जानिए इस वर्ष 2017 के सावन महीना में शिव की पूजा कैसे करें…

—  शिवलिंग पर सिन्दूर , हल्दी , लाल रंग के फूल , केतकी और केवड़े के फूल आदि या स्त्री सौंदर्य से सम्बंधित सामान ना चढ़ाएँ। क्योंकि
शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। जलधारी पर ये चढ़ाये जा सकते है क्योकि जलधारी माता पार्वती और स्त्रीत्व का प्रतीक होती है।
—  शिव लिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। आधी परिक्रमा ही लगाएं।

सावन महीना होता हैं देवों के देव महादेव भगवान शंकर का  ; मात्र सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाकर उन्हें रिझाया जा सकता है | आषाढ़ पूर्णिमा यानि गुरु पूर्णिमा के बाद श्रावण माह की शुरुआत हो जाती है। इस बार सावन का महीना 20 जुलाई से शुरू हो गया है। इस मास का समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। शास्त्रों में बताया गया है कि सावन माह भगवान शिव का माह है। हिन्दी पंचांग के सभी बारह महीनों में श्रावण मास का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि ये शिवजी की भक्ति का महीना है। श्रावण मास को सावन माह भी कहते है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, ये महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई उपाय करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र, स्तुति व स्रोतों की रचना की गई है।

इनके जाप व गान से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं। सावन में रोज इन स्तुति व स्रोतों का पाठ करने से सभी समस्याओं का अंत भी हो जाता है। श्रावण मास में बाबा को भांग, बेल पत्र और दूध चढ़ाने से मनवांक्षित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही गरीबों को दान देने से पुण्ये फल मिलता है। हालांकि महादेव चूंकि बड़े ही भोले माने जाते हैं इसलिए मात्र सच्चेश्रावण का सम्पूर्ण मास मनुष्यों में ही नही अपितु पशु पक्षियों में भी एक नव चेतना का संचार करता है जब प्रकृति अपने पुरे यौवन पर होती है और रिमझिम फुहारे साधारण व्यक्ति को भी कवि हृदय बना देती है | सावन में मौसम का परिवर्तन होने लगता है | प्रकृति हरियाली और फूलो से धरती का श्रुंगार देती है परन्तु धार्मिक परिदृश्य से सावन मास भगवान शिव को ही समर्पित रहता है |

श्रवण मास में देवाधिदेव महादेव की स्तुति दिन में दो बार की जाती है |सूर्योदय पर ,फिर सूर्यास्त के बाद | पूजा के दौरान 16 सोमवार की व्रत कथा और सावन व्रत कथा सुनाई जाती है |पूजा का समापन प्रसाद वितरण से किया जाता है | शिव मन्त्र का जाप अत्यंत उपयोगी माना गया है अन्यथा आप साधारण एवं सर्वप्रिय पंचाक्षरी मन्त्र “ॐ नम: शिवाय ” और गणेश मन्त्र “ॐ गं गणपतये नम:” का जाप करते हुए सामग्री चढ़ा सकते है | यह माह आशाओं की पूर्ति का समय होता है। श्रावण में शिव भक्तों के लिए भगवान शिव का दर्शन एवं जलाभिषेक करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस महीने में शिव उपासना से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।

पूरे माह भर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का दौर जारी रहेगा। सभी शिव मंदिरों में श्रावण मास के दौरान ‘बम-बम भोले और ॐ नम: शिवाय’ की गूंज सुनाई देगी। शिवालयों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ने लगी है। धार्मिक पुराणों के अनुसार श्रावण मास में शिवजी को एक बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। जो भक्त पूरे सावन महीने उपवास नहीं कर सकते वे श्रावण मास के सोमवार का व्रत कर सकते हैं। सोमवार के समान ही प्रदोष का महत्व है। इसलिए श्रावण में सोमवार व प्रदोष में व्रत जरूर रखें। पूरे माह भर शहर सहित जिले के सभी शिवालयों में सावन महीने में हर-हर महादेव और बोल बम की गूंज सुनाई देगी।

