में कांग्रेस के नेता यही से निकलेंगे और यदि पौधशाला अच्छी और उन्नत है, तो परिणाम भी अच्छे होंगे। यद्यपि परिवर्तन कि प्रकिया सहज नहीं होती है, इसमें बहुत सी अड़चने और परेशानियां सामने आती है। फिर भी राहुल अपनी धुन के पक्के है और उन्होंने इस और बड़ी तेजी से कदम बढ़ाये है।

इसके साथ ही राहुल भारत भर में लगातार घूम घूमकर आम आदमी से सीधा संवाद स्थपित कर रहे है, तो कही किसी दलित या अदिवासी के घर भोजन और प्रवास ,और उनकी यही शैली उन्हें जनता में लोकप्रिय बना रही है। राहुल के विरोधी भले उनकी इस कार्य पद्धत्ति का मजाक बनाये, पर राहुल जानते है कि देश हित में क्या भला और क्या बुरा हैं। आज सुरक्षा कारणों से तमाम बड़े नेता जनता से सीधे नहीं मिल पाते और इसी कारण से वास्तविक जन-भावनाओं से अनभिज्ञ है। इस मामले पर राहुल ने गंभीरता से ध्यान देते हुए यह सुनिश्चित किया की जनता से सीधा संवाद कायम हो ताकि अपनी और अपने दल की कमजोरियों और मजबूतियों का ज्ञान एवं भान होता रहें।

आज भारत कि राजनीति इतनी मैली और सड़ी हो रही कि, पाक साफ बचे रहने बहुत मुश्किल होता जा रहा है। नैतिकता और उत्तरदायित्व जैसी चीजे आज विलोपित होती जा रही है और भ्रष्टाचार और अनैतिकता आज की राज-शैली का अहम हिस्सा बन चुकी है।लेकिन अब भारतीय जन मानस ऐसी राज शैली से ऊब चुका है और वोट लेकर हम पर राज करने वालो के स्वरुप में परिवर्तन का पक्षधर है। और इस परिवर्तन और राजनितिक स्वच्छता की अपेक्षों पर राहुल ने अपनी कार्य –प्रणाली से सफलता हासिल करी है।

उनके समकक्ष और समकालीन अन्य राजनितिक दलों के युवा अभी भी अपनी शैली और छाप निर्मित करने कि प्रक्रिया में राहुल से मीलो पीछे है।

लेकिन इस सब से यह तो बिल्कुल स्पष्ट है कि अब देश की राजनीति में राहुल गाँधी कि शैली और पद्धत्ति ही पनप सकती है, जो आम आदमी के इस सिपाही ने शुरू करी है और जिस जनता ने पूरा पूरा समर्थन भी दिया है। राहुल ने यह बहुत ही स्पष्ट कर दिया है कि वो सत्ता सुख के भूखे नहीं है अपितु देश सुखमय कैसे हो ये उनकी प्राथमिकता है। और शायद उनकी यही अदा भारतवासियों को लुभा रही है।

देखना यह है कि राहुल को देख कर देश के बाकी अन्य दल और उनसे जुड़े नौजवान राज नेता अब क्या रुख अपनाते है। यदि सकारात्मक रुख रहा तो एक स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत हो सकती है, जहाँ देश को नैतिक मूल्यों वाले नेताओं की बीच देश हित और जनहित पर सार्थक संवाद सुनने को मिल सकते है।

