कौन हैं जयराम ठाकुर? 

जानिए कौन हैं हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री — श्री जयराम ठाकुर…

जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं। 52 साल के ठाकुर हिमाचल में बीजेपी की पूर्व सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के टांडी कसबे में हुआ है।

 

बचपन से ही उन्होंने गरीबी देखी है, उनके पिता का निधन 2016 में हुआ है। उनकी मां और भाभी कहती हैं कि उनको ये औदा मिलना ही चाहिए। उनके पिता एक कारीगर थे। जयराम एक गरीब परिवार से आते हैं। वो 5वीं बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने मंडी के सिराज विधानसभा से जीत दर्ज की है।जयराम ठाकुर के पिता का नाम जेठूराम ठाकुर और पत्नी का नाम डॉ. साधना ठाकुर है। उनकी दो बेटियां हैं.
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जानिए  कहाँ हैं जयराम जी का सुसराल—

 

हिमाचल प्रदेश के मंडी में वर्ष 1965 में जन्में ठाकुर का जयपुर से गहरा नाता है।जयराम ठाकुर का ससुराल जयपुर के झोटावाड़ा में है। ठाकुर की शादी वर्ष 1995 में आरएसएस नेता रहे श्रीनाथ राव की बेटी डॉ. साधना ठाकुर से हुई थी। साधना ठाकुर के छोटे भाई प्रताव राव का संबंध मीडिया जगत से है। जयपुर के झोटावाड़ा में रहने वाले राव परिवार में इस वक्त खुशी का माहौल है।

 

दामाद को मिली हिमाचल की नई जिम्मेदारी के बाद इस घर में मिठाई का सिलसिला थम नहीं रहा है। उनके भाई अपनी दीदी से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि उनकी साधना दीदी का अलवर के खेड़ली कस्बे से भी कनेक्शन रहा है,

 

क्योंकि उनके पिता श्रीनाथ राव जब वर्ष 1974 में कर्नाटक से आए थे, तब उन्होंने इस कस्बे से ही व्यापार प्रारंभ किया था। इसलिए साधाना ठाकुर करीब दस वर्ष तक इस कस्बे में रहीं और शुरुआती पढ़ाई यहीं से की। जयराम ठाकुर ने 1995 में साधना ठाकुर से शादी की थी.
नब्बे के दशक में जम्मू में आयोजित संघ प्रचारकों के सम्मेलन में जयराम की मुलाकात राजस्थान की प्रचारक डॉ. साधना से हुई. यहीं पर जयराम ठाकुर की उनकी पत्नी से जान-पहचान बनी और बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला किया.
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आरएसएस नेता थे जय राम के ससुर—–
बता दें कि साधना ठाकुर श्रीनाथ राव की बेटी हैं. उनके पिता भी आरएसएस नेता रहे हैं. श्रीनाथ राव वर्ष 1974 में कर्नाटक से जयपुर आ गए थे. उन्होंने यहीं अपना व्यापार शुरू किया. साधना ठाकुर ने दस साल तक यहां पढ़ाई की.
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शादी के तीन साल बाद विधायक बने जयराम—
जयराम ठाकुर को अपने जीवन के पहले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. उनकी शादी साल 1995 में हुई थी और शादी के तीन साल बाद वह पहली बार विधायक चुने गए और विधानसभा पहुंचे. जय राम ठाकुर ने 1993 में पहला चुनाव लड़ा था. जयराम की दो बेटियां है. एक बेटी टांडा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं.
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जयराम ठाकुर के गांव में जश्न का माहौल —-

 

जयराम ठाकुर की इस कामयाबी पर उनके गांव टांडी में जश्न का माहौल है. शिमला से क़रीब 200 किलोमीटर दूर इस गांव में जयराम ठाकुर अपने चार बहन-भाइयों के साथ बड़े हुए. उनके पिता जेठू राम मिस्त्री थे. मां ब्रिकू देवी गृहिणी हैं. अपने बेटे की कामयाबी पर उनकी आंखों में ख़ुशी के आंसू हैं और जुबान पर ही एक ही बात, ‘मेरा जय सीएम बन गया.’

 

जयराम ठाकुर के बड़े भाई बीरी सिंह ठाकुर भी किसान हैं. छोटे भाई की इस उपलब्धि पर एक अखबार से बात करते हुए वे कहते हैं, ‘हम बहुत खुश हैं. हमने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा. एक ही दुख है कि हमारे पिताजी जिन्होंने सारी ज़िंदगी संघर्ष किया हमारे साथ नहीं हैं.’ शपथ ग्रहण समारोह से पहले जयराम ठाकुर ने भी कहा, ‘बहुत खुशी होती अगर पिताजी आज साथ होते. एक साल पहले वो हमें छोड़कर चले गए.’