श्रावण मास में शिव-पार्वती का पूजन बहुत फलदायी होता है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में सावन मास का बहुत महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन महीने को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। सावन महीने में सोमवार के दिन श्रद्धालु शिवालयों में जाकर भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। सावन मास के सोमवार को भगवान शिव के अभिषेक का विशेष महत्व होता है। सोमवार के दिन शिव की आराधना को सर्वसुलभ माना गया है। पहले सोमवार से लेकर प्रत्येक सोमवार को शिवपुराण के ये छोटे-छोटे उपाय कर सकते हैं। आपकी हर इच्छा पूरी जीवन के संहारक भगवान शिव पूरी करेंगे। सोमवार को बाबा भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक व उस दिन व्रत रखने तथा श्रद्धा भाव से पूजन अर्चन करने वाले आस्थावानों की मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं ऐसा शास्त्रोंन में भी उल्लेखित है।

सोमवार के व्रत का विधान अत्यंत सरल है। स्नान करके श्वेत या हरा वस्त्र धारण करें, दिन भर मन प्रसन्न रखें, क्रोध, ईष्र्या, चुगली न करें। स्वयं को शिवमय (कल्याणकारी) मानें। दिन भर शिव के पंचाक्षरी मंत्र ¬ नमः शिवाय का मन ही मन जप करते रहें। सायंकाल को प्रदोष बेला कहते हैं। इस समय यदि भगवान शिव का सामीप्य मिले, समस्त दोष दूर हो जाते है अतः सायंकाल शिव मंदिर में या अपने घर में ही मिट्टी से शिवलिंग और पार्वती तथा श्री गणेश की मूर्ति बनाकर सोलह प्रकार से पूजन करें, इनमें सोलह दूवी, सोलह सफेद फूल, सोलह मालाओं से शिवपूजन समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

श्रावण मास में वारों का महत्व श्रावण मास के प्रथम सोमवार से शुरू कर निरंतर किया जाने वाला व्रत सभी मनोकामनाएं पूरी करता है। सोमवार का व्रत रोटक, मंगलवार का मंगलागौरी, बुधवार का बुधव्रत, बृहस्पति का बृहस्पति व्रत, शुक्रवार का जीवंतिका व्रत, शनिवार का हनुमान तथा नृसिंह व्रत और रविवार का सूर्य व्रत कहलाता है। श्रावण मास में तिथियों का महत्व श्रावण मास में बहुत से महत्वपूर्ण व्रत किए जाते हैं। शुक्ल द्वितीया को किया जाने वाला व्रत औदुंबर व्रत, तृतीया को गौरीव्रत, चतुर्थी को दूर्वा गणपति व्रत (इसे विनायक चतुर्थी भी कहते हैं), पंचमी को नाग पंचमी व्रत (सौराष्ट्र में नागपंचमी श्रावण कृष्ण पक्ष में संपादित होती है), षष्ठी को सूपौदन व्रत, सप्तमी को शीतलादेवी व्रत, अष्टमी और चैदस को देवी का व्रत, नौवीं को नक्तव्रत, दशमी को आशा व्रत और द्वादशी को किया जाने वाला व्रत श्रीधर व्रत कहलाता है।
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जानिए 2017  में सावन के सोमवार वाले दिन – 

इस वर्ष 2017 में 5 सोमवार है। उत्तर भारत यानि राजस्थान , पंजाब , बिहार , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , हिमाचल प्रदेश  अदि राज्यों में इस साल यानि

 

2017  में सावन महीना सोमवार 10  जुलाई से शुरू हो रहा है। 10  जुलाई , 17  जुलाई , 24 जुलाई , 31 जुलाई तथा 7 अगस्त को सोमवार शिव पूजा और व्रत के दिन आएंगे।

 

दक्षिण भारत में यानि तमिल नाडु , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , गुजरात आदि राज्यों में इस साल सावन महीना सोमवार 24 जुलाई से

 

शुरू होगा। 24 जुलाई , 31 जुलाई , 7 अगस्त , 14 अगस्त तथा 21 अगस्त को सोमवार शिव पूजा और व्रत के दिन आएंगे।
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ऐसे करें भगवान् शिव जी की आराधना —-