15 Responses to “राहुल गाँधी की लोकप्रियता के मायने”

  1. अभागा भारत

    मैं भारत हूँ, अभागा भारत| आप सब आज मुझ से भली भांति परिचित हैं| मेरा वर्तमान स्वरूप कब और कैसे बन गया मुझे खुद ही पता नहीं चला| मेरी धरातल पर अपनी ही कमजोरियों के कारण सदियों से आक्रमणकारियों द्वारा रोंदे छोटे बढे विभिन्न राज्यों में रहते मेरे बाशिंदे मुठी भर अंग्रेजों की चालाकी और धूर्तता की नीति में फस कर रह गए| राजे रजवाडों ने उनकी प्रभुसत्ता के अंतर्गत मेरे बाशिंदों पर अंपनी मनमानी से राज किया| राएजादों, राएबहादुरों, चौधरियों, और अंग्रेजी स्कुल में पढ़े बाबुओं ने मुझ ब्रिटिश इंडिया पर अंग्रेजी शासन को निरंतर बनाए रखने के लिए उनकी भरपूर सहायता की| अंग्रेजों के टुकड़ों पर पलते उन्हें मेरा और मेरे बाशिंदों का कभी ध्यान नहीं आया| गरीबी और अज्ञानता में पल रहे मेरे बाशिंदों के शरीर के साथ साथ उनकी आत्मा भी इतनी क्षीण हो गई कि आज़ादी के तिरेसठ वर्षों बाद भी अपने अच्छे बुरे का विचार किये बिना मुझ गणतंत्र भारत में गुलामी की परम्परा को बनाए रख अब वे काले अंग्रेजों की छत्र छाया में जी रहे हैं| मिथ्या आज़ादी में राएजादों, राएबहादुरों, और चौधरियों के नए रूप में आज अपने काले अंग्रेजों से कुछ पा लेने के प्रलोभन में उनके कार्यकर्ताओं व पढ़े लिखे युवा वर्ग के सदस्यों ने जैसे मेरी और मेरे साधारण बाशिंदों की दयनीय स्थिति से मानों अपनी आँखें मूंद ली हैं| आँखें मूंदे आज खिलौना समझ मुझे वे राहुल बाबा को सौंप देना चाह रहे हैं| मेरे मध्य प्रदेश प्रांत में स्थित छोटे से कोलार की दुर्दशा मेरे कुल धरातल पर सैंकडों हज़ारों छोटे बढे गाँव, कस्बों, और शहरों की सी है| आजादी में नए नवेले दुल्हे के समान सुन्दर तो नहें बन पाया लेकिन आधा अधूरा सांसे ले रहा कोलार मेरी और मेरे बाशिंदों की दयनीयता को अवश्य समझता है| लगता है कि कोलार को भोपाल से कुछ पा लेने की व्यक्तिगत उम्मीद ने उसे काले अंग्रेजों की हाजरी में ला खडा किया है| मैं अभागा भारत अपने गरीब, अज्ञान, व रुग्ण बाशिंदों को गोद में लिए कब तक सिसकीयाँ लेता रहूँगा?

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  2. दीपा शर्मा

    Deepa sharma

    Mahoday
    pata nahe aap kya sidh karna chahte hen. Aap sara bhartiy upmahdip kyn ghume. Jab aapko in chandrvanshiyon ki mahima me rahul-chalisa likhna tha to sidhe 2 likh dete.
    Is prkar ke lekh koi ummid nahe jagate

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  3. sunil

    aap sab kitane bhi gal bajye rahul gandhi ko pradhanmantri ban ne se aap jaise log nahi rok sakte.kya kisi or neta ke liye bharat mein itni bat hoti hai.
    rahul se kyo darte ho dam ho to us se badi lakir khich kar bato
    ho ko dusra nam rahul ki takkar ka
    dhundho par jalo mat

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  4. om prakash shukla

    aphi jaise chatukaro ne rahul gandhi ko itana bada neta bana diya hai.kya desh bhar me hawaijahaj se ghumane se desh ki kisi samasya ka nidan ho jayega.desh chalama koi bachjcho ka khel nahi hai jaisa apke hisab se rahul baba bade ho gaye ab khiluono se nahi desh se kheliyr.aphi jaise logo ne indira hi bharat hai aur bharat hi indira hai ka nara diya tha jisase indira gandhi ko desh ko 19 mahine bandhak banane ka awasar upalabdh karaya tha.akhir desh ke rahul 5 sal sansad rahe aur pure karyakal me sirf 3 bar bole wah bhi kalawati prakarad ke alawa janta kuch nahi jan saki.na to kabhi kisi patrakar ko bhetvarta ka samay diya aur nahi mahagai,atankvad,naxsalvad,videsh neeti,purvottar ke algawvad,kashmir,bambai me purvio ki pitai kisi vishay me kabhi apnmi juban nahi kholi.AUR APKA DESH KO RAHUL DWARA BADALNE KA TARK HAI<APKO DHYAN DILANA CHAHTA HU KI RAHUL BRIGADE KE EKHI COLLEGE JAHA RAHUL PADHE HAI ADHA DARJAN MANTRI is manmohan ke mamtrymandal me hai.apke dawe ki hawa nikalane ko yahi tathya bahut hai.

