वक्त कैसा ये आया, खराब यार रे

-कुमार सुशांत-
shadow of a women

वक्त कैसा ये आया, खराब यार रे, वक्त कैसा ये,
सबकी नीयत यहां, है बेकार यार रे।

अपनी बहनों की इज्जत खतरे में है,
कैसा इंसा हुआ जा रहा यार रे।

गोरे आए गुलाम हमें कर गए,
उनकी राह क्यूं जाता है तू यार रे।

वो है नारी जो शक्ति का रूप है,
वही माता, बहन, भार्या यार रे।

अब से ठानो तू इनकी इज्जत करोगे,
मां भारती देगी, तुझे वरदान रे।

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