 

।। || ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं,वन्दे जगत्कारणम् lवन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं,वन्दे पशूनां पतिम् लाल
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं,वन्दे मुकुन्दप्रियम् lवन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं,वन्दे शिवंशंकरम।।।

 

भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कुछ छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है, ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है,  ये उपाय इस प्रकार हैं-
शिवपुराण के अनुसार इन छोटे उपायों  से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है :-

 

भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।
यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद जरूरतमंदों  में बांट देना चाहिए।

 

शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

 

बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है,  सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा भगवान  शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
तीक्ष्ण बुद्धि के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।
यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का अभिषेक गौ माता के शुद्ध घी से करना चाहिए ।

 

शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

 

लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
शिव को प्रसन्न करने के लिए डमरू जरूर बजाएं और बम बम भोले बम बम भोले कहने से कृपा मिलेगी |
जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।
शिव जी को स्तुति प्रिय है अतः स्तुतियों से करें शिव आराधना—
शिव सहस्त्रनामावली का पाठ करें | शिव की सबसे प्रचलित स्तुति है—

 

ॐ कर्पूर गौरं करुणावतारं
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं
सदा वसन्तं हृदयारवृन्दे
भवं भवानी सहितं नमामि !!
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जानिए सावन में शिवजी की पूजा का कारण—-

 

देवी सती ने पिता दक्ष के घर में शरीर त्यागने के समय हर जन्म में महादेव को पति बनाने का प्रण लिया था। अगले जन्म में देवी ने पार्वती के
रूप में जन्म लिया और सावन के महीने में निराहार व्रत करके महादेव को प्रसन्न करके उनसे  विवाह किया था। इसी वजह से सावन का महीना
शिवजी को प्रिय है।  कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएँ सुहाग की सलामती के लिए सावन के सोमवार का व्रत करती है।
स्त्री पुरुष सभी को सावन के महीने में शिव की पूजा करने से लाभ होता है।

 

शिव जी का व्रत तीन प्रकार से  किया जाता है।
प्रति सोमवार व्रत , सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार व्रत। तीनो की विधि एक समान ही होती है। व्रत उपवास अवश्य करने चाहिए। भारत में 12 ज्योतिर्लिंग है ,जो की शिव जी के विशेष मंदिर है। इनके दर्शन का बहुत महत्त्व है।

 

12  ज्योतिर्लिंग इस प्रकार है :

 

सोमनाथ  –  गुजरात  ,
मल्लिकार्जुन –  आन्ध्र प्रदेश  ,
महाकालेश्वर – उज्जैन , मध्य प्रदेश  ,
ओंकारेश्वर – इंदौर , मध्य प्रदेश ,
केदारनाथ – उत्तराखंड   ,
भीमाशंकर – पूना , महाराष्ट्र  ,
विश्वनाथ – काशी ,उत्तर प्रदेश ,
त्रयंबकेश्वर – नासिक , महाराष्ट्र  ,
बैद्यनाथ  –  बिहार ,
नागेश्वर – द्वारिका , गुजरात ,
रामेश्वरम – रामनाथ पुरम , तमिलनाडु ,
घृष्णेश्वर – दौलताबाद , महाराष्ट्र
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इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव—

 

सावन के माह में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ  नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी ।
अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गुल का धूप दें।
सावन के माह में शिवलिंग पर केशर मिला दुध चढाने से विवाह कार्य में आ रही बाधा दूर होती है।
सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में ‘राजा’ ‘महाराजा’ जैसी सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।
सावन में गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।
सावन में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद शिव मंदिर में  भगवान शिव का जल से अभिषेक कर उन्हें काले तिल अर्पण करें तत्पश्चात  मन ही मन में ॐ  नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।
सावन में किसी नदी या तालाब जाकर ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं, यह धन प्राप्ति का बहुत ही सरल उपाय है।
सोमवार के दिन भगवान शिवजी को घी, शक्कर, गेंहू के आटे से बने प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप से आरती करें। प्रसाद को गुरुजनों, बुजुर्गों और परिवार, मित्र सहित ग्रहण करें।
सोमवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी।
इस मंत्र का करें जाप—
ॐ नमः शिवाय॥