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  5. राजेश जैन

    this some xcelent political views near to truth,dnt woory about d critics every body has a right to say what they want rahul ji is doing realy for the base of politics not d upper stracture
    do write more n more article like this to reveal d truth

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  6. पंकज चतुर्वेदी

    पंकज चतुर्वेदी

    आप सब का आभार की सब ने अपना कीमती समय मेरे आलेख को दिया |मैं सामन्यत कभी प्रति -टिपण्णी नहीं करता और न अब करूँगा , लेकिन मैं आलोचकों का मुरीद हूँ ,और अलोचन को सदा सकारात्मक रूप से लेता हूँ | फिर भी अपनी लिखी बातों पर अपने अनुसन्धान के बाद अडिग हूँ, और राहुल गाँधी अवसर मिलने पर भारत की तस्वीर और तक़दीर दोनों बदलेंगे ऐसा मेरा विश्वास और कामना है |पुन आपका सबका आभार
    विनायवत आपका
    पंकज चतुर्वेदी

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    • shishir chandra

      चतुर्वेदी साहब आपकी विनम्रता काबिले तारीफ है. आप यदि कमेंट्स पर टिपण्णी करते तो बेहतर रहता. आपकी लेखन कुछ हद तक सही जान पड़ती है. राहुल गाँधी जितना मेहनत कर रहा है, उतना दुसरे दलों में नहीं दिखाई देता! कांग्रेस की परंपरा रही है की गाँधी ब्रांड नामे का फायदा उठाना.इसमें राहुल का क्या दोष? उत्तर प्रदेश में २० से अधिक लोकसभा सीट जितना दिखता है की उसने मेहनत की है. लेकिन कांग्रेस पॉवर के लिए किसी भी हद तक जा सकती है ये उस पर आरोप है? राहुल गाँधी की असफलता को सफाई से अनदेखा कर देना और उसकी अच्छी तस्वीर पेश करना आप जैसे लोगों की आदत है? आज सारा मीडिया और सेकुलर ताकतें राहुल को प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट कर रही हैं? क्योंकि राष्ट्रवादी ताकतों से केवल गाँधी नेहरु खानदान लड़ सकता है? यह दर इनमे समाया हुआ है? नहीं तो इनकी दूकान बंद होने का खतरा रहेगा? हो सकता है ये अपने इरादे पर कामयाब हो जाएँ? क्या राष्ट्रवाद सत्ता की दासी है? क्या सेकुलर ताकतें किसी सामंतवादी व्यवस्था में जी रहे हैं? ये सर्वोच्च पद को एक खानदान के लिए छोड़ के रखते हैं? और नीचे के पदों के लिए दावा करते हैं? और मजे की बात अपनी योग्यता साबित करने की जरुरत कहाँ? बस गाँधी परिवार के करीबी बन जाओ? वाकई इम्तिहान में पास होना आसन नहीं होता बनिस्बत किसी सफल आदमी का कृपापात्र होना? और ये चीज़ इन सेकुलर वादिओं को बहुत रास आ रही है? मजे की बात है कुछ बन गए तो आपको सिर्फ गाँधी परिवार के प्रति निष्ठा की अपेक्षा की जाती है. आप गाँधी परिवार के प्रसाद पर्यंत पद पर बने रह सकते हैं? इस परिवार ने दीर्घ समय में सामानांतर राजनीतिक व्यवस्था कड़ी कर ली है? इस तोडना इंतना आसन नहीं होगा? सत्ता के लालची लोग जो कोई आन्दोलन नहीं खड़ा कर सकते वो अपने फयदे के लिए इस सामंतवादी व्यवस्था का पोषण करते हैं? क्या desh का कोई भी naujawan itna kaabil नहीं? क्या किसी anya congressi को प्रधानमंत्री banne का sapne dekhne का कोई hak नहीं? क्या कोई vyakti seedhe प्रधानमंत्री bana diya jana chahie? na तो कोई mantri के roop में karya kiya na mukhyamantri और na hi jeemini कोई sangharsh करना pada? desh को किसी को seedhe प्रधानमंत्री पद पर bithana कहाँ तक uchit है?
      aasha है prabhuddha pathak varg chintan karenge.
      चतुर्वेदी साहब main आप को दोष नहीं dunga क्योंकि इस maansikta के shikar आप apele नहीं हैं. gulami की maansikta itni jaldi chhutegi भी नहीं. italian ma और bharitya pita की santaan राहुल गाँधी bhartiya kam और european jyada dikhta है. और bhartiya janta को videshi कुछ jyada hi pasand aate हैं. क्योंकि unhone hame gulam banaya tha. shaayad bhartiya janta राहुल में videshi chhavi dekhta हो? khair यह लोगों की pasand है की we किसी chunen. hamko क्या farak padta है की desh का प्रधानमंत्री mammohan singh , राहुल गाँधी हो, sonia गाँधी हो ya ottavio quatrochi हो.

