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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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भोपाल, मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में नये कार्यों व तकनीकों को ध्‍यान में रखते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने 14 नये पाठयक्रम घोषित किये हैं। अधिकतर नवीन पाठयक्रम देश में प्रथम बार प्रारंभ किये जा रहे हैं, जिनको करने के बाद विद्यार्थियों को न केवल अच्छी नौकरियां मिलेंगी बल्कि वे अपना उद्योग भी स्थापित करने में सक्षम होंगे। नव घोषित 14 पाठ्यक्रमों में से चार पाठ्यक्रम स्नातक स्तर के हैं, जिनमें कोई भी बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी प्रवेश ले सकेगा। छ: पाठयक्रम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा के हैं जिनके लिए स्नातक स्तर की शिक्षा होना आवश्यक है। विशेष रूप से पांच एम.बी.ए. के पाठयक्रम प्रारंभ किये गए हैं जो अपने आप में एक नया प्रयोग है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने मीडिया में एम.फिल. और पीएच.डी. में प्रवेश की घोषणा भी की है।

बारहवीं कक्षा पास विद्यार्थियों के लिए बी.एस.सी.(मल्टीमीडिया) एवं बी.एस.सी.(ग्राफिक्स एण्ड एनीमेशन) के नये पाठयक्रम न केवल रोजगार देने वाले हैं बल्कि इनको करने के पश्चात् विद्यार्थियों को घर बैठे इंटरनेट पर अपना कारोबार करने का अवसर मिलेगा। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि आने वाले समय में मल्टीमीडिया और एनीमेशन का काम विदेशों से भारत में बड़ी मात्रा में आने वाला है। इसी प्रकार वेब संचार व पर्यावरण संचार में डिप्लोमा कार्यक्रम आज के मीडिया उद्योग की आवश्यकताओं को पूर्ण करने वाले हैं। दो डिप्लोमा पाठयक्रम जो भारतीय परंपराओं से जुड़े हुए हैं उनकी तरफ स्नातक किए हुए विद्यार्थियों का विशेष आकर्षण होगा। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा योगिक स्वास्थ्य प्रबंधन एवं अध्‍यात्मिक संचार व पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भारतीय संवाद परंपराएँ हमारे देश के प्राचीन ज्ञान को वर्तमान में उभार कर लाने में सहायक होंगे। वर्तमान और भविष्य में उनका सदुपयोग मानव-जाति के लिए होगा।

वर्तमान के मीडिया के प्रबंधन को नये तरह के व्यावहारिक रूप से निपुण व्यक्ति उपलब्ध कराने के लिए मीडिया प्रबंधन, मीडिया शोध, मनोरंजन संचार, कॉरपोरेट संचार व विज्ञापन संचार के एम.बी.ए. पाठयक्रम स्नातक उपाधि विद्यार्थियों के लिए प्रारंभ किए गए हैं। इन नये पाठयक्रमों के अतिरिक्त विश्वविद्यालय में चल रहे पुराने कार्यक्रम जो पूरे भारत से विद्यार्थियों को आकर्षित करते हैं जैसे – स्नातकोत्तर पत्रकारिता एम.जे., विज्ञापन एवं जनसंपर्क, प्रसारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि एवं एम.सी.ए. इत्यादि के लिए भी प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है। विश्वविद्यालय के खंडवा परिसर में बी.एस.सी. (मल्टीमीडिया) व बी.ए. (जनसंचार) के पाठयक्रम मुख्य रूप से चलेंगे। विश्वविद्यालय के नोयडा परिसर में अन्य पाठयक्रमों के साथ पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में स्नातक पाठयक्रम भी चलाया जाएगा। सभी पाठयक्रमों का शिक्षण शुल्क भी देश के अन्य विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों की तुलना में काफी कम रखा गया हैं।

विश्वविद्यालय के निदेशक जनसंपर्क ने बताया कि इन सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश पात्रता परीक्षा के अंकों पर आधारित मेरिट सूची द्वारा किया जाएगा। कोई भी विद्यार्थी एक से अधिक पाठयक्रमों के लिए आवेदन कर सकता है, परन्तु हर पाठयक्रम के लिए अतिरिक्त आवेदन पत्र देना होगा। आवेदन पत्र व प्रॉस्पेक्टस मात्र रूपये 150/- में प्राप्त होगा। यह अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मात्र रूपये 100/- में प्राप्त होगा। एक से अधिक पाठयक्रमों में आवेदनों के लिए अतिरिक्त फार्म मात्र रूपये 50/- में प्राप्त होगा।

श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 19 जुलाई 2010 है। अधिक जानकारी के लिए 13 मई के बाद विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mcu.ac.in को देखा जा सकता है। श्री सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों की सुविधा व परामर्श के लिए तीनों परिसरों में विशेष काउन्‍टर बनाकर अध्‍यापकों द्वारा विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने की व्‍यवस्‍था रहेगी।

5 Responses to “माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्रारम्भ होंगे कई नए रोजगारोन्मुखी पाठयक्रम”

  1. पंकज झा

    पंकज झा.