 

बीरी सिंह ठाकुर बताते हैं कि टीवी चैनलों और अख़बारों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की ख़बरें आने पर परिवार ने टीवी बंद कर दिया था. उन्होंने कहा, ‘हमने रात को टीवी बंद किया और सो गए. सुबह 11 बजे जयराम ने फ़ोन कर (मुख्यमंत्री बनने की) ख़बर दी. उसके बाद से जश्न रुका नहीं है.’
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ऐसा रहा जयराम जी का शुरुआती सफर—-

 

छह जनवरी, 1965 को जन्म जयराम ठाकुर की प्राथमिक शिक्षा गांव में ही हुई. बाद में माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने के लिए वे पास के बाग़शियार गांव आ गए. जयराम ठाकुर बताते हैं, ‘हम तीन भाई और दो बहनें हैं. (स्कूल के बाद) मुझे एहसास हो गया था कि मेरे माता-पिता मेरी कॉलेज की शिक्षा का भार नहीं उठा पाएंगे. मैंने भी उन पर ज़ोर नहीं दिया. स्कूल के बाद मैंने दो साल छोड़ दिए और पैसे कमाने के लिए काम करने लगा ताकि कॉलेज जा सकूं.’

 

इसके बाद उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया और भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्या परिषद के सदस्य बन गए. एमए करने के बाद वे जम्मू चले गए और वहां आरएसएस कार्यकर्ता के तौर पर काम किया. वहां वे तीन साल रहे और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा में शामिल हो गए.
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जयराम ठाकुर की जन्म कुंडली–

 

आइये अब चर्चा करते हें, गूगल पर उपलब्ध जयराम ठाकुर की जन्म तारीख अनुसार बनी उनकी जन्म कुंडली पर—

 

हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 (बुधवार)को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के टांडी कसबे में हुआ है। उनकी राशी और जन्म लग्न मकर बनता हें |उनका जन्म नक्षत्र धनिष्ठा का दूसरा चरण बनता हें |

 

जयराम ठाकुर की जन्म कुंडली में शनिदेव अपनी ही राशी कुम्भ में दुसरे भाव स्थित हें |
सुख भाव (चोथे स्थान पर) देव गुरु वृहस्पति, मेष याशी में स्थित हें |
वही पंचम भाव में राहू,वृषभ राशी में विराजित हें |
नवम भाव (भाग्य स्थान) में मंगलदेव , बुध की कन्या राशी में विराजित हें |
11वें भाव में बुध,शुक्र और केतु, वृश्चिक राशी में स्थित हें | इस बुध ने उन्हें कुशल वक्ता/विचारक बनाया|
—वर्तमान में जयराम ठाकुर की जन्म कुंडली में शनि की महादशा ( 15 दिसंबर 2022 तक) चल रही हें|
और उसमें राहू की अन्तर्दशा ( 02 जून 2020 तक) चल रही हें |
वर्तमान में राहू का प्रत्यंतर (31 दिसम्बर 2017 तक) चल रहा हें |

​चुनावी राजनीति का सफ़र—

जयराम ठाकुर ने अपना पहला चुनाव 1993 में लड़ा. वे चाचियोट (जो अब सेराज है) विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के मोती राम ठाकुर के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में उतरे और केवल 1800 वोटों से हार गए. इस चुनावी हार ने उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को और बढ़ा दिया. 1998 में उन्होंने फिर चुनाव लड़ा. तब से उनकी जीत का सिलसिला चल रहा है. वे एक बार भी हारे बिना लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीते हैं.

 

2007 के विधानसभा चुनाव से पहले जयराम ठाकुर को हिमाचल में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. पार्टी ने उस साल राज्य की सत्ता में वापसी की थी. बाद में ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज विभाग दिए गए.

 

इसके बाद 2013 में पार्टी ने उन्हें मंडी से कांग्रेस के दिग्गज वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव में उतारा. लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा. जयराम को लगा कि अगर वे एक बार और हार गए तो उनका राजनीतिक करियर ख़तरे में पड़ सकता है. लिहाज़ा 2014 में वे चुनाव लड़ने से पीछे हट गए. लेकिन उसी सीट से भाजपा के राम स्वरूप शर्मा जीत गए. इसे लेकर जयराम ठाकुर कहते हैं, ‘अब मैं सोचता हूं कि अगर मैंने चुनाव लड़ा होता तो सांसद बन जाता और मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा संभवतः नहीं मिलता. यह भाग्य की बात है, और कुछ नहीं.’
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वह मंडी विधानसभा से चुनाव जीतते रहे हैं और संगठन से लेकर आम जनता तक इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। जयराम ने चुनाव जीतने के तुंरत बाद कहा था कि सीएम पद को लेकर पार्टी अगर उन्हें जिम्मेदारी देगी तो वह उसे निभाने के लिए तैयार हैं।

 

आज हुई  बैठक में विधायक दल के नेता के रूप में जयराम ठाकुर के नाम का प्रस्ताव पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के मुख्य मंत्री प्रेम कुमार धूमल ने किया जिसका बाकी विधायकों ने एकसुर में समर्थन किया। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया को संबोधित करते हुए इसकी जानकारी दी और कहा कि अब हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मुलाकात की जाएगी। राज्यपाल के निर्देशानुसार तय क्रार्यक्रम में जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। हिमाचल प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में जयराम ठाकुर के नाम पर मुहर लग गई। वह हिमाचल प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री होंगे। इस बैठक में दोनों ऑब्जर्वर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा हिमाचल प्रदेश के सभी बीजेपी लोकसभा और राज्यसभा सांसद पहुंचे थे.