 

एक ग्रन्थ में आया की श्रावण में कोई नित्य रावण कृत शिव ताण्डव स्त्रोत का पाठ करता हैं तो रावण उन पर मेहरबान होता हैं ।
और यदि द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग मंत्र का पाठ करता हैं तो भगवान् विष्णु प्रसन्न होते हैं ।
और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करते हैं तो माँ दुर्गा आपके रोग और ग्रह को दोष को नष्ट कर देती हैं ।
और मात्र
“”ॐ नमः शिवाय”” जपते हैं तो भगवान् शिव स्वयं खुश होते हैं ।
और “”ॐ गं पां बं कां शिवाय नमः”” बोलने से शिव परिवार खुश होता हैं जो सभी अभिष्ट फल को देते हैं ।
इस श्रावण मास में आप हो सकते हैं कष्ट से मुक्त एक मंत्र मात्र शिव के नाम से ।
“”जय सदा शिव आनंद श्रावणानन्द नमः शिवाय शिव तराय ।”‘
किसी भी समस्या के लिए श्रावण में करे उचित उपाय किसी योग्य विद्वान् ब्राह्मण आचार्य द्वारा आपको शीघ्र सफलता प्राप्त होगी । कल्याण हो।। शुभम भवतु।।
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शिव की पूजा से बढ़ाए आमदनी—

 

सावन के महीने में किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें-

 

ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं||

 

प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं,  बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें।
शिव ही एक मात्र ऐसे भगवान् हैं जो प्रकृति से उत्पन्न किसी भी वस्तु को चढाने से खुश होते हैं ।
1. बिल्व पत्र
2 आक के फूल
3 शमी के पत्ते
4 शमी के फूल
5 धतुरा
यह 5 ऐसी वस्तु हैं जिनको शिव को चढाने से हर कष्ट से मुक्ति मिलती और सुख सम्पदा धन यश कीर्ति की वृद्धि होती हैं ।
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संतान प्राप्ति के लिए अद्भुत उपाय—

 

सावन में किसी भी दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें, इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें, उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।

 

उत्तम स्वास्थ्य और बीमारी ठीक करने के लिए उपाय—

 

सावन में किसी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें, अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें। अभिषेक करते समय ॐ  जूं स: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें। इस उपाय से बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है।
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सावन के सोमवार को शिवजी की पूजा करने का तरीका—

 

सावन के सोमवार के व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहा धोकर शुद्ध सफ़ेद रंग के कपडे पहनने चाहिए। भगवान शिव की पूजा यदि घर में करनी हो तो पूजा का स्थान साफ करके गंगाजल छिड़क कर शुद्ध कर लेना चाहिए। इसके बाद शिव जी की मूर्ती या तस्वीर को स्थापित करके साफ आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। घर में सिर्फ पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। बाहर मंदिर में पूजा करने जाना हो तो पूजा का सामान ढक कर ले जाना चाहिए। संभव हो तो मंदिर में भी शुद्ध आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

 

शिव पूजा की सामग्री – 

 

जल कलश
गंगा जल
कच्चा दूध
दही
घी
शहद
चीनी
केसर
वस्त्र
चन्दन रोली
मौली
चावल  ( अक्षत )
फूलमाला , फूल
जनेऊ
इत्र
बील पत्र
आंक , धतूरा
भांग
कमल गट्टा
पान
लौंग , इलायची , सुपारी
धूप , दीप , अगरबत्ती
माचिस
कपूर
फल
मेवा
मिठाई
नारियल
दक्षिणा के पैसे
 

