खाशोगी: ट्रंप की गीदड़भभकी

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
सउदी अरब के प्रसिद्ध पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या का मामला अब गजब का तूल पकड़ रहा है। हर साल दर्जनों पत्रकारों की हत्या के मामले सामने आते हैं लेकिन वे उन देशों के आतंरिक मामले होते हैं। यह मामला तीन देशों के बीच का है। सउदी अरब, अमेरिका और तुर्की । तुर्की के शहर इस्तांबूल में सउदी वाणिज्य दूतावास है। खाशोगी इस दूतावास में अपने कानूनी कागजात लेने गए थे ताकि एक तुर्की महिला से उनकी शादी हो सके। उन्हें कागजात लेने के लिए जिस दिन बुलाया गया था (2 अक्तूबर), उस दिन उनकी मंगेतर भी उनके साथ गई हुई थी लेकिन वह घंटों इंतजार करती रही और खाशोगी बाहर ही नहीं आए। तुर्की सरकार का कहना है कि खाशोगी की तत्काल हत्या कर दी गई और उनके टुकड़े-टुकड़े करके फेंक दिए गए। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि सउदी अरब की सरकार ने यह हत्या की है तो वे उसे कठोर सजा देंगे। ट्रंप ने ऐसा इसलिए कहा है कि खाशोगी आजकल सउदी अरब छोड़कर अमेरिका में रह रहे थे और ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के लिए काम कर रहे थे। खाशोगी के मामले में यूरोपीय राष्ट्र भी काफी भन्नाए हुए हैं। खाशोगी और सउदी अरब के 33 वर्षीय शासक मोहम्मद बिन सलमान के बीच काफी दिनों से ठनी हुई थी। शाहजादे सलमान के खिलाफ खाशोगी जमकर लिखते रहे हैं। यमन में चल रहे सउदी सैन्य-अभियान, वहाबी ज्यादतियों और मिस्री-तख्ता-पलट आदि के खिलाफ लिखते हुए खाशोगी की कलम कभी कांपी नहीं। यदि उनकी हत्या के बारे में तुर्की का आरोप सही निकला तो शहजादे सलमान की इज्जत पैंदे में बैठ जाएगी, हालांकि इधर उन्होंने कई बहुत ही प्रगतिशील और साहसिक कदम उठाए हैं। लेकिन ट्रंप ने जो धमकी दी है, वह कोरी गीदड़भभकी दिखाई पड़ती है, क्योंकि अमेरिकी हथियारों की खरीद के लिए सउदी अरब ने 110 बिलियन डाॅलर का सौदा कर रखा है। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया है कि यदि वे इस सौदे को रद्द कर देंगे तो अमेरिका के लगभग साढ़े चार लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। सउदी अरब ने कहा है कि यदि अमेरिका कोई दुस्साहस करेगा तो उसका वह मुंहतोड़ जवाब देगा। जाहिर है कि बड़बोले ट्रंप अपने बच निकलने का रास्ता खोज निकाल ले जाएंगे।

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