 

प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और धूमल की अगुआई वाली राज्य सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री का पद संभाल चुके जयराम राजपूत नेता हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी समझा जाता है।पांच दिन से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री धूमल की जगह केंद्र ने पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर को तरजीह दी। धूमल की हार के बाद क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जयराम ठाकुर पहली पसंद थे।हिमाचल प्रदेश में ठाकुर समुदाय की संख्या ज्यादा है और नड्‌डा ब्राह्मण हैं। बीजेपी के सामने सीएम की दिक्कत प्रेम कुमार धूमल के हारने की वजह से हुई थी। नरेंद्र सिंह तोमर ने ठाकुर के नाम का ऐलान किया। प्रेम कुमार धूमल ने ठाकुर के नाम का प्रस्ताव किया था।

 

इससे पहले शनिवार को चुनावों में पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा रहे प्रेम कुमार धूमल ने खुद को राज्य के मुख्यमंत्री के पद की दौड़ से बाहर बता दिया था। धूमल ने कहा, ‘मीडिया में यह अटकलबाजी चल रही है कि मैं मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदार हूं, लेकिन मैंने मतगणना के दिन ही यह स्पष्ट कर दिया था कि मैं किसी दौड़ में शामिल नहीं हूं।’

 

बीजेपी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा रहे प्रेम कुमार धूमल के चुनाव में हार जाने के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हुआ। कांग्रेस के राजेंद्र राणा ने सुजानपुर सीट से धूमल को चुनाव में शिकस्त दी थी।

 

हिमाचल प्रदेश के अब तक के ज्यादातर मुख्यमंत्री शिमला, कांगड़ा और सिरमौर इलाके से होते थे। मंडी में 10 विधानसभा सीटें हैं जबकि कांगड़ा में 15 विधानसभा सीटें हैं। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मंडी की 10 में से नौ सीटों पर कब्जा जमाया था। सुर्खियों से दूर रहने वाले जयराम मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिर्विसटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और यूनिर्विसटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखने का फैसला किया। जयराम ने 1993 का हिमाचल विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा। 1993 के चुनाव में तो वह हार गए, लेकिन उसके बाद के सारे विधानसभा चुनाव उन्होंने जीते हैं।

 

मृदुभाषी माने जाने वाले जयराम की ताकत यह है कि उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जा रहा है जिसने राज्य में पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने में सफलता पाई है। नए विधायकों के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण दो केन्द्रीय पर्यवेक्षकों, केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेन्द्र सिंह तोमर को इस मुद्दे को केन्द्रीय नेतृत्व के साथ दोबारा विचार विमर्श करने के लिए शिमला से दिल्ली लौटना पड़ा। केंद्रीय पर्यवेक्षकों का दो सदस्यीय दल राज्य में 21 और 22 दिसंबर को मौजूद था और उन्होंने राज्य भाजपा की कोर कमेटी के सदस्यों , सांसदों और कुछ विधायकों की राय ली थी। गौरतलब है कि भाजपा ने 68 सीटों में से 44 सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया है।
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जयराम ठाकुर का कोई राजनीतिक गुरु नहीं रहा. वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए उसकी चकाचौंध से दूर रहे. किसी विवाद में उनका नाम सामने नहीं आया. यह पहली बार है जब उनके मंडी ज़िले से कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बना है. और यह भी पहली ही बार है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में कोई प्रधानमंत्री शामिल हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे.
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नड्डा से यूं आगे निकले जयराम —
बीजेपी नेताओं की अच्छी-खासी तादाद ऐसी थी जो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में थी। उन नेताओं का मानना था कि प्रदेश में मजबूत नेतृत्व देने के लिहाज से नड्डा हर पैमाने पर खरा उतरेंगे। हालांकि, नेताओं का एक वर्ग जयराम ठाकुर को नए सीएम की जिम्मेदारी देना चाहता था। ये नेता यह दलील देते रहे कि जयराम ठाकुर एक कुशल संगठनकर्ता तो हैं ही, वह प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं। आखिरकार केंद्रीय टीम को यह दलील भा गई और ठाकुर के नाम पर मुहर लग गया और नड्डा खेमे के नेताओं-विधायकों ने भी अपनी सहमति जता दी।

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