शिव पूजा की विधि – 

—  पूजा के लिए सबसे पहले  पूजा के सामान  को यथास्थान रख दें ।
—  अब भगवान शिव का ध्यान करके ताम्बे के बर्तन से शिव लिंग को जल से  स्नान कराएँ  ।
—  गंगा जल से स्नान कराएं।
—  इसके बाद दूध , दही , घी , शहद और शक्कर से स्नान कराएँ । इनके मिश्रण से बनने वाले पंचामृत से भी स्नान करा सकते है।
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—  इसके बाद सुगंध स्नान के लिए केसर के जल से स्नान कराएँ ।
—  चन्दन आदि लगाएँ ।
—  अब मौली , जनेऊ , वस्त्र आदि चढ़ाएँ।
—  अब इत्र और पुष्प माला , बील पत्र आदि चढ़ा दें। बील पत्र 5 ,11 , 21 , 51 आदि शुभ संख्या में लें। बीलपत्र चढाने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
—  आंकड़े और धतूरे के फूल चढ़ाएँ । शिव जी को सफ़ेद रंग अतिप्रिय है क्योकि ये शुद्ध , सौम्य और सात्विक होता है। आंकड़ा और धतूरा
चढ़ाने से पुत्र का सुख मिलता है।
—  वाहन सुख के लिए चमेली का फूल चढ़ाएँ , धन की प्राप्ति के लिए कमल का फूल, शंखपुष्पी या जूही का फूल चढ़ाएँ  , विवाह के लिए बेला
के फूल चढ़ाएँ , मन की शांति के लिए शेफालिका के फूल चढाने चाहिए। पारिवारिक कलह से मुक्ति के लिए पीला कनेर का फूल चढ़ाएं।
—  शिव जी की पूजा करते समय आपकी भावना  शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए ( जैसे शिव खुद है ) ।
—  अब धूप , दीप आदि जलाएँ।
—  अब फल मिठाई आदि अर्पित कर भोग लगाएँ।
—  इसके बाद पान , नारियल और दक्षिणा चढ़ाएँ।
—  अब आरती करें। जय शिव ओमकारा ….
—  आरती के बाद  क्षमा मंत्र बोलें। क्षमा मन्त्र इस प्रकार है :
” आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर: “

श्रद्धा पूर्वक इस प्रकार सावन के सोमवार को पूजा सम्पूर्ण करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करते है। इस दिन महामृत्युंजय , शिवसहस्र नाम , रुद्राभिषेक ,शिवमहिमा स्रोत ,शिवतांडव स्रोत या शिवचालीसा आदि का पाठ करना बहुत लाभकारी होता है।

 

ध्यान रखें – 
—  शिवलिंग पर सिन्दूर , हल्दी , लाल रंग के फूल , केतकी और केवड़े के फूल आदि या स्त्री सौंदर्य से सम्बंधित सामान ना चढ़ाएँ। क्योंकि
शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। जलधारी पर ये चढ़ाये जा सकते है क्योकि जलधारी माता पार्वती और स्त्रीत्व का प्रतीक होती है।
—  शिव लिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। आधी परिक्रमा ही लगाएं।
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सावन के सोमवार व्रत करने का तरीका————–

 

यह व्रत सुबह सूर्योदय से शुरू करके दिन के तीसरे पहर यानि सूर्यास्त  तक किया जाता है। सूर्यास्त के बाद भोजन कर सकते है। उसके पहले
अनाज व नमक नहीं लिया जाता है। जहाँ तक संभव हो सूर्यास्त तक पानी , फ्रूट जूस , दूध , छाछ आदि ही लेने चाहिए। नींबू पानी सेंधा नमक
व काली मिर्च डालकर पी सकते है। व्रत के समय तला – भुना सामान बिलकुल नहीं लेना चाहिए। यदि कंट्रोल न हो तो पनीर ,उबला आलू , कुट्टू , सिंघाड़े या राजगिरि का आटा , साबूदाना , दही , सूखे मेवे , मूंगफली , नारियल पानी , शेक आदि में से अपनी पसंद से सिर्फ एक बार कुछ भी ले सकते है। पानी खूब पिएँ। सिर्फ तरल पदार्थ लेने से शरीर के विषैले तत्व निकल जाते है और मन व आत्मा की शुद्धि हो जाती है।

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