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  7. Anil Sehgal

    Dr Manmohan Singh has no political authority, no control over cabinet ministers even from Congress Party, cannot introduce any reform for making the life of common man comfortable.
    The reins of power are with Gandhi family.
    Has the life of common man become any less arduous – what to speak of comfortable during the past 6 years?
    Nobody is aware of policy and programs of Rajiv Gandhi for controlling price rise, fighting terrorism, eradicating corruption.
    Is he a magician that just by his personal appearance as PM, India’s common man would feel comfortable?

    Dear countrymen know that control of the destiny of Indian polity is already in the hands of the Gandhi family for the past 6 years. All else is drama.

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  8. जीतेन्द्र देशमुख

    सुरेश जी आप किसी जबरदस्त पूर्वाग्रह से ग्रसित है ,आपकी जानकारी के लिए देश का अधिकांश भाग अभी नक्सलियों से शासित एवं काबिज नहीं है , शायद आप हो |
    राहुल गाँधी अपनी यात्रा के सरकारी विमान के पात्र नहीं और नहीं वे सरकारी जहाज इस्तेमाल करतें हैं |

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  9. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    आप ने कहा: “…….. इसके साथ साथ हमें यह भी स्वीकारना होगा कि इस विशेषाधिकार के बाद भी राहुल गाँधी ने स्वयं को भारत के जन मानस का नेता साबित करने के लिए कठोर परिश्रम और प्रयास किये है।…..”
    प्रश्न: कौनसे परिश्रम? ज़रा गिनाएंगे?
    आप बहुत समर्थ लेखक है। जो ४ फ़ूट की लंबाई ६ फ़ूट से भी अधिक प्रमाणित कर सकते हैं। ज़रा नरेंद्र मोदी से राहुल की तुलना कर के लेख लिखकर दिखाइए।

    पाठकोंका समय भी कुछ अर्थ रखता है।

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  10. shishir chandra

    mr chaturvedi saheb !
    your lekh is totaly contradictory. one side you are telling that indian subcontinent is in strong arm of dynasty politics and other side you are praising mr rahul gandhi. why? do you think dynasty politics is right? and if it is not right not bad too? i think you are totally confused and you are unable to express yourself in this article. do you want to promote mr rahul gandhi? if yes then you are partially successful. do you want a rajyasabha ticket or something else for you?
    you are a journlist mr chaturvedi and you must show your conscience and your professionalism. this is totally against on any adopted tradition of journlism. i appreciate your topmost part of article in which you elaborate about dynasty politics and it’s drawback. but why you have started the matter by criticising dynastiesm and if you are critic then you must also criticise Mr Rahul? anyway i hope you would turn as a good writer, still you are not a serious writer one who notice you.

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  11. डॉ. राजेश कपूर

    Dr. Rajesh Kapoor

    चतुर्वेदी जी जब हम पक्षपात व पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होते हैं तो सच को समझने और समझाने में भी असमर्थ सिद्ध होते हैं. सुरेश जी का सुझाव सही है कि हम अपनी विश्वसनीयता और इमानदारी पर स्वयं संदेह पैदा करलेते हैं. एक स्वाभिमानी और इमानदार साहित्यकार ” स्वान्तः सुखाय ” लेखन करता है या कि किसी को प्रसन्न करने के लिए. वैसे भी हमारी जिम्मेवारे इस समाज के लिए है न कि किसी व्यक्ती या दल / विचार विशेष के लिए. समाज को सही दिशा देने की गंभीर जिम्मेवारी साहित्यकारों व लेखकों पर है और ये जिम्मेवारी किसी के द्वारा सौंपी हुई नहीं, हमरे द्वारा स्वयं ग्रहण की हुई है. इसका पालन जितनी अच्छी तरह से हम कर पायेंगे, उतने शक्तीशाले हम नैतिक रूप से बनाते जायेंगे.
    जब भी एकांगी , एक पक्षीय , असंतुलित बात कही जाती है तो पाठक तुरंत समझ जाता है कि प्रमाणिकता उसमें नहीं है.
    आशा है कि अन्यथा नहीं लेंगे.
    सादर, शुभकामनाओं सहित,