    अख़लाक़ हो क्या गया है आपको ? क्या मजदूरी करने और सीखने ही गए थे आप माखनलाल ? आज कहाँ हैं आप मालूम नहीं. सहपाठी होने के कारण कुशलता की कामना भी करता हूं. लेकिन पहले नक्सलियों को सलाम पहुचाने वाली बात और अब ये जिस थाली में खाए हों उसीमे छेद करने वाली बात. समझ में नहीं आता कि बात क्या है? इतना नफरत तो नहीं सिखाया गया था संस्थान में.

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  2. सौरभ कर्ण

    जिस तरीके से माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के कुलपति श्री बीके कुठियाला ने अनेक तरह के प्रशासनिक एवं शैक्षिक फैसले लिए हैं उससे विश्‍वविद्यालय के प्रगतिशील होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। वास्‍तव में अभी तक भारतीय मीडिया पश्चिम देशों के बनाए हुए लीक पर ही चल रहा है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत केन्द्रित मीडिया शिक्षा का प्रसार किया जाए ताकि सिर्फ राजनीतिक खबरों, पेज थ्री के समाचार और शहरों की समस्‍याओं तक ही मीडिया न सिमटा रहे।

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  3. Mayank Verma

    सबसे ज्यादा योग एवं आध्यात्म की जरूरत आपको ही है, आपका चित्त शांत हो जायेगा श्रीमान अख़लाक़ | आप इतने नकारात्मक हैं की आप को कुछ भी अच्छा पचता नहीं है| संकीर्णता से निकलिए पूरी दुनिया आध्यात्म एवं योग के महत्व को समझ चुकी है हाँ आप जैसे कुछ नासमझ कभी नहीं समझ सकेंगे आपके हिन्दू विरोधी चश्मे को उतर दीजिये| आपको डर है की कंही यंहा से कई और बाबा रामदेव जन्म न ले ले? अच्छा तो है जब बहुत सारे बाबा हो जायेंगे तो योग शिक्षा मुफ्त मैं मिलने लग जायगी | आपकी देशद्रोही वाली बात का जवाब ये है की देश का हर आदमी इस फर्क को अच्छे से जनता है की देशद्रोही कोन है|

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  4. jay prakash singh

    akhlak sahab deshdrohi kaun hai aur kisaki jane bahar hai ye pure bharat ko pata hai, jab kisi ko yog aur ayurved mein bhi samprdayikta dikhane lage , to use nischit apne dimag ka ilaj karawana chahiye

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  5. एम. अखलाक

    योग और आध्‍यात्‍म की जरूरत इस देश के चंद पूंजिपतियों को है। यह दोनों उन निकम्‍मों की जरूरतें हैं जो आम आदमी की जेब काटने का हुनर जानते हैं। बाबा रामदेव भी जेब काट रहे हैं। बिना पैसा लिए कहीं नहीं जाते। क्‍या अब माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भी जेब काटेगा ?

    यह देश गरीबों का है, मजदूरों का है। 90 फीसदी आबादी उन्‍हीं की है। ये सुबह से शाम तक योग ही तो करते हैं। इनसे बड़ा आध्‍यात्‍िमक कौन हो सकता है जो सुबह उठते ही ईश्‍वर से रोजगार की फरियाद करता है, सिर्फ पेट के लिए।

    विवि में पहले से ही पत्रकारिता के जो पाठयक्रम चल रहे हैं काफी हैं। बीजे आनर्स को बेवजह बंद कर दिया गया। उसकी निहायत जरूरत है। वहीं एक कोर्स था जो तीन साल में पत्रकारिता के माहौल में ढाल देता था। उसे चालू करने की जरूरत है।

    एक बार श्री शरतचंद बेहार जी ने भी पानी में पत्रकारिता कराने की कवायद शुरू की थी, जिसका मैने पुरजोर विरोध किया था। नवभारत अखबार में एक खबर के माध्‍यम से यह भी उजागर किया था कि बेहार साहब जापान गये थे, वहीं से टिप्‍स लेकर आए है। खबर छपने के बाद कवायद बंद हो गई। ……… युवाओं को वे किस सोसायटी की आवाज (पत्रकार) बनाना चाहते हैं। बाबा रामदेव वाले या 90 फीसदी वालों की ?

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