लेखक परिचय

गिरीश पंकज

गिरीश पंकज

सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार गिरीशजी साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में, रायपुर (छत्तीसगढ़) से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका 'सद्भावना दर्पण' के संपादक हैं।

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गिरीश पंकज

किसी भी राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है उसका ध्वज, उसकी भाषा, उसका राष्ट्र-गान. दुनिया में भारत ही वह अनोखा उदारवादी देश है जहाँ दिन दहाड़े संविधान जला दिया जाता है. ध्वज का अपमान होता है. बेचारी राष्ट्र भाषा की हालत क्या है, ये सब जानते है. अपने यहाँ तो कोई भी देशविरोधी बातें कर देता है और उस पर कार्रवाई नहीं होती. इसी उदारता का दुष्परिणाम यह हो रहा है कि कश्मीर में देश विरोधी लोग तिरंगा न फहराने की घोषणा कर देते है. इसलिये अगर कुछ लोगों ने २६ जनवरी को कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने की ठान ली है तो उनकास्वागत होनाचाहिए. यह पहल केवल भारतीय जनता पार्टी के युवा लोग कर रहे है. जबकि यह सर्वदलीय अभियान होना चाहिए. इसमे देश भर के युवको को शामिल होना चाहिए. राष्ट्र ध्वज केवल भाजपा का नहीं है. यह कांग्रेस का भी है औ दूसरे दलों का भी. लेकिन देश का यही दुर्भाग्य है कि यहाँ देश की अस्मिता का सवाल भी घटिया और टुच्ची राजनीति का शिकार हो जाता है. होनातो यह चाहिए था कि २६ जनवरी को एक सर्वदलीय मोर्चा बनाता और सारे राजनीतिक दल के लोग मिलजुल कर लाल चौक पर तिरंगा फहराते. पता नहीं हमारा देश राष्ट्रीयता के सवाल पर कब एकजुट होगा. मै भाजपा कार्यकर्त्ता नहीं हूँ. न कभी हो सकता हूँ. मगर लाल चौक पर तिरंगा फहराने के अभियान का मैं खुल कर उनका समर्थन करता हूँ. मैं वहाँ नहीं जा पाऊँगा. लेकिन मेरी भावनाए वहां जायेंगी. मैंने २६ जनवरी के लिये एक अभियान-गीत लिखा है. यह गीत उस भावना को समर्पित है, जो देश की शान के लिये अपनी जान लुटाने का भी संकल्प लेती है. उम्मीद है यह गीत केवल दल विशेष का गीत नहीं बनेगा वरन हर देशवासी इसे दिल से गायेगा. क्योंकि केवल कश्मीर ही अमर नहीं है. इस देश का चप्पा-चप्पा हमारा है. हम कहीं भी जा कर तिरंगा फहरा सकते है. हमें कोई नहीं रोक सकता. जो रोकेगा मतलब वह देशद्रोही है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर का यह बयान कितना हास्यास्पद है कि लाल चौक पर तिरंगा फहराने से कश्मीरी नाराज हो जंगे और वे भड़केंगे. अलगाववादी नेता यासीन मालिक ने भी चुनौती दी है, कि हम देखते है,कि लाल चौक पर कैसे फहराता है तिरंगा. हद है इस मानसिकता की. इस मानसिकता को चुनौती देने जो लोग निकल रहे है,. उनकाखुल कर स्वागत करनाचाहिये देश विरोधी लोगों से निपटना हमारा परमपुनीत कर्तव्य है. क्योंकि सवाल है देश का..किसी पार्टी का नहीं. प्रस्तुत है वन्दे मातरम के जय घोष के साथ यह अभियान-गीत—-

अभियान-गीत

युवा- शक्ति ने ठान लिया है, आगे कदम बढ़ाएंगे.

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

नहीं डरेंगे गोली से हम, लाठी-पत्थर खाएंगे,

वीरों के जो वंशज है वे, कभी नहीं घबराएंगे.

है कश्मीर हमारा सुंदर, इसको नहीं गवाएंगे.

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

बहुत हो चुका अब न सहेगे, गद्दारों की बातें.

भारत में रह कर जो करते, देशविरोधी घातें.

देशद्रोहियों को जा कर हम, अब तो सबक सिखायेंगे…

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे..

युवा- शक्ति ने ठान लिया है, आगे कदम बढ़ाएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

हम उदार है इसका मतलब, हमें न कायर जानो.

हम है कट्टर देशभक्त बस, तुम हमको पहचानो.

जिन्हें मुल्क से प्यार नहीं हैं, वे न यहाँ टिक पाएंगे..

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

युवा- शक्ति ने ठान लिया है, आगे कदम बढ़ाएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

बढ़ो-बढ़ो ओ वीर सपूतों, यह कश्मीर हमारा है.

चप्पा-चप्पा इस भारत का, हमें जान से प्यारा है.

देश हमारा, धरती अपनी, हम परचम लहरायेंगे..

युवा- शक्ति ने ठान लिया है, आगे कदम बढ़ाएंगे.

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

जय-जय भारत वर्ष हमारा, अमर शान है तेरी.

तेरे लिये अगर जाती है, धन्य जान है मेरी.

बढ़े कदम माँ की खातिर अब, पीछे नहीं हटायेंगे.

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम…

युवा- शक्ति ने ठान लिया है, आगे कदम बढ़ाएंगे.

लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे.

वन्दे मातरम…वन्दे मातरम..

3 Responses to “लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे….”

  1. sanjay rastogi

    जो भी श्रीनगर लाल्चोव्क पर तिरंगआ झंडा फेहराने से रोकने के लिए जिम्मेदार है वोह चाहे मो उम्र हो या सरदार मनमोहन सिंह वोह भारत का गद्दार है गद्दार है गद्दार है गद्दार है काश उसको भारत माता ki dharti aur akassh kahin sthan na miley

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  2. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    आदरणीय गिरीश पंकज जी सही कहा आपने की यह एक सर्वदलीय अभियान होना चाहिए था, जिसमे सभी दल मिलकर श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहरा कर आते, किन्तु यहाँ पर सत्ता के भूखे राजनेता केवल राजनीति ही खेलना जानते हैं और उमर अब्दुल्ला जैसे देशद्रोही और आतंकवादी भारत को इस्लामी झंडे के नीचे लाने का सपना dekh rahe हैं| किन्तु उनका यह सपना कभी साकार नहीं होगा| भाजपा की इस पहल का हमें समर्थन व स्वागत करना चाहिए|
    अभियान गीत भी अति उत्तम लगा, मन को जोश से भर देने वाला लगा|
    प्रस्तुत लेख व सुन्दर गीत के लिए बधाई व धन्यवाद स्वीकार करें|

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