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  12. सुरेश चिपलूनकर

    सुरेश चिपलूनकर

    1) “…राहुल गाँधी ने स्वयं को भारत के जन मानस का नेता साबित करने के लिए कठोर परिश्रम और प्रयास किये है…।”… हा हा हा हा हा हा…

    2) “…राहुल भारत भर में लगातार घूम घूमकर आम आदमी से सीधा संवाद स्थपित कर रहे है…” इसका खर्चा कौन उठा रहा है? और सरकारी हवाई जहाज उपयोग करने के लिये उनकी हैसियत क्या है, सिर्फ़ एक सांसद होने के अलावा?

    3) “…इस परिवर्तन और राजनितिक स्वच्छता की अपेक्षों पर राहुल ने अपनी कार्य –प्रणाली से सफलता हासिल करी है…” अच्छा??? स्वच्छता और नैतिकता के इस झण्डाबरदार ने आंध्रप्रदेश के रेड्डियों और हरियाणा के हुड्डाओं पर कितनी नकेल कसी है?

    4) “…राहुल ने यह बहुत ही स्पष्ट कर दिया है कि वो सत्ता सुख के भूखे नहीं है…” फ़िर से हा हा हा हा हा हा… अरे भाई साहब जब मनमोहन सिंह जैसे “कथित” प्रधानमंत्री खुद कह रहे हैं कि “जब राहुल आना चाहेंगे, वे गद्दी से हट जायेंगे…” तो फ़िर सत्ता की भूख और क्या होती है? वैसे भी उनकी “मम्मी” के होते उन्हें किसी पद की जरुरत भी क्या है?…

    5) “…सशक्त लोकतंत्र में गत दिवस भारत के एक बड़े मीडिया समूह द्वारा कराये गए आंकलन में…”। सशक्त लोकतन्त्र(?) जिसमें देश के एक तिहाई हिस्से पर नक्सलियों का कब्जा है, इतना सशक्त? रही बात मीडिया समूह की तो ऐसे समूह आसानी से बिकाऊ हैं…

    जिस व्यक्ति ने आज तक महंगाई, कश्मीर, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार जैसे महामुद्दों पर एक शब्द भी ठीक से न उचरा हो, जिसे देश की मूलभूत समस्याओं का ज्ञान न हो… उसे “भाग्यविधाता” बताना कैसे उचित है? दक्षिण एशियाई देश तो वंशवाद की चपेट में हैं ही, क्योंकि कई दशकों तक गुलाम भी तो रहे हैं…

    अन्त में सिर्फ़ इतना ही चतुर्वेदी साहब कि… इतने हास्यास्पद और बेढंगे लेख न लिखा कीजिये… आपकी “क्रेडिबिलिटी” पर खतरा मंडराने लगेगा… 🙂

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    • MANOJ JOSHI

      SHAYAD AAP YAH KAHNA CHAHTE HEN KI RAHUL GANDHI KE MAHASACHIV RAHTE HUE CONGRESS BADAL RAHI HE, TO ISSE TO SAHMAT HUA JA SAKTA HE. KISI BHI BADE SANGATHAN, RAJNITIK DAL YA BUSINESS HOUSE ME BHI CHANGE ITNA AASAAN NAHI HOTA. NSUI AUR YOUTH CONGRESS ME JIS CHANGE KI SHURUAAT HUI HE USKA PARINAM AANE ME SAMAY LAGEGA. TAB TAK RAHUL GANDHI AUR UNKI TEAM KO LAGE RAHNA PADEGA. DOOSRI TARAF RAJNITI ME VANSHVAAD KI JAHAN TAK BAAT HE TO IMANDARI S BHARAT KA KOUNSA RAJNITIK DAL ISSE BACHA HE AUR YAH EK ALAG BAHAS KA MUDDA HE. LEKIN RAHUL KE RAJNITIK VIRODHIYON KHAS TOUR PAR BJP KO YAH SAMAJH LENA CHAHIYE KI VOH JO CHODTE JAA RAHE HEN, RAHUL USI KO PAKAD KAR AAGE BADH RAHE HEN. AAM AADMI VICHARDAHARA NAHI VYAVHAR SE PRABHAVIT HOTA HE.

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