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    Homeसाहित्‍यदोहेकण कण में कृष्ण क्रीड़ा किए!

    कण कण में कृष्ण क्रीड़ा किए!

    कण कण में कृष्ण क्रीड़ा किए, हर क्षण रहते;

    कर्षण कराके घर्षण दे, कल्मष हरते!

    हर राह विरह विरागों में, संग वे विचरते;

    हर हार विहारों की व्यथा, वे ही हैं सुधते!

    संस्कार हरेक करके वे क्षय, अक्षर करते;

    आलोक अपने घुमा फिरा, ऊर्द्ध्वित त्वरते!

    कारण प्रभाव हाव भाव, वे ही तो भरते;

    भावों अभावों देश काल, वे ही घुमाते!

    थक जाते राह चलते, वे ही धीर बँधाते;

    मँझधार बीच तारक बन, ‘मधु’ को बचाते!

    ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’

    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल ‘मधु’ अध्यक्ष अखिल विश्व हिन्दी समिति आध्यात्मिक प्रबंध पीठ मधु प्रकाशन टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा www.GopalBaghelMadhu.com

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